गुरुवार, 5 नवंबर 2009

राष्ट्र गीत पर फतवा से राष्ट्रभक्तों में नाराजगी

आख़िर देशभक्तों को भी चैन कहा । समाचारपत्रों में छोटी सी 'न्यूज़' बनकर रह गई थी वन्देमातरम पर फतवा जारी करने का समाचार । ब्रेकिंग न्यूज़ से खबरों को बडा चडा कर चटपटा बनाने में माहिर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर तो फतवे वाली इस न्यूज़ से कोई सरकोर नज़र आया ही नही । अपनी अपनी समझ और अपने अपने मायने है राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर ... कौन किसको समझाए सब जरुरत से ज्यादा समझदार है।

जो वंदेमातरम् नही गा सकते वो पाक या बांग्लादेश जाएं : उद्धव ठाकरे
मुंबई। वंदे मातरम् पर बयानों की राजनीति एक बार फिर गर्मा चुकी है। जमीयत उलेमा ए हिंद के वंदे मातरम पर फतवा जारी करने के एक दिन बाद शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि जो राष्ट्रीय गीत का विरोध करता हैं वो पाकिस्तान चले जाएं। ठाकरे ने कहा कि अगर आप अपनी मातृभूमि को प्रणाम नहीं करते तो फिर किसे आप नमस्कार करेंगे। भारतमाता को नमस्कार करने में क्या शर्म है ठाकरे ने कहा कि जो लोग भारतमाता को नमस्कार नहीं करते उन्हें पाकिस्तान या बांग्लादेश चले जाना चाहिए।यही नहीं, ठाकरे ने कहा कि अगर गृह मंत्री की मौजूदगी में ऎसा फतवा जारी होता है तो फिर इस देश का कोई भविष्य ही नहीं है। ठाकरे ने अपने बयान में कहा कि लगता है कि केन्द्र ने मुस्लिमों को खुश करने की नीति अपना रखी है। मालूम हो कि मुस्लिम उलेमाओं के सबसे बडे़ समूह जमीयत ने देवबंद में मंगलवार को दारूल उलूम के आयोजन मे एक प्रस्ताव पास किया कि मुसलमानों को वंदे मातरम् नहीं गाना चाहिए क्योंकि यह उनकी धार्मिक आस्था के खिलाफ है........
स्त्रोत : http://www.khaskhabar.com/showstory.php?storyid=12077

मुद्दों पर राजनीती तुंरत हो जाती हैं चाहे वो सकारात्मक ही क्यो न हो .... इक बानगी आज के दैनिक भास्कर की देखे .......


विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित