बुधवार, 28 अक्तूबर 2009

गाय हमारी संस्कृति का प्रतीक

गया २७ अक्टूबर । उतर प्रदेश के अयोध्या के संत स्वामी कमल नयन दास ने मंगलवार को कहा कि गाय हमारी संस्कृति के प्रतीक है। हमारी कृषि अर्थव्यवस्था भी गोवंश पर आधारित है। गाय और कृषि गांव की स्मृति का प्रतीक है। गाय बचेगी तो गांव बचेगा, गांव बचेगा तो भारत बचेगा, भारत बचेगा तभी विश्व बचेगा यही संदेश को लेकर देश के संतो की टोली विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा पर निकली है। उक्त बातें गांधी मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में संतो ने कही। इसके पूर्व विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा गया पहुंचने शहरवासियों ने पुष्प की वर्षा कर भव्य स्वागत किया। यहां के प्रमुख मार्गो को भगवाध्वज एवं तोरणद्वार से दुल्हन की तरह सजाया गया था। संतो ने गौ माता का पूजन व आरती कर कार्यक्रम की शुरूआत की। संतों ने कहा कि गौ माता में राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा,आर्थिक सुरक्षा, खाद्यान्न सुरक्षा एवं पर्यावरण सुरक्षा प्रदान करने की क्षमता विद्यमान है। गौ मूत्र एवं पंचगव्य के उपयोग से एड्स एवं कैंसर जैसी जानलेवा बिमारियों के रोगी को जीवन दान मिल रहा है। गाय एक पशु नहीं बल्कि माता है, जिसका लोहा पूरे विश्व के लोग मानते है। विदेशी लोग गाय को चलता फिरता चिकित्सालय मानते है। इसके बावजूद वर्तमान समय में देश के नयी आर्थिक नीति के लागू होने से पशुओं का कत्ल हो रहा है। यह उद्योग का रूप धारण कर लिया है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में पशु के कत्ल करने का उद्योग तेजी फैल फैल रहा है। इसके कारण भी अपने ही देश में गोवंश की संख्या निरंतर घट रही है। गौवंश की रक्षा के लिए हिन्दुस्तान में रहने वाले लोगों को आगे आने की जरूरत है। वोट के तुष्टीकरण की वजह से गोवंश की संख्या में कमी आयी है। लोगों को अपनी मतभेद को भुलाकर गोवंश की रक्षा करनी होगी। कार्यक्रम में स्वामी हरेरामचार्य, स्वामी संतोषानंद, गुरूशरण कुमार, कार्यक्रम प्रमुख सियाशरण प्रसाद एवं आर.एस नागमणि आदि उपस्थित थे।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित