सोमवार, 31 अगस्त 2009

जसवंत के जिन्ना दार्जलिंग के दामाद

Agency Monday, August 31, 2009 02:22 [IST]

नई दिल्ली. भाजपा से निष्कासन का दंक्ष झेल रहे जसवंत सिंह और पाकिस्तान के पूर्व कायदेआजम जिन्ना के बीच अब एक अनोखा संबंध निकलकर सामने आया है। जी हां यह संबंध कुछ और नहीं बल्कि जसवंत के जिन्ना दार्जलिंग के दामाद के रूप में सामने आया है।

जसवंत सिंह की किताब की अगर सबसे ज्यादा कही मांग है तो वो है दार्जलिंग में। इसकी एक वजह तो ये है की जसवंत जी अभी मई वहां से लोक सभा सांसद निर्वाचित हुए है। इसलिए एक वजह तो यह हो सकती है। लेकिन इसकी दूसरी तरफ एक और वजह भी है जो शायद कम ही लोगों को मालूम है, वह है जिन्ना-जसवंत में एक अनोखा संबंध।
यह सबसे बड़ी वजह है जिन्ना की दूसरी शादी। जी हां आपको जानकर शायद ही आश्चर्य होगा कि जिन्ना की पहली पत्नी की मौत हो जाने के बाद उन्होंने अपनी दूसरी शादी दार्जलिंग की एक पारसी लड़की के साथ की थी। लड़की का नाम रत्नाबाई था।
लडकी के पिता दिनशा मानेकजी जिन्ना के दोस्त थे। उस समय जिन्ना की उम्र लगभग 40 थी, जब वे दार्जलिंग आए तो वहां पर उनकी मुलाकात रत्नाबाई से हुई। वे रत्नाबाई को फ्रेंच सिखाने में मदद करते थे। इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती गईं और ये एक दूसरे को पसंद करने लगे। उस समय रत्नाबाई की उम्र 16 साल थी।
जिन्ना ने जब रत्नाबाई का हाथ उनके पिता मानेकजी से मांगा तो वे नाराज हो गए। लेकिन तब तक रत्नाबाई जिन्ना को अपना दिल दे चुकी थी और पूरे दो साल रुकने के बाद जब वे 18 साल की हो गई तो कलकता आकर उन्होंने इस्लाम धर्म कबूल कर जिन्ना से शादी कर ली इसके बाद वे पाकिस्तान चली गईं। शादी के समय रत्नाबाई के घर से वहां पर कोई मौजूद नहीं था।
रत्नाबाई और जिन्ना की शादी के बारे में आज भी शायद बहुत कम लोग जानते हों लेकिन दार्जलिंग में आज भी लोगों के जेहन में जिन्ना-रत्नाबाई की शादी की बात याद है। शायद यही वजह है जब कि जसवंत सिंह की किताब प्रकाशित हुई तो यहां के लोगों में किताब पढ़ने के लिए एक अलग ही उत्सुकता नजर आई। जसवंत की किताब पढ़ने के लिए लोगों में इतना ज्यादा उस्ताह है कि अब बाजार में किताब आने के बाद ही हाथों हाथ बिक चुकी है। और हर दिन लोग किताब खरीदने के लिए बुक सेंटर पर आ रहे हैं लेकिन उन्हें अब मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। प्रकाशकों का कहना है कि जल्द ही किताब की दूसरी खेप आ जाएगी।

source: http://www.bhaskar.com/2009/08/31/090831022341_jaswant_singh_and_jinna.html

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित