बुधवार, 28 अप्रैल 2010

सैलानी देखेंगे बॉर्डर का नजारा


बीकानेर। अंतरराष्ट्रीय सीमा, तारबंदी, जीरो लाइन सीमा चौकी, बॉर्डर आउट पोस्ट अब अब इतने गोपनीय नहीं रहेंगे। बल्कि अब ये पर्यटन स्थल होंगे। सीमा सुरक्षा बल के पश्चिमी सीमान्त के श्रीगंगानगर सेक्टर के बाद बीकानेर सेक्टर में भी इसे "प्रायोगिक प्रोजेक्ट" के रूप में लागू किया जा रहा है। बीकानेर सेक्टर की दो चौकियों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। इनमें खाजूवाला के पास "सिसाड़ा" और रणजीतपुरा से कुछ दूरी पर स्थित "मारूति" चौकियां शामिल हैं। सुरक्षा और अन्य तथ्यों के अध्ययन के बाद ही अन्य चौकियों पर ऎसी परियोजना शुरू करने पर विचार किया जाएगा।

श्रीगंगानगर सेक्टर की "हिन्दूमल कोट" चौकी को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया गया है। वहां तारबंदी के पार नजारा देखने के लिए स्तरीय दूरबीन तथा धूप से बचाव व छाया के लिए शैड बनाया गया। अब बीकानेर सेक्टर की "सिसाड़ा" और "मारूति" चौकी पर सुविधाएं विकसित करने के लिए सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) ने 20-20 लाख रूपए स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से इन चौकियों पर आगुंतकों के लिए विश्राम स्थल,फर्नीचर, बाथरूम तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। सिसाड़ा में विश्राम गृह बनकर तैयार है। इसे सिसाड़ा चौकी से लगभग एक किलोमीटर दूर पीरजी की दरगाह के पास विकसित किया गया है। वहां ओपी टावर भी है। यहां दूरबीन आदि उपलब्ध करवाई जाएंगी। सैलानी टावर पर चढ़कर सीमा पार का नजारा देख सकेंगे। ऎसी ही सुविधाएं मारूति चौकी पर भी विकसित की जाएंगी।

स्कूली बच्चों को प्राथमिकता
"सिसाड़ा चौकी के पास ही पीर बाबा की दरगाह के पास विश्रामगृह बनकर तैयार है। वहां टावर भी है। नागरिकों को वहीं से सीमा का नजारा देखने दिया जाएगा।स् कूली बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी। "-विपिन कुमार सिंह, उपमहानिरीक्षक, सीमा सुरक्षा बल बीकानेर सेक्टर40 लाख रूपए स्वीकृत "बीकानेर सेक्टर की दो चौकियों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम से 20-20 लाख रूपए की स्वीकृति मिली हैं।

हिन्दूमल कोट जैसा ही रूझान मिला तो मारूति व सिसाड़ा के बाद अन्य चौकियों को भी पर्यटन के लिए विकसित किया जा सकता है।"-हनुमानमल आर्य, सहायक निदेशक, पर्यटन विभाग

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित