बुधवार, 3 अक्तूबर 2012

हिन्दू संस्कृति को अक्षुण बनाये रखने की आवश्यकता - सरसंघचालक पूजनीय मोहन जी भागवत

देश के किसी कोने में शांति नहीं है, इसके लिए संपूर्ण हिन्दू समाज को एकजुट होने की जरूरत है
हिन्दू संस्कृति को अक्षुण बनाये  रखने की आवश्यकता प्रतिपादित की.
अपूर्व उत्साह, हर ओर गूंजा वंदे मातरम

जैसलमेर २ अक्टूबर २०१२ . सीमावर्ती क्षेत्र के जैसलमेर जिले में पहली बार  पधारे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक पूजनीय मोहन जी भागवत  की उपस्थिति  में  हिन्दू शक्ति संगम संपन्न हुआ. जैसलमेर के स्वयंसेवको तथा नागरिक गणों का  उत्साह देखते ही बनता था.  सर्वप्रथम चार अलग अलग स्थानों से पथ संचलन प्रारंभ हुए.  जिसका त्रिवेणी  संगम हनुमान चौक में ठीक ३.२१ बजे हुआ. संचलन में आठ हजार से अधिक स्वयंसेवको ने हिस्सा लिया. जगह जगह पर  स्वयंसेवको का पुष्प से स्वागत किया गया.शहीद  पूनम सिंह स्टेडियम में हिन्दू शक्ति संगम कार्यक्रम  पांच बजे प्रारंभ हुआ. सरसंघचालक पूजनीय मोहन भागवत जी पहले शहीद पूनम सिंह,  महात्मा गाँधी एवं लाल बहादुर शास्त्रीके चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की. सरसंघचालक मोहन जी भागवत ने सबसे पहले मंच पर विराजमान संतो का अभिवादन किया. ध्वजारोहण एवं प्रार्थना के पश्चात्  सह्गीत हुआ.  
स्वयंसेवकों  द्वारा दंड, दंड योग , सूर्य नमस्कार का प्रदर्शन किया गया. पूजनीय सरसंघचालक मोहन जी भागवत ने स्वयंसेवको तथा उपस्थित नागरिक गणों को उधबोधन देते हए कहा की हिंदुस्तान को फिर से परम वैभव पर पहुचाने के लिए हमें अपने आप को पहचानना  होगा.हमें गुण संपन्न बनना होगा तभी देश का भाग्य बदलेगा. हिन्दुत्व विश्व के लिए कल्याणकारी है. स्वार्थ को छोड़ कर देश के लिए न्योछावर होना के लिए तैयार रहना होगा.
देश के सुरक्षा के बारे में बोलते हुए भागवत जी ने कहा कि सीमायें कही से भी सुरक्षित नहीं है.  कही कही तारबंदी अच्छी है मगर बंगलादेश से वैसे ही आ जा सकते है.  जाली मुद्रा लेकर कोई भी कही आ जा सकता है.   न पश्चिम में पाकिस्तान और न ही उतर में चीन पर कोई विश्वास कर सकता है. हिन्दू अपने ही देश में विस्थापित की तरह जी रहा है. गरीब किसान की चिंता करते हुए ऍफ़ डी आई के निर्णय को किसानो तथा छोटे दुकानदारो के लिए अति नुकसानदायक बतलाया. सारी नीतियों में राजनीति  ही चल रही है और राजनीति वोटो  के लिए चल रही है. महाभारत और स्वामी विवेकानंद जी के द्रष्टान्त  बतलाते हुए मोहन जी भागवत ने हिन्दू संस्कृति को अक्षुण बनाये  रखने की आवश्यकता प्रतिपादित की.
हमारा देश खतरों से घिरा हुआ है, यह बात सभी लोग महसूस भी कर रहे हैं। देश के किसी कोने में शांति नहीं है। उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में राष्ट्र विरोधी ताकतें पनपी हुई हैं। मोहन भागवत ने कहा कि ऐसा कोई देश नहीं है जहां का देशवासी अपने ही देश में शरणार्थी शिविर में रह रहा हो, लेकिन हमारे देश में हिन्दू विस्थापितों के शिविर में रह रहा है। चाहे वह कश्मीर हो या फिर गुवाहटी। उन्होंने कहा कि अभारतीय ताकतें कट्टरपंथी हैं. सारी राष्ट्रविरोधी ताकतें चारों तरफ छोटे छोटे उपद्रव करवाकर हिन्दुस्तान को आजमा रही है। उन्हें देश में अन्दर  समर्थन भी मिल जाता है।

संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि हमारे सामने जो समस्याएं और ताकतें हैं वह हमारी दुर्बलताओं पर पलने वाली हैं। इसलिए दुर्गुण छोड़कर एक होना पड़ेगा। पवित्र हिन्दू धर्म को मिटाने की ताकत किसी में नहीं है। उन्होंने उपस्थित लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान को विश्व गुरु बनाने वाला स्वयंसेवक बस्ती बस्ती में चाहिए। वातावरण बनाना है, समान्य व्यक्ति वातावरण में काम करता है। देश की वर्तमान स्थिति हमें भुगतनी पड़े इसलिए इस स्थिति को बदलना होगा। संघ को पैसा व शाबाशी नहीं चाहिए कार्यकर्ता चाहिए। देश व हिन्दू समाज के उद्धार के लिए स्वाभिमान के आधार पर संपूर्ण एकता लानी होगी, देश के लिए जीना होगा।

कदम से कदम मिलाते हुए स्वयंसेवक जब शहर के मुख्य मार्गों से निकले तब शहर का माहौल ही बदल गया। लगभग शहर के हर कोने में स्वयंसेवकों की कदम ताल व बैंड वादन की धुन सुनाई पड़ रही थी। स्वयंसेवकों के पथ संचलन को देखने पूरा शहर उमड़ पड़ा। बाजार में जाम लग गया और कदम रखने तक की जगह नहीं मिली। जगह जगह पुष्प वर्षा और वंदे मातरम व भारत माता जयकारें लगाए जा रहे थे। यह नजारा था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विविध धारा पथ संचलन का जिसमें हिन्दुओं का रैला शहर के मुख्य मार्गों से निकला। मंगलवार को जैसलमेर में हुआ कार्यक्रम ऐतिहासिक रहा। कई लोगों ने कहा कि ऐसा कार्यक्रम पहले कभी नहीं हुआ।

सीमावर्ती क्षेत्र में माताओं एवं बहनों में अपार उत्साह देखत ही बन रहा था. सेवा बस्तियों सहित शहर की सभी बस्तियों की सड़को पर सेकड़ो स्थानों पर माताओ एवं बहिनों द्वारा आकर्षक रंगोली सजाई गई.
 कार्यक्रम के लिए जैसलमेर शहर  के हर घर से संपर्क किया गया. सभी समाजो ने बाद चढ़ कर हिन्दू शक्ति संगम में सहभाग  किया.
जैसलमेर जिले के सुदूर गाँव जैसे मदासर, नौख इत्यादि स्थानों से ३०० किलोमीटर चल कर न केवल स्वयंसेवको ने बल्कि ग्रामीण बंधुओ  ने भी कार्यक्रम में बढ चढ़ कर हिस्सा लिया.

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित