गुरुवार, 25 मई 2017

सफल होने के साथ-साथ व्यक्ति का जीवन उद्देश्यपूर्ण भी होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

सफल होने के साथ-साथ व्यक्ति का जीवन उद्देश्यपूर्ण भी होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

 
नई दिल्ली (इंविसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि जीवन में सफल होने के साथ-साथ जीवन को उद्देश्यपूर्ण भी होना चाहिए. तभी मनुष्य को प्राप्त विद्या सार्थक होती है. ऐसे उत्कृष्ट कार्य को विद्या भारती पूरी मेहनत के साथ कर रही है. सरसंघचालक मोहन भागवत जी 23 मई को विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान से संबंधित समर्थ शिक्षा समिति द्वारा संचालित राव मेहर चंद सरस्वती विद्या मंदिर, भलस्वा के नए भवन के शिलान्यास कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे.

सरसंघचालक जी ने कहा कि विद्याभारती ने अपने हाथ में एक कल्याणकारी, मंगलकारी कार्य लिया है. इसके माध्यम से विद्या भारती एक ऐसी युवा पीढ़ी का निर्माण करना चाहती है जो हिन्दुत्व निष्ठ और राष्ट्र प्रेम से ओत-प्रोत हो, अपनी वर्तमानकालीन समस्याओं से सामना करने में सफल होने के लिए सक्षम हो और अपने देश के अभावग्रस्त लोग, साधनहीन लोगों को शोषण और अन्याय से मुक्ति दिलाकर उनका उत्थान करने के लिए सेवारत हों.

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जीवनयापन करना नहीं है. शिक्षा प्राप्त करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि जिस समाज व जिस देश से हम हैं, उसे वापिस देने के लिए हम सक्षम बनें. शिक्षा को सार्थक बनाने के लिए इन भावों को जगाना जरूरी है. विद्या मनुष्य को शिक्षित बनाती है. वह बच्चों के मन में स्वाभिमान को बनाए रखने की क्षमता प्रदान करती है. विद्या केवल विद्यालय में जाकर नहीं सीखते हैं. इसमें अभिवावकों और परिवारों का भी बहुत बड़ा त्याग, तपस्या, और बलिदान सम्मिलित होता है.

विद्या भारती इन सब कार्यों को अच्छे ढंग से करने का प्रयास कर रहा है. विद्या भारती वास्तव में एक परिवार है, जिसमें अभिभावक, आचार्य और विद्यार्थी सभी शामिल हैं. जिस प्रकार की शिक्षा की हमें आवश्यकता है, वह विद्यार्थियों को मिल सके, इस हेतु विद्या भारती के लाखों कार्यकर्ता दिन-रात एक करके समर्पित होकर लगे हुए हैं.

विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान से संबंधित समर्थ शिक्षा समिति द्वारा संचालित “राव मेहर चंद सरस्वती विद्या मंदिर, भलस्वा के नए भवन के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा, विद्या भारती के अखिल भारतीय पदाधिकारी डॉ. ललित बिहारी गोस्वामी जी, दिल्ली प्रांत के संघचालक कुलभूषण आहूजा जी, विद्यालय प्रबंधन के सदस्य एवं शिक्षक उपस्थित थे.

गुरुवार, 18 मई 2017

सार्थक और सकारात्मक पत्रकार थे देव ऋषि नारद - विष्णु प्रसाद चतुर्वेदी

सार्थक और सकारात्मक पत्रकार थे देव ऋषि नारद - विष्णु प्रसाद चतुर्वेदी
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पाली 16 मई 2017.  रोटरी भवन  में विश्व संवाद केंद्र पाली द्वारा देवर्षि नारद जयंती (पत्रकार दिवस) एवं पत्रकार सम्मान समारोह मनाया गया! कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विष्णुप्रसाद चतुर्वेदी ने बताया कि देव ऋषि नारद विश्व के प्रथम पत्रकार थे, जिन्होंने सार्थक एवं सकारात्मक पत्रकारिता की लेकिन वर्तमान सिनेमा एवं TV में  नारद मुनि की भूमिका को हास्यास्पद दिखाया जाता है जिससे आमजन में उनके प्रति नकारात्मक छवि बनी हुई है! उन्होंने बताया कि नारद जी को श्राप मिला था कि वह कहीं पर भी टिककर नहीं बैठेंगे उन्होंने बताया कि वर्तमान में भी देव ऋषि नारद की तरह सार्थक पत्रकारिता की आवश्यकता है! 
चतुर्वेदी ने बताया कि पत्रकारिता समाज में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में कार्यरत है, यह वह स्तंभ है जो सही को सही एवं गलत को गलत कहने की हिम्मत रखते हैं, एवं समाज में सामजस्य बनाए रखते हैं! उन्होंने बताया कि वर्तमान पत्रकारों को देश की भावी चुनौतियों को देखते हुए सफल पत्रकारिता की बजाय सार्थक पत्रकारिता करनी चाहिए, जो न केवल समाज के नैतिक चरित्र को बनाए रखें अपितु इन विकट परिस्थितियों में भी हमारी स्वर्णिम एवम  इतिहासिक संस्कृति को जीवित रखें!
इससे पहले कार्यक्रम के अध्यक्ष, विश्व संवाद केंद्र के के प्रांत प्रमुख, प्रफुल्ल जी मेहता ने बताया कि विश्व संवाद केंद्र समाचार संस्था नहीं वरन विचार संस्था है, जोकि सूचनाओं का संकलन व वितरण हेतु कार्यरत है!विश्व संवाद केंद्र राष्ट्रीय विषय व राष्ट्रीय संस्कृति धर्म व समाज संबंधित जानकारियों का संकलन करता है!उन्होंने बताया कि नारद मुनि तीनों लोकों में विचरण करने वाले मानव, दानव व देवताओं के बीच समान रूप से लोकप्रिय और विश्वसनीय व विद्वान, भक्ति सूत्र के रचियता, निष्पक्ष एवम निर्भीक  थे! 

पत्रकार सुभाष जी त्रिवेदी ने भी  अपने विचार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की सराहना की एवं बताया कि इस तरह के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए!

Displaying IMG-20170516-WA0014.jpgकार्यक्रम में पधारे हुए सभी पत्रकारों को उपस्थित अतिथियों द्वारा  दुपट्टा, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया!कार्यक्रम के अंत में   विभाग प्रचार प्रमुख तेज सिंह जी ने आगंतुक पत्रकारों एवं प्रबुद्धजनों का आभार व्यक्त किया!

इस कार्यक्रम में ओम चतुर्वेदी, राजीव दवे,अविनाश केवलिया,हस्त पाल सिंह, राजीव अग्रवाल,धर्मेंद्र वैष्णव,सुरेश हेमनानी,शेखर राठौड़,दिनेश, मुकेश राजा, भारतभूषण जोशी, सुभाष त्रिवेदी एवम तोष चंद्र चौहान आदि पत्रकारों को  सम्मानित किया गया! कार्यक्रम में मुकेश पोखरण, सुरेंद्र चारण, निखिल व्यास,हंसराज शर्मा,मनीष शर्मा, आनंद सिंह, ईश्वर सिंह, अभिषेक  आदि का सहयोग रहा! इस अवसर पर शहर के कई गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे!


बुधवार, 17 मई 2017

संघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष का शुभारम्भ * संघ को जानना समझना है तो संघ का प्रत्यक्ष कार्य करना पड़ेगा - दत्तात्रेय होंसबोले

 संघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष का शुभारम्भ 
 
नागपुर (विसंकें). रेशिमबाग स्थित डॉ. हेडगवार स्मृति भवन परिसर के महर्षि व्यास सभागृह में तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग का सोमवार प्रातः शुभारंभ हुआ. उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले जी ने कहा कि संघ से जुड़ने के पश्चात् सभी स्वयंसेवक स्वप्न देखते है कि संघ शिक्षा, तृतीय वर्ष तक पूर्ण की जाए. परन्तु ये सौभाग्य सभी को प्राप्त नहीं होता है. लाखों स्वयंसेवकों में से चुने हुए हजार स्वयंसेवक ही इस साधना के पुजारी बन पाते हैं. यह वर्ग इसलिए भी खास है क्योंकि नागपुर की इसी भूमि से आद्य सरसंघचालक डॉ. हेडगेवार जी ने संघ कार्य को अवतरित किया और पूज्य गुरु जी की तपस्या यहाँ के कण-कण में व्याप्त है. संघ को यदि जानना है तो संघ के विषय में किताबें पढ़ना, किताबें लिखना, अनुसंधान करना पर्याप्त नहीं है. संघ को जानना-समझना है तो संघ का प्रत्यक्ष कार्य करना पड़ेगा. जिस तरह तैराकी सीखना है तो नदी में कूदना ही पड़ेगा और धारा के विपरीत चलना पड़ेगा, वैसे ही संघ को बाहर रह कर नहीं समझा जा सकता. स्नेह, आत्मीयता, समर्पण, नि:स्वार्थ भाव से बने स्वयंसेवक आज राष्ट्रीय जीवन के केंद्र बिंदु बन गए है.

सह सरकार्यवाह जी ने शिक्षार्थियों को स्वयंसेवकत्व का अर्थ बताते हुए कहा कि समाज की किसी भी आवश्यकता या संकट के समाधान हेतु, वह सज्जन शक्ति जो संगठित होकर, परिचित-अपरिचित को सद्भावपूर्वक, आत्मीयता के विशाल बाहू फैला कर स्वागत करे – स्वयंसेवक की पहचान है. संघ का वर्ग कोई इवेंट मैनेजमेंट नहीं है, इस वर्ग के क्षण-क्षण को, कण-कण को अपने अंतर्मन में समाहित कर स्वयंसेवकत्व की अनुभति करें. ऐसे प्रशिक्षणों से हम शारीरिक के साथ साथ वैचारिक रूप से भी मजबूत होते है. ये राष्ट्र क्या है ? हिन्दू राष्ट्र क्या है ? संघ का कार्य, क्यों, कैसे ? ऐसे अन्यान्य मूल प्रश्नों का निरसन प्रशिक्षण वर्ग के माध्यम से होता है. शरीर तो स्वस्थ है, पर अपने मन को भी स्वस्थ, चुस्त और संवेदनशील बनाने की साधना यह प्रशिक्षण वर्ग है. शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के शुद्धिकरण का माध्यम है यह वर्ग. सम्पूर्ण देश का अनुभव अर्थात अगले 25 दिनों तक आप इस परिसर में भारत भ्रमण करेंगे.

अलग भाषा, अलग पहनावा, अलग खानपान, पर फिर भी एक हो कर, राष्ट्र के लिए समर्पित हो कर, जब आप यह प्रशिक्षण पूर्ण करेंगे तो आप स्वत: ही “अखिल भारतीय व्यक्तित्व “ बन जाते हैं. संघ में कई लोग, संघ के रहस्य को जानने के लिए आते हैं. प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा जी ने शाखा देखने की इच्छा व्यक्त की, जिससे स्वयंसेवक का निर्माण होता है.

परिवर्तनशील भारत में आज भी जीवन मूल्यों को आखिर कैसे संरक्षित रखा जा सकता है, इस पर कई देश आश्चर्यचकित हैं, कुछ शोध कर रहे हैं. सम्पूर्ण विश्व की नजर संघ पर है. ये एक राष्ट्रीय अभियान है और इसी कड़ी में आप इस वर्ग का हिस्सा बन कर अलग-अलग स्तर पर अपने व्यक्तित्व का निर्माण करेंगे. तृतीय वर्ष के प्रशिक्षण वर्ग का यह कालखंड आप शिक्षार्थियों के जीवन का स्वर्णिम कालखंड बने और यह साधना कर के आप राष्ट्र हित में उपयोगी सिद्ध हों और अपने जीवन में आप सफलता संतुष्टि और सार्थकता प्राप्त करते रहें.

सर्वाधिकारी पृथ्वीराज सिंह जी ने कहा कि हम राष्ट्र आराधना करने एकत्रित आए हैं. प्रशिक्षण से निरंतरता बनी रहती है. यह स्थली तपस्या की है, साधना की है और इसलिए यहाँ आकर हमारा दायित्व और जिम्मेदारी ओर भी बढ़ जाती है.
पालक अधिकारी के रूप में अनिल जी ओक का मार्गदर्शन हुआ. उन्होंने कहा कि मनुष्य रूप में अपना जन्म हुआ, इस श्रेष्ठ कार्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा तथा प्रेरणा हेतु महापुरुषों का सान्निध्य, ये सभी हम पर भगवान का अनुग्रह है, ईश्वरीय अनुकम्पा है. इसीलिए संघ कार्य ईश्वरीय कार्य है, ऐसा सुनने को मिलता है. आज सम्पूर्ण विश्व में महाभारत जैसी स्थिति व्याप्त है. सभी विनाश करने की बात करते हैं, कोई भी बसाने की बात नहीं करता है, इसलिए आज शील के साथ-साथ शक्ति की भी आवश्यकता है. विनाश की इस घड़ी में सभी देश भारत की ओर आशा से देख रहे हैं.

अगले 25 दिन के प्रशिक्षण में क्या करना और क्या नहीं करना है, मैं क्या हूँ और मुझे क्या बनना है ? इन दोनों के बीच के अंतर का कम होना ही विकास होगा और यही प्रशिक्षण का उद्देश्य है. ज्ञान, कर्म और श्रद्धा का समन्वय बनाइए, किसी एक के बिना बाकि दोनों अधूरे रहते हैं. शारीरिक, बौद्धिक, खेल, चर्चा, चिंतन के माध्यम से प्रशिक्षण वर्ग को पूरा करें. 25 दिन की इस संघ गंगा में अधिकतम से अधिकतम अपना घड़ा भरें.



उद्घाटन कार्यक्रम का प्रास्ताविक एवं अधिकारियोंका का परिचय मा. भागय्या जी (अखिल भारतीय सह सरकार्यवाह ) ने किया ! श्री स्वांत रंजनजी (अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख), श्री मुकुंदजी ( अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख ) श्री सुनीलजी कुलकर्णी (अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख ), श्री. जगदीश प्रसाद जी (अखिल भारतीय सह शारीरिक प्रमुख) श्री मंगेश जी भेंडे ( अखिल भारतीय व्यवस्था प्रमुख) श्री पराग जी अभ्यंकर (अखिल भारतीय सेवा प्रमुख) श्री सुब्रमण्यम जी ( अखिल भारतीय कुटुंब प्रबोधन प्रमुख) प्रमुख रूपसे उपस्थित थे

इस वर्ग के सर्वाधिकारी मा. पृथ्वी राज सिंह जी, पालक अधिकारी मा. अनिल जी ओक, वर्ग कार्यवाह  मा. रमेश काचम जी , मुख्य शिक्षक गंगा विष्णु जी ,सह मुख्यशिक्षक श्री अखिलेश जी , बौद्धिक प्रमुख रविन्द्र किरकोले जी ,सह बौद्धिक प्रमुख सुनील देव जी , सेवा प्रमुख  नवल किशोर जी , व्यवस्था प्रमुख दिलीप हाडगे जी , है ! 8 जून २०१७ को वर्ग समाप्त होगा.

पत्रकारों को सार्थक पत्रकारिता करनी चाहिए ना कि अर्थ आधारित -महेन्द्र जी सिंघल



बीकानेर 14 मई 2017. विश्व संवाद केन्द्र बीकानेर (इकाई) द्वारा आदि पत्रकार नारद मुनि की जयन्ति को पत्रकार सम्मान समारोह के रूप में मनाया गया।
        रानीबाजार स्थित मेढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार भवन में आज प्रातः 11 बजे मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारम्भ करते हुए मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रिय प्रचार प्रमुख श्रीमान महेन्द्र जी सिंघल ने कहा कि पत्रकारों को सार्थक पत्रकारिता करनी चाहिए ना कि अर्थ आधारित। लोकतंत्र के चैथे स्तम्भ पत्रकारिता को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। नारद जी की तरह ही पत्रकार को अध्ययनशील होकर समाचार पत्रों का केवल मात्र सूचना प्रसारण करने वाला न रहकर उन्हें सूचनाओं के आधार या घटना का उचित विश्लेषण भी करना चाहिए और सार्थक समाज की रचना कर लोकतंत्र की रक्षा करनी चाहिए।
सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि, विनायक पत्रिका के प्रधान सम्पादक और वरिष्ठ पत्रकार श्रीमान सन्तोष जी जैन ने भी पत्रकारिता के रचनात्मक पहलुओं पर प्रकाश डाला और पत्रकार को निर्भिक होकर एक आम समाज के हित में पत्रकारिता करने का आहवान किया।
 


इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि राजस्थान पत्रिका के वरिष्ठ सम्पादक श्री हेम जी शर्मा ने पत्रकारिता पर आज के परिक्षेप में पढ़ रहे राजनैतिक एवं औद्योगिक दुष्प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि एक संजीदा पत्रकार सदैव सामाजिक हित को सरौपरी रखता है। और राष्ट्र हित में ही लिखता है। तभी स्वच्छ समाज की रचना सम्भव है।

सम्मान समारोह में अन्य विशिष्ट अतिथि इलेक्ट्राॅनिक मिडिया के अध्यक्ष के.के. सिंह जी, प्रेस क्लब के अध्यक्ष सुरेश बोड़ा जी, और दैनिक नव ज्योति की पत्रकार श्रीमती उषा जोशी जी ने भी अपने विचार रखे। 

इस सम्मान समारोह में उपस्थित अतिथियों द्वारा दैनिक युगपक्ष से शिव भादाणी, लोकमत से उमाशंकर आचार्य, नैशनल राजस्थान (खाजूवाला) से विष्णु दत विश्नोई, ई-टीवी (नोखा) से पवन जी सोनी, विनायक से विवेक जी आहुजा, राष्ट्रदूत से हनुमान जी चारण एवं पी.आर.ओ. श्रीमान हरीशंकर आचार्य को शाॅल ओढाकर, सम्मान प्रतीक एवं साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया। इसी प्रकार विभाग संचालक माननीय नरोतम जी व्यास, क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख श्रीमान महेन्द्र जी सिंघल एवं विश्व संवाद केन्द्र बीकानेर (इकाई) एवं कार्यभार के संयोजक एस.एल. राठी ने पधारे हुए अतिथियों को शाॅल, प्रतीक चिन्ह एवं साहित्य भेंट कर आभार व्यक्त किया। इससे पूर्व आगन्तुक अतिथियों का महा नगर प्रचार प्रमुख शिव जी ने परिचय कराया एवं विभिन्न कार्यकर्ताओं द्वारा माल्या अर्पण कर स्वागत किया।

कार्यक्रम के अन्तिम सौपान कार्यक्रम अध्यक्ष, विभाग संचालक माननीय नरोत्तम जी व्यास ने सभी का आभार व्यक्त किया और धन्यवाद दिया।

’’पत्रकार सम्मान समारोह’’ द्वारा मनाई नारद जयन्ति




श्रीगंगानगर 14 मई, 2017. विश्व संवाद केन्द्र, श्रीगंगानगर इकाई द्वारा महर्षि नारद जयन्ती के अवसर पर पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित किया गया।

मुख्य वक्ता श्री रवि चामड़िया जी (संस्थापक संपादक, सांध्य बाॅर्डर टाईम्स), मुख्य अतिथि श्री रेवती रमण शर्मा (प्रख्यात पत्रकार, सीमा सन्देश) एवं विशिष्ट अतिथि श्री शिव कुमार स्वामी (संस्थापक संपादक, लोक सम्मत) ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में उपस्थित कैलाश जी भसीन सदस्य क्षेत्रीय कार्यकारिणी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने उपरोक्त विषय पर प्रकाश डाला एवं पत्रकारिता की महत्ता को बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार बंधु एवं कार्यकत्र्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

श्री शिव स्वामी जी ने पत्रकारिता के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त की। वही रेवती रमण जी ने गीता के श्लोक के माध्यम से प्रभावी संवाद की महत्ता की चर्चा की एवं श्री रवी चामड़िया जी ने नारद जी की वैदिक भूमिका के माध्यम से पत्रकारिता को समझाया।

 अतिथियों का सम्मान विभाग प्रचार प्रमुख लाजपत जी ने किया एवं डाॅ आर पी शर्मा जी (जिला प्रचार प्रमुख) ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन श्री सचिन भाटिया जी (सह-जिला प्रचार प्रमुख) ने किया।

शनिवार, 13 मई 2017

देवऋषि नारद जयंती का आयोजन पत्रकार सम्मान समारोह सम्पन्न

देवऋषि नारद जयंती का आयोजन 
पत्रकार सम्मान समारोह सम्पन्न



जैसलमेर. 11 मई 2017.  विश्व संवाद केंद्र के तत्वाधान में गुरुवार को जनसेवा समिति में देवऋषि नारद जयंती के आयोजन किया गया।समारोह में स्वर्णनगरी के वरिष्ठ पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया। जिसमे भास्कर के ब्यूरो चीफ विमल शर्मा व फोटो जर्नलिस्ट आरके व्यास को प्रशंसा पत्र व शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इनके साथ ही जैसलमेर के प्रेम जगानी(वरिष्ठ पत्रकार,पूर्व ब्यूरो चीफ राज पत्रिका), हरदेवसिंह भाटी (PTI संवाददाता), आनन्द पुराहित (प्रधान संपादक दैनिक राजस्थान की पाती) व श्याम सुंदर डावाणी (प्रधान संपादक दैनिक मरु महिमा ) को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बाड़मेर विभाग के संघचालक डॉ. दाऊलाल शर्मा, जनसंपर्क सहायक निदेशक श्रवण कुमार चौधरी मुख्य अतिथि, वरिष्ठ इतिहासकार नंदकिशोर शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार दीनदयाल ओझा व सेवानिवृत्त संयुक्त शिक्षा निदेशक बालकृष्ण जोशी विशिष्ट अतिथि तथा संघ के जिला प्रचारक इन्द्रसिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे .

संघ के जिला प्रचार प्रमुख मांगीलाल बम्भणिया ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखी। उन्होंने बताया कि देवऋषि नारद ने अपना सम्पूर्ण जीवन समाज के कल्याण व देवताओ के लिए समर्पित कर दिया। जिस प्रकार समाज मे देवऋषि नारद की गलत छवि को समाज में प्रचारित किया जा रहा है वो गलत है। विश्व संवाद केंद्र द्वारा जैसलमेर में पहली बार देवऋषि नारद जयंती मनाने का यह उद्देश्य है कि लोग नारद मुनि द्वारा किये गए लोक कल्याण को जान सके। बम्भणिया ने कहा कि 1826 में नारद जयंती के अवसर पर ही पहले अखबार उदंत मार्तंड में संपादक ने अपने संपादकीय को नारद मुनि को ही समर्पित करते हुए आद्य पत्रकार बताकर लोक कल्याण की परंपरा को बताया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जिला प्रचारक इन्द्रसिंह ने अपने संबोधन में देवऋषि नारद के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि नारद धर्म के प्रचार व लोक कल्याण के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहे। इन्द्रसिंह ने कहा कि आज के समय मे पत्रकारों का निस्पक्ष रहने के साथ ही सही बात को हमेशा आगे रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि नारद मुनि को एक जगह नही टिकने का श्राप मिला था।लेकिन उन्होंने अपनी दूरगामी सोच के कारण ही उस श्राप को वरदान समझकर लोक कल्याण में लग गए। उन्होंने कहा कि विश्व संवाद केंद्र समाचार संस्था नही बल्कि विचार संस्था है। सूचना का संकलन वितरण करने के लिए विश्व संवाद केंद्र स्थापित किया गया है। विश्व संवाद केंद्र राष्ट्रीय विषय, राष्ट्रीयता संबंधी विचार एवं दृष्टिकोण की सूचना एवं जानकारी के संकलन एवं वितरण के लिए है। इसके साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने भी उपस्थित गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए महर्षि नारद के व्यक्ति व उनके कार्यो पर प्रकाश डाला।

सोमवार, 17 अप्रैल 2017

मेरे पिता मेरे सपनों को पूरा करना चाहते थे .... फूलों से सुसज्जित ताबूत भेंट ....केरल में वामपंथी आतंक के पीड़ितों ने सुनाया अपना दर्द

हमारे कार्य का आधार घृणा, हिंसा नहीं, आत्मीयता है – डॉ. कृष्ण गोपाल जी

केरल में वामपंथी आतंक के पीड़ितों ने सुनाया अपना दर्द
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मेरे पिता मेरे सपनों को पूरा करना चाहते थे ....................................  
विस्मया, ये नाम अधिकांश ने सुना होगा. उसकी कविता सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी. वह पुलिस अधिकारी बनकर अपने गांव की सेवा करना चाहती है, लेकिन वामपंथी गुंडों ने उसके पिता की हत्या कर दी. वह कहती है कि ---- मेरे पिता मेरे सपनों को पूरा करना चाहते थे, वह रात मेरे सारे सपनों को तबाह कर गई. उनकी (विस्मया के पिता संतोष कुमार, 52 वर्ष) बस एक ही गलती थी कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी का समर्थन (पार्टी गांव में भाजपा के समर्थन से पंचायत का चुनाव लड़ा था) किया था. अब मुझे अपने भविष्य में सिर्फ अंधकार दिख रहा है. उन्होंने सिर्फ मेरे पिता को नहीं मारा बल्कि मेरे सपनों और भविष्य़ की भी हत्य़ा कर दी. मुझे सिर्फ अंधकार दिख रहा है, पूर्ण अंधकार. मुझे अब तक यह जवाब नहीं मिला कि उन्होंने मेरे पिता को क्यों मारा?”


http://vskbharat.com/wp-content/uploads/2017/04/showimg-1.jpg अब किसके सहारे जियेंगी ..................... आंखों के सामने पुत्र की हत्या देख नारायणी अम्मा टूट गईं. अब वे इन वामपंथी गुंडों से दोनों हाथ जोड़कर एक ही प्रार्थना कर रही हैं कि जिस चाकू से उन्होंने उनके पति और बेटे को मारा, उसी से उन्हें भी मार दें. उन्हें किस लिये छोड़ दिया, अब किसके सहारे जियेंगी?”


चलते फिरते शहीद ..................
विभाग प्रचार प्रमुख प्रजिल चलते फिरते शहीद हैं, उनके शरीर पर करीब ढाई दर्जन घावों के निशान हैं. खुशकिस्मत हैं कि वामपंथी गुंडों के हमले में उनका जीवन बच गया.

दोनों पैर चले गए ..................
 श्रीधरन अपने घर के पास चीखने चिल्लाने की आवाजें सुनीं तो लोगों को बचाने के लिये दौड़े, लेकिन वामपंथी गुंडों ने उन पर बम फैंक दिया, जिसमें उनके दोनों पैर चले गए.

फूलों से सुसज्जित ताबूत भेंट ................
 केरल के एक कॉलेज की पूर्व प्राचार्या डॉ. टीएन सरसू, उनकी सेवानिवृत्ति पर कॉलेज की एसएफआई इकाई ने अनोखा गिफ्ट दिया, उन्हें सेवानिवृत्ति पर फूलों से सुसज्जित ताबूत भेंट किया गया.

ये केवल कुछ घटनाएं मात्र हैं, कहानी केवल यहीं तक सीमित नहीं है. शिवदा, रजनी पीड़ितों की सूची काफी लंबी है. पिछले साठ साल के दौरान 400 से अधिक कार्यकर्ता वामपंथी गुंडों के हिंसक हमलों का शिकार हुए हैं. केरल में वामपंथी सरकार के गठन के पश्चात हिंसक घटनाओं में अचानक बढ़ोतरी हुई है. नई सरकार के छोटे से कार्यकाल में अकेले कन्नूर जिले में 436 हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं. इसी कालखंड में 19 कार्यकर्ता मारे गए हैं, जिसमें 11 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के, 4 कांग्रेस के थे. 4 सीपीआई एम के कार्यकर्ता, लेकिन ये वामपंथी विचार को छोड़कर कहीं न कहीं संघ की शाखा, भारतीय मजदूर संघ या भाजपा की ओर आकर्षित थे. इस कारण उनकी भी हत्या कर दी गई.

लेकिन ये समस्त घटनाएं, परिवारों की पीड़ी कभी नेशनल मीडिया की सुर्खियां नहीं बनीं, न ही मानवाधिकार आयोग का कभी इन पीड़ितों की ओर ध्यान गया. न ही तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग का ध्यान इनकी ओर गया.

भगवान की धरती कहलाने वाला केरल आज मार्क्सवादी हिंसा का प्रतीक बन चुका है. केरल मार्क्सवादी हिंसा के चेहरे को सबके समक्ष लाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अभियान शुरू किया है. जिसके तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, इन कार्यक्रमों में केरल में मार्क्सवादी हिंसा के शिकार पीड़ित कुछ स्वयंसेवक परिवारों के सदस्य भी भाग ले रहे हैं. इसी निमित्त शनिवार 15 अप्रैल को दिल्ली में तीन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, पहला कार्यक्रम जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में था, इसके पश्चात मीडिया जगत में कार्यरत पत्रकार बंधुओं के साथ गोष्ठी का आयोजन किया गया, तीसरे कार्यक्रम में दिल्ली के बुद्धिजीवी वर्ग (प्राध्यापक, अध्यापक, अधिवक्ता, व अन्य) के लिये नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट एवं योगक्षेम न्यास ने संगोष्ठी का आयोजन किया. इन कार्यक्रमों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी, प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार जी (मूलतः केरल निवासी) तथा पीड़ित परिवारों के सदस्य उपस्थित रहे. कार्यक्रम में शहीद स्वयंसेवकों की जानकारी पर आधारित पुस्तक आहुति का लोकार्पण किया गया.

हमारे कार्य का आधार घृणा, हिंसा नहीं, आत्मीयता है – डॉ. कृष्ण गोपाल जी
बम बनाना केरल में कुटीर उद्योग  

http://vskbharat.com/wp-content/uploads/2017/04/IMG_20170415_153220.jpgनई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी ने कहा कि बम बनाना केरल में कुटीर उद्योग जैसा बन गया है. पुलिस राज्य सरकार के आदेश पर सबूत इकट्ठे करती और बाद में उन्हें नष्ट कर  देती है. इसलिए वहां मार्क्सवादी विचारधारा से अलग विचार रखने वालों के लिए बहुत संकट पैदा हो गया है. केरल हमारे देश का ही एक अंग है, इसलिए यह सारे देश की समस्या है. वैचारिक भिन्नता से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस देश का महान दर्शन, महान परम्पराओं को नष्ट नहीं करने दिया जा सकता. राज्य के मुख्यमंत्री, जिनके पास गृह विभाग भी है, उन्हें अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का पालन करना चाहिए. एक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में नहीं बल्कि एक मुख्यमंत्री की तरह व्यवहार करना चाहिए. उन्हें राज्य में कानून, न्याय और शांति सुनिश्चित करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि आरएसएस का विरोध किसी कम्युनिस्ट से नहीं है, अपितु भारत के लिए प्रतिकूल कम्युनिज्म विचारधारा से है. क्योंकि हमारे देश में शास्त्रार्थ कर अपने विचारों से दूसरों को जीतने की परम्परा रही है. किसी की हत्या से आतंक उत्पन्न कर अपने विचार मनवाना यह भारतीय परंपरा कभी नहीं रही. वामपंथ की विचारधारा भारतीय परंपरा, आध्यात्मिक दर्शन के अनुकूल नहीं है. ये देश प्रेम, करुणा, दया का देश है. संघ के कार्यकर्ताओं का स्वभाव सभी जानते हैं. आपातकाल में हजारों कार्यकर्ताओं ने यातनाएं झेलीं. लेकिन सरसंघचालक बाला साहब देवरस जैसे ही जेल से बाहर आए, उन्होंने एक ही बात कही, जिन्होंने हमको बंद किया, कष्ट दिया वे अपने ही थे, अपने मन के अन्दर से यह बैर-भाव निकाल दो, सबसे मित्रता रखो. हमारा दर्शन ही ऐसा है कि हम लम्बे समय तक अपने ऊपर हुए अत्याचारों को याद ही नहीं रखना चाहते. संघ का कार्य का आधार घृणा, हिंसा नहीं, आत्मीयता है, हममें विचारधारा की भिन्नता से घृणा उत्पन्न नहीं होती. यही कारण है कि विरोध के बावजूद देश में सबसे अधिक शाखाएं (लगभग 4500) केरल में हैं.

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प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक जे. नंदकुमार जी ने कहा कि केरल में मार्क्सवादी आतंक से पीड़ित परिवारों को यहां लाना तथा उनके परिवार के सदस्यों की निर्मम हत्याओं का प्रस्तुतिकरण उनके तथा हमारे लिए अत्यंत कष्टकारी है, लेकिन केरल के बाहर वहां का सच तथाकथित बुद्धिजीवियों के सामने लाने का अन्य मार्ग न होने के कारण इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने पड़ रहे हैं. एक अखलाक की हत्या मीडिया में कई दिनों तक चर्चा व बहस का विषय बनी रहती है, लेकिन केरल में सत्ताधारी वामपंथियों की वैचारिक असहिष्णुता के कारण हुई नृशंस हत्याओं पर मीडिया में चर्चा नहीं होती. उन्होंने केरल से आये पीड़ित परिवारों का परिचय संगोष्ठी में आये बुद्धिजीवियों से करवाते हुए उनके परिजनों की मार्क्सवादियों द्वारा की गयी हत्याओं का उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवारों की ओर से मानवाधिकार आयोग और अनुसूचित जाति आयोग में भी मामले को ले जाया गया है.

डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन वास्तव में हिंसा को रोकना चाहते हैं या सच को सबके समक्ष लाना चाहते हैं तो सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों से या पूर्व न्यायाधीशों से हिंसक घटनाओं की जांच करवाएं. पुलिस पर पार्टी का नियंत्रण है, पुलिस ट्रेड यूनियन में वामपंथी पदाधिकारी पुलिस विभाग में प्रमुख पदों पर विराजमान हैं. ऐसे में कैसे निष्पक्ष न्याय की उम्मीद की जा सकती है. उन्होंने बताया कि 1948 तक केरल में संघ की नाम मात्र की शाखाएं थीं, जनवरी 1948 में श्रीगुरूजी का प्रवास था. कार्यक्रम में 150-200 कार्यकर्ता उपस्थित थे, इस दौरान वामपंथी गुंडों ने हमला कर दिया था.

उल्लेखनीय है कि केरल में वामपंथी हिंसा के खिलाफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ ही अन्य सामाजिक संगठनों ने धरना प्रदर्शन का आयोजन किया था . देशभर में लगभग 800 स्थानों पर विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया. जिसमें साढ़े चार लाख बंधु भगिनियों की भागीदारी रही. (केरल, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, गोवा, मणिपुर शामिल नहीं)

 
निकुंज सूद

शनिवार, 15 अप्रैल 2017

विषम सामाजिक परिस्थितियों को रौंदते हुए हमारे राष्ट्र को सामाजिक समरसता के विचार डॉ अम्बेडकर ने दिए - नन्दलाल जी

 विषम सामाजिक परिस्थितियों को रौंदते हुए हमारे राष्ट्र को सामाजिक समरसता के विचार डॉ अम्बेडकर ने दिए - नन्दलाल जी 



पाली 14 अप्रेल २०१७ । शुक्रवार को लाखोटिया उद्यान स्थित माली समाज भवन में डाॅ सुरेन्द्रसिहजी की अध्यक्षता में डाॅ. भीमराव अम्बेडकर जयन्ती समारोह उत्साह व श्रृद्वा के साथ माल्यापर्ण कर मनाया गया। 

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए संयोजक मुकेश  पोखरणा ने बताया कि इस अवसर पर डाॅ अम्बेडकर के व्यक्तित्व और विचार पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। 

मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ के राजस्थान के क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य श्री नंदलालजी जोशी ने कहा कि डाॅ भीमराव अम्बेडकर एक ऐसे अदभूत व्यक्तित्व के धनी थे जिन्होने विषम सामाजिक परिस्थितियों को रौदते हुए हमारे राष्ट्र को सामाजिक समरसता के ऐसे विचार दिये जो आज भी हमारे देश  के संविधान को गौरवान्वित कर रहे है। 

नंदलालजी जोशी ने कहा कि भेदभाव की पीड़ा में भी अपने अन्दर की प्रतिभा को प्रखर कर जीवन की सार्थकता को सिद्व करने वाले ऐसे चिन्तक के चिन्तन को सही व सकारात्मक रूप से समझकर आत्मसात करना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। 

सामाजिक भेदभाव पर कटाक्ष करते हुए जोशी  ने कहा कि भारत विश्व  गुरू था। कालान्तर में हमारी पराजय का कारण खोजे तो हम पायेंगे कि ज्ञान व वैभव के मिथ्या अभिमान की गलती से ही हम हारे। हमारी भारतीय संस्कृति का दृश्टिकोण इतना व्यापक है कि हम सृष्टि के प्रत्येक जीव में परमात्मा का अंश  देखते है। हमारी संस्कृति समन्वय व न्याय की संस्कृति है। ऐसी संस्कृति पर चालाक लोगो द्वारा आघात होता है तो मन में पीड़ा होना स्वाभाविक है। हमारे महापुरूषो  विवेकानन्द स्वामी, डाॅ हेडगेवारजी, स्वामी शिवानन्द ने सामाजिक समरसता को जो पाठ हमे पढाया, हमे उन्हीं के अनुभवो का अनुकरण करना चाहिए। 
 
डाॅ सुरेन्द्रसिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डाॅ अम्बेडकर के व्यक्तित्व में  हिन्दुवादी आदर्श था। संविधान निर्माण की जो आधारशीला रखी गयी है वो आज भी विश्व  में अहिंसा, प्रेम व त्याग का संदेश  देती है। उन्होने समाज के पिछड़े व दलित व समाज की मुख्य धारा में छुटे हुये नागरिको के उत्थान के लिए संविधान के कई उपयोग कर बल देते, संविधान के बारे में विभिन्न जानकारियाॅ दी।

 कार्यक्रम के अंत में जिला संघ चालक नेमिचन्द अखावत ने धन्यवाद ज्ञापित किया और समरसता मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।   
 
                                                                  

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित