गुरुवार, 6 नवंबर 2014

सशक्त, समृद्ध एवं सुसंस्कृत राष्ट्र निर्माण में नैतिक मूल्यों का महत्वपूर्ण योगदान - भैयाजी जोशी लेखक अंधकार को दूर करने के लिए नैतिकता रूपी दीप जलाएं: आचार्य महाश्रमण डॉ बजरंग लाल गुप्ता को अणुव्रत लेखक पुरस्कार

 सशक्त, समृद्ध एवं सुसंस्कृत राष्ट्र निर्माण में नैतिक मूल्यों का महत्वपूर्ण योगदान - भैयाजी जोशी
लेखक अंधकार को दूर करने के लिए नैतिकता रूपी दीप जलाएं: आचार्य महाश्रमण

डॉ बजरंग लाल गुप्ता को अणुव्रत लेखक पुरस्कार


नई दिल्ली, 4 नवम्बर 2014. अणुव्रत महासमिति द्वारा प्रतिवर्ष उत्कृष्ट नैतिक एवं आदर्श लेखन के लिए प्रदत्त किया जाने वाला ‘अणुव्रत लेखक पुरस्कार’ वर्ष-2014 के लिए प्रख्यात अर्थशास्त्री, समाजसेवी, यशस्वी साहित्यकार डाॅ. बजरंगलाल गुप्ता को अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में अध्यात्म साधना केन्द्र, मेहरौली (दिल्ली) में प्रदत्त किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि आरएसएस के सह सरकार्यवाहक भैयाजी जोशी, अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष डालचंद कोठारी, महामंत्री मर्यादा कोठारी, पुरस्कार के प्रायोजक परिवार के चैथमल श्यामसुखा, अणुव्रत लेखक मंच के संयोजक ललित गर्ग ने डाॅ. गुप्ता को इक्यावन हजार रुपए की राशि का चैक, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र प्रदत्त कर उन्हें सम्मानित किया।

डाॅ. बजरंग लाल गुप्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र के संघचालक हैं। आपकी ‘भारत का आर्थिक इतिहास’, ‘विवेकानंद के सपनों का भारत’ एवं ‘हिन्दू अर्थचिंतन’ प्रमुख कृतियां हैं। 

आचार्यश्री महाश्रमण ने डाॅ. गुप्ता की नैतिक एवं स्वस्थ लेखन की प्रतिबद्धता की चर्चा करते हुए कहा कि डाॅ. गुप्ता राष्ट्रीय एकता एवं नैतिक मूल्यों के उन्नयन के लिए खूब अच्छा काम कर रहे हैं। इस पुरस्कार से उनके ऊपर और ज्यादा जिम्मेदारी आ गई है। यह पुरस्कार और ज्यादा काम करने की प्रेरणा देने वाला बने। आप पवित्र सेवाएं देते रहें।

आचार्य श्री महाश्रमण ने आगे कहा कि आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आंदोलन का प्रवर्तन किया। जिसका उद्देश्य है मनुष्य अच्छा मनुष्य बने। लेखक की समाज-निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेखक के द्वारा अच्छे विचार दिये जा सकते हैं। लेखक अंधकार को कम कर सकता है। लेखक के द्वारा समाज में व्याप्त विसंगतियों एवं बुराइयों को दूर करने के दीप प्रज्ज्वलित किये जा सकते हैं। आदमी श्रेय को समझे और ऐसा समाज-निर्माण का कार्य करें।

मुख्य अतिथि भैयाजी जोशी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सशक्त, समृद्ध एवं सुसंस्कृत राष्ट्र निर्माण में नैतिक मूल्यों का महत्वपूर्ण योगदान है। अणुव्रत आंदोलन देश को नैतिक दृष्टि से सशक्त बनाने का विशिष्ट उपक्रम है। वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमणजी व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र को नैतिक दृष्टि से सुदृढ़ बना रहे हैं। यही राष्ट्र की सुदृढ़ता का मूल आधार भी है।वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमणजी व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र को नैतिक दृष्टि से सुदृढ़ बना रहे हैं। यही राष्ट्र की सुदृढ़ता का मूल आधार भी है। राजनीति में नैतिकता की स्थापना जरूरी है। शुचिता और सादगी की शक्तियों का समन्वय करके ही राजनेता देश को वास्तविक एवं आदर्श नेतृत्व दे सकते हैं। श्री भैयाजी ने आचार्य श्री तुलसी जन्म शताब्दी वर्ष की चर्चा करते हुए कहा कि मेरा आचार्य तुलसी के साथ संपर्क रहा। मुझे आज इस कार्यक्रम में आकर सुखद महसूस हो रहा है। भैयाजी ने डाॅ. गुप्ता की सेवाओं की चर्चा करते हुए कहा कि उनकी सुदीर्घ सेवाएं रही हैं, ऐसा सम्मान-पुरस्कार व्यक्ति के लिए मार्गदर्शन का काम करता है।
अणुव्रत लेखक पुरस्कार से सम्मानित डाॅ. गुप्ता ने आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुरस्कार मेरे लिए महान् संतपुरुषों का आशीर्वाद है। मेरा यह सौभाग्य है कि मुझे आचार्यश्री तुलसी, आचार्यश्री महाप्रज्ञ और आचार्यश्री महाश्रमण का असीम अनुग्रह, स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि अणुव्रत का प्रारब्ध तत्व नैतिकता है। अणुव्रत मानवता की आचारसंहिता है। मेरे लिए यह प्रसन्नता की बात है कि मैं इस आंदोलन के साथ जुड़कर मानवता की सेवा कर सका। आचार्य श्री महाश्रमण से ऐसे आशीर्वाद की कामना है कि उनके नैतिक और मानवतावादी कार्यक्रमों में अपने आपको अधिक नियोजित करते हुए समाज और राष्ट्र की अधिक-से-अधिक सेवा कर सकूं।

इस अवसर पर श्री सुखराज सेठिया ने भैयाजी जोशी का एवं श्री पदमचंद जैन ने डाॅ. बजरंगलाल गुप्ता का जीवन-परिचय प्रस्तुत किया। अणुव्रत महासमिति द्वारा आरएसएस के श्री नंदलाल बाबाजी, श्री इंद्रेशजी एवं श्री चैथमल श्यामसुखा का प्रतीक चिन्ह प्रदान कर श्री शांतिलाल जैन, श्री रतनलाल सुराणा, श्री बुद्धसिंह सेठिया, श्री सुखमिंदर पाल सिंह ग्रेवाल, श्री शांतिलाल पटावरी ने सम्मानित किया। कार्यक्रम का संयोजन श्री ललित गर्ग ने किया। आभार ज्ञापन श्री बाबूलाल दुगड़ ने किया।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित