रविवार, 4 नवंबर 2012

सह सरकार्यवाह श्री गोपालकृष्ण की प्रेस वार्ता के अंश हिंदी में



बंगलादेश से असम और देश के अन्य क्षेत्रों में घुसपेठ पर संघ ने गंभीर चिता जताई
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के दुसरे दिन संघ के सह सरकार्यवाह श्री कृष्णगोपाल जी ने पत्रकार सम्मलेन किया | बैठक के दूसरे दिन संघ ने असम सहित पूरे भारत में बाग्लादेश से बढ़ रही घुसपेठ पर एक प्रस्ताव पारित किया |
सह सरकार्यवाह श्री गोपालकृष्ण ने इस प्रस्ताव के महत्वपूर्ण बिन्दुओं से पत्रकारों को अवगत कराया |
असम और विशेषकर कोकराझार में २० जुलाई से हुई हिंसा में अनेकों लोगों ने अपनी जान गंवाई और लगभग ४ लाख लोग बेघर होकर शरणार्थी शिविर में रहने को बाध्य हुए |इस घटनाक्रम के पीछे एक इतिहास है जो सभी जानते हैं | स्वतंत्रता के पूर्व से ही असम को बांग्लादेशियों की घुसपेठ का संकट झेलना पड़ा है | पहले के पूर्वी पाकिस्तान और आज के बांगलादेश से हजारों की संख्या में लोग इस राज्य में अपनी जड़ें जमा रहे हैं | यहाँ तक की असम के सिलहट जिले के एक छोटे से भाग को छोड़ कर बाकि सारा भाग मुस्लिम बहुल होने के कारण विभाजन के समय बंगलादेश को देना पड़ा था | १९४७ के विभाजन के समय असम के हर क्षेत्र में हिन्दू ही बहुसंख्यक थे, लेकिन आज स्थित चौंका देने वाली हो गयी है की वहां के अब ७ जिलों में मुसलमान बहुसंख्यक हो गए हैं | 
कोकराझार असम बोडोलैंड संभाग में स्थित है और इसके चार जिले आदिवासी बहुल होने के करण स्वयातसाशी बनाये गए थे | दुर्भाग्य से पिछले २५-३०वर्षों में घुसपेठ के कारण उनकी भूमि छिन गयी | केवल पि छले १० वर्षों में ही यहाँ की मुस्लिम जनसँख्या में १०% की वृद्धि हुई है | इस घुसपेठ के परिणाम स्वरुप यहाँ पर अनेकों समस्याएं, दंगे, हिसा, और गांवों को जलाने जैसी उत्पन्न हुयी है | सन्२००८ में हुयी हिंसा के बाद मुसलमानों ने इस आदिवासी बोडो जिलों में आरक्षण की मांग करते हुए बंद किया था |
देश पर इसका प्रभाव
इस वर्ष की २० जुलाई को ४ बोडो युवकों की निर्मम हत्या के कारण हिंसा भड़की थी | कई गाँव जला दिए गए | बहुत से आदिवासियों को शरणार्थी शिविरों में शरण लेनी पड़ी | समूचे देश में इस घटना पर तीव्र प्रतिक्रिया हुयी | मुंबई में भी जुलुस प्रदर्शन हुए | प्रदर्शनकारियों ने पत्रकारों और मीडीया कर्मियों पर भी हमला किया | उन्होंने सार्वजनिक सम्पति को हानि पहुंचाई, पुलिसकर्मियों पर हमला किया और महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया | ऐसे ही प्रदर्शन इलाहबाद, उदयपुर अदि में भी हुए |कुछ शरारती तत्वों ने उत्तर पूर्व के छात्रों को एमएमएस और एसएमएस भेज कर तुरंत अपने घर लौटने या रमजान के बाद विपरीत परिणामों के लिए तैयार रहने की धमकियां भेजी | इसके परिणामस्वरुप पुणे, मुंबई और बंगालुरू में भगदड़ सी मच गयी |
इन सभी घटनाओं को दृष्टिगत करते हुए एक प्रस्ताव पारित करने की आवश्यकता अनुभव हुई | हमने असम ही नहीं सारे देश में फैले मुस्लिम घुसपेठियों की पहचान ना केवल असम अपितु सम्पूर्ण भारत में करनी होगी और यदि उन्होंने किसी भी प्रकार के अधिकार देश में प्राप्त किये हों तो उन्हें उन अधिकारों से वंचित कर देश की सीमा से बाहर भेजना होगा |
इस विषय में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश
अपने २००५ के एक आदेश में उच्चतम न्यायलय ने इस निर्बाध घुसपेठ को देश की सीमा का अतिक्रमण कहा है | इसमें कहा गया है की यह सरकार का कर्त्तव्य है की जाँच समिति गठन कर इन घुसपेठियों की खोज और पहचान कर देश से बाहर खदेड़े | सर्वोच्च न्यायलय IMDT  त्रुटीपपूर्ण और घुसपेठियों के हित का बताया | उच्चतम न्यायालय का स्पष्ट मत है की घुसपेठ के कारण अशांति बढ़ी है और स्थानीय लोगों की संस्कृति को प्रभावित किया है |
इन घुसपेठियों ने चुनाव पहचान पत्र भी बनवा लिए | सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार सरकार को नया कानून बनाकर IMDT को तुरंत निरस्त करना चाहिए | विचित्र बात यह है की जिस कानून का असम में पालन होना था वह कहीं और हो रहा है | जब तक नया कानून नहीं बने तब तक सर्वोच्च न्यायलय के आदेशानुसार केवल Foreigners  Act  ही प्रयोग में लाना होगा | किन्तु आज तक कोई ट्रिब्यूनल असम में कार्य नहीं कर रही है | मुसलमानों की जनसँख्या अवश्य इस अवधि में दोगुनी हो गयी है, ना केवल असम बल्कि चेन्नई, पुणे, मुंबई, दिल्ली अदि में भी | हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश कामनी लाल ने, अपने आदेश में कहा है की वहां हजारों लाखो लोग अब भी घुसे बैठे हैं | दिल्ली पुलिस ने अपने सन् २००० में एक आदेश जारी किया था जिसके अनुसार रोजाना १०० घुसपेठियों को खोज कर दिल्ली से बाहर खदेड़ने की बात कही गई थी | लेकिन पुलिस महानिदेशक श्री प्रकाश सिंह के असमर्थता प्रकट करने के कारण कुछ नहीं हो पाया |
केन्द्रीय जाँच ब्यूरो के पूर्व निदेशक श्री जोगिन्दर सिंह ने भी इस संकट पर चिंता जताई | एक पूर्व गृह मंत्री ने संसद में स्वीकार किया था की भारत में एक करोड़ से ज्यादा बांगलादेशी गैर क़ानूनी रूप से बसे हुए हैं | इस विषय में बांगलादेश से बात करने की भी आवश्यकता है |


प्रश्नोत्तर
पृ. १. क्या संघ के पास इसके आंकडे हैं ?
ऊ. १. बहुत से आंकडे उपलब्ध है | ले. सिन्हा ने राष्ट्रपति को सौंपी गयी अपनी रिपोर्ट में इस दावे के समर्थन में अनेकों विवरण दिए हैं |
पृ. २. घुसपेठ क्या असम तक ही सीमित है या दूसरे भागों में भी फैली हुई है ?
ऊ. २. समस्या तो उत्तर पूर्व के सातों राज्यों में है |
पृ. ३. क्या यह कांग्रस की नीति की असफलता है ?
ऊ. ३. केंद्र और राज्य सरकारों को इस सम्बन्ध में चिंतन करना चाहिए. |
पृ. ४. क्या वाजपेयी सरकार में स्थिति इस से अच्छी थी ?
ऊ. ४. एनडीए के शासन में तारबंदी का काम सही दिशा में बढ़ रहा था|
पृ. ५ क्या कांग्रस सरकार रोक नहीं रही है ?
ऊ. ५. वाजपेयी ने तारबंदी शुरू की | अब उसकी गति वैसी नहीं है |
पृ. ६. क्या संघ इससे प्रसन्न है ?
ऊ. ६. नहीं |
पृ. ७. फिर क्या करना चाहिए ?
ऊ. ७. इसकी गति में तीव्रता आनी चाहिए |
पृ. ८. आप उन्हें बांगलादेशी की बजाय मुस्लिम क्यों कहते हैं ?
ऊ. ८. बंगलादेशी मुस्लिम...........वो यहाँ बसने के लिए आते हैं . बंगलादेश में जमीन कम आबादी ज्यादा है और यही उनकी समस्या है | वो भारत में अपनी इन्ही समस्याओं के कारण आते है | जबकि हिन्दू वहां पर प्रताड़ना और अत्याचारों के कारण आते हैं | इसलिए वो शरणार्थी हैं | कोई भी व्यक्ति जातीय हिंसा के कारण भारत आता है वो यहाँ शरणार्थी है | एनडीए सरकार ने पश्चिम पाकिस्तान से शरणार्थियों को यहाँ की नागरिकता दी जो गुजरात और राजस्थान में बस गए थे | एनडीए और कांग्रेस दोनों सरकारों ने इस का समर्थन किया है और बांगलादेश से आनेवाले हिन्दुओं को घुसपेठिया नहीं शरणार्थी माना है | वर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी जब विपक्ष में थे तब इस बात से सहमत थे | 
पृ. ९. क्या इसके पीछे कोई आतंकवादी विचारधारा भी है ?
ऐसी खबरें है | जनरल सिन्हा ने हुजी के बारे में सूचना दी थी | ये नशीली दवाइयां, नकली मुद्रा हथियार अदि की तश्करी करते है |
पृ. १०. सांस्कृतिक रिश्तों के बारे में आप क्या कहेंगे ?
ऊ. १०. यह सत्य है की भाषा एक है – बांगला | लेकिन वो पाकिस्तान के साथ जाने के इच्छुक हैं | भारत के साथ रहना उन्हें पसंद नहीं | उदहारण के लिए नौवाखाली और कोलकाता .. दोनों स्थानीं पर भाषा एक होते हुए भी मुसलमानों ने हिन्दुओं पर ही हमला किया |
इसके साथ श्री गोपालकृष्ण ने सभी पत्रकरों को उपस्थित होने और सहयोग के लिए धन्यवाद् दिया |





विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित