शनिवार, 1 अगस्त 2009

मालेगांव आरोपियों पर मकोका नहीं

मुंबई [जासं]। मालेगांव विस्फोट कांड की चर्चित अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा ठाकुर एवं कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित सहित 11 आरोपियों को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून [मकोका] से मुक्त कर दिया गया है। शुक्रवार को विशेष मकोका अदालत के जज वाई.डी. शिंदे ने कहा कि ये आरोपी किसी संगठित अपराधी नेटवर्क से जुड़े नहीं हैं

अदालत का यह निर्णय जहां आरोपियों के लिए बड़ी राहत है, वहीं मुंबई पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा [एटीएस] के लिए बड़ा झटका है। हालांकि शिंदे ने पुरोहित की जमानत याचिका खारिज कर दी।

अदालत की दलील

जज शिंदे ने कहा कि किसी भी आरोपी पर एक से अधिक आरोपपत्र दाखिल नहीं है, ना ही इनमें से कोई संगठित अपराध गिरोह का सदस्य है। इसलिए उन पर मकोका के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। अब सभी आरोपियों पर भारतीय दंड विधान की संहिता के तहत नाशिक की सत्र अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा।

सरकार करेगी अपील

विशेष अदालत ने अपने फैसले पर अमल चार सप्ताह के लिए रोक दिया है। ऐसा इसलिए ताकि राज्य सरकार चाहे तो हाई कोर्ट में आदेश को चुनौती दे सकती है। राज्य सरकार ने फैसले के तुरंत बाद हाई कोर्ट जाने की घोषणा भी कर दी है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के.पी. रघुवंशी ने कहा कि वह फैसले की प्रति मिलने के बाद हाई कोर्ट में अपील करेंगे।

यह था मामला

महाराष्ट्र में मकोका की विशेष अदालत में उन आरोपियों पर मुकदमा चलाया जाता है, जिन पर पहले से कम से कम दो ऐसे संगीन आरोप लगे हों, जिनमें तीन वर्ष से अधिक की सजा का प्रावधान हो। इस प्रकार के आरोपों से घिरे किसी व्यक्ति के साथ यदि कुछ और लोग भी इसी प्रकार के संगीन आरोप में सहआरोपी हों तो उन सभी पर मकोका के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। मालेगांव कांड में इस प्रकार के दो से ज्यादा आरोप पुणे निवासी राकेश धवाड़े पर लगे थे। धवाड़े पर आरोप था कि मालेगांव विस्फोट कांड से पहले नांदेड़ और परभणी में हुए विस्फोटों के लिए भी उसने प्रशिक्षण दिया था एवं विस्फोटक उपलब्ध कराए थे। एटीएस ने धवाड़े पर लगे इन्हीं आरोपों को आधार बनाते हुए उक्त कांड के सभी आरोपियों पर पिछले वर्ष 20 नवंबर को मकोका लगाने की सिफारिश की थी। यह विस्फोट पिछले वर्ष 29 सितंबर को मालेगांव के व्यस्ततम चौराहे के पास हुआ था, जिसमें छह लोग मारे गए थे एवं 101 घायल हुए थे। एटीएस ने जनवरी में इस मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ 11 हजार पन्नों का आरोपपत्र पेश किया था।

कमजोर कड़ी

दो दिन पहले ही धवाड़े को परभणी विस्फोट कांड से बरी कर दिया गया है। इस कारण इस चर्चित कांड के वकीलों को मकोका अदालत में यह साबित करने का मौका मिल गया है कि साध्वी एवं कर्नल पुरोहित सहित इस मामले के अन्य आरोपियों पर मकोका लगाने के लिए ही एटीएस द्वारा धवाड़े का नाम परभणी विस्फोट कांड में घसीटा गया।

..आरोपी और आरोप

साध्वी प्रज्ञा सिंह : पुलिस के मुताबिक मालेगांव धमाके में इस्तेमाल हुई मोटरसाइकिल प्रज्ञा की ही है।

ले. कर्नल श्रीकांत प्रकाश पुरोहित : एटीएस के अनुसार पुरोहित ने मालेगांव धमाके के लिए पैसा और विस्फोटक का इंतजाम करने में अहम भूमिका निभाई।

दयानंद पांडे : धमाके की साजिश रचने और इसे अंजाम तक पहुंचाने में मठाधीश पांडे की अग्रणी भूमिका बताई जा रही है।

मेजर [रिटायर्ड] शिवजी रमेश उपाध्याय : पुणे का यह शख्स 23 अक्टूबर को गिरफ्तार हुआ। इस आरोप में कि इसने दक्षिणपंथी संगठन हिंदू जनजागृति समिति के कई लोच्चें को हथियार चलाने व बम बनाने का प्रशिक्षण दिया।

समीर कुलकर्णी : भोपाल में पि्रंटिंग प्रेस का कर्मचारी। कुलकर्णी के बारे में एटीएस का कहना है कि इसने धमाकों को अंजाम देने के लिए आयोजित कम से कम तीन बैठकों में शिरकत की। ये बैठकें नागपुर के भोंसला मिलिट्री स्कूल में आयोजित की गई थीं।

अजय राहिरकर : पुणे के राहिरकर को अभिनव भारत का खजांची बताया जा रहा है। एटीएस का कहना है कि मालेगांव धमाके के लिए पैसों का देनलेन इसी संगठन के जरिए हुआ।

राकेश धावड़े : एटीएस का कहना है कि धावड़े ने हथियार प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था।

जगदीश म्हात्रे : 40 साल के म्हात्रे के खिलाफ हत्या व वसूली सहित कई आरोपों में पहले से भी नौ मामले दर्ज हैं।

रामसू उर्फ राम जी : राम जी को गुजरात से गिरफ्तार किया गया था। यह शख्स साध्वी प्रज्ञा सिंह का करीबी बताया जाता है।

सुधाकर चतुर्वेदी : अभिनव भारत का कार्यकर्ता। रिवाल्वर और सेना का फर्जी पहचान पत्र बरामद। पूरोहित से साठगांठ रखने का आरोप।

मकोका का मतलब

- छह माह से पहले जमानत संभव नहीं, आरोप पत्र दायर करने के लिए पुलिस को सामान्यत: 90 दिनों के बजाय 180 दिन का वक्त मिल जाता है।

- भारतीय दंड विधान की तुलना में इसके तहत आरोपियों को सजा दिलवाना पुलिस के लिए और आसान

- पुलिस अधीक्षक को फोन टैपिंग का अधिकार मिल जाता है।

- आजीवन कारावास से फांसी तक की सजाएं हो सकती है।

Source :http://in.jagran.yahoo.com/news/national/crime/5_18_5668497.html


विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित