मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

शत शत नमन !!! जलियांवाला बाग कांड की 91वीं वर्षगांठ!!! कोई भला कैसे भूलेगा जलियांवाला बाग को


जलियाँवाला बाग हत्याकांड
कोई भला कैसे भूलेगा जलियांवाला बाग को

जालियाँवाला बाग हत्याकांड भारत के पंजाब प्रान्त के अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर के निकट जलियाँवाला बाग में १३ अप्रैल १९१९ (बैसाखी के दिन) हुआ था। रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी जिसमें जनरल ओ. डायर नामक एक अँगरेज ऑफिसर ने अकारण उस सभा में उपस्थित भीड़ पर गोलियाँ चलवा दीं जिसमें १००० से अधिक व्यक्ति मरे और २००० से अधिक घायल हुए।[१]
१३ अप्रैल १९१९ को डॉ. सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी तथा रोलेट एक्ट के विरोध में अमृतसर के जलियाँवाला बाग में लोगों ने एक सभा रखी जिसमें उधमसिंह लोगों को पानी पिलाने का काम कर रहे थे। इस सभा से तिलमिलाए पंजाब के तत्कालीन गवर्नर माइकल ओ डायर ने अपने ही उपनाम वाले जनरल डायर को आदेश दिया कि वह भारतीयों को सबक सिखा दे। इस पर जनरल डायर ने ९० सैनिकों को लेकर जलियाँवालाबाग को चारों ओर से घेर लिया और मशीनगनों से अंधाधुँध गोलीबारी कर दी,[२] जिसमें सैकड़ों भारतीय मारे गए। जान बचाने के लिए बहुत से लोगों ने पार्क में मौजूद कुएं में छलांग लगा दी। बाग में लगी पट्टिका पर लिखा है कि १२० शव तो सिर्फ कुए से ही मिले। आधिकारिक रूप से मरने वालों की संख्या ३७९ बताई गई जबकि पंडित मदन मोहन मालवीय के अनुसार कम से कम १३०० लोग मारे गए। स्वामी श्रद्धानंद के अनुसार मरने वालों की संख्या १५०० से अधिक थी जबकि अमृतसर के तत्कालीन सिविल सर्जन डॉक्टर स्मिथ के अनुसार मरने वालों की संख्या १८०० से अधिक थी।
इस हत्याकाण्ड के विरोध में रवीन्द्र नाथ ठाकुर ने इस हत्याकाण्ड के विरोध में 'सर' की उपाधि लौटा दी और उधमसिंह ने लन्दन जाकर पिस्तौल की गोली से जनरल डायर को भून दिया और इस हत्या काण्ड का बदला लिया।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित