शनिवार, 7 नवंबर 2009

विश्व मंगल गोऊ ग्राम यात्रा रांची में


जल-जंगल के साथ जानवर की भी हो सुरक्षा

रांची, विश्र्व मंगल गौ ग्राम यात्रा के संकल्प के साथ गोवंश की रक्षा में कृषि, पर्यावरण व संपूर्ण मानव सभ्यता की रक्षा के लिए पिछले विजयादशमी को कुरुक्षेत्र से शुरू हुआ रथ छह नवंबर की शाम कांटाटोली होते हरमू मैदान पहुंचा। रथ पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए ऋषि-मुनी शामिल सवार थे। मौके पर रथ का दर्शन, पूजन व प्रवचन के कार्यक्रम हुए। सुदूर गांवों से लगभग 20 हजार से अधिक गो भक्तों ने हरमू मैदान पहुंच कर संत डा। रामविलास वेदांती, गोकर्ण पीठ संस्थापक पूज्य शंकराचार्य, स्वामी माधवेश्र्वर भारती, इंद्रेश, बालक दास व रामविलास वेदांती के उद्बोधन को सुना। वक्ताओं ने गो वंश की रक्षा के लिए संवैधानिक प्रावधानों के निर्माण व गो वंश में विदेशी नस्ल से गर्भाधान बंद कराने पर जोर दिया। कहा, भारत ग्राम में है और इंडिया शहर में। पंचगव्यों से रोगों का उपचार हमारा लक्ष्य होना चाहिए। जल, जंगल, जमीन व जानवर जब सुरक्षित होंगे, तभी ग्राम संपन्न होगा। कार्यक्रम संयोजक प्रणय दत्त ने बताया कि रथ का स्वागत विभिन्न संस्थाओं ने किया। इस अवसर पर मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय, मिथिलेश नारायण, गुरुशरण, माया सिसोदिया, अशोक भगत आदि मौजूद थे।

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रांची, नवंबर ६ – कुरुक्षेत्र से प्रारंभ होकर विभिन्न राज्यों में भ्रमण करते हुए विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा पिछले दो दिनों से झारखंड में है । विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा आज सुबह जमशेडपुर से निकलकर चांडिल, बुंडू होते हुए शाम पहुंची, रांची पहुंचने पर गो ग्राम यात्रा का जोरदार स्वागत किया गया । यात्रा के शहर आगमन होते ही भारी संख्या में पुरुष व महिलाओं ने फूलों की वर्षा कर यात्रा के साथ चल रहे रथ का व संत शक्ति का स्वागत किया । सडक पर अनेक स्थानों में स्कूली छात्र छात्राओं ने भी बैण्ड बाजों के साथ यात्रा का अविस्मरणीय स्वागत किया ।
इस के बाद यात्रा रांची के हरमूं मैदान पहुंची जहाँ गो ग्राम यात्रा के लिए आयोजित कार्यक्रम में हजारों की संख्या में गो भक्त यात्रा के दर्शन के लिए उपस्थित थे । कार्यक्रम में यात्रा के साथ आए संतों के साथ स्थानीय संत भी मौजूद थे । जिन्होंने उपस्थित गो भक्तों को अपना आशीर्वचन देते हुए उन्हें गो संरक्षण व गोपालन हेतु संकल्प भी दिलाया ।
गो ग्राम यात्रा के लिए आयोजित कार्यक्रम में जनसभा को संबोधित करते हुए छात्तीसगढ से आए अंते बाबा राम बालक दास ने कहा कि भारत देश में जहाँ गाय को माँ का दर्जा प्राप्त है वहाँ निर्ममता से गो हत्या का होना दुखद है । उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश में ८० फीसदी गायें खत्म हो चुकी है, प्रतिवर्ष १५०० करोड की गो संपत्ति अवैध रूप से पडोसी देशों में भेजी जाती है ।
बालक दास ने कहा कि भारत देश में जन्म लेना गौरव की बात है क्योंकि यहाँ गोमाता का वास है लेकिन आज भारत के लोग गौरवानुभूति का अहसास दिलाने वाली गोमाता की निर्मम हत्या कर उसे विलुप्त करने में प्रयासरत है । उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के साथ इसकी रक्षा के लिए संवैधानिक धारा का निर्माण किया जाए । संत बालक दास ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि गउओं का विदेशी प्रजनन बंद हो तथा देश की कृषि गो आधारित हो, रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद का प्रयोग हो ।
संत बालक दास ने कहा कि पुरातन से ही भारतीय जीवन शैली ने गो आधारित जीवन का अनुसरण किया है । लेकिन वर्तमान में इसके उलटा प्रत्येक व्यक्ति आधुनिकता की धारा में बहकर अपनी जीवन शैली को बदल चुका है । उन्होंने कहा कि आधुनिकता की चमक में युवक गाँव छोड कर शहरों की ओर पलायन कर रहे है । संत बालक दास ने गो का सृष्टि का अनूठा उपहार बताते हुए कहा कि यदि हम गो पालन कर उसकी उपयोगिता समझे तो हम अपने गाँव में ही स्वयं रोजगार प्राप्त कर सकते हैं ।
संत बालक दास ने कहा कि आज गोवंश की समाप्ति की ओर बढने का कारण ही है कि भारत अपना परिचय खो रहा है । भारतीय मानुष चंद रूपए की लालच में माँ समान गो माता को गलत हाथों में बेच रहें हैं । उन्होंने कहा कि आज तक जनता से लुभावने वादे करने वाली अनेक राजनीतिक पार्टियाँ आई उनके नेता भी आए लेकिन आज तक कोई भी गो संरक्षण हेतु कानून लाने में समर्थ नही हो सका । उन्होंने कहा कि जब जब धर्म पर संकट आता है तो उसकी चिंता मात्रा देश के संतो को होती है ।
आज गोवंश की निर्मम हत्या से फिर देश में विश्व में धर्म संकट सामने खडा है । जिसके लिए ही संतों ने विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा का आयोजन किया है । उन्होंने बताया कि विश्व मंगल गो ग्राम यात्र गोमाता के संरक्षण हेतु जनजागृति अभियान है । जिसके द्वारा देश के लोगों को गोसंरक्षण व गो पालन हेतु प्रेरित किया जाएगा ।
गो ग्राम यात्रा के लिए आयोजित कार्यक्रम में केन्द्रीय गो ग्राम यात्रा के साथ चल रहे स्वामी ओंकारानंद सरस्वती के साथ स्थानीय चिन्मय मिषन के संत माधवानंद स्वामी, भारत सेवाश्रम के भूतेशानंद महाराज एवं विश्व हिन्दू परिशद के स्वामी मुक्तानंद पुरी महाराज उपस्थित थे । कार्यक्रम में वनवासी कल्याण समाज के सैकडों लोग भी उपस्थित थे । कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी गोभक्तों ने गोसंरक्षण का संकल्प लिया । इसके बाद गोमाता की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित