राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बीकानेर द्वारा आयोजित सक्रांति महोत्सव 22-01-2012

सोमवार, 13 फरवरी 2012

एक साथ बढ़े हजारों कदम


पथ
संचलन व तहसील सम्मेलन संपन्न


सोजत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सोजत तहसील का द्वि धारा पंथ संचलन व तहसील सम्मेलन संपन्न हुआ। जोधपुर प्रांत संघ चालक ललित कुमार शर्मा ने कहा कि संसार में दो प्रकार की शक्तियां काम कर रही हैं। धर्म का संरक्षण व स्थापना करने के लिए भगवान अवतार लेता है। कलयुग में संगठन में ही शक्ति है। शरीर तभी चल सकेगा जब ये सभी अंग मिलकर संगठित रूप से काम करेगा। इसी प्रकार हिन्दू समाज की सभी जातियां मिलकर काम करेंगी तो ही हमारा समाज धर्म व देश बच सकेगा।
मुख्य अतिथि संत विजयदास महाराज ने कहा कि संगठन की इस धारा में जुडऩे से ही धर्म और हमारी संस्कृति की रक्षा होगी। इससे पूर्व संघ सोजत तहसील सम्मेलन में केशव व माधव दो धाराओं में अलग-अलग स्थानों मेला का चौक व मालियों का बड़ाबास से संचलन प्रारंभ हुआ। इसके बाद दोनों धाराएं एक साथ छह की पंक्ति में महावीर सर्कल, काका चौराहा, चांदपोल गेट होते हुए मोतीचंद सेठिया आदर्श विद्या मंदिर पहुंचे। सम्मेलन में रायपुर, जैतारण, मारवाड़, रोहट, पाली व सोजत तहसील के 500 से अधिक स्वयं सेवकों ने संचलन व शारीरिक प्रदर्शन में भाग लिया। जनता ने पुष्प वर्षा कर तोरण व रंगोली के द्वारा जगह-जगह पर स्वागत किया।

एक साथ बढ़े हजारों कदम


सांचौर आरएसएस स्वयंसेवकों की ओर से रविवार को नगर के विभिन्न मोहल्लों व प्रमुख चौक से पथ संचलन किया गया। इसको लेकर नगर के प्रमुख चौराहे व मार्ग भगवे रंग से सजे धजे नजर आए।

पथ संचलन को लेकर नगर के मुख्य तीन बिंदुओं से स्वयंसेवक संचलन करते हुए दोपहर दो बजे विवेकानंद सर्किल पहुंचे। जहां से त्रिवेणी संगम के रूप में शमिल हुए स्वयंसेवक चार रास्ता व रानीवाड़ा रोड से न्यू बस स्टेशन रोड होते हुए सुभाष कॉलोनी स्थित आदर्श विद्या मंदिर विद्यालय पहुंचे। यहां धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लहरगिरी महाराज ने कहा कि धर्म के साथ-साथ प्रत्येक भारतीय को अपने अधिकारों की रक्षा व उद्देश्य के प्रति जागरूक रहना होगा। यही धर्म की वास्तविक रक्षा करना है।

उन्होंने युवाओं को तन-मन-धन से कार्य करने का आ ह्वान किया। इस दौरान ध्वजारोहण समेत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सम्मेलन से पूर्व उपखंड क्षेत्र के झाब, चितलवाना, सरनाऊ, सरवाना, हाड़ेचा व सांचौर के स्वयं सेवकों ने पथ संचलन किया। पथ संचलन में घोष दल आकर्षण का केंद्र रहा। हिंदू सम्मेलन का शुभारंभ तीर्थगिरी महाराज व अतिथियों ने भारत माता की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
कार्यक्रम में सांसद देवजी एम पटेल, महंत शीतलना
महाराज, देवाराम, भागीरथगिरी, दुर्गाराम चौधरी, दलतपसिंह, मुख्य वक्ता प्रांत सेवा प्रमुख रूद्र कुमार, संघ जिला प्रमुख मोहन परमार, युवा मोर्चा अध्यक्ष जगदीश शारदा, दिनेश पुरोहित, महेंद्रसिंह, गजेन्द्रसिं, जामाराम चौधरी, अश्विनभाई पटेल, सोहनराज मेहता, डूंगराराम पुरोहित, बाबूलाल पालडिय़ा, गेनाराम मेघवाल, पुरूषोत्तम, पुरिन्दर व्यास व भागीरथ व्यास समे काफी संध्या में साधु संत एवं गणमान्य लौग मौजूद थे।




स्वयंसेवकों को दी संस्कारों की सीख



बाड़मेर सरदारपुरा, गौशाला व आजाद चौक क्षेत्र में लगने वा ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम रविवार शाम समारोहपूर्वक आयोजित हुए। वार्षिकोत्सव कार्यक्रमों में बौद्धिक कत्र्ता संघ के जिला संघचालक पुखराज गुप्ता, प्रांतीय सह बौद्धिक प्रमुख मोहनलाल जोशी, विहिप जिला उपाध्यक्ष छत्तूमल सिंधी ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने कहा कि भारत की संस्कृति सबको साथ लेकर चलने वाली है। अपने पूर्वजों से मिली विरासत को पहचानना होगा। यदि हम खुद को बदलें तो परिस्थि
तियां अपने आप बदल जाएंगी। हम बाहर देखते हैं, अपने भीतर झांकने की चेष्टा नहीं करते। हम सत्ताधीशों को कोसते हैं, आखिर वे आते तो हमारे बीच से ही हैं। संस्कार बदले बिना आचार नहीं बदलते। संघ यही काम करता है और शाखाओं में लोगों को संस्कारवान बनाया जाता है।
स्वयं सेवकों ने निकाला पथ संचलन

कालंद्री समीपवर्ती भूतगांव में रविवार को राष्ट्र स्वयं सेवक संघ के बरलूट मंडल भूतगांव शाखा के वार्षिकोत्सव पर पथ संचलन निकाला गया, जो गांव के मुख्य मार्गों से होकर गुजरा। पथ संचलन का गांव में जगह-जगह स्वागत किया गया। इसके बाद पथ संचलन के भूतेश्वर महादेव मंदिर में पहुंचने पर सभा का आयोजन किया गया, जहां स्वयं सेवकों ने शारीरिक व्यायाम का प्रदर्शन किया। सभा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता सह जिला कार्यवाहक जितेंद्र रावल ने कहा कि वर्तमान परिस्थि तियों में देश के विकास के लिए प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना चाहिए। व्यक्ति निर्माण से ही राष्ट्र का निर्माण होगा। इस मौके पर विभाग बौद्धिक प्रमुख गोपाल प्रजापत, तहसील कार्यवाह डूंगरसिंह, मंडल कार्यवाह कांतिलाल पुरोहित एवं विक्रम पुरोहित ने व्यवस्थाएं संभाली।





साभार : दैनिक भास्कर

साभार : दैनिक नवज्योति

सोमवार, 30 जनवरी 2012

समाज को देश की धुरा संभालनी होगी- डॉक्टर मोहन भागवत


समाज को देश की धुरा संभालनी होगी- डॉक्टर मोहन भागवत

स्रोत: News Bharati

हुबली, जनवरी २९ : हुबली में संपन हो रहे तीन दिनों के हिन्दू शक्ति संगम-2012 के समारोप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत ने कहा कि अब समय आ गया है कि समाज देश की धुरा आपने हाथ में लेले और उसे संभाले।

उन्होंने कहा कि इस हिन्दू शक्ति संगम के बारे में बोलने से अधिक इसका दर्शन ही सब कुछ कह देता हैं। देश में विचार भरपूर है तत्त्वज्ञान भी है परन्तु साधना नहीं है ।

डॉक्टर मोहन भागवत ने इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की एक बात को दोहराया कि हम लोग शक्ति की उपासना को भुला चुके हैं यही वजह की आज हम पिछड़ रहे हैं, समाज में उस शक्ति की उपासना को बढाने का काम आरएसएस कर रहा है । उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति प्रयास करता है उसे मिलता है। उन्होंने देश की वर्तमान में विद्यमान समस्याओं को देखते हुए कहा कि ये समस्याएं शतकों पुरानी है हमारे लिए कोई शक्ति असाध्य नहीं हैं सिर्फ शील के साथ शक्ति साधना होनी चाहिए हैं । तभी जाकर इन समस्यों का निवारण होगा।

गौरतलब है कि इस हिन्दू शक्ति संगम में २२ हजार लोगों ने शिरकत की थीं । डॉ भगवात ने कहा कि हमें शील संपन्न भारत निर्माण करने की जरुरत हैं । हमने संपत्ति अपार अर्जित की है लेकिन समस्या रत्ती भर नहीं मिटी है । डॉ भागवत ने कहा, "दुनिया में केवल शक्ति संपन्न लोग ही जीतते हैं। " इस देश को एक सूत्र में पिरोंने का काम हिन्दू करता हैं। संघ देश के हित में कम करने वालों का संगठन हैं आज पुरे देश में १.५७ लाख जगहों पर संघ के लोग अपने पैसों से समाज के उत्थान का काम कर रहे हैं ।

अंतत : उन्होंने कहा कि मातृभूमि, संस्कृति और पूर्वजों का गौरव से देश को एक बंधन में बांधा जा सकता हैं ।

बुधवार, 25 जनवरी 2012

गुण संपन्न बनो संघटित बनो स्वार्थ हटा दो, आपस के भेदों को भुला दो - मोहन भागवत










स्वंय के लिए नहीं समाज राष्ट्र के लिए कार्य करने का आव्हान
स्वयं को जाने अपनी शक्ति को पहचाने
समाज में जाग्रति आना आवश्यक
केवल में और मेरा परिवार इस स्वार्थ से बाहर निकाल कर देश के लिए जीने मरने वाला कार्यकर्त्ता बनो
भारत में सक्रांति कि प्रतीक्षा है एक अहिंसक क्रांति कि आवश्यकता है
संघ नाम के लिए नहीं देश के लिए कार्य करता है
मातृशक्ति को राष्ट्रीय सेविका समिति से जुड़ने का आव्हान
भारतवर्ष को विश्वगुरु बनना है
- परम पूजनीय सर संघचालक मोहन जी भागवत

बीकानेर २२ जनवरी २०१२। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बीकानेर द्वारा सक्रांति- महोत्सव परा पूजनीय सर संघचालक मोहन जी भागवत के सानिध्य में रेलवे स्टेडियम में हर्षोउल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।
मुख्य कार्यक्रम के पूर्व विविध धारा पथ संचलन का आयोजन किया गया, जिसका शहर के लोगो ने बड़े ही उत्साह से विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
द्विधारा संचलन राजरतन बिहारी पार्क में १२.५८ पर प्रारंभ होकर ठीक १.०६ मिनिट पर लव पथक तथा कुश पथक दो धाराओ में परिवर्तित होकर मुख्य मार्गो से गुजरता हुआ तोलियासर भेरूजी पर बाल संगम में परिवर्तित हुआ। यह दृश्य देखकर शहरवासियों ने दातों तले अंगुली दबा ली।
इसी तरह त्रिधारा संचलन गंगा, जमुना तथा सरस्वती अपने निर्धारित स्थानों पर समय से प्रारंभ हुए तथा आंबेडकर सर्किल पर ठीक १.५१ पर त्रिवेणी संगम में परिवर्तित हुए। भारी तादाद में उपस्थित जनता ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया तथा वन्देमातरम के जयघोष से स्वयंसेवको का उत्साहवर्धन किया।
रेलवे स्टेडियम में मुख्य कार्यक्रम सामूहिक गीत "शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है, दिव्य ऐसे प्रेम में इश्वर स्वयं साकार है " से प्रारंभ हुआ। ध्वजारोहण के पश्चात शारीरिक प्रदर्शन तथा घोष वादन हुआ।
मंच पर परम पूजनीय सर संघचालक मोहन जी भागवत के साथ श्री कैलाश भसीन, प्रान्त सह संघचालक, श्री नंदकिशोर सोनी, सह विभाग संघचालक , श्री किशन लाल पारीक, जिला संघचालक तथा नरोत्तम व्यास , महानगर संघचालक विराजमान थे।
काव्यगीत "अंतर्मन में भाव समझ कर राष्ट्र प्रेम का ध्यान करे" के पश्चात परम पूजनीय सर संघचालक मोहन जी भागवत ने उपस्थित स्वयंसेवको तथा नागरिक गणों का मार्गदर्शन किया। सक्रांति क्या है और उसके महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा कि स्वयं को जाने अपनी शक्ति को पहचाने। सक्रांति अँधेरा काम करने तथा सक्रियता बढ़ाने का पर्व है। क्रियाशील रहने से ही सक्रांति आती है। उन्होंने आगे कहा कि साधनों का महत्व नहीं सूर्य के सामान नियमितता महत्वपूर्ण है । भारत में सक्रांति कि प्रतीक्षा है एक अहिंसक क्रांति कि आवश्यकता है। सक्रांति स्वत्व में आती है। स्वंय का परिचय आवश्यक है ।
हनुमान जी का उदहारण देते हुए माननीय भागवत जी ने कहा कि जामवंत ने ही हनुमान को शक्ति का अहसास करवाया था।
माननीय भागवत जी ने अपने उधबोधन में आगे कहा कि भारत का परिचय हिन्दू है, हमारे देश में रहने वाले सब हिन्दू है। सब भारतमाता के पुत्र है। Unity is not necessarily Uniformity अर्थात एक होने के लिए एक जैसा होना आवश्यक नहीं है
सर संघचालक जी ने कहा कि समाज में जाग्रति आना आवश्यक है । इस समाज को कैसे जगाये ? इतना बड़ा समाज है आधे लोग भी पढ़े लिखे नहीं है रोजी रोटी की मारा मरी में घूम रहे हैं। निराशा आती है। निराशा से काम चलता है क्या ? विपत्तियों से डरने से काम चलता है क्या? अपने देश की इस स्तिथि इन सारी समस्याओ के लिए जिम्मेदार कौन है ? अपने समाधान के लिए किसी व्यक्ति को हम दोषी ठहराएंगे और उसको फांसी दे देंगे तो समस्या जाएगी क्या ? हमने तो कर के देख लिया ६४ साल , नेता बदल दिए , पार्टी बदल दी सरकारे बदल बदल कर देख लिया पर स्थति तो वही है जिम्मेदार कौन है ?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन जी भागवत ने जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे देश जिसने हजारो संकट ५०० वर्षो कि सुल्तानी झेली है उसे परास्त किया है उस देश का समाज यह क्यों सोचता है कि अब तो कुछ संभव नहीं है ? इस देश ने अपने इतिहास में इतने सरे संकट झेले है और फिर भी अमर देश है। इकबाल को भी कहना पड़ा कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। उस देश के लोगों को चिंता क्यों ? अपना कर्तव्य करना चाहिए। अपने आप सूर्योदय होगा। रात के बाद दिन निश्चित है। दिन की तय्यारी करो । गुण संपन्न बनो संघटित बनो स्वार्थ हटा दो, आपस के भेदों को भुला दो। भारतमाता के प्रत्येक पुत्र को अपना हिन्दू भाई माँ कर उसके अपने संस्कृति के मूल्यों के आधारित गुण संपदा को जगाओ। इस काम के लिए समय दो, परिश्रम करो। केवल में और मेरा परिवार इस स्वार्थ से बाहर निकाल कर देश के लिए जीने मरने वाला कार्यकर्त्ता बनो। यह कर्तव्य है सक्रांति के लिए।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चर्चा करते हुए माननीय भागवत जी ने कहा कि सम्पूर्ण हिन्दू समाज को देश के लिए संघठित करने कि कार्य पद्वति है जिसे डॉक्टर हेडगेवार जी ने हमें दिया है। संघ कि प्रार्थना - पवित्र साधना में कही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम तक नहीं है। संघ नाम के लिए नहीं देश के लिए कार्य करता है । राष्ट्र के लिए संघ कि प्रार्थना में भारत माता को जय है संघ का नाम तक नहीं है। वयम हिन्दू राष्ट्रंग भूताः अर्थात हम हिन्दू राष्ट्र के अंग है। सम्पूर्ण देश को इस प्रकार संघठन करने का योगमार्ग सिखने के लिए आव्हान है। पूजनीय भागवत जी ने कहा कि RSS के स्वयंसेवक बने। मातृशक्ति को राष्ट्रीय सेविका समिति से जुड़ने का आव्हान किया। राष्ट्र को जोड़ कर सम्पूर्ण समाज को राष्ट्रोथान के कार्य में जुटाने वाले बने। स्वंय के लिए नहीं समाज राष्ट्र के लिए कार्य करने का आव्हान किया। तन मन धन , प्रमाणिकता से कार्यकर्त्ता बन कर अछे गुण सीखे निस्वार्थ बुधि से न आम के लिए न फोटो के लिए न चुनाव के लिए न टिकिट के लिए कार्य करे। देश के लिए कार्य करे। ऐसे से समाज में जो बल खड़ा होगा उसका सामना करने कि क्षमता न चीन में हैं न पाकिस्तान में न अमेरिका में हैं न रशिया में।
भारतवर्ष को विश्वगुरु बनना है , दुनिया रहे इसलिए आवुश्यक है। दुनिया को दूसरी गति नहीं भारत के सिवाय। और भारतवर्ष को बड़ा करना ही तो हम सबको इसकी तैय्यारी करनी पड़ेगी। दूरदृष्टि से इस बात को देखते हुए सरे समाज कि ऐसी तैयारी करने वाला यह आर एस एस का काम है। यह किसी के विरोध में नहीं चलता, यह किसी कि प्रतिक्रिया में नहीं चलता लेकिन यह डंके कि चोट पर स्पष्ट शब्दों में हिन्दू समाज के लिए चलता है। क्योंकि हिन्दू इस देश कि राष्ट्रीय पहचान है । हिन्दू समाज इस देश का राष्ट्रीय समाज है। हिन्दुस्त्व इस देश कि राष्ट्रीय संस्कृति है। सुप्रीम कोर्ट भी यही कहता है और इसलिए हिन्दू संघठन के महाभियान के अंग बनकर केवल दर्शक या हितेषी न बनकर इसके सहयोगी बनकर हम सब को चलना होगा तो सारी समस्याओं के उत्तर एक साथ मिलेंगे। एक नया उध्हम पुरुषार्थ शक्ति सम्पूर्ण देश में हम अनुभव करेंगे। सारी दुनिया भारतवर्ष से शिक्षा ग्रहण कर एक नयी सुखी सुंदर दुनिया जो शोषण रहित, समतायुक्त , पर्यावरण की प्रचुरता से भरपूर और विकास की बहुलता से पूर्ण तृप्त ऐसी दुनिया बनाने कि राह पर सारी दुनिया, दुनिया के लोग चल पड़े है उस दृश्य को हम देखेंगे जिस सम्यक क्रांति को भारतवर्ष में हम लाना चाहते है उस सम्यक क्रांति कि योग्यता प्राप्त करने के लिए यही एक बेहतर रास्ता है और इसके लिए सहभागी कार्यकर्ता होने का आव्हान करते हुए माननीय भागवत जी ने अपना उधबोधन समाप्त किया ।
सक्रांति महोत्सव में क्षेत्रीय प्रचारक माननीय दुर्गादास , जोधपुर प्रान्त प्रचारक माननीय मुरलीधर, चित्तोर्गढ़प्रान्त प्रचारक माननीय गजेन्द्र सिंह जी, क्षेत्रीय प्रचारक प्रमुख माननीय नन्द लाल ,जयपुर प्रान्त प्रचारक गोपाल जी, सह क्षेत्रीय संपर्क प्रमुख प्रकाश चन्द्र , सीमाजन कल्याण समिति के संघटन मंत्री माननीय निम्ब सिंह , बीकानेर विभाग प्रचारक निम्बा राम जी , प्रज्ञा प्रवाह के माननीय गंगाबिशन सहित जोधपुर प्रान्त के प्रचारक, अधिकारी भी उपस्थित थे।

सोमवार, 23 जनवरी 2012

बीकानेर में २२ जनवरी को आयोजित सक्रांति कार्यक्रम के मुख्य अंश - परम पूजनीय सर संघचालक मोहन जी भागवत का उधबोधन

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खबरे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बीकानेर द्वारा आयोजित सक्रांति महोत्सव की


'नापाक इरादों से हमें अलग-थलग करने की फिराक में है चीन'

बीकानेर.राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन मधुकर राव भागवत ने कहा कि देश बाहरी और आंतरिक संकट में है और इसके लिए अब हिंसा मुक्त क्रांति की जरूरत है। चीन लगातार कब्जा करता जा रहा है। पाकिस्तान षड्यंत्र कर रहा है।

चीन भारत के सभी मित्र देशों से नजदीकियां बढ़ाकर हमें अलग-थलग करने की फिराक में है। देश के भीतर भी संकट है। भ्रष्टाचार, अलगाववाद, निहत्थे लोगों पर लाठियां चलाई जा रही हैं। इन सभी से जूझने के लिए अब आपसी बैर-भाव भुलाकर आमजन को एकजुट होना पड़ेगा।

रविवार को रेलवे स्टेडियम में संघ के मकर संक्रांति महोत्सव को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि चीन या पाक से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारतवासियों ने 500 वर्ष की मुगलों की सुल्तानी को कुचला है।

अंग्रेजों को लंबे संघर्ष के बाद खदेड़ा है, लेकिन कुछ स्वार्थ से देश के भीतर आपसी मतभेद पनप रहा है। आपसी फूट का फायदा उन लोगों को मिल रहा है जो भारत के शुभचिंतक नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीति, नेता या सरकारों से देश में परिवर्तन नहीं होगा, अगर होता तो आजादी के बाद अब तक हो चुका होता।

अब इसके लिए समाज को एकजुट होना पड़ेगा। समाज जब जातीय या धर्म के आधार पर मतदान करना बंद कर देगा नेता स्वयं उनकी पैरवी करेंगे और जो समाज चाहेगा वह करेंगे। मकर संक्रांति का महत्त्व बताते हुए भागवत ने कहा कि सूर्य स्थिर रहता है। पृथ्वी जब सूर्य की तरफ मुंह करती है तो दिन और पीठ करने पर रात होती है। संक्रांति क्रांति का संदेश दे रही है।

इससे पूर्व काव्य गीत हुआ। मंच पर सह प्रांत संघचालक कैलाश भसीन, विभाग संघचालक नंदकिशोर, आदि मौजूद थे। समारोह में संघ गणवेश में सांसद अर्जुनराम मेघवाल, कोलायत विधायक देवी सिंह भाटी, बीकानेर पश्चिम क्षेत्र विधायक डॉ।गोपाल जोशी, देहात भाजपा अध्यक्ष रामगोपाल सुथार सहित तमाम नेता मौजूद थे।

साभार : दैनिक भास्कर , बीकानेर

साभार : राजस्थान पत्रिका, बीकानेर

शनिवार, 21 जनवरी 2012

संघ के कार्यकर्ता तैयारियों में जुटे

साभार : राजस्थान पत्रिका
साभार : दैनिक भास्कर

संघ के कार्यकर्ता तैयारियों में जुटे

बीकानेर २१ जनवरी २०१२ । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के २२ जनवरी को प्रस्तावित संक्रांति महोत्सव और त्रिवेणी संगम की तैयारियों के लिए कार्यकर्ता महानगर के विभिन्न स्थानों पर बैठकें और संपर्क कर रहे हैं. मार्केंडेय नगर में अभियांत्रिकी शाखा के स्वयंसेवकों ने छात्रावासों में संपर्क किया. मेडिकल कॉलेज की चरक शाखा के सभी कार्यकर्ताओं ने संपर्क कर स्वयंसेवकों की गणवेश पूर्ण करवाई. महानगर संघचालक ने बताया कि सरसंघचालक के आगमन से संघ के शिशु से लेकर प्रौढ़ स्वयंसेवकों में उत्साह का माहौल है. आठ से लेकर अस्सी पार के स्वयंसेवक उमंग के साथ संपर्क करते दिखाई दे रहें है. त्रिवेणी संगम में शामिल होने के लिए करीब ३००० स्वयंसेवक अपनी गणवेश पूर्ण कर चुके हैं. जिनमे से बड़ी संख्या ऐसे तरुण और नवयुवकों की होगी जो त्रिवेणी संगम में पहली बार शामिल होंगे. प्राध्यापकों, चिकित्सकों, अभियंताओं, समाज के प्रबुद्ध लोगों को कार्यक्रम में लाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में दल बनाया गया है. संचलन मार्ग पर घरों में संपर्क कर संचलन का समय बताया जा रहा है. नगर की शाखाओं में दंड के पांच प्रयोग और नौ योगों का अभ्यास किया जा रहा है जिनका महोत्सव में सार्वजनिक प्रदर्शन होगा.

संपर्क तीन स्तरों पर किया जा रहा है- स्वयंसेवकों से, आम समाज को निमंत्रण देने और मातृशक्ति को कार्यक्रम में लाने के लिए.

ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले स्वयंसेवकों के लिए समाज के घर घर से भोजन पैकेट की व्यवस्था की जा रही है. शनिवार को सुबह ८ बजे रेलवे स्टेडियम में कार्यक्रम का अंतिम शारीरिक और घोष पूर्व अभ्यास होगा.