शुक्रवार, 7 अगस्त 2009

महंगा पड़ सकता है आतंकवाद से समझौता

नई दिल्ली। पाकिस्तान से संबंधों के मामले में अपनी पूर्ववर्ती भाजपा नीत राजग सरकार की नीतियों के अनुसरण के मौजूदा संप्रग सरकार के दावे के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने आज कहा कि सरकार ने पड़ोसी मुल्क से दोस्ती के लिए आतंकवाद से समझौता कर लिया है और भविष्य में यह बहुत महंगा पड़ सकता है।
आडवाणी ने यहां अपनी पुस्तक 'माई कंट्री माई लाइफ' के उर्दू संस्करण 'मेरा वतन मेरी जिंदगी' के विमोचन के अवसर पर कहा कि शर्म अल शेख में भारत और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में कई ऐसे बिंदु हैं, जिनसे पता लगता है कि केंद्र की कांग्रेस नीत सरकार ने पाकिस्तान से हर कीमत पर मित्रता के लिए आतंकवाद से समझौता कर लिया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा नीत राजग सरकार की पाकिस्तान के प्रति नीति के दो हिस्से थे। पहला यह कि पाकिस्तान से दोस्ती की ईमानदारी से लगातार कोशिश की जाए, और दूसरा यह कि आतंकवाद से किसी भी तरह का समझौता न किया जाए।
आडवाणी ने कहा कि संप्रग सरकार ने इस नीति के एक हिस्से को तोड़कर अलग कर दिया है। उसने सिर्फ दोस्ती को ही मकसद बना लिया जबकि आतंकवाद के मुद्दे से किनारा कर लिया। यह रवैया भविष्य में बहुत महंगा पड़ सकता है।
गौरतलब है कि शर्म अल शेख में भारत-पाक संयुक्त बयान पर विवाद पैदा होने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में कहा था कि उनकी सरकार अपनी पूर्ववर्ती राजग सरकार की नीतियों का ही अनुसरण कर रही है और संयुक्त बयान से देश में किसी भी राय की अनदेखी नहीं हुई है।
आडवाणी ने कहा कि देश के हर नागरिक को आतंकवाद के प्रति कोई रियायत नहीं बरतने का इरादा करते हुए खुद को इसके लिए मजबूत करना चाहिए।
अयोध्या के आंदोलन को अपनी जिंदगी की बहुत अहम घटना बताते हुए भाजपा नेता ने कहा कि अयोध्या मसले का हल सिर्फ बातचीत से ही निकल सकता है। उन्होंने कहा कि हिन्दू और मुस्लिम नेताओं को इस मुद्दे पर बातचीत करनी चाहिए।
आडवाणी ने कहा कि भारत को आध्यात्मिक महाशक्ति बनाना भी अब उनका लक्ष्य बन गया है और उन्हें उम्मीद है कि हिन्दुस्तान एक दिन यह मुकाम जरूर हासिल करेगा। अपनी किताब का जिक्र करते हुए आडवाणी ने कहा कि भारत की महानता ही इस किताब की विषय वस्तु है और उर्दू में प्रकाशित होने से इसका महत्व और बढ़ गया है।
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर कहा कि साम्प्रदायिक व्यक्ति के रूप में पेश किए गए आडवाणी दरअसल एक बेहद संवेदनशील व्यक्ति हैं जिन्होंने हमेशा इंसाफ और मानवता की राजनीति की। उन्होंने कहा कि भाजपा ने कभी भी लोगों को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश नहीं की। राजनीतिक लाभ के लिए लोगों ने आडवाणी और संघ की गलत छवि पेश की।
पुस्तक का विमोचन पत्रकार एवं पूर्व सांसद एम. जे. अकबर ने किया। समारोह को प्रख्यात इस्लामी विचारक मौलाना वहीदउद्दीन खान, पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री शाहनवाज कुरैशी, राज्यसभा की पूर्व सभापति नजमा हेपतुल्ला, आडवाणी की पुत्री प्रतिभा आडवाणी और रोजनामा उर्दू सहारा के सम्पादक अजीज बर्नी ने मुख्य रूप से सम्बोधित किया.

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित