गुरुवार, 26 नवंबर 2009

लौकिक और पारलौकिक आवष्यकताओं की प्रदात्री है गाय डा. जैन



मदुरै, नवंबर २५ – गाय में वो सामर्थ्य है जिससे संपूर्ण सृष्टि का पालन हो सकता है । गाय हमारी लौकिक और पारलौकिक दोनों आवष्यकता की पूर्ती करने में समर्थ है । यह कहना है विश्व हिन्दू परिषद के अंतराष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. सुरेन्द्र जैन का । वे विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के मदुरै पहुंचने पर आयोजित सभा में बोल रहे थे ।
गोरक्षा के नाम पर भारत को पीछे ले जाने के बुद्धिजीवियों के तर्क को नकारते हुए उन्होंने कहा कि भारत की ७० प्रतिशत जनता कृषि पर आधारित है और इनमें से भि ७२ पतिशत ऐसे किसान है जिनके पास केवल २ से ४ एकड ही जमीन है । आज देश में ४.०७ करोड हल और १.३० करोड बैलगाडी है । इसलिए किसान को ट्रैक्टर कृषियंत्रों की जरूरत नहीं, उसकी जरूरत गाय है ।
उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद के बढते प्रयोग से भारत की ३० करोड एकड भूमि बंजर हो गयी है । हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता घटने का व अपराधों के बढने का कारण भी रासायनिक खाद ही है । सरकार रासायनिक खाद के लिए प्रतिवर्ष १८ हजार करोड रूपये की सब्सिडी देती है । उन्होंने कहा कि अगर सरकार यह धन गो आधारित अनुसंधान में लगाए तो भारत पुनः विकास की ओर गति करने लग जाएगा ।
डा. जैन ने कहा कि यान्त्रिक कल्लखानों में जितने पानी का उपयोग होता है उसे अगर बचा लिया जाए तो भारत की जल समस्या व कावेरी विवाद का हल हो जाएगा । डा. जैन कहा कि गांव की उपेक्षा करने पर देश का विकास संभव नहीं है । दुर्भाग्य से हमने देश की जडों को नहीं पहचाना, आज भारत विकास के नाम पर विनाश की ओर जा रहा है । यदि मानवता को बचाना है तो भारत को बचाना होगा, भारत को बचाना है तो गांव को बचाना होगा और गांव को बचाना है तो गाय को बचाना होगा ।
मदुरै के मेला मासी स्ट्रीट पर आयोजित सभा को यात्रा प्रमुख श्री राघवन, रामकृष्ण आश्रम विरतुनगर के स्वामी स्वरूपानंद, रामकृष्ण मठ तिरवेटकं के स्वामी परमानंद, स्वामी आत्मानंद आदि संतों ने संबोधित किया ।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित