गुरुवार, 29 अक्तूबर 2009

गाय के दूध व मल-मूत्र भी लाभदायक

भागलपुर देश के दिग्गज संत जनों के सहयोग से 30 सितंबर को हरियाणा के कुरुक्षेत्र से निकली विश्व मंगल गौ-ग्राम रथ यात्रा बुधवार की देर शाम भागलपुर पहुंची। गौ-ग्राम रथ यात्रा के स्वागत में घंटाघर स्थित शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में गौ पूजन, भजन एवं संतों के प्रवचन का आयोजन किया गया। गौ ग्राम यात्रा के साथ आए अभियान के राष्ट्रीय सचिव शंकर लाल तथा अयोध्या से आए स्वामी रामनयन दास जी महाराज ने गायों की सेवा से मिलने वाले लाभ की जानकारी दी।
शंकर लाल ने बताया कि देश में गायों को पालने की परंपरा अब धीरे-धीरे समाप्त होने लगी है। वहीं विदेशी नस्लों की गायों का प्रचलन बढ़ रहा है। यह कृषि क्षेत्र के उत्पादन को भी प्रभावित करेगा। श्री लाल ने गायों की महिमा का बखान करते हुए बताया कि गोबर व गो मूत्र का प्रयोग अगर खेतों में करें तो न केवल खेतों की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होगी बल्कि उससे मानव स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। उन्होंने कहा कि भैंस का दूध पीने से मानव में हिंसात्मक प्रवृति का वास होता है।
इस मौके पर पीएचईडी मंत्री अश्रि्वनी चौबे ने गौ पूजन कर पूज्य संतों का अभिनंदन किया। वहीं दूसरी ओर विश्व मंगल गौ ग्राम यात्रा के प्रदेश स्वागताध्यक्ष दिलीप राय, स्वागताध्यक्ष दिवाकर चंद दुबे, अनिल सिन्हा, पवन गुप्ता, अजीत घोष, राजेश कुमार, दयानंद यादव, जगदीश शर्मा, अजय कुमार, विजय वर्मा आदि ने कुरूक्षेत्र से आए यात्री दलों का पुष्प माला के साथ स्वागत किया।
गाय का संरक्षण जरूरी
बाढ़। गो संरक्षण-संवर्धन के बिना राष्ट्र का विकास संभव नहीं है। प्राचीन काल में भारत को समृद्धशाली बनाने में गोवंश का महत्वपूर्ण योगदान था। यह बातें स्थानीय अनुग्रह नारायण सिंह महाविद्यालय के क्रीड़ा मैदान में बुधवार को विश्व मंगल गो-ग्राम यात्रा के मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए दिगम्बर अखाड़े के स्वामी रामनयन दास जी ने कही। गोवंश का संवर्धन करना धार्मिक, सामाजिक, वैज्ञानिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार राम-राम कहने से राम आपके हाथ में हो जाते हैं, वहीं गाय-गाय करते रहें तब आय आपके हाथ में होगी। गो करुणामयी, ममतामयी मां। यह सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली है। सभी रोगों का निवारण करने वाली है। गोवंश की रक्षा से पर्यावरण को सुरक्षित किया जा सकता है। रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल की जगह खेतों में गोबर डालने से उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी और पर्यावरण को भी खतरा नहीं होगा। आज पश्चिमी देशों के वैज्ञानिक भी मानते हैं कि ओजोन को ढकने का उपाय गाय का घी है। संविधान के अनुच्छेद 48 के अंतर्गत गोमाता की सुरक्षा की बात कही गयी है। गोहत्या पर रोक लगाये बिना हम अपने को स्वतंत्र नहीं कह सकते। बूढ़े गायों को हम कसाई के हाथों बेच देते हैं, यह कितना बड़ा अन्याय है। महज उसके सींग के उपयोग कर हम एक एकड़ जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ा सकते हैं। तुष्टिकरण ओर वोट की राजनीति से गोवंश बर्बाद हो रहा है। समारोह में स्वामी रामदास जी, यात्रा प्रमुख मनोज जी, नवीन कुमार, रामसागर ठाकुर, सुरेन्द्र सिंह सहित कई लोगों ने विचार व्यक्त किये।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित