सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

देशी गाय की नस्ल को एवं इसके वैज्ञानिक प्रभाव को बच्चों के माध्यम से परिवारों तक पहुंचाना एक पुनित एव आवश्यक कार्य - वासुदेव देवनानी, शिक्षा मंत्री


देशी गाय की नस्ल को एवं इसके वैज्ञानिक प्रभाव को बच्चों के माध्यम से परिवारों तक पहुंचाना एक पुनित एव आवश्यक कार्य -  वासुदेव देवनानी, शिक्षा मंत्री



जोधपुर 25 फरवरी .  चन्द्रमा सूर्य से रोशनी लेकर चमकता है एवं ऐसे में हमें चन्द्रमा के साथ-साथ सूर्य की उपासना भी आवश्यक है। सूर्य नमस्कार से हम शारिरीक, मानसिक एवं आध्यात्मिक शक्ति अर्जित करते है ठीक वैसे ही गाय की रीड की हड्डी पर सूर्य की रोशनी के  प्रभाव से जो दुग्ध मे पीलापन आता है वह स्वर्ण उत्पन होने का द्योतक है। ऐसे में देशी गाय की नस्ल को एवं इसके वैज्ञानिक प्रभाव को बच्चों के माध्यम से परिवारों तक पहुंचाना एक पुनित एव आवश्यक कार्य है। जिसे गो विज्ञान परीक्षा के माध्यम से पूर्ण किया जा रहा है। यह विचार राज्य के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने शनिवार गो विज्ञान परीक्षा राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहे। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा राजकीय विद्यालयों की प्रार्थना सभा में योग, सूर्यनमस्कार व प्रणायाम को शामिल करने से हमारी नई पीढी को एक ऊर्जा मिली है। शिक्षा में आई क्यू के साथ ई क्यू, भावपूर्ण शिक्षा व एस क्यू, आध्यात्मिक शिक्षा को विद्यार्थियों को देने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जोधपुर प्रान्त संघचालक ललित शर्मा ने अपने उद्बोधन में स्वदेशी गाय के दूध की ताकत के साथ वैज्ञानिक आधारों को बताते हुए ए 1 व ए 2 मिल्क की जानकारी दी। वैज्ञानिक उदाहरण देते हुए उन्होंने अमेरिकन एंव जर्सी गायों को गाय मानने से इन्कार करते हुए उसके दूध को ताकत की तुलना में बिमारियों का प्रदाता बताया तथा कहा कि जर्सी गाय का दूध मधुमेह का कारण भी है। उन्होंने गाय के आर्थिक महत्व को समझकर उसकी सेवा एवं परिवार का एक अंग मानने के लिए भी आह्वान किया। 

कार्यक्रम में रामस्नेही संत हरिराम शास्त्री ने अपने उद्बोधन में उपस्थित बालकों, अभिभावकों व शिक्षकों के बीच आपसी समन्वय एवं संस्कार स्थापित करने की आवश्यकता जताई साथ उन्होंने यह भी कहा कि गाय पूजन एवं देशी गाय उत्पाद का सेवन हमें संस्कृति के साथ पर्यावरण के नजदीक ले जाता है। 

कार्यक्रम में परीक्षा प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए आयोजन समिति के प्रान्त सहसंयोजक विरेन्द्रसिंह शेखावत ने जानकारी दी कि इस परीक्षा का शुभारम्भ 2011 में चितौड़ प्रान्त से हुआ। 2012 से यह राज्य स्तर पर आयोजित की जा रही है। वर्तमान सत्र 2016-17 में परीक्षा के प्रथम चरण का आयोजन 1619 केन्द्रांे पर 21 सितम्बर 2016 को किया गया। परीक्षा के द्वितीय चरण 27 नवम्बर 2016 को आयोजित हुआ। प्रतियोगिता परीक्षा में कुल 2,15,839 परिक्षार्थियांे ने भाग लिया। इन विद्यार्थियों में से राज्य स्तर पर कुल चयनित 96 विजेता प्रतिभागियों का सम्मान चैंक राशि, प्रमाण पत्र एवं मोमेंटों से किया गया। 

 परीक्षा में राज्य स्तर पर बाल वर्ग में ज्ञानदीप आदर्श विद्या मंदिर, मथानिया के ओमप्रकाश चैधरी    प्रथम, श्रीमति शारदादेवी गहाणी आदर्श विद्या मंदिर, नोखा की पूनम राठौड़ द्वितीय, न्यू बालाजी पब्लिक माध्यमिक विद्यालय, झंवर की मैना पटेल तृतीय व न्यू बालाजी पब्लिक माध्यमिक विद्यालय झंवर की दीपिका सोलंकी व आदर्श विद्या मंदिर बालिका लालसागर की शुभम गोदारा ने प्रोहत्सान पुरस्कार प्राप्त किया।

किशोर वर्ग मंे आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय, श्रीडूंगरगढ के लीलापत सारस्वत प्रथम, आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय, देचू के राधेश्याम द्वितीय, श्री गौरव आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ा कोटेचा खुशबू परिहार तृतीय, श्री गौरव आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ा कोटेचा अर्चना परिहार, आदर्श विद्या मन्दिर माध्यमिक विद्यालय, श्रीडूंगरगढ के आनन्द शर्मा, श्रीमती शारदादेवी गहाणी आदर्श विद्या मंदिर, नोखा यशान्षी शर्मा, आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय, पचपदरा अभिषेक प्रजापत ने प्रोहत्सान पुरस्कार प्राप्त किया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रान्त गो सेवा प्रमुख श्याम सुन्दर राठी, कार्यक्रम के अध्यक्ष, समाजसेवी एवं युवा उद्यमि ज्ञानेश्वर भाटी, तथा कार्यक्रम संयोजक श्याम पालीवाल ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

अतिथियों का परिचय ओमप्रकाश गौड ने दिया स्वागत उद्बोधन दौलतराम सारण ने किया। कार्यक्रम में शहर विधायक कैलाश भंसाली, शिक्षा उपनिदेशक नूतन बाला कपिला, जिला शिक्षा अधिकारी प्रभुलाल पंवार, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी ओमसिंह राजपुरोहित, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य हेमन्त घोष, स्वदेशी जागरण मंच प्रदेश संयोजक धर्मेन्द्र दुबे, भाजपा जिलाध्यक्ष महानगर देवेन्द्र जोशी ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का समापन वन्दे मातरम् से हुआ।



राष्ट्रीय विचारों की प्रखर अभिव्यक्ति एवं प्रसार का सशक्त माध्यम पाथेय कण - महेन्द्र दवे




राष्ट्रीय विचारों की प्रखर अभिव्यक्ति एवं प्रसार का सशक्त माध्यम पाथेय कण - महेन्द्र दवे
पाथेय कण पाठक सम्मेलन एवं डाक मित्र सम्मान समारोह संपन्न

  

सम्मानित डाक मित्र

डाक मित्र का सम्मान करते हुए

डाक मित्र का सम्मान करते हुए


25 फरवरी 17 जोधपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त बौद्धिक प्रमुख महेन्द्र दवे ने कहा कि हमारे देश का मूल धर्म, धर्म आधारित जीवन जीना है, और यही हमारी संस्कृति की प्रमुख विशेषता रही है। अपनी संस्कृति में सबके सुख की कामना की रही है। श्रेष्ठ जीवन मूल्यों के आधार पर जीवन जीकर समाज और राष्ट्र के सामने अपना आदर्श रखते हैं। 


वे न्यू पॉवर हाउस रोड स्थित जोधपुर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन सभागार में संघ के प्रचार विभाग की ओर से पाथेय कण पाठक सम्मेलन एवं डाक मित्र सम्मान समारोह में शनिवार शाम पांच बजे सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हम सब भारत माता के पुत्र हैं। माता भूमि पृथ्वियो अहम्पुत्र की धारणा के आधार पर चलने वाले लोग अपने इस स्वभाव के कारण से ही हम अपने देश से प्रेम करते हैं और इसका गौरव भी रखते हैं।  परन्तु आज देश में इसके विरुद्ध वातावरण बना हुआ है। हमारे देश में ही रहकर देश के टुकडे करना एवं भारत माता की जय नही बोलने की सोच पनपना गलत है। दुर्भाग्य से धर्म निरपेक्षता के नाम पर अपने ही देश के अपने लोग भी ऐसे तत्वों का समर्थन करते हैं, इस स्थिति में राष्ट्रीय सोच रखने वाले समुदाय को आगे बढऩे की आवश्यकता है। 



उन्होंने कहा कि अपने देश की परम्पराओं में यह कार्य श्रेष्ठ साहित्य के माध्यम से होता रहा है। हमारे समाज में परम्परा से अपने घरों में श्रेष्ठ ग्रंथ, सद् साहित्य रखने एवं पढऩे का स्वभाव रहा है। आज के समय में राष्ट्रीय सोच एवं सांस्कृतिक गौरव बढ़ाने का वैचारिक कार्य पाथेय कण के माध्यम से प्रभावी हो रहा है। आवश्यकता है इस प्रकार के साहित्य का और अधिक प्रचार - प्रसार हो। इस कार्य में हमारे डाक मित्रों का भी सराहनीय सहयोग रहता है। उन्हीं के कारण यह जन-जन तक सुगमता से पहुंचता है।

पाथेय कण की गौरव यात्रा

राष्ट्रीय विचार धारा के प्रचार-प्रसार एवं संरक्षण-संवर्धन के लिए पाथेय कण पत्रिका राजस्थान में 1985 से 500 प्रतियों से प्रकाशन से शुरू हुआ। 1986 में इसका पंजीकरण आर.एन.आई. से पाथेय कण के नाम से हुआ। 1988 में इसका डाक पंजीकरण भी हो गया, तब से लेकर नियमित प्रकाशित एवं प्रसारित हो रहा है। 1992 तक मासिक तथा बाद में पाक्षिक प्रकाशन शुरू हुआ।  वर्ष में दो विशेषांक  के साथ पाथेय कण समाज में प्रतिष्ठापित है। प्रदेश में प्रकाशित होने वाली पत्र-पत्रिकाओं में सर्वाधिक प्रसारित होने का गौरव भी पाथेय कण को है। समय-समय पर अपने इतिहास के गौरव, संस्कृति की विशेषताएं एवं आधुनिक भारत के विकास की कल्पनाओं को समाहित करते हुए यह पत्रिका समाज की प्रशंसा एवं स्नेह प्राप्त करते हुए बड़ा पाठक वर्ग जोडने में सफल रही है। इसके प्रकाशित विशेषांकों में 1857 का क्रांति कथा, शहीदे आजम भगत सिंह, ग्राम पुनर्रचना, भक्तिमति मीरा, धरती धोरां री, भारतीय विज्ञान और मारवाड़ विशेषांक प्रमुख रहे है।


कार्यक्रम में डाक मित्रों का मंच की ओर से भगवा दुपट्टा पहनाकर भारत माता चित्र के स्मृति चिह्न के साथ मारवाड़ विशेषांक की प्रति देकर सम्मानित किया गया।


इस अवसर पर मंच पर संघ के महानगर सह संघचालक प्रकाश जीरावला, महानगर कार्यवाह रिछपाल सिंह, विभाग प्रचार प्रमुख जोधपुर दीपक कच्छवाह उपस्थित रहे। संचालन डॉ. अभिनव पुरोहित ने किया।


राष्ट्रीय विचारों के प्रसार में पाथेय कण की महत्वपूर्ण भूमिका


फलोदी  26 फरवरी 17.   पाथेय कण सम्मेलन कार्यक्रम में फलोदी शहर के सभी पोस्टमेन का सम्मान किया गया। इस अवसर पर धनराज सोनी ने बताया कि राष्ट्रीय विचारों के प्रसार में पाथेय कण की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस विचार प्रवाह को जन जन तक पहुंचाने में डाक कर्मियों की महत्ती भूमिका है। इनके अथक परिश्रम के बल पर ही समाज में जन जन तक राष्ट्रीय विचार पहुंच पाते है। आज जिनका सम्मान किया गया उनमे श्री आशाराम, पृथ्वीराज , पुनाराम, सुनील विश्नोई और भंवरलाल थे। इस अवसर पर पाठकों ने भी अपने विचार रखे।

पाठकों का कहना था कि जब पोस्टमेन पत्रिका लाता है तो परिवार की महिलाएं पाथेय कण के बारे में कहती है कि आपके संघ की किताब आ गई। उनका सुझाव था कि इसे हमारी किताब बनाने के लिए परिवार उपयोगी सामग्री भी छापी जाये। जैसे खाना बनाना, स्वास्थ्य, वास्तु, ज्योतिष आदि। कुटुंब प्रबोधन की दृष्टी से लेख या स्तम्भ प्रारम्भ करने का सुझाव भी पाठकों द्वारा दिया गया।

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2017

देवभूमि भारत विश्व का मार्गदर्शन करने में सक्षमः इंद्रेश कुमार




देवभूमि भारत विश्व का मार्गदर्शन करने में सक्षमः इंद्रेश कुमार
अंग्रेजी नववर्ष पर मीडिया के बड़े हिस्से में दीवानगीः अद्वैता काला
भारतीय नववर्ष पूरी तरह कालगणना पर आधारितः नरेंद्र तनेजा
नोएडा 16.2.2017. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इन्द्रेश कुमार ने  भारतीय नव वर्ष को त्योहार के रूप में मनाने पर बल दिया। प्रेरणा जनसंचार एवं शोध संस्थान (नोएडा-उत्तर प्रदेश) की पत्रिका केशव संवाद के चुनाव: लोकतंत्र का पर्व विषयक विशेषांक के लोर्कापण अवसर पर उन्होंने भारतीय नववर्ष की समग्र परिकल्पना पर प्रकाश डाला और कहा कि भारतीय नववर्ष वस्तुतः कालगणना पर आधारित है और पूरे भारत में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। कहीं विक्रमी संवत तो कहीं युगाब्द के रूप में इसकी प्रतिष्ठा है। उन्होंने कहा कि भारतीय नववर्ष वस्तुतः भारतीय संस्कृति और परंपराओं की राष्ट्रीय अभिव्यक्ति है। यह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की आधारभूमि है। भारत देवभूमि है और वह संपूर्ण विश्व का मार्गदर्शन करने में सक्षम है। इसकी स्वीकार्यता जनमानस में है और इसमें जितनी जनहिस्सेदारी बढ़ेगी, उतना ही भारतीय समाज एकजुट होगा और उसको मजबूती मिलेगी। 

जानी-मानी पटकथा लेखिका सुश्री अद्वैता काला ने भारतीय नववर्ष के विस्तार में मीडिया की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर दुःख व्यक्त किया कि मीडिया का बड़ा हिस्सा विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक  मीडिया और अंग्रेजी मीडिया भारतीय नववर्ष की घोर उपेक्षा करते हैं। एक जनवरी को जो अंग्रेजी नववर्ष मनाया जाता है उसको लेकर मीडिया के इस बड़े हिस्से में प्रचारात्मक दीवानगी दिखती है। अगर यही दीवानगी भारतीय नववर्ष को लेकर हो तो भारतीय समाज में इसके प्रसार को बढ़ाया जा सकता है, इसको लोकप्रिय बनाया जा सकता है। उन्होंने भारतीय नववर्ष को जनता का त्योहार बनाने का आह्वान किया। कहा कि बच्चों और नव युवकों में विशेष रूप से इसके प्रति क्रेज पैदा किया जाना चाहिए। 

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलपति नरेन्द्र कुमार तनेजा ने भारतीय नव वर्ष की वैज्ञानिक व्याख्या करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से भारतीय कालगणना पर आधारित है और इसकी वैज्ञानिकता को चुनौती नहीं दी जा सकती है। उन्होंने भी इसमें जनहिस्सेदारी बढ़ाने पर बल दिया और कहा कि इसका जितना प्रचार-प्रसार होगा, उतना ही भारतीय संस्कृति और परंपराओं को मजबूती मिलेगी। हिन्दुस्थान समाचार के प्रधान संपादक राकेश मंजुल,  यूनियन बैंक, मेरठ के पूर्व महाप्रबंधक आनंद प्रकाश, संघ के सह विभाग संघचालक सुशील और नोएडा महानगर संघचालक मधुसूदन दादू आदि  के सान्निध्य में भारतीय नववर्ष पर विस्तार से मंथन हुआ।

शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

कोई भी काम और मनुष्य छोटा-बड़ा नहीं होता, सब समान होते हैं – डॉ. मोहन भागवत जी

कोई भी काम और मनुष्य छोटा-बड़ा नहीं होता, सब समान होते हैं – डॉ. मोहन भागवत जी

सेवाभारती के रजत जयंती वर्ष एवं संत रविदास जयंती के अवसर पर भोपाल में आयोजित श्रम साधक संगम में शामिल हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी
भोपाल (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संत रविदास महाराज ने हमें अपने काम और व्यवहार से संदेश दिया था कि कोई भी काम और मनुष्य छोटा-बड़ा नहीं होता, सब समान होते हैं. हमें अपने श्रम को हल्का नहीं मानना चाहिए. समाज को उसकी आवश्यकता है, इसलिए हम वह श्रम कर रहे हैं. श्रम में जिसका मान होता है, वही देश विकास करता है. इसलिए हमें श्रम और श्रमिकों का सम्मान करना चाहिए. राजा की सवारी के लिए सब रास्ता छोड़ते हैं, परंतु सवारी के सामने श्रमिक आ जाए तो राजा भी उसके लिए रास्ता छोड़ देते हैं. यह हमारी परंपरा है. भोपाल के लाल परेड मैदान पर उपस्थित हजारों श्रम साधकों के बीच यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने व्यक्त किए. संत रविदास जयंती और अपने रजत जयंती वर्ष के अवसर पर सेवाभारती की ओर से श्रम साधक संगम का आयोजन किया गया था, जिसमें भोपाल की 160 सेवा बस्तियों के सभी प्रकार के श्रम साधक उपस्थित थे.

सरसंघचालक जी ने कहा कि यह आयोजन तीन प्रसंगों का संगम है. एक, सेवाभारती का रजत जयंती वर्ष. दो, संत रविदास महाराज की जयंती और तीन, श्रम साधकों का संगम. यह त्रिवेणी है. सेवा का अंग्रेजी में अर्थ सर्विस बताया जाता है. सर्विस के साथ वेतन भी होता है. इसलिए अपने यहाँ इसे सेवा नहीं माना जाता है, जो व्यक्ति यह कहता है कि उसने बहुत सेवा की है अर्थात् सेवा का अहंकार जब प्रकट होता है, तब उसका मूल्य माटी हो जाता है. सेवाभारती के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सेवाभारती के कार्यकर्ता समाज को अपना मानते हैं, इसलिए सेवा कार्य करते हैं. वह मानते हैं कि समाज परिवार का कोई भी भाई पीछे नहीं रहना चाहिए.

परस्पर सहयोग से बड़ा होगा समाज
डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि समाज परस्पर सहयोग से बड़ा होता है. समाज के जो लोग ऊपर हैं, उन्हें थोड़ा नीचे झुककर कमजोर व्यक्ति की ओर हाथ बढ़ाना चाहिए और जो व्यक्ति नीचे हैं, उन्हें ऊपर की ओर उठना चाहिए. दोनों एक-दूसरे के साथ आएंगे, तब समाज सशक्त होता है. हिन्दू समाज में जो सामर्थ्यवान हैं, उनका कर्तव्य है कि वह कमजोर व्यक्तियों को सबल बनाने का प्रयास करें. किसी भी व्यक्ति का जीवन अकेले नहीं चलता है. प्रत्येक व्यक्ति का जीवन चल सके, इसके लिए सब अपना-अपना काम करते हैं. सबको साथ लेकर चलना ही भारत का स्वधर्म है.
पसीने के फूल से बड़ा होता है देश
श्रम साधकों के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज के सभी लोगों को श्रमिकों का सम्मान करना चाहिए. पसीने के फूल खिलने पर ही देश बड़ा होता है. इसलिए प्रामाणिकता से हमें अपना कार्य करना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब हम अपने काम के प्रति सम्मान रखेंगे, तो दूसरे भी हमारे काम को सम्मान से देखेंगे.
शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के क्षेत्र में सेवाभारती का बड़ा योगदान
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में सेवाभारती ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है. श्रम साधकों के प्रति समाज और सरकार के भी कुछ कर्तव्य हैं, हमें इन कर्तव्यों का पालन करना चाहिए. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी श्रमिकों को कानून बनाकर घर उपलब्ध कराने की घोषणा की. परीक्षा का अवसर नजदीक आने पर उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि तनावरहित होकर मेहनत और ईमानदारी से पढ़ाई करें. इस अवसर पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी आशीष चौहान, वृहद कैपिटल प्रा.लि. पुणे के प्रबंध निदेशक प्रसाद दाहपुते, स्वागत समिति के अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र कुमार शुक्ला और मध्यभारत सेवाभारती के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण गोदानी भी उपस्थित थे. इस अवसर पर संत रविदास महाराज पर केंद्रित लेखक रामनाथ नीखरा की पुस्तक और सेवा प्रेरणा के विशेषांक का भी विमोचन किया गया. सेवाभारती का परिचय एवं उसके कार्यों की जानकारी सेवाभारती के सचिव प्रदीप खाण्डेकर और कार्यक्रम का संचालन करण सिंह ने किया.

कला साधकों के साथ संवाद और शौर्य स्मारक का किया भ्रमण
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने मध्यप्रदेश प्रवास के चौथे दिन सुबह अनौपचारिक कार्यक्रम के तहत कला साधकों से संवाद किया. भोपाल में गुंदेचा बंधुओं के प्रयास से स्थापित ध्रपद संस्थान में प्रदेश के प्रख्यात कला साधक समूह के बीच सरसंघचालक जी ने कहा कि कला को समृद्ध करना, देश और समाज के लिए आवश्यक है. कला क्षेत्र के लिए उन्होंने राजाश्रय से अधिक समाजाश्रय की महत्ता को रेखांकित किया. सरसंघचालक डॉ. भागवत शाम 6 बजे शौर्य स्मारक भी पहुंचे. यहाँ उन्होंने परिसर का भ्रमण किया.
सेवा के लिए सम्मान :
1. सर्वश्रेष्ठ छात्रावास सम्मान – 2017: सरला-विनोद वनवासी छात्रावास, ग्वालियर
2. सेवावृत्ति पुरस्कार – 2017: पुरुषोत्तम मेघवाल जी
3. स्व. तात्या साहब पिंपलीकर सेवा सम्मान – 2017: सुधा पाचखेड़े जी
साभार :: vskbharat.com

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

आदर्श व उन्नत खेती के लिए भी पांच 5 नियमों स्वच्छता, स्वाध्याय, तप, सुधर्म और संतोष का पालन करें – डॉ. मोहन भागवत जी

आदर्श व उन्नत खेती के लिए भी पांच 5 नियमों स्वच्छता, स्वाध्याय, तप, सुधर्म और संतोष का पालन करें – डॉ. मोहन भागवत जी

बनखेड़ी के समीप स्थित भाऊसाहब भुस्कुटे लोक न्यास के रजत जयंती समारोह में शामिल हुए सरसंघचालक, समग्र ग्राम विकास के प्रकल्पों का किया अवलोकन
जल, जंगल और जमीन का विकास ही भारत का विकास – सरसंघचालक



भोपाल (विसंकें). देश को वैभव सम्पन्न बनाना है. इसलिए सबसे पहले यह समझ लेना चाहिए कि देश क्या है. जन, जल, जंगल, जमीन और जानवर इन सबको मिलाकर एक देश बनता है. देश का विकास होता है, तब इन सबका विकास होता है. लेकिन, देश की प्रकृति और स्वभाव के अनुरूप विकास हो, तब ही वह वास्तविक विकास कहलाता है. चूंकि भारत का स्वभाव जल और जंगल से जुड़ा है. हमारा मूल गाँव में ही है. इसलिए जल, जंगल और गाँव का विकास ही भारत का विकास है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने भाऊसाहब भुस्कुटे लोक न्यास के रजत जयंती समारोह में संबोधित किया. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में अग्नि अखाड़ा की महामण्डलेश्वर साध्वी कनकेश्वरी देवी और न्यास के अध्यक्ष अतुल सेठी भी उपस्थित थे. समारोह के बाद उन्होंने ग्राम प्रमुखों के साथ कृषि विस्तार और समग्र विकास के संबंध में चर्चा की.

डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि जैसे हम आदर्श जीवन में यम-नियम का पालन करते हैं, उसी प्रकार आदर्श और उन्नत खेती के लिए पाँच नियमों का पालन प्रारंभ करना होगा. स्वच्छता, स्वाध्याय, तप, सुधर्म और संतोष. स्वच्छता के तहत अपने गाँव को साफ-सुथरा रखना. स्वाध्याय के अंतर्गत कृषि के संबंध में नवीनतम और भारतीय पद्धति का अध्ययन करना. तप की अवधारणा के अनुरूप अपनी जमीन को भगवान मानकर बिना किसी स्वार्थ के उसकी सेवा करते हुए कृषि करना. अपने सुधर्म का पालन करना और संतोष अर्थात् धैर्यपूर्वक जैविक खेती को अपनाना. अच्छे परिणाम के लिए धैर्य और संतोष जरूरी है. उन्होंने कहा कि हमें भेदभाव को पूरी तरह हटाकर मिल-जुल कर रहना होगा, तभी वास्तविक विकास आएगा.

भाऊसाह भुस्गुकरुवार को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी बनखेड़ी के समीप गोविंदनगर में स्थित भाऊसाहब भुस्कुटे लोक न्यास पहुंचे. यहाँ न्यास की ओर से आयोजित ग्राम विकास समिति सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज तथाकथित विकास के कारण जंगलों को नुकसान पहुंच रहा है, जल दूषित हो रहा है और हवा में प्रदूषण बढ़ गया है. इसके कारण से पर्यावरणवादियों और विकासवादियों में विवाद हो रहा है. एक कह रहा है कि पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए, तब दूसरा कह रहा है कि विकास चाहिए, विकास होगा तो थोड़ा-बहुत नुकसान पर्यावरण को पहुंचेगा. समाधान किसी के पास नहीं है. समाधान सिर्फ भारत के पास है, इसलिए दुनिया कह रही है कि भारत का विकास होना चाहिए. क्योंकि भारत के विकास की अवधारणा में किसी को नुकसान नहीं है. हमारी कृषि परंपरा में न जमीन दूषित होती है और न अन्न. उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद के उपयोग से जमीन खराब हो गई है और अन्न विषयुक्त हो गए हैं. पंजाब से मुम्बई जाने वाली एक ट्रेन का नाम ही कैंसर ट्रेन पड़ गया है. रासायनिक खेती ने जल, जमीन और जन सहित सबको नुकसान पहुंचाया है. अधिक पैदावार के लालच में अधिक रासायनिक खाद उपयोग करने से आज अनेक स्थानों पर जमीन बंजर हो गई है. सरसंघचालक जी ने कहा कि संघ के प्रयासों से आज देश में जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है. न्यास ने होशंगाबाद जिले में जैविक खेती की दिशा में महत्त्वपूर्ण कार्य किया है. भाऊसाहब भुस्कुटे किसान संघ का काम देखते थे और उन्होंने ही समग्र ग्राम विकास के कार्यक्रमों को गति दी.
हम जहाँ गए, वहाँ भारत बसा दिया.

उन्होंने कहा कि 1857 का स्वतंत्रता संग्राम केवल राजाओं का युद्ध नहीं था, बल्कि इस संग्राम में गाँव-नगर के आमजन भी अपने सामर्थ्य के अनुरूप योगदान दे रहे थे. यह बात अंग्रेजों को समझ आ गई थी. आंदोलन को खत्म करने के लिए अंग्रेजों ने समाज का नेतृत्व करने वाले प्रमुख लोगों को धन और रोजगार का लोभ दिया. अच्छे रोजगार का स्वप्न दिखाकर उन्हें यूरोप भेज दिया. अंग्रेजों ने उस समय जिन भारतीय लोगों को यूरोप भेजा था, आज उनकी सातवीं-आठवीं पीढ़ी वहाँ है. बताया कि वह एक बार वेनेजुएला गए तो उन्होंने वहाँ देखा कि यह लोग हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे. हिंदी और संस्कृत नहीं आती, लेकिन पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक सीखते रहे हैं और प्रति मंगलवार हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं. इसी तरह भारतीयों ने श्राद्ध कर्म के लिए कैरोनी नदी का नाम बदलकर करुणा नदी कर दिया है. मॉरीशस में गंगा सागर बना लिया है. यहीं 13वां ज्योर्तिलिंग मॉरिशसश्वेर महादेव की स्थापना भी कर ली है. इसका अर्थ है कि अंग्रेजों ने हमें देश से दूर करने का प्रयास किया, लेकिन हम जहाँ गए, वहीं अपना भारत बसा लिया.

भारतीय संस्कृति पर गौरव रखने वाला ही भारत का नागरिक
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि एवं महामण्डलेश्वर साध्वी कनकेश्वरी देवी ने कहा कि मात्र भारत में जन्म लेने से कोई भारत का नागरिक नहीं बन जाता. हालाँकि वह कानूनन देश का नागरिक है, लेकिन वैचारिक दृष्टि से वह केवल निवासी है. भारतीय नागरिक बनने के लिए भारत की संस्कृति परंपराओं, पुरुखों और धर्म के प्रति गौरव का भाव होना चाहिए. देश में अनेक नदियां बहती हैं, लेकिन गंगा का महत्त्व अद्वितीय है. राम मंदिर अनेक हैं, लेकिन अयोध्या में राममंदिर का महत्त्व अलग ही है. शिव के अनेक मंदिर हैं, लेकिन काशी में विश्वनाथ मंदिर की प्रतिष्ठा अधिक है. कृष्ण की महत्ता मथुरा में अधिक है. इसी प्रकार इस धरा पर अनेक पंथ होंगे, लेकिन सनातन हिन्दू धर्म का महत्त्व अद्वितीय है. सनातन हिन्दू धर्म को समझने के लिए उसके प्रति गौरव का भाव होना जरूरी है. साध्वी जी ने कहा कि दुनिया में जहाँ भी श्रेष्ठ विचारधाराएं हैं, वह सनातन धर्म की ही देन हैं. वे धर्म ही आपस में भाई-भाई हैं, जिनके भोजन समान हैं. क्योंकि भोजन समान होगा, तो विचार समान आएंगे और विचार समान होंगे तो कार्य समान होंगे.

कार्यक्रम का संचालन कर रहे चाणक्य बख्शी ने न्यास के प्रकल्पों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया.
सृजन ब्रांड की गोविंद अगरबत्ती का लोकार्पण

इससे पूर्व सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने सुबह 10 बजे बनखेड़ी के समीप गोविंदनगर में समग्र ग्राम विकास के प्रकल्पों का अवलोकन किया. उन्होंने ग्राम ज्ञानपीठ परिसर में सृजन ब्रांड के तहत निर्मित गोविंद अगरबत्ती का लोकार्पण किया. इस ब्रांड के अंतर्गत बांस, मिट्टी, पीतल की वस्तुएं, तेल, साबुन सहित अन्य उत्पादों का भी निर्माण एवं विक्रय किया जाएगा. इस कार्य में संलग्न कारीगरों का प्रोत्साहन किया. इसके साथ ही बैम्बू एवं पॉटरी मल्टी कलस्टर के नए भवन का भी उद्घाटन किया. न्यास की ओर से गोविंदनगर में आदर्श गौशाला का संचालन भी किया जाता है. न्यास द्वारा किए जा रहे ग्राम विकास के विभिन्न कार्यों पर प्रदर्शनी का भी उन्होंने अवलोकन किया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से भाऊसाहब भुस्कुटे लोक न्यास की ओर से होशंगाबाद जिले में समग्र ग्राम विकास के प्रकल्पों का संचालन किया जा रहा है.


‘भारत माता की जय’ हमारे हृदय की भाषा है – डॉ. मोहन भागवत जी

‘भारत माता की जय’ हमारे हृदय की भाषा है – डॉ. मोहन भागवत जी

दुनिया भारत को विश्वगुरु की भूमिका में देख रही है – डॉ. मोहन भागवत जी
भोपाल (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि जब हम हिन्दू समाज कहते हैं, तब उसका अर्थ होता है, संगठित हिन्दू. यदि हममें किसी भी प्रकार का भेद और झगड़ा है, तब हम अस्वस्थ समाज हैं. इसलिए स्वस्थ रहने के लिए हमें संगठित रहना होगा, सभी प्रकार के भेद छोड़ने होंगे, विविधताओं का सम्मान करना होगा. यही आदर्श और उपदेश हमारे पूर्वजों के थे. हिन्दू संगठित होगा, तब ही भारत विश्वगुरु बनेगा. सरसंघचालक जी 08 फरवरी को बैतूल में आयोजित हिन्दू सम्मलेन में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि मत-पंथ की भिन्नता को लेकर दुनिया में रक्त-पात किया जा रहा है. अर्थ के आधार पर भी संघर्ष है. इन संघर्षों का समाधान उनके पास नहीं है. समाधान के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है. दुनिया भारत को विश्वगुरु की भूमिका में देख रही है और भारत को विश्वगुरु बनाने का दायित्व हिन्दू समाज पर है. इसलिए हिन्दू समाज का संगठित रहना जरूरी है. इस देश में जाति-पंथ के आधार पर कोई भेद नहीं था. यहाँ सबमें एक ही तत्व को देखा गया. सब एक ही राम के अंश हैं.

सरसंघचालक जी ने कहा कि हमें एक होकर अपने समाज की सेवा करनी होगी. समाज के जो बंधु कमजोर हैं, पिछड़ गए हैं, हमारा दायित्व है कि उन्हें सबल और समर्थ बनाएं. हमें एक बार फिर से देने वाला समाज खड़ा करना है. बहुत वर्षों पहले अंग्रेजों ने हमें टूटा हुआ आईना पकड़ा दिया था. इस टूटे हुए आईने में हमें समाज में भेद दिखाई देते हैं. हमें अंग्रेजों के इस आईने को फैंकना होगा. उन्होंने बैतूल में हिन्दू सम्मेलन के आयोजन का उद्देश्य बताया कि यह प्राचीन भारत का केंद्र बिंदु है. संगठित हिन्दू समाज का संदेश यहाँ से सब जगह प्रभावी ढंग से जाएगा. समाज को सबल बनाना और भारत को विश्वगुरु बनाना, इस हिन्दू सम्मेलन का उद्देश्य है.



इस अवसर पर प्रख्यात रामकथा वाचक पंडित श्यामस्वरूप मनावत जी ने कहा कि दुनिया में केवल भारत ही है, जिसने विश्व कल्याण का उद्घोष किया. हमारे ऋषि-मुनियों ने यह नहीं कहा कि केवल भारत का कल्याण हो, बल्कि वे बार-बार दोहराते हैं कि विश्व का कल्याण हो और प्राणियों में सद्भाव हो. दुनिया में एकमात्र भारतीय संस्कृति है, जिसमें कहा गया है कि धर्म की जय हो और अधर्म का नाश हो. यहाँ यह नहीं कहा गया कि केवल हिन्दू धर्म की जय हो और बाकि पंथों का नाश हो. भारत भूमि ही है, जहाँ सब पंथों का सम्मान किया जाता है.

उत्तराखण्ड से आए आध्यात्मिक गुरु संत सतपाल महाराज ने महिला सशक्तिकरण के लिए समस्त समाज से आह्वान किया. उन्होंने कहा कि संत समाज का यह दायित्व है कि आध्यात्मिक शक्ति के जागरण से पुन: इस देश में मातृशक्ति की प्रतिष्ठा को स्थापित करे. समाज को भी महिला सशक्तिकरण के लिए आगे आना होगा. इस अवसर पर मंच पर संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी, आयोजन समिति के अध्यक्ष गेंदूलाल वारस्कर, सचिव बुधपाल सिंह ठाकुर और वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. शैला मुले भी उपस्थित थीं. कार्यक्रम का संचालन मोहन नागर ने किया. इस अवसर पर गोंडी भाषा में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र ‘लोकांचल’ के विशेषांक और बैतूल पर केन्द्रित स्मारिका ‘सतपुड़ा समग्र’ का विमोचन भी किया गया.

हिन्दुस्थान में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है
हिन्दू सम्मेलन में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि जापान में रहने वाला जापानी, अमेरिका का निवासी अमेरिकन और जर्मनी का नागरिक जर्मन कहलाता है, इसी प्रकार हिन्दुस्थान में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है. लोगों के पंथ-मत और पूजा पद्धति अलग-अलग हो सकती है, लेकिन हिन्दुस्थान में रहने के कारण सबकी राष्ट्रीयता एक ही है – हिन्दू. इसलिए भारत के मुसलमानों की राष्ट्रीयता भी हिन्दू है. भारत माता के प्रति आस्था रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है. मत-पंथ अलग होने के बाद भी हम एक हैं, इसलिए हमको मिलकर रहना चाहिए.
सरसंघचालक ने ये संकल्प कराए – 1. समाज के कमजोर बंधुओं को समर्थ बनाने का प्रयास करूंगा. 2. अपने घर-परिसर में पर्यावरण की रक्षा करूंगा. 3. अपने घर में अपने जीवन के आचरण, महापुरुषों के प्रेरक प्रसंग अपने परिवार को सुनाकर भारत माता की आरती करूंगा. 4. अपने देश का नाम दुनिया में ऊंचा करने के लिए जीवन में सभी कार्य परिश्रम के साथ निष्ठा और प्रामाणिकता से करूंगा. 5. भेदभाव नहीं करूंगा. समाज को संगठित रखने का प्रयास करूंगा.

भारत माता की जय है हृदय की भाषा
हिन्दू समाज में भाषा, जाति और पूजा पद्धति की भिन्नता है, लेकिन इससे हमारी एकता को कोई खतरा नहीं है. यह विविधता तो हमारी पहचान है. हमारी हृदय की भाषा तो एक है. ‘भारत माता की जय’ हृदय की भाषा है. उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से पश्चिम में सभी जगह भारत माता की जय, इन्हीं शब्दों में बोला जाता है.
बैतूल जेल, जहाँ गुरुजी को कैद में रखा गया
अपने प्रवास के दौरान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी 11 बजे बैतूल जेल भी पहुंचे. इस दौरान सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी जी और क्षेत्र संघचालक अशोक सोहनी जी भी उनके साथ थे. 68 साल पहले वर्ष 1948 में प्रतिबंध के दौरान संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ को बैतूल जेल में ही रखा गया था. गुरुजी को यहाँ तीन माह बंद करके रखा गया था. उन्हें जिस बैरक में रखा गया था, आज उस बैरक में उनका चित्र लगा है. डॉ. भागवत ने गुरूजी के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की.

 साभार: vskbharat.com





राष्ट्र विरोधी तत्व हमारी उदात्त हिन्दु सांस्कृतिक विचारधारा के व्यापक होते स्वरूप से परेशान- चन्द्रशेखर जी, प्रान्त प्रचारक

राष्ट्र विरोधी तत्व हमारी उदात्त हिन्दु सांस्कृतिक विचारधारा के व्यापक होते स्वरूप से परेशान- चन्द्रशेखर जी,  प्रान्त प्रचारक

आधुनिक राज्यवाद की अवधारणा में युद्धों की परिणीति से उत्पन्न राष्ट्रवाद मंगलकारी नही होता   - प्रोफेसर पूनम बावा

"राष्ट्रीय अस्मिता-चिन्तन व चुनौतियां"  विषय पर संगोष्ठी संपन्न 
माननीय चंद्रशेखर जी प्रान्त प्रचारक एवं श्री हेमन्त घोष, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष , अ भा वि प , राजस्थान


जोधपुर 8.02.2017.   राष्ट्रीय  शैक्षिक महासंघ जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय शैक्षिक संघ के तत्वावधान में राष्ट्रीय अस्मिता-चिंतन व चुनौतियाँ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें प्रथम सत्र् में प्रोफेसर एन.के. चतुर्वेदी, अध्यक्ष प्रोफेसर चन्द्रशेखर मुख्य वक्ता तथा पुनम बावा मुख्य अतिथि थे। मुख्यवक्ता प्रो. चन्द्रशेखर ने राष्ट्र के आध्यात्मिक स्वरूप की व्याख्या की जिसमें राष्ट्र को एक विराट पुरूष के रूप में बताया व कहा कि राष्ट्र का स्वरूप हमेशा कल्याणकारी होता है। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर एन.के. चतुर्वेदी ने बताया कि जब सभी यूरोपीय देशों मे उनकी अपनी स्वयं की भाषा होती है फिर अपने देश में दूसरें लोगो से संवाद के लिये अंग्रेजी माध्यम क्यों है, उन्होनें बताया कि यूरोपीय देश अपनी शिल्पकला को बढ़ा-चढ़ा कर बताते है।  जबकि हमारे पास वैदिक सभ्यता के समय की शिल्पकला होते हुए भी उसको सही ढंग से प्रस्तुत नही किया जा रहा है। तथा उसे अर्वाचीन सिद्ध करने का कृत्रिम प्रयास किया जा रहा है। इसी संदर्भ मे उन्होने दिनांक 02.02.2017 को प्रोफेसर निवेदिता मैनन द्वारा दिये गये राष्ट्र विरोधी भाषण के प्रत्युतर में उनके द्वारा किये गये संवाद को स्पष्ट किया। 


इसी सत्र् में मुख्य अतिथि प्रोफेसर पूनम बावा ने इस संगोष्ठी को संकीर्ण मानसिकता वाले लोगो द्वारा फैलाये गये दुर्विचारों की मुक्ति के लिये किया जा रहा हवन बताया। उन्होने बताया कि आधुनिक राज्यवाद की अवधारणा में युद्धों की परिणीति से उत्पन्न राष्ट्रवाद मंगलकारी नही होता है। जबकि भारतीय संस्कृति में राष्ट्र का निर्माण सांस्कृतिक सद्भावना का स्वरूप है। इसी सत्र् मे प्रोफेसर जयश्री वाजपेयी ने भारत के प्राचीन गौरव का स्मरण कराते हुए भारतीय संस्कृति को सबसे प्राचीनतम व सर्वोच्च बताया। प्रोफेसर कैलाश डागा ने कहा कि किसी भी भाषा में धर्म का पर्यायवाची शब्द नही है। हिन्दू धर्म कहने का तात्पर्य हिन्दू जीवन पद्धति व आचार पद्धति है। प्रोफेसर चन्दनबाला जी ने कहा कि हमें राष्ट्र विखंडनवादी विचारों का प्रतिकार करना ही होगा। अतिसहिष्णुता भी राष्ट्र के लिये हितकारक नही है। 

द्वितीय सत्र् श्री हेमन्त घोष पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एबीवीपी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हूए राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ जोधपुर के प्रान्त प्रचारक माननीय चन्द्रशेखर जी  ने कहा की राष्ट्र विरोधी तत्व हमारी उदात हिन्दु सांस्कृतिक विचारधारा के व्यापक होते स्वरूप से परेशान है। अतः वे राष्ट्र विरोधी विचारो को समय समय पर तूल देते रहते है।। आज आवश्यकता इस बात की है कि भारत का जन-सामान्य राष्ट्रीय विचारों के प्रचार-प्रसार व संपोषण व संरक्षण के लिये आगे आये । देश की सीमा माता के वस्त्र के समान होती है उनकी रक्षा प्रत्येक मातृभक्त पुत्र का परमदायित्व है। हमारी सेना के जवान भारत माता की रक्षा के लिये कृतसंकल्प व सर्वात्मना समर्पित हमारे बन्धु हैं जिन्होनें राष्ट्र सेवा के पथ का स्वयंवरण किया है। आज भी हमारे लाखों लाखों युवा सर्वथा समृद्ध होकर भी भारत माता की सेवा हेतु सेना मे जाने को तत्पर हैं उसके लिए दिन-रात कठिन तैयारीयां कर रहे है। 

डाॅ. हरिसिंह राजपुरोहित ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है की राष्ट्रवाद के प्रहरियों को मुखर होना होगा तथा तर्क तथा तथ्यों के आधार पर आधारहीन बातों का दृढ़तापूर्वक खण्डन करना होगा। श्रीमान् अभिषेक जैन ने कहा भारतभूमि का कोई भी लाल सेना में केवल राष्ट्र सेवा के लिये ही जाता है। अध्यक्षीय उद्बोधन मे श्री हेमन्त घोष ने गौरव गहलोत का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि ऐसे राष्ट्रभक्त युवाओं को स्वयं आगे आना होगा एवम् उनका अभिवादन किया कि उन्होनें समय पर देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही हेतु पहल की।

प्रो. प्रभावती चौधरी ने संगोष्ठी मे उपस्थित सभी प्रतिभागियों व वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा संगोष्ठी का संचालन प्रोफेसर कैलाश डागा ने किया, संगोष्ठी मे राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ ,जोधपुर के  विभाग प्रचारक धर्मेन्द्र सिंह जी, प्रो. अजय गुप्ता, प्रो. अनिल गुप्ता, प्रो. अखिल रंजन गर्ग, प्रो.मनीष कुमार, प्रो. अरविंद परिहार, प्रो. कैलाश कौशल, डाॅ. विजयश्री, डाॅ. रश्मि मीणा, डाॅ. भानाराम गाडी, डाॅ. हिराराम, डाॅ. रामदयाल, डाॅ. रिछपाल सिंह, डाॅ. ओ.पी. देवासी, डाॅ. जी.एन. पुरोहित, डाॅ. वी.डी. दवे, डाॅ. कुलदीप गहलोत व बड़ी संख्या में प्रवक्तागण व विद्यार्थी उपस्थित थे। संगोष्ठी का समन्वयन संगठन के उपाध्यक्ष प्रो. विजय मेहता व सचिव प्रो. विकल गुप्ता ने किया। 

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित