रविवार, 4 अक्तूबर 2009

अक्तूबर ३ – गौवंश से ही सोने की चिडिया बनेगा भारत – शंकरलाल






संगरिया, अक्तूबर ३ - विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के राष्ट्रीय सचिव शंकरलाल ने कहा है कि गोवंश के जरिए ही भारत फिर से आर्थिक सांस्कृतिक बुलंदियों को छू सकता है । उन्होंने कहा कि स्वावलंबन के लिए गोवंश का संरक्षण आवश्यक है । श्री शंकरलाल संगरिया व्यापार मंडल द्वारा आयोजित स्वागा सभा में गोभक्तों को संबोधित कर रहे थे । यात्रा के राष्ट्रीय सचिव ने कहा कि गाय के दूध की तुलना भैंस अथवा जर्सी के दूध से नही की जा सकती । गाय का दूध अतीव लाभदायक है जबकि अन्य जानवरों से मिलने वाला दूध कई रोगों को कारण बनता है ।

गोकर्ण पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य राघवेश्वर भारती ने कहा कि जो संत संकट के समय समाज का साथ नहीं देता वह संत नहीं है । उन्होंने कहा कि सैनिक देश की राजनैतिक सीमाओं की रक्षा करता है । संत देश की सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा करता है । शंकराचार्य ने कहा कि गोसंरक्षण की लडाई स्वतंत्रता की सच्ची लडाई है । उन्होंने कहा कि भारत को वास्तविक स्वतंत्रता अभी तक नहीं मिली है । विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा गाय वृहद स्वतंत्रता संघर्ष की पहल है । जगद्गुरु ने राजस्थान को गायों की काशी बताया ।
अक्तूबर ३ – भारतीय स्वत्व को स्थापित करने का प्रयास है गौ ग्राम यात्रा – सीताराम केदिलैया
गंगानगर, अक्तूबर ३ - अखिल भारतीय सेवा प्रमुख सीताराम केदिलैया ने विश्व मंगल गौ ग्राम यात्रा को भारतीय स्वत्व को स्थापित करने का प्रयास बताया है । उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद नीति – निर्माण की प्रक्रिया में भारतीय प्रकृति और संस्कृति का ध्यान नहीं रखा गया । जिसके कारण भारत का परंपरागत सामाजिक ढांचा चरमरा गया है । श्री केदिलैया विश्व मंगल गौ – ग्राम यात्रा के स्वागत के लिए गंगानगर में आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे ।

श्री केदिलैया ने कहा विश्व मंगल गौ ग्राम यात्रा भारतीय जनमानस में परिवर्तन लाने का एक महाभियान है । यह यात्रा भारतीयों को आत्मचिंतन और आत्मदर्शन के लिए प्रेरित करेगी । उन्होंने भारत की मूलभूत विशेषताओं की तरफ संकेत करते हुए कहा कि गाँव भारत की आत्मा है, किसान उसके प्राण है और गाय जीवनरेखा है । गांव, किसान और गाय के आपसी संबंधो के बिगड जाने के कारण भारत आज तडप रहा है । इस संबंध को फिर से संतुलित करके भारत में खुशहाली लायी जा सकती है ।

श्री केदिलैया ने कहा कि उपेक्षापूर्ण नीतियों के कारण भारत में खेती करने का मानस टूट गया है । उन्होंने कहा कि गोवंश के जरिए कृषि की दशा सुधरेगी । भूमि की उर्वराशक्ति बढेगी । साथ ही साथ लोगों को स्वस्थ और समृद्ध बनाने में भी गोवंश की भूमिका महत्वपूर्ण है । जनसभा को संबोधित करते हुए स्वामी अखिलेश्वरानंद ने कहा कि भौतिक विकास और भौतिक समृद्धि भारत की पहचान नहीं बन सकती । उदात्त जीवनमूल्य, परंपरा, धर्म ही भारत की पहचान है । इन सभी को पोषित करने के कारण ही गाय को भारत की प्राण रेखा कहा जाता है । उन्होंने कहा कि गाय का संबंध अर्थशास्त्र, चिकित्साशास्त्र, समाजशास्त्र है । यह भारतीय सामाजिक संरचना की धुरी है ।

स्वामी अखिलेश्वरानंद ने कहा कि गौ हत्या पर संपूर्ण देश में पाबंदी लगाने का महात्मा गान्धी का स्वप्न अब भी अधूरा है । उन्होंने कहा कि नागरिक बोध के अभाव के कारण भारत में गोहत्या जैसी अव्यवस्था पनप आयी हैं । यदि प्रत्येक सनातनधर्मी गोपालन और गोसंरक्षण के लिए कमर कस ले तो बूचडखानों पर ताले लगने में देर नहीं लगेगी ।

नामधारी संप्रदाय के संत स्वतंत्रपाल सिंह ने कहा कि आज लोग अधिक धार्मिक दिखायी पडते हैं । लेकिन उनके जीवन से धर्म गायब हो गया है । उन्होंने कहा कि पश्चिमी शिक्षा पद्धति के कारण आज भारतीय की दृष्टि और टेस्ट दोनों बदल गए हैं । उन्होंने कहा कि भारत की खुशहाली का रास्ता गौ और ग्राम से होकर गुजरता है ।

इस सभा में कई संतो और गणमान्य व्यक्तियों सहित भारी संख्या में गोभक्तों ने सहभागिता की ।
Wat News Papers Says :
समृद्धि के शिखर तक ले जाएगा गौवंश’
हनुमानगढ़. गाय महज आध्यात्मिक दृष्टि से सर्वोपरि नहीं बल्कि चिकित्सा, शिक्षा व सामाजिक रूप से भी श्रेष्ठ है।
ऐसे में गौवंश की उपेक्षा ठीक नहीं है। यह बात शनिवार को टाउन स्थित रामलीला रंगमंच परिसर में विश्व मंगल गौ ग्राम रथ यात्रा के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए बात संत अखिलेश्वरानंद महाराज ने कही।
उन्होंने कहा कि भारत को अगर कोई समृद्धि के शिखर पर ले जाने में सक्षम है तो वह गौवंश है। संत ने पश्चिमी संस्कृति के अनुशरण करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि देश राजनीतिक रूप से भले आजाद हो गया, लेकिन धार्मिक, सांस्कृतिक व मानसिक रूप से गुलामी बरकरार है। संत अखिलेश्वरानंद महाराज ने कहा कि जीवनशैली में बदलाव के कारण भारतीयता पर संकट मंडराने लगा है।
उन्होंने सवाल किया कि आखिर क्या वजह है कि भारत को विश्वगुरु का दर्जा मिला? संत ने स्पष्ट किया कि इसका मुख्य कारण था भारत ऋषि-मुनियों व विद्वानों का देश रहा है। यहां संस्कार, शिक्षा, आध्यात्म व आचरण की शुद्धता है जो किसी भी दूसरे देश में नहीं है। इस मौके पर संत ने श्रद्धालुओं को गौवंश की रक्षा का संकल्प दिलाया। गौवंश की उपेक्षा पर चिंता प्रकट करते हुए संत ने कहा कि गौवंश इहलोक के साथ परलोक को सुधारने में सक्षम है।
गौवंश की पूजा का महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने एक विचारक के कथन को उद्धृत किया जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत लड़खड़ा तो सकता है लेकिन मिट नहीं सकता क्योंकि यहां गाय को माता का दर्जा प्राप्त है। गोगामेड़ी प्रन्यास के महंत रूपनाथ, रथयात्रा के राष्ट्रीय सचिव शंकरलाल तथा नामधारी पंथ के स्वतंत्रपाल सिंह ने गौसेवा के महात्म्य पर प्रकाश डाला।
इससे पूर्व हनुमानगढ़ पहुंचने पर विश्व मंगल गौ ग्राम रथ यात्रा का स्वागत किया गया। टाउन में राजवी पैलेस के पास भारत माता चौक पर विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। महिलाओं ने रथ यात्रा के स्वागत में कलशयात्रा निकाली। कार्यक्रमों में शिवसेना के अजयपाल श्रीवास्तव, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सुभाष, शीशपाल, रथयात्रा के जिला सहसंयोजक प्रदीप सिंघल, अशोक जिंदल, तहसील संयोजक देवेंद्र पारीक तथा सुजलाम् के प्रभारी बृजेंद्र नागराज आदि ने सेवाएं दीं।
अध्यक्ष इंद्र हिसारिया ने बताया कि देश भर में गायों की बदहाल स्थिति सुधारने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गौ ग्राम यात्रा निकाली जा रही है। इसमें संतों के श्रीमुख से गायों के महत्व पर प्रकाश डाला जा रहा है ताकि लोग इस बात को समझकर गौवंश की रक्षा में आगे आएं।
इसके तहत गाय को राष्ट्रीय प्राणी घोषित करने के लिए हस्ताक्षर अभियान, भारतीय गौ नस्लों का संरक्षण, संवर्धन व नस्ल सुधार, रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है।
source : Bhaskar
http://www.bhaskar.com/2009/10/04/091004003106_cow_puja.html
गो ग्राम यात्रा का जोरदार स्वागत
हनुमानगढ। विश्व मंगल गो-ग्राम यात्रा का शनिवार को हनुमानगढ आगमन पर कई जगह स्वागत किया गया। रामलीला रंगमंच पर काफी संख्या में श्रद्धालु यात्रा के स्वागत के लिए खडे थे। यात्रा के उपलक्ष्य में कलश यात्रा भी निकाली गई।


रामलीला रंगमंच पर हुई धर्मसभा में नोहर, भादरा, रावतसर कस्बे सहित कई गांवों के श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम में स्वामी अखिलेश्वरानंद महाराज ने यात्रा के उद्देश्य के बारे में बताया। कार्यक्रम में गोगामेडी के महन्त रूपनाथ, रथ यात्रा के राष्ट्रीय सचिव शंकरलाल, नामधारी पंथ के स्वतंत्रपाल सिंह आदि शामिल थे। जिले में यात्रा की सुरक्षा का जिम्मा शिव सेना के पास था। इसका नेतृत्व अजयपाल श्रीवास्तव ने किया। कार्यस्थल पर यह व्यवस्था सुभाष चन्द्र एवं शिशपाल के नेतृत्व में बजरंग दल तथा विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओं ने संभाली। रथ यात्रा के जिला सह संयोजक प्रदीप सिंघल ने आभार व्यक्त किया।


'गो-भक्तों के लिए राजस्थान काशी'
संगरिया। गो-भक्तों के लिए राजस्थान काशी है और प्रत्येक नागरिक को सम्पूर्ण देश में गोरक्षार्थ जुटना होगा क्योंकि चार राजस्थानी मिल जाएं तो गोशाला बना देते हैं जो गो-भक्ति का परिणाम है। ये वक्तव्य जगद्गुरू शंकराचार्य श्रीराघवेश्वर भारती ने शनिवार सुबह गो-ग्राम यात्रा के दौरान व्यक्त किए।। उन्होंने कहा कि गाय की पीडा को समझने वाले देव तुल्य हैं व धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, स्वास्थ्य, संस्कृति एवं अन्न का मूल गौमाता है। श्रीभारती ने कहा कि राष्ट्र को एकजुट होकर गो-रक्षा के लिए संकल्पबद्ध होना होगा।

श्रीअखिलेश्वरानंद महाराज छत्तीसगढ ने पं. दयानंद शास्त्री के साथ मंत्रोच्चार के साथ गो पूजा करते हुए ध्वजारोहण किया। जागृति यात्रा में गोरक्षटीला महंत रूपनाथ, नामधारी संत सर्वजीतसिंह, शाम सुंदर आश्रम महंत सुखदेवानंद, अयोध्या हनुमानगढी महंत बजरंगदास व हरिरामदास, महंत माधोदास आदि थे। इससे पूर्व हरियाणा सीमा पर संतगणों का स्वागत किया। ऋषि आश्रम चौक से कलश यात्रा धान मंडी स्थित सभास्थल पर पहुंची। जहां प्रखर परोपकार मिशन अध्यक्ष चाननमल जींदगर, पूनमचंद मुंडेवाला, स्वागत समिति जिला संयोजक मोमनचंद मित्तल, संघ राष्ट्रीय सचिव शंकरलाल, आदि ने गो-रक्षा का
आह्वान किया।


लालगढ जाटान : विश्व मंगल गोग्राम यात्रा का यहां शिव गो सदन के समक्ष ढोल नगाडों एवं आतिशबाजी के साथ स्वागत किया। सरपंच महेन्द्र पटीर, शिव गो सदन अध्यक्ष महेन्द्र गोदारा, पूर्व अध्यक्ष देवीलाल सहारण, रामजस कुलडिया, जगदम्बा शक्ति युवा मंडल अध्यक्ष सुरेन्द्र जलंधरा सहित क्षेत्र की अनेक लोगों ने गो ग्राम यात्रा का स्वागत किया। उपस्थित जनसमुदाय ने गो माता के जय घोष के साथ पुष्प वर्षा कर शंकराचार्य का स्वागत किया।
source : http://www.rajasthanpatrika.com/hanumangarh/detail/?nid=33835#

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित