शनिवार, 3 अक्तूबर 2009

खबरे विश्व मंगल गोऊ ग्राम यात्रा की




अक्तूबर २ – ग्राम, गान्धी के सपने को पूरा करने का प्रयास है गो ग्राम यात्रा – डा. दिनेश
सिरसा, अक्तूबर २ - विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा गान्धी के ग्रा स्वराज के सपन को पूरा करने का एक नूतन प्रयास है । गो ग्राम यात्रा के जरिए और कृषि आधारित भारतीय सामाजिक – आर्थिक संरचना को पुनरस्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है । यह कहना है अखिल भारतीय ग्रामीण विकास प्रमुख डा. दिनेश का ।

डा. दिनेश श्री रामाक्लब चैरिटेबल पार्क, सिरसा में विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के स्वागत में आयोजित सभा में गोभक्तों को संबोधित कर रहे थे ।

आकडों का हवाला देते हुए डा. दिनेश ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत की ९० फीसदी आबादी गाँवों में बसती थी । अब नीति-नियंताओं की आत्मघाती नीतियों के कारण गांवों में रहने वालों की संख्या ७० फीसदी रह गयी है । रोजगार के अभाव में ग्रामीण शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं । गांव उजडते जा रहे हैं और हमारे शासक इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को विकास का नाम दे रहें हैं ।

डा. दिनेश ने गोवध की समस्या की तरफ उपस्थित गोभक्तों का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आज भारत में ३६ हजार कल्लखाने हैं । उन्होंने हिन्द समाज में आए बदलाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि आज कुत्तों के लिएअ तो घार में स्थान है, लेकिन गाय को घार से निर्वासित कर दिया गया हैं । उन्होंने कहा कि दो दिनों में ही यह यात्रा जन आंदोलन का रूप ले जुकी है ।

गोभक्तों को संबोधित करते हुए गोकर्ण पीठाधीश्वर शंकराचार्य राघवेश्वर भारती ने कहा कि गांधी ने गाय हत्या को अपनी हत्या बताया था । आज हर दिन गाय की हत्या हो रही है, लेकिन गान्धी का नाम लेकर शासन करने वालों का दिल नही पसीजता ।

श्री राघवेश्वर स्वामीजी ने कहा कि विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा की सफलता और असफलता एक राष्ट्र के रूप में भारत के भविष्य को निर्धारित करेगी । उन्होंने कहा कि नंदी और नंदिनी के अभाव में भारत निष्प्राण हो जाए । सभा में कई पूज्य संतों सहित बडी संख्या में लोग उपस्थित थे



अक्तूबर २ – भारतीय समाज की बुद्धिमत्ता का आधार है गोवंश – रामचन्द्र

हिसार, अक्तूबर २ - भारतीय समाज की बुद्धिमत्ता को जागृत करने का आधार गोवंश है । गोवंश से इस को अच्छे स्तास्थ्य और संस्कार के संगम से बुद्धिमत्ता पैदा होती है । विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के पश्चिमी विभाग के अध्यक्ष रामचन्द्र सहस्रबुद्धे ने यह बातें हिसार के न्यू आटो पार्क मैदान में गोभक्तों की सभा को संबोधित करते हुए कहीं ।

श्री सहस्रबुद्धे ने कहा कि प्राचीन भारतीय समाज की संरचना गोवंश पर आधारित थी । लेकिन गुलामी के समय न केवल इस व्यवस्था की उपेक्षा की गयी बल्कि इसको नष्ट करने का भी प्रयास किया गया । उन्होंने कहा कि गोमूत्र और गोबर ही मिट्टी को सही पोषण प्रदान करते हैं । खाद के रूप में इनका प्रयोग न होने से मिट्टी की उर्वराशक्ति नष्ट हो जाती है । उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों के प्रयोग से लोगों का स्वास्थ्य बिगडता जा रहा है । उन्होंने जर्सी और होलिस्टीन प्रजाजि के जानवरों को गाय मानने से इनकार करते हुए कहा कि इस प्रजाति के जानवरों का दूध भारतीय प्रजाति की गाय के समान गुणकारी नहीं होता ।

नागपुर गो विज्ञान अनुसंधान केन्द्र के निर्देशक सुनील मानसिंहका ने कहा कि किसानों की आत्महत्या और गोवंश की हत्या आपस में जुडे हुए हैं । उन्होंने कहा कि भारत मे प्रतिदिन ६० हजार गोवंश की हत्या होती है और प्रतिदिन लगभग २० हजार गोवंश को बांग्लादेश भेजा जाता है । श्री मानसिंह ने कहा कि गोवंश के जरिए ही स्थायी और स्वावलंबी कृषि तंत्र विकसित किया जा सकता है ।

आर्य समाज के हरियाणा प्रांत के अध्यक्ष आचार्य बलदेव ने कहा कि गाय शक्ति को भाण्डार है । उन्होंने कहा कि गाय हमारी सभि तरह की मनोकामनाओं को पूरा करने वाली यह शक्ति है । उन्होंने कहा कि मानव को माधव बनाने की कला का विकास गाय के जरिए ही संभव है ।

उन्होंने कहा कि गोवंश के संरक्षण की लडाई आजादी की लडाई से भी कठिन होगी । आचार्य ने जनसभा में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति से एक गोवंश के पालन अथवा उसके संरक्षण का संकल्प लेने की बात की ।

जनसभा में कई प्रसिद्ध संत, गणमान्य व्यक्ति और बडी संख्या में गोभक्त उपस्थित थे ।

अक्तूबर १ – हिन्दू परिवार की सदस्य है गोमाता – स्वामी अखिलेशानंद जी
रोहतक, अक्तूबर १ - हरिद्वार के प्रसिद्ध संत स्वामी अखिलेशानंद ने गोवंश को हिन्दू परिवार का अभिन्न अंग बताया है । उन्होंने कहा कि माता के समान गोमाता का स्थान भी हिन्दू परिवार और समाज में बहुत पवित्र है । स्वामी जी विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के प्रथम पडाव रोहतक में आयोजित सभा में बोल रहे थे ।

उन्होंने कहा कि यह छद्म – पंथनिरपेक्षता पर आधारित भारतीय राजनीति की विडम्बना ही कही जाएगी कि गोहत्या पर प्रतिबंध मुस्लिम बहुत माने जाने वाले जम्मू कश्मीर में तो है लेकिन हिन्दुत्व की प्रयोगशाला कहे जाने वाले गुजरात में कसाई गोहत्या को अपना मौलिक बताते हैं । उन्होंने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है और गौ कृषि की जीवनशक्ति है ।

आर्य समाज के हरियाणा प्रांत के अध्यक्ष आचार्य बलदेव ने गोहत्या को हिन्दू समाज के लिए कलंक बताया । उन्होंने गांवों के उत्थान एवं गोवंश के संरक्षण के लिए आरंभ की गयी विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा में युवाओं से बढचढ कर भागीदारी करने की अपील की ।

गोकर्ण पीठाधीश्वर शंकराचार्य राघवेश्वर भारती स्वामी ने जनसभा में उपस्थित लोगों से गोहत्या को रोकने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की । उन्होंने कहा कि संत के रूप में गोवंश को बचाने के लिए मैं जीवन की अन्तिम श्वांस तक संघर्ष करूंगा ।

गो ग्राम यात्रा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुकुंचंद सांवला ने गोवंशा की उपयोगिता की तरफ संकेत करते हुए कहा कि गोवंश से प्राप्त होने वाला पंचगव्य राम बाण औषधि है । उन्होंने कहा कि पंचगव्य के जरिए अनेक असाध्य रोगों को दूर किया जा सकता है । श्री सांवला ने कहा कि परंपरागत भारतीय दृष्टिकोन में आए परिवर्तन के कारण आज किसान गोपालन से दूर भाग रहा है । उन्होंने सरकार से गौ को राष्ट्रीय प्राणी घोषित करने की भी मांग की ।

इससे पहले विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा कुरुक्षेत्र से करनाल, पानीपत, गोहना होते हुए रोहतक पहुंची । रास्ते में जगह – जगह पर स्कूली छात्रों और नागरिकों ने फूलों से यात्रा का स्वागत कर गो पालन और गो संरक्षण का संकल्प लिया । कई जगहों पर कलश यात्राएँ भी निकाली गई .

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित