बुधवार, 4 नवंबर 2009

तुष्टिकरण की निती भारत को कहाँ ले जायेगी ?

भारत में आजादी के मायने भी अपने अपने हिसाब से हैं। स्वतंत्रता फुल है अपुन के पास , चाहे जो कीजिये कोई कहने वाला नही हैं। आप ख़ुद तय कीजिये आप को क्या केसे करना हैं कर डालिए चाहे वो राष्ट्रीय गीत की खिलाफत ही क्यों न हो ? और तो और वो भी जब भारत के गृह मंत्री श्रीमान चिदंबरम भी उसी कार्यक्रम में भी हो ? जयजय भारत जय जय गृह मंत्री अब क्या करेंगे संत्री ? कानून किस के लिए है किसको ख़बर ? कानून तो तुष्टिकरण की निती के अनुसार है डबल कानून हैं हमारे देश मैं, जनता में फर्क भी है इस देश में । राजनीती का 'राज' भी यही हैं। अब क्या कोई कुछ कर लेगा उनका जिनका आज वन्देमातरम से खिलाफत है उसका फतवा जारी हुआ हैं कल किसी और का फतवा जारी होगा ........ कांग्रेस मुस्लिम लीग आदि पार्टियों ने ही इस गीत को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया शहीदों की कुर्बानिया क्या भुला सकते है हम ? भाजपा का तो जन्म ही नही हुआ इस समय नही तो कांग्रेस सीधा सीधा कह देती साम्प्रदायिकता से ओत प्रोत हैं इसको राष्ट्रीय गीत से हटा देते हैं ? आप विचार करे आख़िर कहाँ जा रहा है यह देश ? कही दिग्भ्रमित तो नही हो गई है रह इसकी ......

इक समाचार पत्रिका 'जागरण' मैं छापी जय न्यूज़ आपके लिए .........
भाजपा ने चिदंबरम के खिलाफ मोर्चा खोला

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली देवबंद में जमात-ए-उलेमा हिंद के सम्मेलन में राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम् गाने के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए जाने के बावजूद उसके सम्मेलन में गृह मंत्री पी। चिदंबरम के भाग लेने पर गहरी आपत्ति जताई है। पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि इस सम्मेलन का बहिष्कार करने के बजाए गृह मंत्री का यह आचरण देश में अलगाववादी ताकतों को बढ़ावा देने वाला है। भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं की ऐसी करतूतों से ही अलगाववादियों व आतंकवादियों के हौंसले बुलंद होते हैं। भाजपा नेता ने इस मामले पर कांग्रेस व सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी कठघरे में खड़ा किया है। नकवी ने प्रधानमंत्री से पूछा है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने वाले जमात-ए-उलेमा हिन्द के सम्मेलन में गृहमंत्री पी। चिदंबरम को उसमें शिरकत करने दारूल उलूम देवबंद जाना पड़ा। उन्होंने इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया कि जब गृह मंत्री को मालूम हो गया था कि वंदेमातरम गीत के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के साथ सोमवार को जमात का सम्मेलन शुरू हुआ है तो वह आज उसमें क्यों शामिल हुए? इसके बाद तो उन्हें सम्मेलन का बहिष्कार करना चाहिए था, लेकिन चिदंबरम ने न केवल सम्मेलन में भाग लिया, बल्कि वंदेमातरम् के खिलाफ प्रस्ताव के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोले। नकवी ने कहा कि जब धार्मिक आस्थाओं के कारण वंदे मातरम् को गाने की अनिवार्यता नहीं है तो उसके खिलाफ प्रस्ताव पारित करके करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत करने की क्या जरूरत थी? इसके बाद गृह मंत्री द्वारा वहां जाकर ऐसे कार्यक्रम को वैधानिकता प्रदान करने के क्या अर्थ हैं? नकवी ने कहा कि वंदेमातरम् देश की आन-बान-शान का प्रतीक है.

स्त्रोत : http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=49&edition=2009-11-04&pageno=4

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित