सोमवार, 27 अक्तूबर 2014

कश्मीर पर जनजागरूकता जरूरी-हस्तीमल


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख हस्तीमल जी उध्बोधन देते हुए


कश्मीर पर जनजागरूकता जरूरी-हस्तीमल

देहरादून।26 अक्टूबर। कश्मीर समस्या भारत की सबसे बड़ी समस्या है। इस पर जनजागरूकता आज की महती आवश्यकता है। देश की जनता इस बारे में जागरूक होगी और नेताओं पर दबाव बनाएगी तभी इसका उचित समाधान निकल सकता है। ये समस्या देश के बड़े लोगों द्वारा छोटे मन से किए गए कार्यो का परिणाम है। आज कश्मीर के 2 लाख,22 हजार,236 वर्ग किमी में से भारत के पास मात्र 101437 वर्ग किमी ही है।जबकि 78 हजार,114 वर्ग किमी पाकिस्तान के पास और 42 हजार 685 वर्ग किमी का हिस्सा चीन के कब्जे में है। इसके अलावा 5130 वर्ग किमी का हिस्सा पाकिस्तान ने चीन को उपहार में दे रखा है। इस तरह से पाकिस्तान और चीन के पास जम्मू और कश्मीर के कुल 222236 वर्ग किमी क्षेत्रफल का 1 लाख 20 हजार,437 वर्ग किमी का हिस्सा है। जबकि भारत के पास सिर्फ 101437 वर्ग किमी का ही हिस्सा है जिसको हड़पने के लिए पाकिस्तान और चीन दोनों बराबर प्रयास करते रहते है।

यह कहना है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख हस्तीमल जी का। श्री हस्तीमल जी आज यहां महानगर संपर्क विभाग द्वारा विश्व संवाद केन्द्र में कश्मीर विलय दिवस के अवसर पर आयोजित एक दिवसीय गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।

उन्होंने भारती स्वतत्रंता के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की राजनीतिक चतुराई और दृढ़ता के चलते भारत में 565 रियासतों का शांतिपूर्ण विलय हुआ लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री की उदासीनता के परिणामस्वरूप कश्मीर भारत के लिए समस्या बन गया। यदि उस समय सरदार को छूट दी गई होती तो यह समस्या उसी समय दूर हो गई होती। उन्होंने कहा कि इतिहास बताता है कि उस समय राजस्थान की बीकानेर,जैसलमेर और जोधपुर रियासते भी भारत की बजाय पाकिस्तान में मिलना चाहती थी लेकिन पटेल की दृढ़ता के चलते वे ऐसा नहीं कर सकी। ऐसा ही कश्मीर के साथ भी होता लेकिन राजनीतिक उदासीनता के चलते ऐसा हो नही पाया। सरदार पटेल ने साम,दाम,दंड,भेद को अपना कर भारत का एकीकरण किया।

उन्होंने कहा कि भारत के लिए आज कश्मीर सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए वहां के विस्थापितों की समस्याओं पर भी तुरंत ध्यान दिया जाना आवश्यक है। आज जम्मू-कश्मीर की समस्याएं सिर्फ वहां के निवासियों की ही समस्या नहीं बल्कि पूरे भारत की समस्या है इसलिए इसके निदान में पूरे भारत की जनता को जागरूक होना पड़ेगा और कार्य करना होगा।

हस्तीमल जी ने जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक,राजनीतिक,ऐतिहासिक और सामरिक महत्व को रेखांकित किया और उसके लिए बलिदान हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी समेत अन्य लोगों का भी विस्तार से उल्लेख किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त बिग्रेडियर केजी बहल ने कहा कि 1965 में भारत का नेतृत्व पंडित लालबहादुर शास्त्री के मजबूत हाथों में था और जब पाकिस्तान ने कश्मीर क्षेत्र में युद्ध छेड़ा तो भारतीय फौज ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया और हमारी फौजें पाकिस्तान के लाहौर शहर के मुहाने तक पहुंच गई थी। उनसे सेना ने आगे बढ़ने और लाहौर टेकओवर करने की अनुमति मांगी लेकिन पीएम ने नहीं दिया वरना आज कश्मीर देश के लिए समस्या नहीं बना होता। ब्रिगेडियर ने कहा कि कश्मीर हमारे लिए बड़ी समस्या है और पहले हमको इस पर ध्यान देना होगा छोटी छोटी समस्याएं बाद में स्वतः दूर हो जाएगी। गोष्ठी में कश्मीरी विस्थापित मनोज पण्डित ने भी मर्मस्पर्शी शब्दों में अपने विचार रखें।

कार्यक्रम के प्रारंभ में महानगर संपर्क प्रमुख राजेश सेठी ने विषय की प्रस्तावना रखी जिसमें जम्मू-कश्मीर के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम का संचालन पवन शर्मा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन महानगर संघचालक गोपाल कृष्ण मित्तल ने किया।

कार्यक्रम में संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपाशंकर,महानगर प्रचारक महेन्द्र,प्रान्तकार्यवाह लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल,क्षेत्र संपर्क प्रमुख शशिकांत दीक्षित,महानगर संघचालक रोशनलाल,पार्षद अनीता सिंह,नंदलाल,धीरेन्द्र प्रताप सिंह,अमर बहादुर समेत बड़ी संख्या में अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित