गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010

चीन व पाक का हर शहर होगा भारत की जद में


नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। जल्दी ही चीन और पाकिस्तान का हर शहर भारत के मिसाइल तरकश की जद में होगा। साढ़े तीन हजार किमी मारक क्षमता वाली अग्नि-3 के अंतिम परीक्षण के बाद रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन [डीआरडीओ] अगले एक साल के भीतर पांच हजार किमी से ज्यादा दूरी तक मार करने वाली अग्नि-5 मिसाइल को परीक्षण के लिए उतार देगा।
रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और डीआरडीओ के मुखिया डा. वी के सारस्वत के अनुसार अग्नि-3 और अग्नि-5 के साथ चीन और पाकिस्तान का ऐसा कोई लक्ष्य नहीं होगा जिसे हम निशाने पर लेना चाहें और न ले पाएं। उनका कहना था कि भारत को अंतरमहाद्वीपीय मारक क्षमता दिलाने वाली अग्नि-5 मिसाइल को तैयार करने का काम शुरू हो चुका है। अग्नि मिसाइल कार्यक्रम के निदेशक अविनाश चंदर ने बताया कि भारत की सबसे अधिक दूरी तक मार करने वाली अग्नि-5 मिसाइल 17.5 मीटर लंबी होगी और इसका वजन मौजूदा अग्नि-3 से एक टन ज्यादा होगा। अग्नि-5 तीन चरणों वाला प्रक्षेपास्त्र होगा। एक सवाल के जबाव में डा. सारस्वत ने चीन और पाकिस्तान के प्रक्षेपास्त्रों के साथ भारतीय मिसाइलों की तुलना को भी खारिज किया।
मिसाइल कार्यक्रम की उपलब्धियों का ब्यौरा देने को मीडिया से मुखातिब हुए डा. सारस्वत ने बताया कि रविवार को उड़ान की आखिरी परीक्षा पास करने के बाद अग्नि-3 रक्षा सेनाओं के अस्त्रागार में शुमार के लिए तैयार है। गौरतलब है कि बंगाल की खाड़ी स्थित व्हीलर द्वीप पर 7 फरवरी को हुए परीक्षण में अग्नि-3 ने करीब 12 मिनट के समय में अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। डीआरडीओ के अनुसार परीक्षण के दौरान पूर्णत: स्वदेशी तकनीक से विकसित अग्नि-3 की सतह का तापमान तीन हजार डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
अग्नि-3 के सफल परीक्षणों के साथ ही भारत ने संचार उपग्रहों को मार गिराने की क्षमता भी हासिल कर ली है। हालांकि एक सवाल के जवाब में डा. सारस्वत ने साफ किया कि डीआरडीओ के पास सैटेलाइट रोधी मारक क्षमता के लिए कोई निर्धारित कार्यक्रम नहीं है। लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्नत तकनीक से लैस 350 किमी ऊंचाई तक लक्ष्य संधान क्षमता वाली अग्नि-3 मिसाइल को सैटेलाइट मारक प्रक्षेपास्त्र में तब्दील किया जा सकता है।
अन्य मिसाइल कार्यक्रमों के संबंध में वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. सारस्वत ने बताया कि भारत अगले महीने अपने बैलेस्टिक मिसाइल रोधी कार्यक्रम का भी परीक्षण करेगा। इस कड़ी में वायुमंडल के भीतर 15 से 16 किमी के दायरे वाली प्रक्षेपास्त्र छतरी का परीक्षण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मिसाइल निरोधक तंत्र के विकास में चीन से आगे चल रहा भारत पहला चरण 2012 तक पूरा कर लेगा। वहीं अगले चरणों में अधिक ऊंचाई पर ही मिसाइल को मार गिराने की क्षमता विकसित की जाएगी। इसके अलावा डीआरडीओ प्रमुख का कहना था कि भारत स्वदेशी क्रूज मिसाइल 'निर्भय' का भी विकास कर रहा है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि अभी यह कार्यक्रम प्रारंभिक चरणों में ही है।
चीनी दावों को तौलना होगा: नौसेना प्रमुख
नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। भारत ने चीन की पोत विध्वंसक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली को अपने लिए खतरा मानने से इन्कार कर दिया है। चीनी दावों को दरकिनार करते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल निर्मल वर्मा का कहना है कि समंदर में किसी जहाज को चिह्नित करना ही बेहद मुश्किल है।
नौसेना प्रमुख के मुताबिक समंदर में एक समय में कई पोत मौजूद होते हैं। लिहाजा सही जहाज की पहचान होनी चाहिए जो मौजूदा निगरानी उपकरणों के सहारे बहुत जटिल काम है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक मिसाइल से समुद्र में चलते किसी जहाज पर निशाना लगाना जमीनी लक्ष्य भेदने के मुकाबले कहीं अधिक कठिन है। वर्मा के अनुसार जो भी दावे किए गए हैं उन्हें तौलना होगा। गौरतलब है कि चीन ने हाल ही में जमीन से समंदर पर मौजूद पोत को मिसाइल के सहारे भेदने की क्षमता हासिल करने का दावा किया है।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित