शनिवार, 10 अक्तूबर 2009

अक्तूबर ८ – मनुष्य के अस्तित्व को बचाने का प्रयास है गो ग्राम यात्रा



विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा – अंतर्धारा में झलक रही है परिवर्तन की इबारत – आशुतोष
अक्तूबर १० - घुमरावीं । हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले का एक छोटा सा कस्बा । विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा का रथ जैसे ही प्रवेश करता है, असंख्य लोग उसे घेर लेते हैं । लोगों के हाथों में फूल-मालाएँ और प्रसाद के दोने हैं । भीड में बच्चे, बूढे और जवान सभि शामिल हैं । गोमाता की जय और भारत के हैं सुख दाता गंगा, गीता, गोमाता के नारे से वातावरण गूंज उठता है ।

सडके के किनारे एक छोटा मंच बना कर उस पर नन्हे-मुन्ने बालक कृष्ण-राधिका का रूप धरे सजे-संवरे खडे हैं । ८० वर्ष से अधिक की एक माँ कांपते हुए आती है और रथ के किनारे पर माथा टेक देती है । कालेज से लौटती लडकियों के हाथ में किताबें हैं और आंखों में कौतूहल । रथ पर बैठे पुजारी गोमाता की प्रतिमा से उतार कर कुछ मालाएँ उनकी और उछाल देते हैं ।

जिसके हाथ वह माला लगती है उसके चेहरे पर दर्प का ऐसा भव जागता है मानो उसे कोई खजाना मिल गय हो ।

कुरुक्षेत्र से १ अक्तूबर को प्रारंभ हुई यह यात्रा हरियाणा, राजस्थान के एक छोटे हिस्से को स्पर्श करती हुई पंजाब पहुंची । वहाँ से जम्मू होते हुए एक सप्ताह बाद यात्रा हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला पार कर चंडीगढ़ पहुंची है ।

यात्रा जहाँ भी पहुंचती है पुष्पवर्षा और नारों से आकाश गूंज उठता है । घुमरावीं जैसी ही स्थिति सभी जगह है । समाचार माध्यमों से जैसे-जैसे सूचना का विस्तार हो रहा है लोगों की भीड और जोश बढता ही जा रहा है ।

कामकाजी लोगों के शहर चंडीगढ में दोपहर बाद तीन बजे यात्रा पहुंची है । रास्ते के स्वागत के कारण निश्चित समय से डेढ घंटा देरी से । तीखि धूप में सौकडों लोग प्रतीक्षा कर रहे हैं । आते ही जयघोष प्रारंभ हो जाते हैं ।

जो लोग मानते हैं कि गाय की बात बीते जमाने की बात है, उनके लिये यह यात्रा निश्चिय ही एक सबक है । यात्रा में भाग लेने पर ही समझ मे आता है कि भारत इक्कीसवी सदी के बाहरी लबादे के भीतर सदियों पुरानी परंपराओं को संजोये, जिन्दा रखे हैं । आस्था का सवाल उसके लिये महत्वपूर्ण है ।

भारत में गाय के प्रति समाज में हमेशा से आदर रहा है । यहाँ सैकडों गोशालाएँ हैं । इनमें कुछ तो इतनी बडी हैं कि उनमें हजारों गाय रहती हैं । अधिकांश जहाँ समाज के सहयोग से चलती है, वहीं कुछ ने नये प्रयोगों द्वारा पंचगव्य उत्पादों के आधार पर स्वावलंबन की ओर कदम बढाया है ।

यात्रा में चलने वाले संत और सामाजिक कार्यकर्ता लोगों को केवल बवनात्मक उपदेश ही नहीं देतें, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय के योगदान को रेखांकित करना भी नहीं भूलते । वे गाँव की समृद्धि और स्वावलंबन की बात भी करते हैं और वैज्ञानिक तथ्यों को भी । भारत ही नहीं विश्व के मंगल की बात भी वक्ताओं के भाषणों में रहती है ।

कालेज हो या गो ग्राम यात्रा, युवाओं का अपना अलग ही अंदाज है । शिमला के रिज मैदान और मुख्य मार्ग में कंधे पर चलंता ध्वनिवर्धक लटकाए एक नौजवान गोरक्षा के गीत गाता आगे बढ रहा है और उसके दर्जनों साथी उसकी ताल पर झूमते-नाचते हुए चल रहें हैं । देखते ही देखते शिमला घूमने आये देशी-विदेशी सौलानी भी इस उल्लास में शामिल हो जाते हैं ।

धीरे धीरे यह यात्रा एक अंडरकरंट पैदा कर रही है, जिसका असर धीमा किन्तु गहरा होना अवश्यंभावी है । लोगों के मन में जो आग संतों की वाणी से जन्म ले रही है, उसकी ऊष्मा आज नहीं तो कल सभी को महसूस होगी । इस अंतर्धान को जो महसूस कर सकते हैं, वें परिवर्तन की उस इबारत को भी पढ पा रहें हैं, जो अदृश्य में से आकार ले रही है ।

यात्रा के आयोजक इस ऊष्मा का रूपान्तरण रचनात्मक ऊर्जा में करने का प्रयास कर रहें हैं । सरकार ने भी यदि अपनी भूमिका सकारात्मक रखी तो, यह यात्रा राष्ट्रनिर्माण में मील का पत्थर साबित होगी । लेकिन सरकार यदि अपनी भूमिका निभाने में विफल रहती है तो इसे दावानल वनने से कोई नहीं रोक सकेगा ।




अक्तूबर ९ – हमारी अस्मिता का प्रतीक है गोमाता : शंकराचार्य
यमुनानगर, अक्तूबर ९ - गोकर्ण पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य राघवेश्वर भारती ने कहा है कि विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा का उद्देश्य भारत की खोज करना है । राघवेश्वर भारती हरियाणा के यमुना नगर में गो ग्राम यात्रा के स्वागत के लिए आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे । उन्होंने गो माता को भारतीय अस्मिता का पतीक बताते हुए कहा कि गोवंश की संख्या में कमी होने के कारण ही हमारे धर्म व संस्कृति का पतन है ।

शंकराचार्य ने कहा कि आज इण्डिया तो हर जगह हो जाता है लेकिन भारत के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं । उन्होंने सभी भारतीयों से गोसंवर्धन और गोसंरक्षण के लिए अपील की । उन्होंने विश्व मंग्ल गो ग्राम यात्रा को सेना विर्माण का एक प्रयास बताया । एक ऐसी सेना जो गोवंश पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ लड सके । उन्होंने कहा कि भारतीय संदर्भों में पहला विश्व युद्ध सीता माँ के लिए हुआ । दूसरा विश्वयुद्ध द्रौपदी माँ, धरती माँ के लिए हुआ और तीसरा युद्ध गोमाता के लिए होगा ।

जगद्गुरु ने कहा कि गो ग्राम यात्रा उत्सव नही बल्कि शंखनाद है गोसंवर्धन के लिए । उन्होंने कहा कि जब तक गोहत्या होती रहेगी तब तक सभी कर्मकाण्ड, पूजा, तीर्थ व्यर्थ है ।

स्वामी अखिलेश्वरानंद ने कहा कि गाय मनुष्य की प्राण रेखा है । गोमाता के अभाव में जीवन में सुख समृद्धि की कल्पना व्यर्थ है । उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों द्वारा यह प्रमाणित किया गया है कि मूक प्राणियों में सबसे उप्योगी गोमाता है । अखिलेश्वरानंद ने कहा कि गोचिकित्सा विज्ञान पूरे विश्व में प्रतिष्ठित हो रहा है । लेकिन यह दुर्भाग्य पूर्ण है कि भारत में गोवंश की उपेक्षा हो रही है । उन्होंने गोसंवर्धन पर जोर देते हुए कहा कि देश की आबादी के साथ ही गोवंश में भी वृद्धि होनी चाहिए ।

विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा को यमुनानगर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया । यात्रा के स्वागत के लिए आयोजित कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोगों ने उपस्थिति दर्ज करा कर गोवंश के संरक्षण के लिए संकल्प लिया । इससे पहले यात्रा हिमाचल प्रदेश के सोलन, परवाणु और फिर चण्डीगढ होते हुए हरियाणा के यमुना नगर पहुंची थी ।

शिमला, अक्तूबर ८ - विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के स्वागत के लिए शिमला में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए महंत सूर्यनाथ ने कहा है कि गो ग्राम यात्रा मानव अस्तित्व को बचाने का प्रयास है । उन्होंने कहा कि भारतीय मान्यताओं के अनुसार मानव अस्तित्व का मूल आधार गोवंश ही रहा है और गोवंश की हत्या मानव अस्तित्व की हत्या है ।

महंत सूर्यनाथ ने कहा कि मानव के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए ही विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा का शंखनाद किया गया है । गोदुग्ध में बच्चों के मस्तिष्क को विकसित करने वाला एक विशेष प्रकार का प्रोटीन पाया जाता है । उन्होंने गोवंश के आधार पर की जाने वाली कृषि प्रणाली के बारे में बताते हुए कह कि आज का किसान रासायनिक खादों का प्रयोग जैविक खादों की अपेक्षा ज्यादा कर रहा है जिसके कारण भुमि की उर्वरता कम हुई है । उन्होंने एक उदाहरण के माध्यम से बताया कि पंजाब के लोगों ने सरकार को एक लिखित पत्र के जरिए अवगत कराया कि यदि रासायनिक खादों पर आधारित खेती किसान करते रहे तो जल्द ही पंजाब की उत्पादकता में कमी आ सकती है । स्वामी सूर्यनाथ ने कहा कि यदि हमारे देश का किसान आधुनिक उपकरणों के बजाय गोवंश पर आधारित कृषि करे तो भारत देश को कभी अन्य देशों से अनाज आयात करने की आवश्यकता नहीं पडेगी ।

गो ग्राम यात्रा के राष्ट्रीय संयोजक के.ई.एन. राघवन ने यात्रा के बारे में लोगों को बताते हुए कह कि ईश्वर ने भी सदैव गो की सेवा की है । अतः गो पालन की उपेक्षा ईश्वर की उपेक्षा के समान है । जनसभा में श्री राघवन को हिमाचली टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया गया ।

विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा का पहाडी क्षेत्र हिमांचल में जोरदार स्वागत हो रहा है । कांगडा से चलने के बाद हमीरपुर और विलासपुर जिलों में गो ग्राम यात्रा का भव्य स्वागत किया गया । विलासपुर जिला में लोगों द्वारा यात्रा का स्वागत पारंपरिक रणसिंहा के वादन द्वारा किया गया । स्कूली छात्रों द्वारा भी यात्रा का फूल मालाओं द्वारा स्वागत किया गया । जगह जगह पर यात्रा के लिए आयोजित कार्यक्रमों में संतों ने गोवंश की उपयोगिता बताते हुए लोगों को गोपालन व गोसंवर्धन हेतु संकल्प भी कराया ।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित