गुरुवार, 8 अक्तूबर 2009

गोऊ ग्राम यात्रा बन गया जन आन्दोलन






अक्तूबर ५ – शहर के गुलाम बनते जा रहे हैं गाँव


अमृतसर, अक्तूबर ५ - साध्वी ऋतंबर दीदी माँ के गुरु स्वामी परमानंद ने कहा है कि भारतीय गाँव आंतरिक उपनिवेश बन गए हैं । भारत विदेशों का गुलाम बनता जा रहा है और गाँव शहरों के गुलाम बनते जा रहा है । उन्होंने कहा कि गाय की अन्देखी के कारण ही ग्राम पिछडते जा रहे हैं और ग्रामीणों का शहरों की तरफ पलायन बढता जा रहा है । स्वामी परमानंद अमृतसर में विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के लिए आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहें थे ।

स्वामी परमानंद ने कहा कि गाँव की संपदा मानी जाने वाली गायों की स्थिति दयनीय हो गयी है । गोदुग्ध बाहर बेचा जा रहा है । शहर लूट रहा है, गाँव लुट रहें हैं । उन्होंने कहा कि देश के स्वस्थ विकास के लिए ग्रामों का स्वावलंबी होना आवश्यक है । इसी तरह, विश्व के कल्याण के लिए भारत का स्वावलंबी होना जरूरी है ।

स्वामी अखिलेश्वरानंद ने कहा कि पश्चिमी शिक्षा के प्रभाव के कारण भारतीय अपने परंपरागत संसाधनों के महत्व को भूलते जा रहे हैं । उन्होंने कहा कि आज पश्चिमी वैज्ञानिक भारत के परंपरागत ज्ञान और संसाधनों पर शोध कर रहे हैं और हम अपनी इस ताकत को नजर अंदाज कर रहें हैं ।

संत सूर्य प्रताप सिंह ने कहा कि भारत में ग्राम एक स्वतंत्र आर्थिक इकाई थ । ग्रामों की सामाजिक संरचना इस प्रकार थी कि उस्को अपनी जरूरतों के लिए शहर का मुंह नहीं ताकना पडता था । लेकिन बढती गोहत्या के कारण ग्रामों का स्वावलंबन खत्म होता जा रहा है ।

संत सूर्य प्रताप ने उपस्थित जनसमुदाय को गोसंरक्षण और गोसंवर्धन के लिए संकल्प दिलाया ।

साध्वी ज्योत्सना आरती ने कहा कि गायों के महत्व को भूल जाने के कारण भारतीय समाज का साहस भी नष्ट होता जा रहा है । उन्होंने कहा कि गाय सनातनधर्म मानने वाले लोगों के लिए जानवर नहीं है । धर्मग्रंथों में इसका उल्लेख होने के कारण यह हमारे लिए पूजनीय है ।

निर्मल समाज के महंत स्वामी ज्ञानदेश ने कहा कि निर्मल समाज गोवंश के संरक्षण के लिए पहले से ही प्रतिबद्ध है ।

जनसभा से पहले यात्रा को अमृतसर मे प्रवेश करने पर गोभक्तों ने फूल मालाओं से स्वागत किया । कई जगहों पर प्रसाद के रूप में फल वितरित किए गए ।

अक्तूबर ६ – जनांदोलन का रूप लेने लगी है गो ग्राम यात्रा

जम्मू, अक्तूबर ६ - १०८ दिनों तक चलने वाली विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा अपने प्रारंभिक चरण में ही जनांदोलन का रूप धारण करती जा रही है । यात्रा से उपजे उत्साह और विचारों ने लोगों को आंदोलित करना शुरु कर दिया है । मुख्य यात्रा में शामिल संतों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के उद्बोधन लोगों को झकझोर रहे हैं । जबकि जगह जगह निकलने वाली उपयात्राएँ जमीनी स्तर पर जागरण कर रही है । कार्यकर्ताओं की टोली घर घर जाकर गोसंरक्षण और गोसंवर्धन का अलख जगा रही है ।

पहले से ही निर्धारित पडव स्थलों पर लोग घण्टों चिलचिलाती धूप में खडे होकर यात्रा का इंतजार कर रहे है । निर्धारित मार्गों पर जगह – जगह होने वाले स्वागत कार्यक्रमों की वजह से यात्रा विलंब से पहुंच रही है । कुछ जगहों पर तो यात्रा के स्वगत कार्यक्रम निर्धारित है लेकिन कुछ स्थानों पर स्थानीय जनसमुदाय स्व प्रेरणा से यात्रा का स्वागत कर रहा है ।

बच्चे, नौजवान, बुजुर्ग सभी इस यात्रा में उत्साहपूर्वक अपनी भागीदारी दर्ज करा रहे हैं । इस यात्रा ने मीडिया के एक वर्ग द्वारा गढी गयी युवाओं की भारतीय संस्कृति विरोधी छवि को ध्वस्त कर दिया है । श्री गंगानगर में यात्रा के स्वागत के लिए युवाओं का हुजूम उमड पडा । गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के प्रति युवा जागरुक दिखे और वर्तमान परिस्थितियों में गोवंश की जरूरत की जानकारी से लैश भी ।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित