शुक्रवार, 26 अक्तूबर 2012

संस्कारक्षम समाज निर्मिती में योगदान दे महिलाये: शान्ताक्का

संस्कारक्षम समाज निर्मिती में योगदान दे महिलाये: शान्ताक्का 

(राष्ट्र सेविका समिति नागपुर का विजयादशमी उत्सव)

Source: newsbharati     

$img_title“संगठित शक्ति के माध्यम से ही राक्षसी वृत्ति का विध्वंस करना संभव हो सकेगा. दुर्गा माता संगठित शक्ति का प्रतीक है. इसलिए आज महिलाओं को दुर्गा रूप धारण कर समाज में व्याप्त सभी प्रकार के राक्षसी प्रवृत्तियों को नष्ट करने हेतु आगे आना होगा.” यह कहना है राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका वन्दनीय शान्ताक्का जी का.
नवरात्री के अष्टमी के दिन राष्ट्र सेविका समिति के विजयादशमी उत्सव में सेविकाओं को संबोधित करते हुए वन्दनीय शान्ताक्का ने समाज में महिलाओं की और देखने की दृष्टी में जो अवांछनीय परिवर्तन दिखाई देता है उस की तीखी आलोचना की और इस ‘उपभोग्य वस्तु’ वाली प्रतिमा के लिए महिलाओं को भी कुछ हद तक जिम्मेदार ठहराया.
$img_titleपंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति शरद निम्बालकर इस उत्सव में प्रमुख अतिथि थे. मंच पर समिति की विदर्भ प्रान्त कार्यवाहिका सुश्री सुलभा गौड़ एवं नागपुर विभाग कार्यवाहिका सुश्री करुणा साठे विराजमान थी.
अपने भाषण में वन्दनीय शांताक्का ने कहा कि आज हमारे हिन्दू संस्कृति पर अनेक आक्रमण हो रहे है. उन के प्रतिकार के हेतु हमें शक्ति चाहिए. माँ दुर्गा शक्ति का प्रतीक है. हर स्त्री शक्तिरूपिणी है यह समिति की मान्यता है. इसी आधार पर समिति के माध्यम से उस शक्ति को जगाने का प्रयास अनवरत चल रहा है. भारतीय संस्कृति में व्यक्ति के दुष्ट गुणों के नाश के लिए अनेक सुन्दर उपाय बताये है. विजयादशमी का संदेश भी यही है.
माँ सरस्वती, माँ लक्ष्मी और माँ दुर्गा यह ज्ञान, संपत्ति और शक्ति के प्रतीक है. एक व्यक्ति के जीवन से ले कर विश्व को सुव्यवस्थित रूप से चलने के लिए ज्ञान, संपत्ति एवं शक्ति की महती आवश्यकता है. महिलाओं के क्षमता का परिचय भी इसी से होता है क्योंकि संपूर्ण विकसित तथा सुसंस्कृत व्यक्तिमत्त्व का निर्माण एक माँ के द्वारा ही संभव हो सकता है और वह करती भी है. निसर्गतः प्राप्त मातृत्व से वह तेजस्वी हिन्दू राष्ट्र का निर्माण कर सकती है.
$img_titleस्वामी विवेकानंद, डेविड फ्राले जैसे विद्वान लोगों के कथन को उद्धृत करते हुए प्रमुख संचालिका ने कहा कि हिन्दू ही संपूर्ण विश्व में समरसता निर्माण कर सकता है, क्योंकि दूसरों के हित का विचार उसके रक्त में ही समाहित है. इसीलिए इस पवित्र विचार के साथ प्रत्येक हिन्दू ने अपनी तेजस्विता बढ़ाकर धर्म, संस्कृति और परंपरा में विश्वास रख कर स्वाभिमान के साथ जीना सीखना चाहिए.
प्रसिद्ध महिला वैज्ञानिक ‘मिसाइल वुमन’ तोनी थामस ने अग्नि-५ के परिक्षण के पूर्व इस मिसाईल की भारतीय पद्धति से पूजा की. उनसे पूछने पर उन्होंने कहा कि मै गर्व से कहती हूँ कि मै हिन्दू हूँ. इस प्रकार की स्वाभिमान निर्माण करने वाली घटनाओं को युवा पीढ़ी के समक्ष रखने की आवश्यकता है. समिति की प्रमुख ने कहा कि, आत्मविश्वास से ओतप्रोत तेजस्वी हिन्दू ही धर्माधिष्ठित समाज निर्माण कर सकता है. सत्चरित्र, समृद्धि, सात्विक शक्तियुक्त और सुव्यवस्थित समाज ही धर्माधिष्ठित समाज है.
$img_titleउन्होंने कहा कि, महालक्ष्मी सत्चरित्र और समृद्धि का प्रतीक है. ‘इनफ़ोसिस’ की प्रमुख सुधा मूर्ती का उदहारण देते हुए आप ने कहा कि, “अलक्ष्मी हमारे घर नहीं आ सकेगी ऐसा निश्चय करने वाली माताओं के कारण ही भ्रष्टाचार पर रोक लग सकती है. ऐसे मातृत्व के निर्माण के लिए समिति कटिबद्ध है”.
वन्दनीय शान्ताक्का ने आगे कहा कि, भ्रष्टाचार और घोटालों की बाढ़ को रोकने का सामर्थ्य संगठित शक्ति में है. आज भारतीय समाज अपने मूल चिंतन से हट कर, अपने जीवन में धन कमाने को ही अग्रक्रम दे रहा है. इस कारण उसका नैतिक अध:पतन होता दिखाई देता है. पुणे के होटल में हाल की घटी घटनाएँ इसी पतन की और निर्देश करती है.
महिलाओं के ऊपर होने वाले अत्याचारों का उल्लेख करते हुए आप ने कहा कि, दिन प्रतिदिन बढ़ते हुए अत्याचार का कारण महिलाओं की और देखने की समाज की दृष्टी में है. महिला को एक उपभोग्य वस्तु माना जा रहा है. यह स्थिति बदलने की आवश्यकता है.
अपने पडोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधो पर जोर देते हुए उन्होने कहा कि, विभिन्न देशों के साथ हमारे जो सम्बन्ध है उस के प्रति हमें सचेत रहना होगा. चीन के विस्तारवादी नीति का उल्लेख करते हुए आप ने देश के नेताओं को चीन से सावधान रहने की चेतावनी दी.
$img_titleअपने वक्तव्य में पूर्व कुलपति डॉ शरद निम्बालकर ने कहा कि, पुरुष प्रधान संस्कृति के कारण महिलाओं की स्थिति ठीक नहीं है. अतः स्त्री को उसके स्वत्व की पहचान करा देना आज की महती आवश्यकता है. महिलाओं का बाज़ार के रूप में अवमूल्यन होनेसे समाज में एक नया धोखा निर्माण हुआ है. कन्या भ्रूण हत्या यह निंदनीय तथा लज्जास्पद है. इसको रोकने हेतु कानून है पर उस पर अमल नहीं होता, अतः केवल कानून बनाने से काम नहीं चलेगा. स्त्री को शिक्षित करना अब बहुत जरुरी हो गया है. तभी विजयादशमी जैसे पर्वों का महत्त्व अबाधित रहेगा.
प्रारंभ में प्रास्ताविक और अतिथि का परिचय सुश्री स्मिता पत्तरकिने ने करवाया. कार्यक्रम का सञ्चालन सुश्री मेधा नांदेडकर ने किया और मयूरी वालदे ने व्यक्तिगत गीत सदर किया.
शुरू में सेविकाओं ने योगासन, लेज़िम, घोष आदि प्रात्यक्षिक का प्रस्तुतीकरण किया.
$img_titleइस कार्यक्रम में यशोधरा राजे भोसले, वासंतिका राजे भोसले, राजकुमारी मोहिनि राजे भोसले, भारतीय श्री विद्या निकेतन की दीपा दीक्षित प्रमुख रूप से उपस्थित थी.

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित