शनिवार, 29 नवंबर 2014

भारत को परम वैभवषाली बनाने के लिए युवा उर्जा अनिवार्य: भागवत्


भारत को परम वैभवषाली बनाने के लिए युवा उर्जा अनिवार्य: भागवत्
हरिद्वार, 29 नवंबर ;ंमीडिया सेंटरद्ध। युवा अन्याय, अपमान सहन नहीं करता, कुछ भव्य,दिव्य करना चाहता है। भारत के माता पिता अपने बच्चांे को स्वामी विवेकानन्द की कहानी सुनाते है किसी धनकुबेर की नहीं। अगर अपने समाज,देष दुनिया के दुःख आपकी नींद हराम नहीं करते है तो आप तरूण कहलाने के हकदार नहीं है। भारत को परम् वैभवषाली बनाने के लिए तरूणाई की उर्जा अनिवार्य है।
यह कहना है राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के परम पूजनीय सरसंघचालक श्रीमान मोहनराव जी भागवत का। श्री भागवत आज यहां पतंजलि योगपीठ फेज टू में आयोजित त्रिदिवसीय नवसृजन षिविर के  दूसरे दिन के प्रथम सामूहिक सत्र को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि तरूण माने युवा और युवाओ में  जोष होता है। जिसमें जोष नहीं होता व तरूण नहीं। पर जोष से भरे युवा होष न खोए इसके लिए निरन्तर स्व नियंत्रण का अभ्यास करना पड़ता है। इसी लिए कहा जाता है जिसका अपनेष्षरीर पर पकड़ ढीली हो वह बूढ़ा है इसलिए युवा का तात्पर्य है स्व पर पूर्ण नियंत्रण। तरूण का अर्थ उम्र से नहीं उत्साह और उर्जा है।
उन्होंने कहा कि तरूणों में स्वार्थबुद्धि का होना स्वाभाविक है लेकिन यह पषु प्रवृत्ति है।मनुष्य होने के नाते इस पर नियंत्रण होना आवष्यक है। यह पषु की पहचान है कि वह जहां भोजन नहंीं मिलेगा वह स्थान छोड़ देता है भले ही वह उसका देष हो लेकिन मनुष्य उससे इसी मामले में भिन्न होता है उसके मन में दूसरे के दुःख के प्रति संवेदना होती है अपने देष के प्रति प्रेम होता है वह सिर्फ भोजन के लिए देश नहीें छोड़ता वह उसके लिए अपना जीवन लगाता है।
यह षिविर तरूण स्वयंसेवको का है जिसके जीवन की एक दिषा होती है। जिस तरह से तीर जरा सा टेढ़ा होने पर लक्ष्य से भटक जाता है उसी तरह से तरूणाई की उर्जा भटकने पर समाप्त हो जाती है। इसलिए कड़े अभ्यास से अपने ध्यान भटकने से बचाना है। उन्होनंे कहा कि स्वयंसेवक का अर्थ है पहले स्वयं सेवा के लिए प्रस्तुत होना और बाद में अपनी सेवा से दूसरों को प्रेरित करना। काम बड़ा करना है तो छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। उन्होंने मोदी के अमेरिका भ्रमण का उदाहरण दिया और कहा कि उन्होंने पूरे अमेरिका भ्रमण में अपना नवरात्रि का व्रत चालू रखा और पूरा संयम बरता।यह संयम का बड़ा उदाहरण है। दुनिया की सारी लड़ाईयां संयम के दम पर ही लड़ी और जीती गई है।
उन्होंने स्वयंसेवक का मतलब बताते हुए कहा कि जीवनभर परिश्रम करना,इसको बनाए रखने के लिए सतत साधना करना। प्रत्येक स्वयंसेवक को ध्यान रखना चाहिए कि उसे नरपशु की बजाय नारायण बनने की साधना करना है। अपने स्वार्थ की बजाय समाज के स्वार्थ की चिंता करनी है।
पूजनीय सरसंघचालक ने कहा कि राष्ट्र को वैभवषाली बनाना है तो भाषण की बजाय आचरण करके दिखाना होगा।
कार्यक्रम में प्रान्तकार्यवाह लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल, संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपाशंकर,अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेष कुमार,दिनेष जी, अषोक बेरी जी, अखिल भारतीय  प्रचारक प्रमुख सुरेष राव जोशी,सर्व व्यवस्था प्रमुख डा अनिल वर्मा,सह सर्व व्यवस्था प्रमुख योगेश जी,भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के मुख्य केन्द्रीय प्रभारी डा.राकेष,पूजनीय सरसंघचालक के निजि सचिव दिलीप जी,सह षिविराधिकारी डा. अनिल गुप्ता,षिविर कार्यवाह डा. कपिल,सह षिविर कार्यवाह डा. अरविंद भट्ट आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ निर्माणों के पावन युग में हम चरित्र निर्माण न भूले के गायन से हुआ।

षिक्षक को बनना होगा जीवन का गुरू,सच्ची मनुष्यता की देनी होगी षिक्षा-भागवत्
हरिद्वार। 29 नवंबर। मीडिया सेंटर। दुनिया में कोई देष वर्तमान षिक्षा पद्धति से संतुष्ट नहीं है। पूरी दुनिया वर्तमान षिक्षा पद्धति में आमूलचूल परिवर्तन की जरूरत महसूस कर रही है। दुनिया अब पेट भरने वाली षिक्षा से उब गई है और उसे सच्चा मनुष्य बनाने वाली षिक्षा पद्धति की जरूरत है। इसके लिए षिक्षा संस्थानों  के संचालकों,षिक्षकों, अभिभावाकों और विद्यार्थियों को गंभीरता से सोचना होगा और इसके लिए कार्य करना होगा।
यह कहना है राष्टीय स्वयंसेवक संघ  के परमपूज्यनीय सरसंघचालक मोहन भागवत् जी का। वे आज यहां पतंजलि योगपीठ फेज टू के प्रसादम् सभागार में विष्वविद्यालय,महाविद्यालय के प्राध्यापकों  व षिक्षा क्षेत्र में कार्यरत लोगों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आज यह बात बहुत सिद्दत से महसूस की जा रही है कि आज की जो षिक्षा है वह पेट भरने लायक रोजगार तो दे रही है लेकिन मानवीय संवेदनाओं को कही पीछे छोड़ रही है।  आज षिक्षा की उस पद्धति को अपनाने की जरूरत है जिसमें अच्छा और सच्चा मनुष्य बनने की प्रेरणा,राष्ट का जिम्मेदार नागरिक होने का अहसास हो। इसके साथ ही षिक्षा को सर्व सुलभ और सस्ती बनाना होगा। षिक्षक को सिर्फ षिक्षक नहीं बल्कि जीवन का षिक्षक बनना होगा। नयी पीढ़ी को षिक्षा दान और दया के रूप में नहीं बल्कि अधिकार के तौर पर देनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि नई तकनीकियों की जानकारी,उद्यमों के उत्कृष्ठीकरण के लिए विदेषी भाषा और विदेषी संस्थाओं का सहयोग लेने में कोई बुराई नहीं है लेकिन उस षिक्षा को अपने देष अपने राष्ट्र परिप्रेक्ष्य में प्रयोग करने की कला भी सीखनी पड़ेगी।
पूजनीय सरसंघचालक ने कहा कि सरकार षिक्षा में सुधार करें या न करें संघ के स्वयंसेवक इसके लिए कार्य कर सकते हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों को संघ की शाखा में आने के लिए प्रेरित कर  भी हम उनको नई षिक्षा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि षिक्षा  में परिवर्तन के लिए स्वयंसेवको को खुद आगे आना होगा और वातावरण बनाना होगा। पूजनीय सरसंघचालक ने कहा कि संघ के साथ ही व्यक्तिगत स्तर पर गायत्री परिवार, आर्य समाज,श्षांति निकेतन, पांडिचेरी में महर्षि अरविंद का आश्रम आदि इस क्षेत्र में बहुत ही प्रषंसनीय कार्य कर रहे है।
सरसंघचालक ने कार्यक्रम में उपस्थित प्राध्यापकों एवं षिक्षाविद्ांे के संघ के बारे में पूछे गए कई तरह के सवालों का जवाब दिया।
कार्यक्रम में संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपाषंकर जी,अखिल भारतीय कार्यकारिण सदस्य डा. दिनेष जी, क्षेत्र प्रचारक प्रमुख किषन जी,क्षेत्र बौद्धिक प्रमुख डा. सुषील जी,क्षेत्र संपर्क प्रमुख षषिकांत दीक्षित ,क्षेत्र संघचालक दर्षनलाल जी, प्रांत संघचालक चंद्रपाल सिंह नेगी, षिविर अधिकारी बहादुर सिंह बिष्ट आदि लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।



देश में परिवर्तन का श्रेय समाज कोः भागव

हरिद्वार। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत ने कहा कि देश में परिवर्तन का श्रेय समाज को जाता है। संतों का आह्वान करते हुए कहा कि संत समाज जनता के बीच जाकर लोगों को उचित-अनुचित बताए। हिदू समाज के सभी घटकों के बीच भरोसा जगाना आवश्यक है।

कनखल स्थित जगदगुरु आश्रम में ब्रह्ममलीन स्वामी प्रकाशानंद महाराज की मूर्ति अनावरण पर शुक्रवार को आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखी। भागवत ने कहा कि हिंदू धर्म, हिंदू संस्कृति व हिंदू समाज तीनों का संरक्षण जरूरी है। समाज के दबाव को हर विषय में कारगर बताते हुए उन्होंने कहा कि देश का आगे बढ़ना तय है और भारत विश्व गुरु बनेगा।

बच्चों के नामकरण पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि पहले बच्चों के अर्थपूर्ण नाम रखे जाते थे। उसके बाद रिंकू-टिंकू नाम का प्रचलन हुआ। इनका कोई अर्थ नहीं है। भारतीय समाज में हर बात का अर्थ होता है। इस बात का कार्यक्रम में मौजूद संतों ने तालियां बजाकर समर्थन किया।

कार्यक्रम में जगदगुरु आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी राजराजेश्वाश्रम महाराज, महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर जयदेव महाराज और कालीकापीठाधीश्वर सुरेंद्र नाथ अवधूत समेत अनेक लोग मौजूद रहे
साभार नई दुनिया 

शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

RSS का प्लान, हर गांव में लहराए हिंदुत्व का झंडा

ग्रामीणों में ही नेतृत्व तलाशें

भैयाजी जोशी ने कहा कि खुद जाकर वहां शाखाएं शुरू कराएं। फिर उन्हीं में से किसी को इसकी जिम्मेदारी दे दें। आवश्यक हो तो अगल-बगल के स्थानों के प्रमुख लोगों को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। जब नियमित रूप से साप्ताहिक शाखाएं चलने लगें तो उन्हें प्रतिदिन करने की कोशिश की जाए।

नए लोगों को जोड़ने पर जोर
सरकार्यवाह ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में कई नए लोग संघ की विचारधारा के नजदीक आए हैं। जिलों के लोग उनसे संपर्क करके उन्हें शाखाओं से जोड़ें।

इससे आगे चलकर एक ऐसा बड़ा वर्ग हमारे साथ होगा, जिसके सहारे समाज में विचारधारा की पकड़ व पैठ ज्यादा मजबूत बनाई जा सकेगी तक काम पूरा करने का दिया आदेश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी भैयाजी के प्रवास के तीसरे दिन भी उनकी चिंता शाखाओं का विस्तार और उनकी सक्रियता को लेकर रही। भैयाजी ने आदेश दिया कि मार्च तक मुख्य मार्ग से जुड़े हर गांव में संघ की शाखा स्‍थापित हो जाए।

उन्होंने संघ की जिला टोली में शामिल पदाधिकारियों से बातचीत में दो दिन के विचार-विमर्श की बातें दोहराने के साथ ही बंद हो चुकी शाखाओं को शुरू करने पर सबसे पहले ध्यान देने की नसीहत दी।

उन्होंने कहा कि इसके लिए जिले के लोग संबंधित स्थानों पर जाएं। पुराने लोगों से मिलें। उनकी कठिनाइयां जानें और उन्हें सक्रिय करें।

राजधानी के सीतापुर रोड पर आईआईएम के पास ग्रामीण क्षेत्र के एक स्कूल में गुरुवार को हुई बैठक में जिलों के लोगों को शाखाओं का लक्ष्य सौंपकर मार्च तक पूरा करने का आग्रह किया गया प्लान, हर गांव में लहराए हिंदुत्व का झंडा!

इस तरह संघ से जोड़ा जाएगा ग्रामीणों को

भैयाजी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर पहले संघ की शाखाएं नियमित लगती थीं और उन पर काफी संख्या में लोग जुटते थे। धीरे-धीरे ये शाखाएं अनियमित हुईं और फिर बंद हो गईं। इसलिए नया काम शुरू करने से पहले पुराने काम को दुरुस्त करने पर ध्यान दिया जाए।

कोशिश हो कि मार्च तक उन सभी स्थानों पर प्रभावी तरीके से संघ की शाखाएं शुरू हो जाएं जहां कुछ वर्षों पहले लगती थीं। उन्होंने जिले के लोगों को शाखाओं के साथ-साथ सामाजिक कार्यों व वहां की समस्याओं के समाधान में सक्रिय भागीदारी के साथ ही सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अभियान चलाने, गरीबों की समस्याओं के समाधान में हाथ बंटाने का सुझाव भी दिया।

जानकारी के मुताबिक, जोशी ने कहा कि मार्च तक कम से कम मुख्य मार्गों के किनारे स्थित उन गांवों और कस्बों में संघ की शाखाएं हर हालत में नियमित हो जाएं, जहां पहले संघ का अच्छा काम था।

उन्होंने सुझाव दिया कि गांव वालों को जोड़ने के लिए शुरुआत में साप्ताहिक शाखाओं का प्रयोग शुरू किया जा सकता है। इसके लिए जिले के पदाधिकारी सुविधानुसार कोई दिन तय कर लें

साभार अमर उजाला

खबरें समाचार   पत्रों  से 

खबरें समाचार   पत्रों  से
साभार दैनिक भास्कर 

गुरुवार, 27 नवंबर 2014

संघ चाहता है शिक्ष में बदलाव … खबरे समाचार पत्रो से

खबरे समाचार पत्रो से 
संघ चाहता है शिक्ष में बदलाव  …
साभार: राजस्थान पत्रिका

पूर्वोत्तर भारत और ईसाई षड्यंत्र

पूर्वोत्तर भारत और ईसाई षड्यंत्र
डॉ. सतीश चन्द्र मित्तल
पूर्वोत्तर भारत इस देश की भौगोलिक तथा सांस्कृतिक विविधता में एकत्व का एक अनुपम उदाहरण है। यह विविधता यहां के प्राकृतिक सौन्दर्य एवं जन-जीवन में सहज रूप से दृष्टिगोचर होती है।पूर्वोत्तर का यह भाग जो 1947 तक असम प्रदेश था, कालान्तर में सात बहनों-अर्थात् असम, मेघालय, नागालैण्ड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा तथा अरुणाचल प्रदेश के नाम से जाना जाता है। यह लगभग 40000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। जिस प्रकार से उत्तर पश्चिम से अनेक जातियां हिन्दुकुश के मार्ग से भारत आईं तथा यहां के जनजीवन से समरस हो गईं, उत्तर-पूर्व में ये जातियां असम की ओर से आईं तथा यहां अनेक जातियों का संगम हुआ। इनकी संख्या
लगभग 260 है।
ये जनजातियां भारत के अतीत रामायण, महाभारत, भागवत, पुराण काल से यहां के जीवन में एकरस हुईं। साथ ही विशिष्ट भौगोलिक रचना के कारण अपनी बोली, अपने परिवेश अपने रीति-रिवाजों तथा परम्पराओं का वैशिष्ट्य भी बनाए रखा। प्रमुख जनजातियों में असम में कारबी, दिमच कछारी हैं, मेघालय में गारो, खासी तथा जयंतियां हैं। नागालैण्ड में आओ, अनगमी, सीमा, लोहता,रेन्ग्या चोंग आदि हैं। मणिपुर में मैइती सर्वाधिक हैं इसके अलावा ऐमोस,हमर, पैश्ते, थाड, बेपई तथा पूरम आदि हैं। मिजोरम में मिजो तथा कुछ गैर
मिजो-कूकी चिन आदि हैं। इसी भांति त्रिपुरा में रियांग तथा चकमक हैं।
अरुणाचल प्रदेश में लगभग 25 जनजातियां हैं। जिनमें अदी, अका, अपतनी,बांगरू, मीजी, मिसिंग, सिंगपों, वन्चू आदि हैं। इसमें अदी सर्वाधिक हैं तथा वन्चू सबसे कम।
पूर्वोत्तर का इतिहास सतत् संघर्ष तथा विजय का रहा है।यह 13वीं शताब्दी से 18वीं शताब्दी तक पठानों तथा मुगलों से संघर्ष करना रहा। यहां के इतिहास में कभी मुगलकाल नहीं रहा। 9वीं शताब्दी में यहां ब्रिटिश शासन स्थापित हुआ। यह तभी से ईसाई कुचक्रों तथा 20वीं शताब्दी में चीटियों की भांति विशाल सैलाब के रूप में आए मुस्लिम घुसपैठियों का शिकार रहा है। जहां ब्रिटिश शासन में ईसाई मिशनरियों तथा उनकी गतिविधियों को खुलकर प्रोत्साहन दिया गया तथा उसे एक 'क्राउन कालोनी' बनाने का प्रयत्न चलता रहा वहां स्वतंत्रता के पश्चात कांग्रेस सरकार की वोट बैंक की राजनीति का शिकार गैरकानूनी रूप से बंगलादेशी मुस्लिम घुसपैठियों का आरामगाह बन गया। विश्व के इतिहास में कहीं भी, कभी इतनी घुसपैठ नहीं हुई।

ईसाई मिशनरियों के पुराने इतिहास पर नजर डालें तो नाथन ब्राउन तथा ओलिवर कट्टर, असम के सादिया नामक स्थान पर 1836 में पहुंचे। उनके आगमन को उत्तर-पूर्व भारत के इतिहास में एक महान घटना कहा गया। उल्लेखनीय है कि 1838 ई. में असम के हिन्दू अहोय वंश का 600 वर्षीय यशस्वी राज्य समाप्त हो गया था तथा असम पर अंग्रेजी राज्य प्रारम्भ हो चुका था, पर अभी तक पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक भी ईसाई न था। इनका प्रयत्न रहा कि स्थानीय व्यक्ति इनका सहयोग करें। मिशनरियों ने शिक्षा, प्रेस, भाषा द्वारा ईसाईयत का प्रचार प्रारम्भ किया। स्कूलों के गरीब तथा उजड़े छात्रों को आश्रय दिया। 1845 ई. तक शिवसागर, गौहारी तथा नौगांव में तीन चर्च स्थापित किए।
स्थानीय लड़का थूनकुम जो मिशनरी स्कूल का ही छात्र था, 1847 ई. में पहला ईसाई बना(देखें, एफ.सी.डाउस, माईटी वर्क्स ऑफ गॉड., पृ. 31-32) शिवसागर में बेतीराम  नामक एक छात्र को भी ईसाई बनाया जो मिशनरी स्कूल का ही था। 1840 ई. में शिवसागर, नौगांव तथा गुवाहाटी में लड़कियों के लिए स्कूल खोले, इसके अलावा
चिकित्सालय तथा अनाथालय खोले। ईसाई मिशनरियों ने1846 में शिवसागर में मिशन प्रेस लगाया तथा ओरुनोडोई मासिक पत्र निकाला। पादरियों ने इस समाचार पत्रिका द्वारा अपनी पहचान बनाने का प्रयत्न किया। यह पत्र 1882 ई. तक चला।
इसमें अहोय राजाओं को प्रचलित देवत्व का स्वरूप न मान को कहा। समाचार पत्रिका में स्थानीय जनजातियों की संस्कृति के प्रति उपेक्षा, परस्पर अलगाव तथा हिन्दुत्व के प्रति कटु विवेचना की गई, हिन्दुओं की आस्थाओं के प्रतीकों के प्रति भी कटुता पैदा की गई।
ईसाई पादरियों ने रोमन लिपि में असमी भाषा का प्रचार किया। एक शब्दकोष असमिया तथा अंग्रेजी में डॉ. माईल्स ब्रोनसन ने तैयार किया। अहोम शासकों द्वारा चले आ रहे संस्कृत शिक्षा केन्द्र को लक्ष्य बनाकर प्राचीन व्यवस्था को नष्ट किया। 
स्वतंत्रता के पश्चात

भारत के प्रसिद्ध विद्वान व चिंतक हो.वे. शेषाद्रि ने सही लिखा है कि ईसाइयत के मतान्तरण ने उन्हें जड़ों से काटकर पाश्चात्य संस्कृतियों का नामहीन और व्यक्तित्वहीन नकलचीभर बनाया तथा उनकी पुरानी मान्यताओं को न केवल समाप्त करने बल्कि उनसे घृणा करना सिखाया। (देखें पाञ्चजन्य, 3 जुलाई, 1983) साथ ही यह भी सही है कि स्वतंत्रता के पश्चात ईसाई मिशनरियों द्वारा अधिकतर मतान्तरित व्यक्तियों ने राष्ट्र विद्रोह की भूमिका असम क्षेत्र में अपनाई, बार कौंसिल आफ चर्चेज द्वारा प्रकाशित क्रिश्चयनिटी एण्ड ऐशियन  रेवोल्यूशन (1994) पुस्तक में स्वयं माना है कि ईसाइयत ने एशिया के लोगों को अपने देश की वफादारी से दूर किया (देखें पृ. 216) प्रसिद्ध गांधीवादी अर्थशास्त्री डा. जे.सी. कुमारप्पा ने लिखा है कि पाश्चात्य सेना के चार अंग-स्थल, वायु, नौसेना के अलावा चौथा है चर्च। रूस के जोसेफ स्टालिन ने भी चर्च की 'अदृश्य सेना' माना है।
स्वतंत्रता के पश्चात असम के विभिन्न भागों में अलगाव तथा भारत से स्वतंत्र होने का भाव मतान्तरित ईसाइयों द्वारा उठा। सर्वप्रथम नागालैण्ड में 1946 में ए.जेड फिजों के नेतृत्व में नागा नेशनल काउंसिल बनी। एक पत्र 'नागा नेशन' भी प्रकाशित किया गया।
भारत से अलग राष्ट्र बनाने की घोषणा की। भारत के विरुद्ध सशस्त्र भूमिगत आन्दोलन प्रारम्भ किया गया। आखिर पं. नेहरू ने 1 दिसम्बर 1963 में 16579 वर्ग के जिले को भारत का 16वां राज्य मान लिया। इसी भांति तुराई हिल वर्तमान मिजोरम में ईसाइयों द्वारा विद्रोह हुआ। लालडेंगा ने इसका नेतृत्व किया। फरवरी 1987 में इसे नया राज्य माना गया। इससे पूर्व जनवरी 1972 में मेघालय, मणिपुर तथा त्रिपुरा क्षेत्र को अलग राज्य का स्थान दिया गया।
अरुणाचल प्रदेश को भी 20 फरवरी, 1987 को पूर्ण राज्य माना गया। इसमें आज भी नागालैण्ड, मिजोरम, मेघालय ईसाई बाहुल्य राज्य हैं। मणिपुर भी ईसाई बाहुल्य बन गया हैं। अरुणाचल में आतंकवादियों के बल पर ईसाईयत का प्रभाव बढ़ा है।
यहां पर बतलाना आवश्यक है कि पूर्वोत्तर में आतंकवादी तथा विघटनकारी घटनाओं में विदेशी चर्च द्वारा प्रचुर मात्रा में धन का सहयोग मिला है। विदेशी ईसाई मिशनरियों द्वारा पूर्वोंत्तर में ईसाईकरण का अभियान चलाने के लिए आज भी सुदूर दुर्गम स्थानों में आर्थिक रूप से गरीब, उपेक्षित एवं वंचित लोगों को चिन्हित करते हुए उन्हें ईसाई बनाने का क्रम जारी है जो बहुत गंभीर चिन्ता का विषय है। भारतीयों ने किसी भी प्रदेश को नष्ट करके उसके भग्नावशेषों पर भवन नहीं बनाए कभी धार्मिक ग्रन्थों को जलाकर स्नान घर में पानी गर्म नहीं किया। किसी का जबरदस्ती मत परिवर्तन नहीं किया।
छत्रपति शिवाजी का कुरान का आदर एवं मुस्लिम महिला गौहरबानू बेगम को मां कहकर सम्मान देना विश्व प्रसिद्ध है। कुछ लोग यह बेहूदा प्रश्न करते हैं कि यदि यहां का उत्थान केवल हिन्दू संस्कृति के उत्थान से होगा तो बाकी अन्य समाज का क्या होगा? मुस्लिम कहां जाएंगे? ईसाइयो का क्या होगा? क्या आज वैसा ही करेंगे जैसा अमरीकियों ने नीग्रो तथा वहां के मूल निवासियों से किया या आस्ट्रेलिया जैसा जिन्होंने वहां की जनजाति को समूल नष्ट किया?
वास्तव में यह प्रश्न भ्रामक एवं दूरदर्शिता शून्य है। यदि हम केवल हिन्दू धर्म को ही लें। इसके अनेक सम्प्रदाय मत तथा पंथ है, जैसे शैव, वैष्णव शाक्त आस्तिक, नास्तिक, बौद्ध, जैन, सिख आदि। क्या वे भिन्न उपासना पद्धति के कारण भारतीय नहीं हैं? उनकी उपासना पद्धति अलग हो सकती है, पर राष्ट्रभक्ति, देशभक्ति की भावना कम नहीं होती। इसी भांति मुसलमान भी एक सम्प्रदाय है जिसे पूजा पद्धति की पूर्ण स्वतंत्रता है। परन्तु हिन्दू सहित सभी पहले भारतीय होने चाहिएं। यह कोई अनोखी बात नहीं है। चीन का रहने वाला पहले चीनी हैं। बाद में मुसलमान या बौद्ध है। इण्डोनेशिया का निवासी पहले वहां का निवासी है। बाद में है उसका रिलीजन।
हम यदि वास्तव में राष्ट्रीय एकता चाहते हैं तो नीर-क्षीर विवेक करना होगा। सत्यता को शब्द जाल में अधिक दिनों तक कैद मैं नहीं रखा जा सकता है। समान भाव के स्थान पर मुस्लिम तुष्टीकरण की विषवेल बोकर हम राष्ट्रीयता, एकता तथा स्वतंत्रता का अमृत फल नहीं चख सकते। बाहर से पत्ते चिपकाकर स्वतंत्रता का वह वृक्ष हरा नहीं रह सकता। छोटे वगोंर् को अस्पृश्य कहकर, दलित या हरिजन कहकर हम वंचित वर्ग को समरस नहीं कर सकते। प्रांत, भाषा, जाति, पंथ या वर्णभेद जगाकर राष्ट्रीय एकता नहीं स्थापित कर सकते। राष्ट्रीय एकता के लिए बाहरी रूप को छोड़कर सांस्कृतिक एकत्व का सूत्र पकड़ना होगा।

सौभाग्य से इस समय भारत में राष्ट्रवादी सरकार के आगमन से आशा की उम्मीदें बढ़ी हैं। सांस्कृतिक आधार पर भारत के सुदूर प्रांतों-पूर्वोत्तर में समरसता, आत्मीयता बढ़ेगी। भारत के पड़ोसी देशों के साथ सुदृढ़ सम्बंधों का आधार भी यही होगा। इतना ही नहीं, भारत विश्व में न केवल आर्थिक या सामरिक बल्कि विश्व बन्धुत्व तथा विश्व कल्याण की उच्चतम सांस्कृतिक भावना सेइन्हंे सशक्त, सुदृढ़ तथा सुसंगठित करेगा। राष्ट्रीय एकता का स्वरूप प्रदर्शनात्मक की बजाय क्रियात्मक होगा तथा राष्ट्रीय एकता केवल एक 'हाबी'बनकर नहीं रहेगी।
साभार:पाञ्चजन्य

मंगलवार, 25 नवंबर 2014

हरित पार्क योजना का संघ प्रमुख ने किया उद्घाटन

हरित पार्क योजना का संघ प्रमुख ने किया उद्घाटन

परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने बाली समेत विश्व के कई देशों के लोगों को रुद्राक्ष देकर किया सम्मानित
Parmarth Niketan- Sarsanghchalak ji

ऋषिकेश/देहरादून (विसंके उत्तराखंड). सीवर के गन्दे पानी को शुद्ध कर उससे हरीतिमा संवर्द्धन का प्रयोग करके पार्कों को हरा-भरा बनाने की गंगा एक्शन परिवार-परमार्थ निकेतन के हरित पार्क योजना का संघ प्रमुख मोहन राव भागवत ने 20 नवम्बर को विधिवत शुभारंभ किया. इसके पूर्व पार्क में पहुँचने पर आचार्य संदीप शास्त्री की अगुवाई में ऋषिकुमारों ने वेद मन्त्रों के साथ संघ प्रमुख का स्वागत किया. मोहन भागवत ने रिबन खोलकर स्वामी चिदानन्द सरस्वती के साथ पार्क में प्रवेश किया और प्रस्तावित योजना को देखा. उन्होंने पार्क परिसर में रुद्राक्ष का एक पौधा भी रोपा और देववृक्ष के इस पौधे की आरती उतारी. इस मौके पर श्री सुजी गेडे के नेतृत्व में बाली से आये 29 सदस्यीय दल के अलावा अमेरिका एवं मैक्सिको के भी अनेकों लोग मौजूद थे. संघ प्रमुख ने उन सभी को भारत के पवित्र रुद्राक्ष का दाना भेंटकर भारत भूमि पर उनका सम्मान किया.
 परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने इस मौके पर कहा कि बायोडायजेस्टर आधारित इको फे्रन्डली जैविक शौचालयों के निर्माण से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी क्रान्ति खड़ी की जा सकती है तथा मल-जल का उपयोग करके देश भर में हरीतिमा संवर्द्धन का अभियान चलाया जा सकता है. बताया कि परमार्थ निकेतन के मुख्य द्वार के समीप इस हरित पार्क में विशेष पौधों से प्रदूषित जल का शोधन करने की भी योजना बनाई गयी है. पार्क को समीप में बने जैविक शौचालय से पाईप लाईन के जरिए जोड़ा गया है. स्वामी जी ने संघ प्रमुख के मस्तक पर तिलक करके परमार्थ आश्रम से विदा किया और देश-दुनिया में भारतीय संस्कृति की सुगन्धि फैलाने के लिए अपनी शुभकामनाएँ दीं. विदाई 

पूर्व स्वामी जी ने संघ प्रमुख को आईएचआरएफ द्वारा प्रकाशि त हिन्दू धर्म विश्वकोष भी भेंट किया. भागवत ने विश्वकोष के रूप में एक अमूल्य सम्पदा विश्वभर को देने के लिए स्वामी चिदानन्द सरस्वती की सराहना की. इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तराखण्ड प्रांत के प्रांत प्रचारक डां हरीश रौतेला, यमकेश्वर विधायक श्रीमती विजय बड़थ्वाल, स्वर्गाश्रम-जौंक की नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शकुन्तला राजपूत समेत परमार्थ निकेतन परिवार एवं संघ परिवार के कई सदस्य एवं परमार्थ गुरुकुल के ऋषि कुमार उपस्थित थे.

 

बुधवार, 19 नवंबर 2014

परमवीर मेजर शैतान सिंह का शहीदी दिवस भारत की सेना बहुत मजबूत,केवल आधुनिकीकरण की आवश्यकता - ब्रिगेडियर बी डी सिंह निर्वाण

परमवीर मेजर शैतान सिंह का शहीदी दिवस
भारत की सेना बहुत मजबूत,केवल आधुनिकीकरण की आवश्यकता - ब्रिगेडियर बी डी सिंह निर्वाण
  १९६२ में भारत माता की और बढ़ते चीन के नापाक कदमों को रोकने के प्रयास में अपनी पूरी टुकड़ी के साथ प्राणोत्सर्ग करने वाले इन जांबाजों को कोटि-कोटि नमन।



फलोदी 18 नवम्बर २०१४.
 परमवीर की स्मृतियों को जान-जान में बनाये रखने और उनकी प्रेरणा ज्योति देश वासियों में जगाये रखने के विचार से आज सीमाजन कल्याण समिति फलोदी और पूर्व सैनिक सेवा परिषद जोधपुर के संयुक्त तत्वाधान में एक प्रभावी और प्रेरक कार्यक्रम फलोदी में संपन्न हुआ।
 जोधपुर के सांसद  श्रीमान गजेन्द्र सिंह शेखावत, फलोदी के विधायक श्रीमान पब्बाराम बिश्नोई, पूर्व सैनिक सेवा परिषद के जयपुर प्रान्त अध्यक्ष ब्रिगेडियर वी डी सिंह निर्वाण, सीमाजन कल्याण समिति राजस्थान के प्रदेश महा मंत्री बंशीलाल भाटी और स्थानीय जनता की मौजदगी में शहीद सैनिकों के परिवारों और शौर्य चक्र वीर चक्र सम्मानित योद्धाओं का और उनके परिवारों का सम्मान कर सभी लोग स्वयं को सम्मानित महसूस कर रहे थे। 
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राजकीयसीनियर सैकंडरी स्कूल में मंगलवार दोपहर आयोजित समारोह में परमवीर चक्र मेजर शैतानसिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समारोह में फलौदी के अलावा बाप, लोहावट, शेरगढ़ से आए शहीद परिवारों को सम्मानित किया गया। मुख्य वक्ता पूर्व सैनिक सेवा परिषद जयपुर के अध्यक्ष ब्रिगेडियर बी डी सिंह निर्वाण ने कहा कि भारत की सेना बहुत मजबूत है केवल इसके आधुनिकीकरण की आवश्यकता है। सीमाओं पर खतरे को देखते हुए आम जनता को भी सजग रहना होगा। मुख्य अतिथि सांसद गजेंद्रसिंह शेखावत ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से आज के नौजवानों के देश के शहीदों सेना के बारे में जानकारी मिलती है। कार्यक्रम के अध्यक्ष विधायक मास्टर पब्बाराम विश्नोई ने युवा पीढ़ी को देश सेवा के लिए आह्वान करते हुए कहा कि मेजर शैतानसिंह स्मारक बनाने के लिए अपनी ओर से हर संभव प्रयास करेंगे। आरएसएस के प्रचारक श्यामसिंह ने कहा कि आज बहुत कम बच्चों को शहीदों के बारे में जानकारी होती है, लेकिन हीरो-हीरोइनों के बारे में बच्चे सारा कुछ जानते हैं। 
कार्यक्रम पूर्व सैनिक कल्याण परिषद सीमा जन कल्याण समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। इस अवसर पर परिषद की फलौदी कार्यकारिणी का गठन किया गया। गौरव सैनिक कैप्टन राणीदान सिंह को अध्यक्ष बनाया गया। कार्यक्रम संयोजक जयराम गज्जा थे। कार्यक्रम में कर्नल गुमानसिंह भाटी, कुंभसिंह पातावत, करणसिंह, कैप्टन हनुमान सिंह, जुगत सिंह करनोत, कैप्टन विजयसिंह, सूबेदार मेजर मेघा सिंह अमर सिंह आदि उपस्थित थे। मंच संचालन मदनसिंह ने किया। समारोह में शहीद परिवारों की वीरांगनाओं को सम्मानित किया गया। कैप्टन राणीदान सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। 

देणोक| क्षेत्रके शैतानसिंह नगर में मंगलवार को परमवीर चक्र मेजर शैतानसिंह की पुण्यतिथि उसके पैतृक निवास स्थल हवेली में स्थित मंदिर परिसर में हर्षोल्लास से मनाई गई। इस मौके पर आए जोधपुर लोकसभा सांसद गजेंद्रसिंह शेखावत ने मेजर साहब द्वारा किए गए देश रक्षार्थ कार्यों का चिंतन किया। इस मौके पर उपस्थित सभी युवा नौ-जवानों के देश रक्षार्थ करने का संकल्प दिलवाया। इस दौरान मेजर के पैतृक निवास स्थल पर आयोजित शहीद दिवस के कार्यक्रम संयोजक राजेंद्रसिंह भाटी ने बताया कि सुबह 10 बजे मेजर साहब के मंदिर में उसकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करके श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान ब्रिगेडियर बी डी सिंह निर्वाण पूर्व सैनिक सेवा परिषद जयपुर अध्यक्ष ने मेजर साहब द्वारा चीनी सैनिकों से डटकर 1962 की लड़ाई में किए युद्ध की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच 1948, 65, 71 के युद्ध परिणामों को भी बताया। इस दौरान भाटी ने बताया कि इस अवसर पर श्यामसिंह राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ   के जिला प्रचारक , विशिष्ट अतिथि रविंद्र चौधरी अधिशासी अभियंता पीएचडी, हनुमान सिंह, कमलेश अध्यापक, भाजपा मंडल अध्यक्ष लोहावट शांतिलाल शर्मा, मुच्छी पावा, पूर्व सरपंच जीतसिंह, कालूराम मीणा, रतनसिंह देणोक, कैप्टन गंगासिंह भाटी, नकतसिंह धौलासर, इंद्रसिंह बीका कानासरिया, जयसिंह पलीना, नाथूसिंह इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ थी।

भारत का एक ही लक्ष्य है “कृण्वंतो विश्वमार्यम” – जे. नंदकुमार

भारत का एक ही लक्ष्य है कृण्वंतो विश्वमार्यम”–जे. नंदकुमार

 
जयपुर, 18 नवंबर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख जे. नंदकुमार ने कहा कि भारत का एक ही लक्ष्य हैकृण्वंतो विश्वमार्यमअर्थात् विश्व श्रेष्ट बनाना यह पहले से ही स्पष्ट है। इसे पूरा करने के लिए हमारा अभियान सदियों से चल रहा है। बीच में इसमें कुछ गतिरोध आ गए थे। इन्हें हटाने और राष्ट्र को परमवैभव पर ले जाने के लिए डॉ. हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।
नंदकुमार मंगलवार को राजस्थान विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में पत्रकारिता के विद्यार्थियों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शक्तिशाली देश बनाने के लिए समाज परिवर्तन जरूरी है। संस्कारित समाज के आधार पर राष्ट्र को परम वैभव पर लाना है। समाज परिवर्तन की पहली सीढ़ी व्यक्ति निर्माण है। उन्होंने कहा कि समाज को सुदृढ किए बिना, सत्ता के माध्यम से देश को शीर्ष पर नहीं पहुंचाया जा सकता। इसलिए समाज के सभी क्षेत्रों में काम करते हुए समाज को आगे लाने का काम ही संघ कर रहा है।
उन्होंने छात्रों से चर्चा करते हुए कहा कि आज समाज, संगठन और राष्ट्र वैभव में मीडिया की बड़ी भूमिका है। इसलिए मीडिया को समाज के सामने सच लाना चाहिए। लेकिन आज समाचार न्यूज उत्पाद बन गई है, कथित मीडिया द्वारा इसे आकर्षक बनाने के लिए थोड़ा झूठ का कलर मिलाकर इसे संवेदनशील बनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि आजादी से पहले मीडिया और पत्रकार, लोगों के आदर्श हुआ करते थे, उनमें सादगी, समर्पण और जीवन मूल्य थे। आजादी के बाद मीडिया का स्वरूप बदला है। प्रतिस्पर्धा बढ़ी है लेकिन यह स्वस्थ नहीं रही। उन्होंने कहा कि मीडिया में नकारात्मक खबरों को ज्यादा महत्व मिलता है। जबकि व्यक्ति और समाज को प्रेरित करने वाली खबरें कम होती है। राष्ट्रीय विचारों और समाज के लिए हितकारी समाचारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। 

नंदकुमार ने इस दौरान छात्रों के कई सवालों के जबाव भी दिए। 

इस अवसर पर पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. संजीव भानावत, प्रांत प्रचारक शिवलहरी, प्रांत प्रचार प्रमुख महेन्द्र सिंहल, विश्व संवाद केन्द्र के सचिव विवेक कुमार, प्रताप यूनवर्सिटी के पत्रकारिता विभागध्यक्ष डॉ. योगेश शर्मा और बड़ी संख्या में पत्रकारिता के विद्यार्थी मौजूद थे।

रविवार, 16 नवंबर 2014

आतंकियों को किया कोर्ट में पेश

आतंकियों को किया कोर्ट में पेश 
साभार:दैनिक भास्कर

साभार:राजस्थान पत्रिका  

हेमंत घोष एबीवीपी के प्रदेशाध्यक्ष

हेमंत घोष एबीवीपी के प्रदेशाध्यक्ष 
 
हेमन्त  घोष
जोधपुर. जोधपुर के हेमंत घोष एबीवीपी के प्रदेशाध्यक्ष  बनाए गए हैं। वे जोधपुर के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। यह निर्णय अमृतसर में आयोजित एबीवीपी के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में राजस्थान के चुनाव अधिकारी दिनेश शर्मा ने किया। 

घोष पहले ऐसे कार्यकर्त्ता है जिन्हे पश्चिमी राजस्थान से पहली बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेशाध्यक्ष का दायित्व मिला हैं  साथ ही सबसे कम उम्र के प्रदेशाध्यक्ष बनने का मौका भी इन्हें प्राप्त हुआ हैं

उपाध्यक्ष पद पर सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के प्रो. आनंद पालीवाल, बारां के दिनेश शर्मा, गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज अजमेर के जिनेश जैन, आरआर कॉलेज, अलवर में लेक्चरर डॉ. राजेश यादव को नियुक्त किया गया है। प्रदेश कोषाध्यक्ष लोकेश प्रताप सिंह प्रदेश कार्यालय मंत्री हेमंत जैन को बनाया गया है। जोधपुर के राजेश गुर्जर को प्रदेश मंत्री बनाया गया है।

सरकारी सेवा में अध्यापक पद पर कार्यरत घोष अपने छात्र जीवन में 1989 से ही एबीवीपी से जुड़े हैं। वे पूर्व में जोधपुर महानगर मंत्री, विभाग प्रमुख, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रह चुके हैं। वर्ष 2011 से अब तक वे एबीवीपी के प्रदेश उपाध्यक्ष थे। उन्होंने अनेक छात्र आंदोलनों का नेतृत्व भी किया है। प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के साथ तालमेल स्थापित कर छात्रहित में कार्य किए जाएंगे। साथ ही राज्य के विश्वविद्यालयों काॅलेजों में शैक्षणिक माहौल स्थापित करने के प्रयास होंगे। 

वहीं दुबारा प्रदेश मंत्री बनाए गए राजेश गुर्जर मूलतः नीम का थाना (सीकर) के रहने वाले है। वे बीएससी बीएड तक शिक्षा लेने के बाद वर्ष 2009 से एबीवीपी में प्रचारक (पूर्णकालिक) कार्यकर्ता है। वर्ष 2004 में एबीवीपी से जुड़ने के बाद से वे नगर मंत्री, अलवर जिला संगठन मंत्री जोधपुर विभाग में संगठन मंत्री भी रहे। 

घोष के प्रदेश अध्यक्ष बनने पर सीएम ने दी बधाई

 
जोधपुर के हेमंत घोष को एबीवीपी के प्रदेशाध्यक्ष पद पर निर्वाचित होने के बाद प्रदेश शहर की अनेक सामाजिक स्वयंसेवी संगठनों ने बधाई शुभकामनाएं दी हैं। उनके निर्वाचन पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, भाजपा यूपी प्रभारी आेम माथुर, यूपी भाजपा संगठन मंत्री सुनील बंसल, स्वदेशी जागरण मंच से जुड़े मुरलीधर राव, शिक्षा मंत्री कालीचरण सर्राफ, शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी, सांसद गजेंद्रसिंह शेखावत, विधायक बाबूसिंह राठौड़, जोगाराम पटेल के अलावा अनेक सामाजिक स्वयंसेवी संगठनों ने बधाई प्रेषित की है।

  

गुरुवार, 13 नवंबर 2014

संत सम्मलेन की खबर कर्नाटक के समाचार पत्रों से .............

संत सम्मलेन की खबर कर्नाटक के समाचार पत्रों से ............. 

धर्मांतरण पर लगे रोक

साभार:राजस्थान पत्रिका

 

गायों को बचाना युगधर्म की पुकार है: संघ प्रतापपुरी महाराज ने गायों को बचाने के लिए अर्थदान का आह्वान किया



गायों को बचाना युगधर्म की पुकार है: संघ

प्रतापपुरी महाराज ने गायों को बचाने के लिए अर्थदान का आह्वान किया
गौ शिविर का इक दृश्य
पशुपालकों  से विचार विमर्श करते हुए प्रान्त प्रचारक मुरलीधर जी एवं सह प्रान्त  प्रचारक राजाराम जी
गौ शिविर 
व्यवस्थाओं  का जायजा लेते हुए

जैसलमेर (कासं.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक मुरलीधर ने कहा कि गाय हमारे लिए प्रकृति का अनुपम उपहार है। उसका संरक्षण युगधर्म की पुकार है। जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में अकाल की वजह से गोवंश के जीवन पर संकट आ गया है। संघ के प्रांत प्रचारक आदर्श विद्या मंदिर में गो संरक्षण पर आयोजित प्रबुद्धजनों की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे।
        उन्होंने कहा कि सीमावर्ती जिलों में संघ और सीमाजन कल्याण समिति के कार्यकर्ता गायों के लिए चारे-पानी का इंतजाम कर रहे हैं। संघ के पास कोई बैंक बैलेंस नहीं है। स्वयंसेवक ही संघ की पूंजी है। ऐसी स्थिति में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे भामाशाह अर्थ समर्पण कर सहयोग करें।
        बैठक में उपस्थित तारातरा मठ के महंत प्रतापुरी ने कहा कि हमारे जीवन के 16 श्रृंगार गाय के बिना संभव नहीं हैं। सनातन धर्म में अपनी आय का दसवां हिस्सा दान करने की परम्परा रही है। अगर हम धर्म निभाने के लिए दान करेंगे तो अधर्म हमसे दूर रहेगा तथा शरीर भी नीरोगी रहेगा। प्रतापपुरी महाराज ने गोवंश की रक्षा के लिए चलाये जा रहे महायज्ञ में सभी से मुक्त हाथों से दान करने की अपील की है।
15 लाख की सहयोग राशि की घोषणा
        सीमाजन के जिला मंत्री शरद व्यास ने बताया कि संघ प्रचारक मुरलीधर और प्रतापपुरी महाराज के आह्वान पर वहां उपस्थित गो भक्तों ने मौके पर ही अपनी सामथ्र्य के अनुसार गायों के चारे-पानी की व्यवस्था के लिए सहयोग राशि देने की घोषणा की। कारोबारी बिल्डर्स कैलाश खत्री ने 7 लाख रुपए, श्री लक्ष्मीनाथजी साख सहकारी समिति ने 2 लाख, डाॅ. दाऊलाल शर्मा, नखतसिंह भाटी, फलोदी निवासी जगदीश कुमार और विनोद कुमार खत्री ने एक-एक लाख, भूरसिंह बीदा ने 51 हजार, मांगीलाल टावरी, मूलचंद खत्री व सत्यनारायण खत्री ने 25-25 हजार, लक्ष्मण खत्री, अमरचंद खत्री, मोहनलाल सोनी व राजेंद्र चांडक ने 21-21 हजार रु. की राशि का गोवंश को बचाने के लिए दान दिया। अकाल राहत एवं गो संरक्षण समिति के संयोजक मुरलीधर खत्री ने उपस्थित लोगों को सीमाजन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित गो शिविरों व चारा डिपो से संबंधित जानकारी दी।
संघ के प्रचारकों ने गो शिविरों का निरीक्षण किया अकाल के संकट में गायों की रक्षा के लिए सीमाजन कल्याण समिति द्वारा संचालित गो शिविरों का संघ के प्रांत प्रचारक मुरलीधर और विभाग प्रचारक बाबूलाल ने निरीक्षण कर वहां की जा रही व्यवस्थाओं को परखा। उन्होंने खुहड़ी, म्याजलार, करड़ा, पोछीना, बींजराज का तला, खारिया, चेलक आदि क्षेत्रों का भ्रमण कर वहां पर उपस्थित पशुपालकों से आत्मीयता से मिले। संघ पदाधिकारियों ने ग्रामीणों को विश्वास दिलाया कि अकाल के संकट में संघ पूरी तरह से उनके साथ खड़ा है। उन्होंने शिविर में सीमाजन कार्यकर्ताओं व पशुपालकों द्वारा की गई व्यवस्थाओं पर प्रसन्नता जाहिर की। उनके साथ सीमाजन के उपाध्यक्ष अमरसिंह सोढ़ा और सहमंत्री वीरेंद्रसिंह बैरसियाला भी थे।






बुधवार, 12 नवंबर 2014

संत सम्मलेन की खबर कर्नाटक के समाचार पत्रों से .............

संत सम्मलेन की खबर कर्नाटक  के समाचार पत्रों  से .............
साभार:राजस्थान पत्रिका


भागवत ने संगठित हिंदू समाज का आह्वान किया


  भागवत ने संगठित हिंदू समाज का आह्वान किया


 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने सिद्धगंगा मठ मेंसंत सम्मेलनमें कहा कि दुनिया की कुछ शक्तियां हिंदू समाज को विभाजित करना चाहती हैं. ऐसी शक्तियां हमारे अपने लोगों को अपने साथ ले जाती हैं. ये लोग बाद में हिंदू समाज के दुश्मन बन जाते हैं... हमें आईना दिखाने की जरूरत है जो हर हिंदू की एकता प्रतिबिंबित करे. इस तरह का कार्य हिंदू समाज के संत-स्वामी प्रभावी तरीके से कर सकते हैं.


     
सिद्धगंगा मठ के डॉ. शिवकुमार स्वामी ने भागवत के साथ मिलकर सम्मेलन का उद्घाटन किया जिसका आयोजन विश्व हिंदू परिषद ने अपने स्वर्णजयंती समारोह के तहत किया था.
     
भागवत ने स्वामियों से लोगों के जीवन में उतारे जाने वाले आध्यात्मिकता के मूल्य का विश्लेषण और उस पर चर्चा करने का अनुरोध किया.
     
उन्होंने कहा कि हमें स्वामीजी की मदद से इन गुमराह लोगों का मार्गदर्शन करने के वास्ते मूल्यों को लागू करने के लिए चलाए जाने वाले कार्यक्रमों एवं उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा करने की जरूरत है.
     
भागवत ने कहा कि आरएसएस विहिप अपनी सामाजिक गतिविधियों से स्वामीजी का समर्थन करेंगे. उन्होंने कहा कि यदि संत-स्वामीजी समाज की अगुवाई करेंगे तो हम धार्मिक नेतृत्व के पीछे रहेंगे.
     
उन्होंने कहा कि हम वसुधैव कुटुम्बकम अवधारणा में विश्वास करने वाले लोग हैं. हिंदू के लिए कोई बाहरी नहीं है. भारत के हर धार्मिक संप्रदाय को अपनों के बीच यह अवधारणा स्पष्ट कर लेनी चाहिए.
     
विहिप के अंतरराष्ट्रीय महासचिव चंपत राय ने कहा कि साधुओं और संतों में हिंदू समाज के समक्ष मौजूद सभी समस्याओं का हल करने की क्षमता है.
     
इस अवसर पर भागवत ने वरिष्ठ संघ प्रचारक चंद्रशेखर भंडारी की ओर से लिखित एक पुस्तक भी जारी की.
     
इस मौके पर आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रविशंकर ने भारत में बढ़ते धर्मांतरण पर चिंता जतायी और कहा कि धर्मांतरण रोकने के लिए प्रभावी उपाय होने चाहिए.
     
उन्होंने कहा कि भारत में जनसंख्या अभिशाप नहीं बल्कि वरदान है. समाज को अंधविश्वास, जातिवाद जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए गंभीर रूप से आगे आना चाहिए.
  साभार: समय लाइव 

मंगलवार, 11 नवंबर 2014

सोमवार, 10 नवंबर 2014

पाथेय कण पाठक सम्मेलन

पाथेय कण पाठक सम्मेलन





सोजत (पाली) . जयपुर से प्रकाशित होने वाली जागरण पत्रिका पाथेय कण के सोजत तहसील ( पाली ) पाठको का सम्मेलन मोती चन्द सेठिया आदर्श  विधा मन्दिर के प्रांगण मे आयोजित किया गया। सम्मेलन मे मंचासीन अतिथी पत्रिका के सम्पादक श्री कन्हैया लाल जी चतुर्वेदी,प्रबन्ध सम्पादक श्री माणक चन्द्र,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पाली जिला संघ डां श्रीलाल, सोजत तहसील संघ चालक नेमीचन्द गहलोत ने भारत माता का पूजन कर पाठक सम्मेलन का शुभारम्भ किया।
             पाथेय कण पत्रिका के विषय मे प्रबन्ध सम्पादक श्री माणक चन्द्र ने बताया कि 25 वर्ष पूर्व प्रारम्भ कि पत्रिका गई जिसका उद्देशय देश  व समाज हित के समाचार जन जन तक पहुॅंचाकर उनको जागृत करना रहा तथा वर्तमान मे यह सर्वाधिक संख्या मे पढी जाने वाली पाक्षिक पत्रिका है। जिसमे राष्ट्रीयता की भावना जगाने वाले विभिन्न प्रकार के लेख,जीवनीयाॅं,बोध कथाएॅ तथा चित्र कथाए प्रकाशित  की जाती है। पाठको की समस्याओ का निराकरण सम्पादक श्री कन्हैया लाल जी चतुर्वेदी से सीधे संवाद के माध्यम से किया। पाठको द्धारा दिये गये सुझाव को पत्रिका मे स्थान देने का भरोसा दिलाया। सम्मेलन मे करीबन 35 गॉवों  से लगभग 150 से अधिक पाठको ने भाग लिया।  सोजत लहसील के सभी 122 गॉवों  मे  पाथेय कण पत्रिका को पढा जाता है।
            सम्मेलन में पाथेय कण पत्रिका के सह सम्पादक मनोज गर्ग,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पाली विभाग के प्रचार प्रमुख तेज सिंह पंवार, पाली जिला प्रचार प्रमुख हनुमान चैहान, जिला समरसता प्रमुख रामकिषोर राठौड़,सह जिला शारिरिक प्रमुख सुरेश  कुमार,विधालय के प्रधानाचार्य दीपसिंह राजावत, जगदीश  जांगिड़ आदि उपस्थित थे। सम्मेलन मे मंच संचालन राजेश  गहलोत ने किया।

तमिलनाडु से खबरें वहाँ के समाचार पत्रो से ……

तमिलनाडु से खबरें वहाँ  के समाचार पत्रो से ……

साभार:राजस्थान पत्रिका

साभार: द न्यू इंडियन एक्सप्रेस

हमारे संगठन का आधार : क्रियात्मक भाव - श्रीगुरुजी

हमारे संगठन का आधार : क्रियात्मक भाव - श्रीगुरुजी
साभार: पाञ्चजन्य

शनिवार, 8 नवंबर 2014

 प्रज्ञा प्रवाह  अखिल भारतीय प्रान्त संयोजक बैठक  प्रारंभ 

 प्रज्ञा प्रवाह
अखिल भारतीय प्रान्त संयोजक बैठक प्रारम्भ
काशी ८ नवंबर  १४.

उद्घाटन सत्र में डॉ. सदानन्द सप्रे एवं मा. श्री दत्तात्रेय जी ने प्रस्तावना व इस संगठन की उपादेयता पर विचार व्यक्त किये.

दो दिन चलने वाली इस बैठक विभिन्न सत्रों में संपन्न होंगी।
एकात्म मानव दर्शन पर महेश जी शर्मा ने उध्बोधन दिया वाही एक अन्य सत्र में राकेश सिन्हा जी ने मार्गदर्शन दिया 

विश्व संवाद केंद्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित पुस्तक

शुक्रवार, 7 नवंबर 2014

भारतीय संस्कृति त्याग और बलिदान की

भारतीय संस्कृति त्याग और बलिदान की 

साभार:राजस्थान पत्रिका

प्रो. अरोड़ा के स्मृति दिवस पर लिया राम मंदिर बनाने का संकल्प


प्रो. अरोड़ा के स्मृति दिवस पर लिया राम मंदिर बनाने का संकल्प 

 जोधपुर 6 नवम्बर २०१४ | श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन में बलिदान देने वाले प्रो. महेंद्रनाथ अरोड़ा का स्मृति दिवस गुरुवार को अरोड़ा सर्किल पर आयोजित किया गया। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल दुर्गा वाहिनी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में संत अमृतराम महाराज का सान्निध्य रहा। विहिप के महानगर मंत्री पंडित राजेश दवे ने बताया कि इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक नंदलाल जोशी, प्रांत प्रचारक मुरलीधर, प्रहलाद गोयल, भंवरलाल चौधरी, रामस्वरूप भूतड़ा, जगदीश पुरोहित, रामप्रताप अग्रवाल, आशा जोशी, महेंद्रसिंह राजपुरोहित, विक्रांत अग्रवाल, अनिल चौपड़ा, तेजराज मंत्री, महेंद्र उपाध्याय, विजयसिंह परिहार सहित अनेक प्रमुख पदाधिकारियों ने प्रो. अरोड़ा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। 

प्रो. महेंद्रनाथ अरोड़ा की प्रतिमा पर संतों ने पुष्पांजलि अर्पित की।

समारोह को संबोधित करते हुए बाड़मेर के तारापुरी मठ के महंत प्रतापपुरी महाराज ने राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम में घनश्याम ओझा, बिहारीलाल शर्मा, जितेंद्र पालीवाल, राहुल परिहार, विक्की, कमल, राजू वैष्णव सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

 

 

गुरुवार, 6 नवंबर 2014

संघ को समझना है तो शाखा आयेंः मोहन भागवत

संघ को समझना है तो शाखा आयेंः मोहन भागवत



आगरा 2 नवम्बर। आज प्रातःकाल युवा संकल्प शिविर में पं.दीनदयाल उपाध्याय परिसर आस्था सिटी रूनकता मथुरा रोड आगरा पर महानगर आगरा के गणमान्य महानुभावों के मध्य जलपान पर वार्ता कार्यक्रम का आयोजन किया हुआ राष्ट्रीय स्यंवसेवक संघ के सरसंघचालक ने प्रस्तावना में संघ की जानकारी देते हुये बताया कि हम संघ को समझे। संघ के काम को समझें। ,संघ जैसा संगठन दुनिया में कोई नहीं है संघ को समझने की दृष्टि एवं जिज्ञासा चाहिए संघ हिन्दू समाज को संगठित करने का कार्य कर रहा है आपने सभी को शाखा में आने का निमंत्रण दिया। उन्होने कहा कि हिन्दू समाज देश को जैसा रखेगा वैसा ही बनेगा संघ निर्माता डाॅ. हेडगेवार गरीबी में पले बडे कमाने वाला कोई नहीं था। पढ़ाई में सदैव अग्रणी रहे देश हित में सारे कार्य किये कलकत्ता डाक्टरी की पढाई करते हुये क्रान्तिकारीयों व काग्रंेस में रह कर आन्दोलनकारियों के सम्पर्क में रहे। सम्पूर्ण भारत में समन्वय में काम करने वाली अनुशीलन समिति में सक्रिय रहे साथ ही देश हित में काम करने वाले कार्यक्रम व गणेश उत्सव व लोक प्रबोधन के लिये भाषण करना और सब नेताओं से सम्पर्क करते रहे। भगतसिंह चंद्रशेखर वीरसावरकर आदि सब प्रकार की विचार धाराओं के लोग मित्र बने डाॅ. साहब के मन में विचार आया कि हम गुलाम क्यांे बनें। हमारे साथ सब प्रकार की समृद्वि थी, फिर देश गुलाम क्यो हुआ। हममें क्या दोष है उन्होने समाज में एकता व सुदृढ़ता लाने के लिये अनेक प्रयोग किये और विवधता में एकता का मंत्र दिया। संघ की दैनिक शाखा संघ की कार्य पद्यति की विशेषता है। शाखा के माध्यम से संस्कार सामूहिक रूप से कार्य करने का स्वभाव और भारत माता के सभी पुत्र मेरे सभी सगे भाई है परस्पर आत्मीयता का भाव संघ ने दिया

प्रस्तावना में जानकारी दी कि आगामी अप्रैल 2015 में संघ के स्वयंसेवकों द्वारा दिल्ली में विशाल सेवा शिविर लगने वाला है स्वयंसेवकों द्वारा 1,38,000 सेवा कार्य चल रहे है संघ निरंतर प्रभावी हो रहा है समाज के उन्न्यन के लिये कार्य कर रहा है। शाखा में स्वयं प्रत्यक्ष अनुभव करें उन्होनें नागरिकों की जिज्ञसा के समाधान में बताया कि भारत के बिना हिन्दू नहीं, हिन्दू के बिना भारत नहीं। भारत जमीन के टुकडे का नाम नहीं है, भारत यानि जहां भारतीयता वाले लोग रहते हो, भारत की गुण-सम्पदा को हिंदुत्व कहते है। एकता के लिए छोटी छोटी बातों पर संयम रखना होगा संस्कृति सब की एक चाहे, उसे हिन्दू संस्कृति कहें भारतीया संस्कृति अथवा आर्य संस्कृति कोई अन्तर नहीं पडता। सब अपने सत्य पर चलें। दुनिया में हिन्दुत्व की पहचान बन गई है। इस भूमि से नाता मानने वाला समाज इतिहास संस्कृति और परम्परा को मानने वाला समाज है जब कि पाकिस्तान जैसे देश अपनी पहचान खो चुके है अपने देश में अनेक पंत भाषा, सम्प्रदाय प्रांत है फिर भी देश एक है। सत्य क्या है कोई जड की पूजा करता है तो कोई चेतन की, किन्तु जीवन एक है सब अपने अपने हिसाब से साहित्य का निर्माण करते है, संघ की प्रगति के बारे में कहा 121 करोड़ के देश में 40 लाख स्यवंसेवक है और 30 हजार शाखायें है तथा 60 हजार साप्ताहिक मिलन शाखायें हैं। सम्पूर्ण समाज को संगठित करने के लिए एक करोड स्यंवसेवकों का लक्ष्य संघ के सौ वर्ष पूरे होने तक हो जायेगा। उन्होनें कहा कि पर्व व त्यौहारों को और अधिक सार्थक बनाने का प्रयास किया जाए। संघ भी अपने उत्सव मनाता है। जैसे संक्रातिं उत्सव को समाज की समरसता एकता के लिये मनाते है। आरक्षण समाज की विशमता मिटाने के लिए है आरक्षण सही प्रकार से लागू नहीं हुआ अपितु राजनीति लागू हो गई है। उन्होने समाधान बताया कि गैरराजनैतिक लोगों के वर्चस्व वाली समिति द्वारा निरीक्षण व सर्वेक्षण किया जाये फिर आकलन हो कि आरक्षण किस को मिला किस को नहीं उन सुझावों से सुप्रीम कोर्ट से मेल खाता है नागरिकों के प्रश्न के उत्तर में कहा कि संघ किसी को आदेश नहीं देता है। जनसंख्या संतुलन के लिए बनाई गई नीति सब पर समान लागू होनी चाहिये हम सब भारत माता के पुत्र है हमारे पूर्वज व संस्कृति एक है एक दूसरे के प्रति कोई भेद नहीं है इसलिय छूआ छूत के लिये कोई स्थान नहीं है। संघ एक ही काम करता है कि समाज का संगठन, जब कि स्यंवसेवक अपनी प्रतिभा क्षमता का प्रयोग कर रहा है। देश हित की मानसिकता रखने वाला हर व्यक्ति युवा: मोहन भागवत आगरा। राष्ट्रीय स्यवंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि देश व समाज के हित में कार्य करने की मानसिकता रखने वाला हर उम्र का व्यक्ति युवा है। अस्सी वर्ष की आयु मे स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेकर बाबू कुवर सिंह ने यही साबित किया। किनारों को तोड कर उफनती नदी विनाश करती है जब कि तटों के बीच में बहने वाली नदी उपयोगी होती है। अनुशासित चरित्रवान एवं राष्ट्रहित मानसिकता वाले युवा राष्ट्र निर्माण में भूमिका निभा सकते है। श्री भागवत आज सायं शिविर के युवा विद्याथर््िायों को सम्बोधित कर रहे थे उन्होने कहा कि भारत राष्ट्र अति प्राचीन है लेकिन राष्ट्रभाव विलुप्त होने से हम गुलाम बने फिर से ऐसी स्थिति न आये। इसके लिये राष्ट्रभाव के देशप्रेम की आवश्यकता है। हम उपदेश देने के स्थान पर स्वंय अनुकरण कर उदहारण बने।
साभार:rss.org
 

सशक्त, समृद्ध एवं सुसंस्कृत राष्ट्र निर्माण में नैतिक मूल्यों का महत्वपूर्ण योगदान - भैयाजी जोशी लेखक अंधकार को दूर करने के लिए नैतिकता रूपी दीप जलाएं: आचार्य महाश्रमण डॉ बजरंग लाल गुप्ता को अणुव्रत लेखक पुरस्कार

 सशक्त, समृद्ध एवं सुसंस्कृत राष्ट्र निर्माण में नैतिक मूल्यों का महत्वपूर्ण योगदान - भैयाजी जोशी
लेखक अंधकार को दूर करने के लिए नैतिकता रूपी दीप जलाएं: आचार्य महाश्रमण

डॉ बजरंग लाल गुप्ता को अणुव्रत लेखक पुरस्कार


नई दिल्ली, 4 नवम्बर 2014. अणुव्रत महासमिति द्वारा प्रतिवर्ष उत्कृष्ट नैतिक एवं आदर्श लेखन के लिए प्रदत्त किया जाने वाला ‘अणुव्रत लेखक पुरस्कार’ वर्ष-2014 के लिए प्रख्यात अर्थशास्त्री, समाजसेवी, यशस्वी साहित्यकार डाॅ. बजरंगलाल गुप्ता को अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में अध्यात्म साधना केन्द्र, मेहरौली (दिल्ली) में प्रदत्त किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि आरएसएस के सह सरकार्यवाहक भैयाजी जोशी, अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष डालचंद कोठारी, महामंत्री मर्यादा कोठारी, पुरस्कार के प्रायोजक परिवार के चैथमल श्यामसुखा, अणुव्रत लेखक मंच के संयोजक ललित गर्ग ने डाॅ. गुप्ता को इक्यावन हजार रुपए की राशि का चैक, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र प्रदत्त कर उन्हें सम्मानित किया।

डाॅ. बजरंग लाल गुप्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र के संघचालक हैं। आपकी ‘भारत का आर्थिक इतिहास’, ‘विवेकानंद के सपनों का भारत’ एवं ‘हिन्दू अर्थचिंतन’ प्रमुख कृतियां हैं। 

आचार्यश्री महाश्रमण ने डाॅ. गुप्ता की नैतिक एवं स्वस्थ लेखन की प्रतिबद्धता की चर्चा करते हुए कहा कि डाॅ. गुप्ता राष्ट्रीय एकता एवं नैतिक मूल्यों के उन्नयन के लिए खूब अच्छा काम कर रहे हैं। इस पुरस्कार से उनके ऊपर और ज्यादा जिम्मेदारी आ गई है। यह पुरस्कार और ज्यादा काम करने की प्रेरणा देने वाला बने। आप पवित्र सेवाएं देते रहें।

आचार्य श्री महाश्रमण ने आगे कहा कि आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आंदोलन का प्रवर्तन किया। जिसका उद्देश्य है मनुष्य अच्छा मनुष्य बने। लेखक की समाज-निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेखक के द्वारा अच्छे विचार दिये जा सकते हैं। लेखक अंधकार को कम कर सकता है। लेखक के द्वारा समाज में व्याप्त विसंगतियों एवं बुराइयों को दूर करने के दीप प्रज्ज्वलित किये जा सकते हैं। आदमी श्रेय को समझे और ऐसा समाज-निर्माण का कार्य करें।

मुख्य अतिथि भैयाजी जोशी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सशक्त, समृद्ध एवं सुसंस्कृत राष्ट्र निर्माण में नैतिक मूल्यों का महत्वपूर्ण योगदान है। अणुव्रत आंदोलन देश को नैतिक दृष्टि से सशक्त बनाने का विशिष्ट उपक्रम है। वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमणजी व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र को नैतिक दृष्टि से सुदृढ़ बना रहे हैं। यही राष्ट्र की सुदृढ़ता का मूल आधार भी है।वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमणजी व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र को नैतिक दृष्टि से सुदृढ़ बना रहे हैं। यही राष्ट्र की सुदृढ़ता का मूल आधार भी है। राजनीति में नैतिकता की स्थापना जरूरी है। शुचिता और सादगी की शक्तियों का समन्वय करके ही राजनेता देश को वास्तविक एवं आदर्श नेतृत्व दे सकते हैं। श्री भैयाजी ने आचार्य श्री तुलसी जन्म शताब्दी वर्ष की चर्चा करते हुए कहा कि मेरा आचार्य तुलसी के साथ संपर्क रहा। मुझे आज इस कार्यक्रम में आकर सुखद महसूस हो रहा है। भैयाजी ने डाॅ. गुप्ता की सेवाओं की चर्चा करते हुए कहा कि उनकी सुदीर्घ सेवाएं रही हैं, ऐसा सम्मान-पुरस्कार व्यक्ति के लिए मार्गदर्शन का काम करता है।
अणुव्रत लेखक पुरस्कार से सम्मानित डाॅ. गुप्ता ने आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुरस्कार मेरे लिए महान् संतपुरुषों का आशीर्वाद है। मेरा यह सौभाग्य है कि मुझे आचार्यश्री तुलसी, आचार्यश्री महाप्रज्ञ और आचार्यश्री महाश्रमण का असीम अनुग्रह, स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि अणुव्रत का प्रारब्ध तत्व नैतिकता है। अणुव्रत मानवता की आचारसंहिता है। मेरे लिए यह प्रसन्नता की बात है कि मैं इस आंदोलन के साथ जुड़कर मानवता की सेवा कर सका। आचार्य श्री महाश्रमण से ऐसे आशीर्वाद की कामना है कि उनके नैतिक और मानवतावादी कार्यक्रमों में अपने आपको अधिक नियोजित करते हुए समाज और राष्ट्र की अधिक-से-अधिक सेवा कर सकूं।

इस अवसर पर श्री सुखराज सेठिया ने भैयाजी जोशी का एवं श्री पदमचंद जैन ने डाॅ. बजरंगलाल गुप्ता का जीवन-परिचय प्रस्तुत किया। अणुव्रत महासमिति द्वारा आरएसएस के श्री नंदलाल बाबाजी, श्री इंद्रेशजी एवं श्री चैथमल श्यामसुखा का प्रतीक चिन्ह प्रदान कर श्री शांतिलाल जैन, श्री रतनलाल सुराणा, श्री बुद्धसिंह सेठिया, श्री सुखमिंदर पाल सिंह ग्रेवाल, श्री शांतिलाल पटावरी ने सम्मानित किया। कार्यक्रम का संयोजन श्री ललित गर्ग ने किया। आभार ज्ञापन श्री बाबूलाल दुगड़ ने किया।

जम्मू-कश्मीर : पत्थर खाकर भी सेवाकार्यों में जुटे रहे स्वयंसेवक'

जम्मू-कश्मीर : पत्थर खाकर भी सेवाकार्यों में जुटे रहे स्वयंसेवक'



पीड़ितों की मदद करना भारतीय सेना के जवानों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों की अपनी शैली है। वे स्थान, समूह, वर्ग, वर्ण, धर्म, जाति अथवा आपदा के स्वरूप पर भेद नहीं करते। खबर मिलते ही पहुंचते हैं। भूकंप, रेल दुघर्टनाओं तथा बाढ़ की विभीषिका में ऐसे उदाहरण भी हैं जब स्वयंसेवक पहले पहुंचे और सरकार बाद में। अपने उसी संगठन के तहत स्वयंसेवक कश्मीर घाटी में पीड़ितों की सहायता के लिए पहुंचे।   
रमेश शर्मा
जम्मू-कश्मीर
में बाढ़ का पानी उतर गया है। जिंदगी दोबारा अपनी रफ़्तार पकडऩे के लिए जूझ रही है। तूफान की धुंध खत्म हो गई है। तूफान के दौरान क्या घटा, क्या उजड़ा
, कौन बचा सब साफ दिखने लगा है। इन साफ तस्वीरों में कुछ बातें चौंकाने वाली है। सबसे पहली तो यही कि तूफान, आंधी और पानी की प्रलयकारी बौछारों के बीच पीडि़तों की मदद के लिए केवल दो ही  हाथ सामने आए एक सेना का और दूसरा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का, और हैरत में डालनेवाली दूसरी बात यह है कि घाटी में कुछ लोगों ने मदद के लिए सामने आए  स्वयंसेवकों और सैनिकों पर पत्थर बरसाए। लेकिन पत्थर खाकर भी मददगार पीछे  नहीं हटे बल्कि डटे रहे। इसका कारण यह था कि पत्थर बरसाने वाले लोग गिरोह-बंद तो थे लेकिन उनकी संख्या कम थी जबकि मदद के आकांक्षी हजारों लोग हसरत की नजरों से अपने मददगारों को देख रहे थे और दुआ दे रहे थे। 

पीड़ितों की मदद करना भारतीय सेना के जवानों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों की अपनी शैली है। वे स्थान, समूह, वर्ग, वर्ण, धर्म, जाति अथवा आपदा के स्वरूप पर भेद नहीं करते। खबर मिलते ही पहुंचते हैं। भूकंप, रेल दुघर्टनाओं तथा बाढ़ की विभीषिका में ऐसे उदाहरण भी हैं जब स्वयंसेवक पहले पहुंचे और सरकार बाद में। अपने उसी संगठन के तहत स्वयंसेवक कश्मीर घाटी में पीड़ितों की सहायता के लिए पहुंचे। हालांकि संघ पर यह आरोप हमेशा लगता है कि वह केवल हिन्दुत्व के लिए काम करता है। हिन्दू का अर्थ किसी के लिए कुछ भी हो लेकिन संघ की नजर में हिन्दुस्तान में रहनेवाला प्रत्येक व्यक्ति ‘हिन्दू’ है, भले ही उसका पंथ और सम्प्रदाय कुछ भी हो। इसी भाव के साथ स्वयंसेवक घाटी में पहुंचे थे जबकि वहां 99 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। घाटी में एक समूह ऐसा है जो सदैव भारत विरोधी वातावरण बनाता है। भारत और भारत से जुड़े तमाम संदर्भों का विरोध करता है।
वह नहीं चाहता कि भारतीय सेना या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे राष्ट्र को समर्पित संगठन की साख घाटी में प्रतिष्ठित हो। पत्थर मारने के पीछे असली मंशा यही थी। अब पत्थरों की बौछार के बीच सैनिक और स्वयंसेवकों की सेवा कैमरे में कैद है। इसका विवरण सेना के पास भी है और संघ के पास भी, जो पिछले दिनों लखनऊ में संपन्न संघ के कार्यकारी मंडल की बैठक में सामने आया। 
संघ की इन तमाम सेवाओं को नजर अंदाज करते हुए उत्तरप्रदेश समाजवादी पार्टी के चर्चित नेता आजम खान ने राज्य और केन्द्र सरकार को चिट्ठी लिखी। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ साम्प्रदायिक राजनीति करता है। उन्हें संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा हिन्दू शब्द का प्रयोग करने पर ऐतराज है। उनका यह भी तर्क हैं कि केन्द्र में भाजपा सरकार आने के बाद संघ के ‘अच्छे दिन’ आ रहे हैं। लगभग ऐसी ही मिलती-जुलती प्रतिक्रिया कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी व्यक्त की। इन दोनों प्रतिक्रिया करनेवालों को ‘इंडियन’ शब्द से एतराज नहीं है जो अंग्र्रेजों का दिया हुआ है और उस शब्द के मूल में भी ‘हिंदू’ शब्द है लेकिन संघ प्रमुख द्वारा हिन्दूशब्द के उपयोग पर आपत्ति होती है। प्रजातंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है और प्रत्येक व्यक्ति को अपनी निजी राय रखने और व्यक्त करने का अधिकार है लेकिन सरेआम साम्प्रदायिक राजनीति करनेवाले हैदराबाद के औवेसी के भाषण पर कोई टिप्पणी न हो, या दिल्ली के इमाम बुखारी के कथनों पर कोई प्रतिक्रिया न हो तब इनकी प्रतिक्रियाओं पर आश्चर्य होना स्वाभाविक है। खासकर तब जब संघ
के सेवा कार्यों में भेदभाव नहीं दिखता। संघ के स्वयंसेवक सेवा के लिए यदि उत्तराखंड जाते हैं तो कश्मीर की घाटी में भी जाते हैं। बाढ़ में, रेल-बस दुर्घटनाओं अथवा भूंकप से प्रभावित क्षेत्रों में भी वे बिना जाति-धर्म पूछ सेवा करते हैं किन्तु आजम खान इस सेवाकार्य पर कोई टिप्पणी नहीं करते।

कश्मीर की आपदा में एक खास बात और देखी गई। मौलाना इमाम बुखारी, आजम खान और हैदराबाद के औवेसी, जिनकी जुबान पर केवल मुसलमानों की बात होती है, इनमें से कोई व्यक्ति या इनका प्रतिनिधि अथवा इनके द्वारा संरक्षित संस्थाओं में कोई भी कश्मीर घाटी में राहत या सेवा के लिए नहीं पहुंचा। वहां अगर सबसे पहले कोई पहुंचा तो संघ के स्वयंसेवक और सुरक्षा बलों के जवान, जिन्हें कुछ लोगों ने अपशब्द कहकर या पत्थर मारकर  भगाने की कोशिश की बावजूद इसके वे  डटे रहे। अपने दायित्व को पूरा करके ही वहां से रवाना हुए। संघ के इन्हीं सेवाकार्यों का नतीजा है कि उसका काम निरंतर विस्तार पा रहा है। संघ की स्थापना से आज तक यह अकेला संगठन है जिसे निरंतर विस्तार मिल रहा है। जो विपरीत परिस्थिति में भी अपनी जगह कायम रहा।

संघ द्वारा की जानेवाली यह जमीनी सेवा और विचलित हुए बिना राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का भाव ही है जिससे हजार विरोधों के बावजूद संघ के काम बढ़ रहे हैं। कार्यकारी मंडल के सामने संघ ने कार्य-विस्तार का जो विवरण प्रस्तुत किया, उसके अनुसार देश में 43,500 शाखाएं नियमित लग रही हैं। जबकि 11,854 साप्ताहिक शाखाएं इससे अलग हैं। वे लोग साप्ताहिक शाखा में जाते हैं जो
किन्हीं कारणों से नियमित शाखाओं में नहीं जा पाते, जबकि इस वर्ष
59 हजार स्थानों पर गुरुपूजा हुई। भारत के अलावा 36 अन्य देशों में संघ का प्रत्यक्ष कार्य चल रहा है। इनमें अमेरिका में 140, इंग्लैंड में 80 और श्रीलंका में 70 स्थानों पर संघकार्य हो रहे हैं।

राजनीतिक या अन्य कारणों से मीडिया में कुछ लोग कुछ भी प्रचारित करें लेकिन संघ के प्रति लोगों का विशेषकर नौजवानों का रुझान किस प्रकार बढ़ रहा है। इसका उदाहरण उस वेबसाइट से मिलता है जिसपर 67 हजार लोगों ने संघ से जुडऩे के लिए पंजीयन कराया। प्रत्यक्ष शाखाओं के अतिरिक्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एक ज्वाइन आर.एस.एस. नाम से एक वेबसाइट बनाई है। इस वेबसाइट को प्रतिदिन हजारों लोग देखते हैं और संघ से जुडऩे की इच्छा दिखाते हैं। पिछले दिनों हम ‘आन-लाइन’ स्वयंसेवकों का एक समागम कर्नाटक में आयोजित किया गया जिसमें चार हजार लोगों ने हिस्सा लिया। इस समागम में 650 महिलाएं थीं जिन्होंने ‘समर्थ भारत’ का संकल्प लिया।
इस समागम में आए 35 लोगों ने सेवा के लिए पूर्णकालिक बनने की इच्छा व्यक्त की। इनमें सेवा की प्रेरणा का भाव संघ के सेवाकार्यों को देखकर ही जगा। वेबसाइट के माध्यम से शिविर में आए कार्यकर्ताओं को 47 प्रकार के सेवाकार्यों का परिचय दिया गया। इन कार्यकर्ताओं को यह संकल्प भी
दिलाया गया है कि बिना किसी भेदभाव, बिना परवाह किए सेवा के संकल्प को पूरा करते हैं। इसका उदाहरण कश्मीर में आए प्राकृतिक आपदा के समय देखने को मिला। स्वयंसेवक पत्थर खाकर भी सेवा के कामों में जुटे रहे।

साभार:न्यूज़ भारती  

बुधवार, 5 नवंबर 2014

जी.एम.फसलो पर स्वदेशी जागरण मंच व सहयोगी संगठनो का संयुक्त वक्तव्य

जी.एम.फसलो पर स्वदेशी जागरण मंच
व सहयोगी संगठनो का संयुक्त वक्तव्य

जोधपुर 04 नवम्बर
स्वदेशी जागरण मंच व अन्य सहयोगी संगठनो का संयुक्त वक्तव्य मंगलवार को जारी कर जी.एम. फसलो पर राजस्थान के कृषि मंत्री द्वारा उठाये गए कदम की सराहना की। वक्तव्य मंच के अखिल भारतीय सहसंयोजक डाॅ. भगवती प्रकाश शर्मा, द्वारा जारी किया गया। जोधपुर में मंगलवार को हुई मंच की महानगर बैठक में इस वक्तव्य को महानगर विचार मण्डल प्रमुख डाॅ. अमित व्यास द्वारा जारी किया गया।
राज्य के कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी द्वारा प्रदेश में जैनेटीकली मोडिफाइड सरसांे (जी‐एम‐सरसो) के खुले परीक्षण की अनुमति नहीं दिया जाना एक स्वागत योग्य कदम है।प्रदेश के कृषि मंत्री  द्वारा इन विवादित बीजो के परीक्षण की अनुमति नहीं दिया जाना प्रदेश के कृषि जैव द्रव्य की शुद्वता के लिये आवश्यक कदम है। स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय किसान संघ , भरतीय मजदूर संघ, ग्राहक पंचायत, लघु उघोग भारती एवं सहकार भारती सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हैं। देश के पारिस्थितिकी तंत्र एवं जन-स्वास्थ्य के लिए सर्वथा असुरक्षित जैनेटीकली मोडिफाइड फसलों (जी‐एम‐ फसलांे) के परीक्षण के विरुद्व एक जन हित याचिका सर्वोच्च न्यायलय में विचाराधीन होने पर भी पिछली  यू‐पी‐ए‐ सरकार में पर्यावरण मंत्री, वीरप्पा मोईली ने, जन स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की अनदेखी करते हुए कई जी‐ एम‐ फसलो की खुल्ले में परीक्षण की अनुमति दे दी थी। इन फसलो के पर्यावरण व जन स्वास्थ्य पर प्रतिकुल प्रभावांे को देखते हुए ही यूरोपीय संघ सहित विश्व के अधिकांश देशो में  आज तक इन जी‐एम‐ फसलों के परीक्षण पर रोक है। लेकिन, देश में बीजों के 5-6 लाख करोड़ रुपयोे के बाजार को देखते हुए मोन्सेण्टो व एवेन्टिस जैसी बहुराष्ट्रीय कम्पनीयाँ, अपने धन-बल से कई देशो में सरकारांे को रिझाने में लगी हुई हंै। यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि पर्यावरण मन्त्रालय में अतिरिक्त सचिव रेंक के अधिकारी हेम पाण्डे की अध्यक्षता वाली जैव अभियान्त्रिकी अनुमोदन समिति ने दूसरे चरण में, मोइली के बाद और कई जी‐एम‐ फसलों के परीक्षण की अनुमति जारी कर दी है। इस केन्द्रीय समिति द्वारा प्रदेश मे भी तीन स्थानो पर जी‐एम‐ सरसो के परीक्षण की अनुमति दे दी है जिसे अविलम्ब वापस लेनी चाहिये।
           स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय किसान मंच, भारतीय मजदूर संघ, गा्रहक पंचायत, लघु उघोग भारती एवं सहकार भारती ने अपने संयुक्त वक्तव्य में केन्द्र सरकार से भी आग्रह किया है कि यू‐पी‐ए‐ के कार्यकाल में गठित विदेशी प्रभाववाली जैव अभियांत्रिकी अनुमोदन समिति केा पुर्नगठित किया जावे और यू‐पी‐ए‐ के कार्यकाल व उसके बाद में भी इस समिति द्वारा जिन जी‐एम‐ फसलांे के खुले परीक्षण की अनुमति दी गई है उस, अविलम्ब वापस लिया जावे।
          इन छ संगठ़नो की मांग है कि, सर्वाैच्च न्यायलय द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की अनुषंसा के अनुरुप, देश में जी‐एम‐ फसलांे के खुले परीक्षण पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जावे। वैज्ञानिक प्रयोगो की दृष्टि से यदि इन फसलो के  कोई परीक्षण किये जाने है तो व,े पी‐वी‐सी‐ या काँच के ग्रीन हाउस में ही किये जाने चाहिये। अन्यथा, जी‐एम‐ फसलांे के खुले परीक्षण से जी‐एम‐ फसलांे के परागकणांे  द्वारा देश की प्राकृतिक वनस्पति व कृषि जैव द्रव्य के प्रदूषित हो जाने का खतरा बना रहेगा। भारत जैसे देश की कृषि जैव सम्पदा प्रदूषित हो जाने के बाद, हमारे पास क्या विकल्प बचेगा? वस्तुतः, इन फसलांे से एलर्जी,आंतांे से रक्त स्त्राव एवं चूहांे में बन्ध्याकण जैसी अनेक समस्याऐं प्रकट हो चुकी है। इसलिए प्रकृति से छेड़छाड़ केे ऐसे खुले दुस्साहस से परीक्षणकर्ता वैज्ञानिको को विरत या दूर रहना चाहिये। इनके जो भी परीक्षण हो वे ग्रीन हाउस के बाहर कदापि नहीं होने चाहिये। स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सहसंयोजक भगवती प्रकाश शर्मा ने मांग की है कि प्रदेश के कृषि मंत्री द्वारा इन विवादित बीजो के परीक्षण की अनुमति नहीं दिये जाना प्रदेश के कृषि जैव द्रव्य की शुद्वता के लिए आवश्यक कदम है। स्वदेशी जागरण मंच सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हैं।

संघ, सत्ता और मीडिया

संघ, सत्ता और मीडिया 
मीडिया इस समय उलझन में ही चमत्कृत है कि भाजपा के माध्यम से राजनीतिज्ञों की ऐसी खेप सामने आ रही है जो युवा तो है ही पर जिस पर बाल्यकाल से संघ के संस्कारों की छाप रही है।

देवेन्द्र स्वरूप

आज के टाइम्स ऑफ इंडिया के पहले पन्ने पर एक शीर्षक देखा, 'केन्द्र में नरेन्द्र, महाराष्ट्र में देवेन्द्र।' मैं सोचने लगा,यह शीर्षक क्यों दिया गया होगा? क्या केवल नाम साम्य के कारण? इसके अलावा इन दोनों में और क्या समानता है? टाइम्स ऑफ इंडिया को कभी आशा नहीं थी कि नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे और 44 वर्षीय देवेन्द्र फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, क्योंकि टाइम्स आफ इंडिया की गणना के अनुसार महाराष्ट्र में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरने वाली नहीं थी और यदि कोई गठबंधन सरकार बनी और उसमें भाजपा का मुख्यमंत्री बना तो वह वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी ही होंगे। उसके लिए गडकरी के बार-बार कहे इन शब्दों का कोई मूल्य नहीं था कि 'पार्टी ने मुझे दिल्ली भेजा है, मैं दिल्ली में अपने दायित्व से प्रसन्न हूं और उसे पूरा करने में लगा हूं। उसे छोड़कर मैं महाराष्ट्र वापस जाने की नहीं सोचता। महाराष्ट्र में जो भी मुख्यमंत्री बनेगा उसे हम सबका पूरा सहयोग रहेगा।' मीडिया को लगता था कि यह महत्वाकांक्षा को परदे में छिपाए रखने की भारतीय राजनेताओं की पुरानी चाल है। जब विदर्भ के चालीस विधायकों ने नागपुर में गडकरी के घर पर जाकर उनको मुख्यमंत्री बनाने का नारा लगाया तो मीडिया ने कहा, 'हमारी बात सही निकली। यह प्रदर्शन गडकरी ने स्वयं आयोजित कराया है। वे मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।' मीडिया शायद यह भूल गया कि गडकरी और देवेन्द्र फड़णवीस दोनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की साधना भट्टी में से तपकर निकले हैं और गडकरी देवेन्द्र के पिता स्व. गंगाधर राव को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं।

मीडिया इस समय उलझन में ही चमत्कृत है कि भाजपा के माध्यम से राजनीतिज्ञों की ऐसी खेप सामने आ रही है जो युवा तो है ही पर जिस पर बाल्यकाल से संघ के संस्कारों की छाप रही है। जिन्होंने संघ में नि:स्वार्थ राष्ट्रभक्ति का मंत्र पाया है, जिनके लिए राजनीति सत्ता की सीढ़ी नहीं राष्ट्र निर्माण का माध्यम है, ये लोग धनी प्रभावशाली परिवारों के कंधों पर बैठकर राजनीति में उच्च स्थानों पर नहीं पहुंचे, बल्कि अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश करके, उच्च शिक्षा प्राप्त कर प्रत्यक्ष समाज कार्य करके एक-एक सीढ़ी ऊपर उठे हैं।
निष्ठावान कार्यकर्ता
मीडिया की अपेक्षा के विपरीत जब नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री पद पर पहुंच गए तो सभी अखबारों और टी.वी. चैनलों ने उनकी जीवनयात्रा को खंगालना शुरू किया। वे यह देखकर चमत्कृत रह गए कि पिछले बारह वर्षों से जिस व्यक्ति पर मुस्लिम विरोधी छवि थोपते आ रहे थे, मुसलमानों का 'नरमेध रचाने वाला राक्षस' बता रहे थे, उसके मुख्यमंत्री काल में गुजरात के विकास को 'उद्योगपतियों की खैरात' बता रहे थे, वह व्यक्ति बचपन में स्टेशन पर चाय बेचकर परिवार का गुजारा करता रहा है, वह संघ का प्रचारक है और संघ की योजना से राजनीतिक क्षेत्र में वर्षों तक मंच के पीछे रहकर संगठन का कार्य करता रहा है। जो विवाह के मंडप से भागा राष्ट्र की सेवा के लिए। 'इस दीपावली पर लगभग साढ़े चार सौ मीडिया-कर्मियों को मोदी ने स्मरण दिलाया कि एक समय मैं आपके लिए कुर्सियां बिछाया करता था, आतुरता से आपके आगमन की प्रतीक्षा करता था।' मीडिया यह विश्वास नहीं कर पा रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री पद पर आसीन व्यक्ति स्वयं दिन में अठारह घंटे काम करता है, वह भी अपने लिए नहीं, राष्ट्र के लिए।

यह निष्ठा, यह लगन केवल नरेन्द्र मोदी तक सीमित नहीं है, भाजपा के जितने भी चेहरे इस समय उभर रहे हैं उन सबके जीवन में झांकने पर मीडिया को यही गुण सम्पदा दिखायी दे रही है। अब देखिए, हरियाणा में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बना तो उसने किसे चुना? मनोहरलाल खट्टर को। हरियाणा की चुनावी राजनीति अब तक जाट वोटों के ईद-गिर्द घूमती रही है। इस समय यह कल्पना ही नहीं हो सकती थी कि कोई गैर जाट मुख्यमंत्री बन सकता है। पर यह चमत्कार हुआ। भाजपा ने एक अनजाने पंजाबी चेहरे मनोहरलाल खट्टर को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया, जबकि भाजपा विधायक दल में कई कद्दावर चेहरे हैं। चार बार निर्वाचित रामविलास शर्मा हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष हैं और ब्राह्मण समाज के नेता माने जाते हैं। जाट नेताओं में कैप्टन अभिमन्यु हैं, हार्वर्ड से पढ़े, सेना से निवृत्त, भाजपा के श्रेष्ठ प्रवक्ता के रूप में सर्व परिचित। ओमप्रकाश धनकड़ हैं, वीरेन्द्र सिंह की पत्नी प्रेमलता हैं। इनमें से प्रत्येक नाम मुख्यमंत्री पद के लिए योग्य है, किंतु मुख्यमंत्री की कुर्सी पर तो कोई एक ही बैठ सकता था, फिर, हरियाणा को आज तक चली आ रही जाति और क्षेत्रवाद के आधार पर भेदभाव की राजनीति से बाहर निकालना था। इसलिए पहली बार चुने गए, सत्ता राजनीति से पूर्णतया अलिप्त मनोहरलाल खट्टर को सामने लाया गया। देश विभाजन के फलस्वरूप पंजाब से उजड़ा उनका परिवार रोहतक जिले के एक गांव में बसा। वहीं खट्टर का जन्म हुआ। बहुत कठिनाइयों में शिक्षा पाई, जीविका और उच्च शिक्षा की खोज में दिल्ली आए। अपने रिश्तेदारों के यहां आश्रय लिया। कैनवास बेचने की छोटी सी दुकान की। बी.ए., एल.एल.बी. पास किया, 1980 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक निकले। 1994 में हरियाणा में भाजपा के संगठन मंत्री बनाए गए। उन्हीं दिनों प्रभारी नरेन्द्र मोदी के सम्पर्क में आए। दोनों ने एक-दूसरे की संगठन क्षमता व कौशल को पहचाना, सादगी की प्रतिमूर्त्िा मनोहरलाल ने राजनीति की पेचीदगियों को जाना, जो काम सौंपा गया, उसे पूरा करके दिखाया, अपने को कभी सामने नहीं आने दिया। पद की दौड़ में वे कभी सम्मिलित नहीं हुए। इसीलिए हरियाणा की विखंडित राजनीति को राष्ट्रवाद के गोंद से जोड़ने की चुनौती उन्होंने स्वीकार की। जिन नामों को मुख्यमंत्री पद के लिए प्रतिस्पर्धी बताया जा रहा था उन सबको मंत्रिमंडल में सम्मिलित करके टीम भावना से हरियाणा के विकास का पथ प्रशस्त किया।

संघ के सांचे में ढले नेता
देवेन्द्र फड़णवीस बी.ए., एल.एल.बी. और एम.बी.ए. की शिक्षा प्राप्त कर केवल 22 वर्ष की उम्र में नागपुर शहर के महापौर बने। मनोहर जोशी के बाद वे पहले ब्राह्मण मुख्यमंत्री हैं जो महाराष्ट्र को प्राप्त हुए। शायद यही कहानी भाजपा के अधिकांश सांसदों व मंत्रियों की है। केन्द्रीय पर्यटन व संस्कृति मंत्री शरद येस्सो नाईक का जीवन-वृत्त केरल से प्रकाशित अंग्रेजी साप्ताहिक दि वीक (2 नवम्बर, 2014) में छपा है। वीक ने नाईक की धार्मिक प्रवृत्ति पर प्रकाश डालते हुए लिखा कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सांचे में ढले हैं। प्रात: 5.30 बजे अपनी दिनचर्या आरंभ करते हैं। उन्होंने राजनीतिक दायित्व का निर्वाह करने के लिए एल.एल.बी. और एम.बी.ए. की पढ़ाई को अधूरा छोड़ दिया। उन्होंने सरपंच से अपनी राजनीतिक यात्रा आरंभ की। वे लगातार चार बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं और हर बार पहले से अधिक अंतर के साथ। अपने परिवार में सबसे बड़ा होने के कारण परिवार के भरण-पोषण के लिए रात में माण्डवी नदी से रेत निकालते और दिन में 15 किलोमीटर साइकिल चलाकर कॉलेज जाते।

'दि वीक' लिखता है कि उनकी जीवन-शैली बहुत सादी है, वे शुद्ध शाकाहारी हंै और घर में बना भोजन खाना पसंद करते हैं। उनके घर में विलासिता की कोई सुविधा नहीं है। संघ परंपरा का सच्चा साक्षात्कार होता है। पन्द्रह वर्ष पूर्व उन्हें खान मार्केट के सामने जो छोटा मकान आवंटित हुआ था, वे बड़े मकान के अधिकारी होते हुए भी उसी में रह रहे हैं। उनके एक सहयोगी आर्पेकर ने बताया कि उनके दरवाजे हरेक के लिए दिन-रात खुले हैं। उनके चुनाव क्षेत्र के नागरिक रात को साढ़े बारह बजे भी उन्हें मिल सकते हैं। 

संस्कारों से रचा- पगा नेतृत्व

ऐसे कुछ उदाहरण देने का अभिप्राय केवल इतना है कि भारतीय राजनीति में एक ऐसा नेतृत्व उभर रहा है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्कारों में रचा-पगा है, जो जाति, क्षेत्र और पंथ की संकीर्ण निष्ठाओं से ऊपर उठकर आसेतु हिमाचल पूरे राष्ट्र के बारे में सोचता है। 2014 के चुनावों के बाद संघ 'रिमोट कंट्रोल' की मीडिया आरोपित छवि से बाहर निकलकर राजनीति के केन्द्र में आ गया है। मीडिया ने मान लिया है कि 2014 के सत्ता परिवर्तन में मोदी के नेतृत्व के पीछे संघ परिवार की विशाल कर्मशक्ति की मुख्य भूमिका है। जिस संघ को अब तक अछूत माना जाता था वह अब मीडिया में चर्चित विषय बन गया है। अब मीडिया बहस कर रहा है कि मोदी सरकार की नीतियों में संघ परिवार की क्या प्रतिक्रिया है। इकानॉमिक टाइम्स ने लिखा है कि संघ परिवार की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए सरकार और संघ के बीच विचार विनिमय का तंत्र बनाया जा रहा है। कृषि, जी.एम. फसल, श्रम सुधार और खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश के बारे में भारतीय मजदूर संघ व स्वदेशी जागरण मंच आदि संघ परिवार के घटकों की शंकाओं का निवारण करके केन्द्रीय मंत्रियों एवं इन संगठनों के नेताओं के बीच गहरा विचार मंथन हुआ। यह एक स्वस्थ प्रक्रिया है। संघ परिवार अपनी अनेक शाखाओं-प्रशाखाओं के द्वारा जमीनी स्तर पर समाज से जुड़ा हुआ है अत: वह सरकार और समाज के बीच सम्पर्क पुल की भूमिका निभा रहा है। संघ अपनी इस भूमिका के बारे में पूरी तरह जागरूक है। संघ समझता है कि यह सत्ता परिवर्तन राष्ट्र निर्माण का एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान करता है। पिछले 67 वर्षों में हम अपने स्वाधीनता आंदोलन की मुख्य प्रेरणाओं से भटक गए थे। हमने राष्ट्र जीवन के किसी भी क्षेत्र में उन प्रेरणाओं के अनुरूप रचना की कोई भी नई पगडंडियां तैयार नहीं कीं। यह अवसर है कि जब सरकार और समाज को मिलकर नई दिशाओं को खोजना है। मीडिया को समझना है कि संघ राष्ट्र के लिए समर्पित एक रचनात्मक संगठन प्रक्रिया है। उसे अपने लिए सत्ता की तनिक भी चाह नहीं है। संघ भी बदली हुई परिस्थितियों के अनुरूप अपने चिंतन और संगठन प्रक्रिया में परिवर्तन ला रहा है। संघ जानता है कि यदि इस समय भारतीय राजनीति के चरित्र में गुणात्मक परिवर्तन न हुआ तो फिर कभी नहीं हो पाएगा। इसलिए संघ राष्ट्र यज्ञ में अपनी पूरी पूंजी को झोंकने के लिए कृत संकल्प है। संघ की शक्ति वर्तमान दैनिक शाखा तंत्र और परिवार की संस्थाओं के संगठन से कहीं आगे पूरे समाज में बिखरी हुई है। संघ की 90 वर्ष लम्बी संगठन साधना में से जो विशाल स्वयंसेवक वर्ग खड़ा हुआ है उसकी पहली पीढ़ी तो शायद हमारे बीच नहीं है। पर बाद की पीढि़यों के भी अधिकांश स्वयंसेवक आयु अथवा अन्य बाधाओं के कारण दैनिक शाखा तंत्र का अंग नहीं है। पर वे जहां भी हैं संघ विचारधारा के प्रति पूरी तरह निष्ठावान हैं। इनमें से अनेक स्वयंसेवकों ने किसी न किसी क्षेत्र में लम्बा अनुभव अर्जित किया है। अपने-अपने विषय में विशेषज्ञता अर्जित की है। उनकी विशेषज्ञता का लाभ राष्ट्र निर्माण के यज्ञ में हो सके इसके लिए उपयुक्त कार्य पद्धति की खोज संघ के भीतर चल रही है। संघ की संगठन प्रक्रिया अखबारी प्रचार के बजाए व्यक्तिगत सम्पर्क पर आधारित रही है। पहले प्रचारक स्वयं को पीछे रखकर शाखा पद्धति के माध्यम से गटनायक व गण प्रमुख से आगे विभाग प्रमुख, भाग प्रमुख, नगर कार्यवाह, प्रांत कार्यवाह तक का तंत्र खड़ा करता था जो सम्पर्क कार्य में जुटा रहता था। पर आज इन सब का पूरा भार प्रचारक वर्ग पर आ पड़ा है। उसकी सीमाएं हैं। प्रचारक की दृष्टि उन्हीं लोगों पर जा सकती है जो उनके सम्पर्क में आते हैं। अत: विशाल एवं क्षमतावान स्वयंसेवक वर्ग उसके सम्पर्क में आ पाता, संघ अपनी इस विशाल पूंजी को बटोरने के प्रयास में जुटा हुआ है। इसके लिए वह सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का भी सहारा ले रहा है।

पर्याप्त नहीं भावुक श्रद्धा
संघ अनुभव कर रहा है कि केवल भावुक श्रद्धा पर्याप्त नहीं है। राष्ट्र निर्माण के प्रत्येक क्षेत्र के लिए विशेषज्ञों की टीम खड़ी करना आवश्यक है। इस प्रकार के प्रकोष्ठों के माध्यम से शाखा तंत्र से अलग अनुभवी स्वयंसेवकों को एकत्र लाना संभव होगा। मीडिया इसमें सहायक हो सकता है। इसके लिए मीडिया को अपनी नकारात्मक भूमिका और वामपंथियों एवं नेहरूवादियों की मार्क्सवादी शब्दावली को छोड़कर भारतीय परंपरा में अवगाहन कर परंपरा प्रदत्त शब्दावली को अपनाना होगा और विज्ञान तथा टैकनालॉजी के प्रकाश में परंपरागत ज्ञान की युगानुकूल व्याख्या करनी होगी।

सरसंघचालक श्री मोहन राव भागवत के विजयादशमी संबोधन में यह प्रयास बहुत स्पष्ट था, किंतु इने-गिने संघ विरोधियों की पहल पर मीडिया ने उस भाषण में प्रस्तुत तात्विक बिन्दुओं पर चर्चा करने के बजाए अपनी पूरी शक्ति इस बात पर लगायी कि डीडी न्यूज ने उस भाषण का सीधा प्रसारण क्यों किया? क्या मीडिया सचमुच नहीं समझता कि विचारों के प्रसारण को प्रतिबंधित करना लोकतंत्र की भावना के सर्वथा विरुद्ध है। इस मंगलवार को मध्य प्रदेश भवन में श्री सुरेश सोनी और डॉ. कृष्ण गोपाल की उपस्थिति में भारतीय मजदूर संघ, किसान संघ व स्वदेशी जागरण मंच के नेताओं का चार केन्द्रीय मंत्रियों (राधा मोहन सिंह, पीयूष गोयल, नरेन्द्र सिंह तोमर व प्रकाश जावड़ेकर) के साथ राष्ट्रीय नीतियों के बारे में विचार-विमर्श को एक रचनात्मक प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए।

साभार:पाञ्चजन्य  

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित