सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

देशी गाय की नस्ल को एवं इसके वैज्ञानिक प्रभाव को बच्चों के माध्यम से परिवारों तक पहुंचाना एक पुनित एव आवश्यक कार्य - वासुदेव देवनानी, शिक्षा मंत्री


देशी गाय की नस्ल को एवं इसके वैज्ञानिक प्रभाव को बच्चों के माध्यम से परिवारों तक पहुंचाना एक पुनित एव आवश्यक कार्य -  वासुदेव देवनानी, शिक्षा मंत्री



जोधपुर 25 फरवरी .  चन्द्रमा सूर्य से रोशनी लेकर चमकता है एवं ऐसे में हमें चन्द्रमा के साथ-साथ सूर्य की उपासना भी आवश्यक है। सूर्य नमस्कार से हम शारिरीक, मानसिक एवं आध्यात्मिक शक्ति अर्जित करते है ठीक वैसे ही गाय की रीड की हड्डी पर सूर्य की रोशनी के  प्रभाव से जो दुग्ध मे पीलापन आता है वह स्वर्ण उत्पन होने का द्योतक है। ऐसे में देशी गाय की नस्ल को एवं इसके वैज्ञानिक प्रभाव को बच्चों के माध्यम से परिवारों तक पहुंचाना एक पुनित एव आवश्यक कार्य है। जिसे गो विज्ञान परीक्षा के माध्यम से पूर्ण किया जा रहा है। यह विचार राज्य के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने शनिवार गो विज्ञान परीक्षा राज्य स्तरीय सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहे। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा राजकीय विद्यालयों की प्रार्थना सभा में योग, सूर्यनमस्कार व प्रणायाम को शामिल करने से हमारी नई पीढी को एक ऊर्जा मिली है। शिक्षा में आई क्यू के साथ ई क्यू, भावपूर्ण शिक्षा व एस क्यू, आध्यात्मिक शिक्षा को विद्यार्थियों को देने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जोधपुर प्रान्त संघचालक ललित शर्मा ने अपने उद्बोधन में स्वदेशी गाय के दूध की ताकत के साथ वैज्ञानिक आधारों को बताते हुए ए 1 व ए 2 मिल्क की जानकारी दी। वैज्ञानिक उदाहरण देते हुए उन्होंने अमेरिकन एंव जर्सी गायों को गाय मानने से इन्कार करते हुए उसके दूध को ताकत की तुलना में बिमारियों का प्रदाता बताया तथा कहा कि जर्सी गाय का दूध मधुमेह का कारण भी है। उन्होंने गाय के आर्थिक महत्व को समझकर उसकी सेवा एवं परिवार का एक अंग मानने के लिए भी आह्वान किया। 

कार्यक्रम में रामस्नेही संत हरिराम शास्त्री ने अपने उद्बोधन में उपस्थित बालकों, अभिभावकों व शिक्षकों के बीच आपसी समन्वय एवं संस्कार स्थापित करने की आवश्यकता जताई साथ उन्होंने यह भी कहा कि गाय पूजन एवं देशी गाय उत्पाद का सेवन हमें संस्कृति के साथ पर्यावरण के नजदीक ले जाता है। 

कार्यक्रम में परीक्षा प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए आयोजन समिति के प्रान्त सहसंयोजक विरेन्द्रसिंह शेखावत ने जानकारी दी कि इस परीक्षा का शुभारम्भ 2011 में चितौड़ प्रान्त से हुआ। 2012 से यह राज्य स्तर पर आयोजित की जा रही है। वर्तमान सत्र 2016-17 में परीक्षा के प्रथम चरण का आयोजन 1619 केन्द्रांे पर 21 सितम्बर 2016 को किया गया। परीक्षा के द्वितीय चरण 27 नवम्बर 2016 को आयोजित हुआ। प्रतियोगिता परीक्षा में कुल 2,15,839 परिक्षार्थियांे ने भाग लिया। इन विद्यार्थियों में से राज्य स्तर पर कुल चयनित 96 विजेता प्रतिभागियों का सम्मान चैंक राशि, प्रमाण पत्र एवं मोमेंटों से किया गया। 

 परीक्षा में राज्य स्तर पर बाल वर्ग में ज्ञानदीप आदर्श विद्या मंदिर, मथानिया के ओमप्रकाश चैधरी    प्रथम, श्रीमति शारदादेवी गहाणी आदर्श विद्या मंदिर, नोखा की पूनम राठौड़ द्वितीय, न्यू बालाजी पब्लिक माध्यमिक विद्यालय, झंवर की मैना पटेल तृतीय व न्यू बालाजी पब्लिक माध्यमिक विद्यालय झंवर की दीपिका सोलंकी व आदर्श विद्या मंदिर बालिका लालसागर की शुभम गोदारा ने प्रोहत्सान पुरस्कार प्राप्त किया।

किशोर वर्ग मंे आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय, श्रीडूंगरगढ के लीलापत सारस्वत प्रथम, आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय, देचू के राधेश्याम द्वितीय, श्री गौरव आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ा कोटेचा खुशबू परिहार तृतीय, श्री गौरव आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ा कोटेचा अर्चना परिहार, आदर्श विद्या मन्दिर माध्यमिक विद्यालय, श्रीडूंगरगढ के आनन्द शर्मा, श्रीमती शारदादेवी गहाणी आदर्श विद्या मंदिर, नोखा यशान्षी शर्मा, आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय, पचपदरा अभिषेक प्रजापत ने प्रोहत्सान पुरस्कार प्राप्त किया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रान्त गो सेवा प्रमुख श्याम सुन्दर राठी, कार्यक्रम के अध्यक्ष, समाजसेवी एवं युवा उद्यमि ज्ञानेश्वर भाटी, तथा कार्यक्रम संयोजक श्याम पालीवाल ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

अतिथियों का परिचय ओमप्रकाश गौड ने दिया स्वागत उद्बोधन दौलतराम सारण ने किया। कार्यक्रम में शहर विधायक कैलाश भंसाली, शिक्षा उपनिदेशक नूतन बाला कपिला, जिला शिक्षा अधिकारी प्रभुलाल पंवार, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी ओमसिंह राजपुरोहित, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य हेमन्त घोष, स्वदेशी जागरण मंच प्रदेश संयोजक धर्मेन्द्र दुबे, भाजपा जिलाध्यक्ष महानगर देवेन्द्र जोशी ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का समापन वन्दे मातरम् से हुआ।



विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित