सोमवार, 5 नवंबर 2012

अब ज्यादा तरुण हो रहे हैं आरएसएस में शामिल: जोशी

पत्रकारों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी, अखिल भारतीय प्रचार विभाग प्रमुख डा. मनमोहन वैद्य और आरएसएस के अध्यक्ष दक्षिण क्षेत्र संघचालक श्री वन्नियाराजन।
चेन्नई, नवंबर ४: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) को देश की युवा शक्ति का समर्थन प्राप्त है। देश के लगभग ४०००० से अधिक दैनिक शाखाओं में जानेवाले दो तिहाई से ज्यादा स्वयंसेवक ४५ वर्ष की आयु के भीतर हैं,ऐसी जानकारी आरएसएस महासचिव सुरेश जोशी ने पत्रकारों को दी। जोशी ने चेन्नई में हो रही आरएसएस के तीन दिवसीय राष्ट्रीय परिषद बैठक के बारे में मीडिया को बता रहे थे।
पुरे देश में आरएसएस के रोजाना ४०००० और १२००० साप्ताहिक तथा मासिक मिलन चल रहे हैं। पिछले साल की तुलना में रोजाना बैठक में ३००० शाखाओं की बढ़ोत्तरी हुई है। इन दैनिक शाखाओं में ७५ फीसदी लोग ४५ साल की उम्र से कम हैं और यही नहीं बैठक में ५० फीसदी लोग २५ वर्ष की आयु से नीचे हैं। जोशी ने इस बात को मीडिया से साझा किया। उन्होंने यह भी कहा कि, आरएसएस का जोर युवाओं पर हैं देश भर में ११ ,०००  कॉलेजों के छात्रों पर १०००  से अधिक कार्यक्रमों के आयोजन के माध्यम से उन्हें संगठित किया जा रहा  है।  आरएसएस के फोकस का और एक  केंद्र  आईटी प्रोफेशनल्स हैं। आईटी केन्द्रों के रूप में मशहूर पुणे, बैंगलोर और नोएडा जैसे शहरों में ५००  स्थानों पर सप्ताह में एक बार या रोजाना मिलते हैं।
जोशी ने सेवा बस्तियों, शहरी, जनजातीय क्षेत्रों और दूरदराज के गांवों के उत्थान के लिए आरएसएस द्वारा विभिन्न सेवा परियोजनाओं के माध्यम से उठाए गए कदमों के बारे में भी पत्रकारों को बताया। "आरएसएस के द्वारा १,५०,००० से अधिक सेवा गतिविधियां चलाई जा रही हैं। पिछले २ से ३ वर्षों से ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। देश के १५  राज्यों के २५०  गांवों में स्वास्थ्य, कृषि, आत्म निर्भरता और सामाजिक सद्भाव के लिए सुधार कार्यक्रम को भी चलाया जा रहा है। हमें यकीन है कि निकट भविष्य में हम इसका अच्छा परिणाम देखेंगे" उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि "आरएसएस ने गौ सुरक्षा (गाय के संरक्षण) के विषय पर भी काम कर रही है और इसलिए संतों द्वारा आयोजित विश्व मंगल गौ ग्राम यात्रा का समर्थन भी किया हैं। उन्होंने कहा कि इसका भी परिणाम अच्छा हुआ है और पिछले एक साल के दौरान ६०० नए गाय (गोशाला) आश्रयों और अनुसंधान इकाइयों भी शुरू की गई है।"
चेन्नई के केलाम्बक्कम में  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद की तीन दिवसीय बैठक आज समाप्त हुई है, आरएसएस सरकार्यवाह सुरेश जोशी ने तीन दिन चली बैठक की कार्यवाही के के महत्त्वपूर्ण पहलुओं के बारे में प्रेस को अगवत कराया। अखिल भारतीय प्रचार विभाग प्रमुख डा. मनमोहन वैद्य और आरएसएस के अध्यक्ष दक्षिण क्षेत्र संघचालक श्री वन्नियाराजन भी इस अवसर पर उनके के साथ थे। बता दें कि यह बैठक श्री शिव शंकर बाबा आश्रम के परिसर में आयोजित की गई थी।
श्री जोशी ने इस बैठक में पारित महत्त्वपूर्ण प्रस्तावों से भी पत्रकारों को अगवत कराया। वे महत्वपूर्ण मुद्दे -'असम और देश के अन्य भागों में घुसपैठ एक बहुत बड़ा सुरक्षा खतरा' और ' चीन के सन्दर्भ में समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की आवश्यकता’ हैं।
जम्मू एवं कश्मीर और उत्तर पूर्व में आरएसएस के काम में सुधार की जरूरत है। अरुणाचल और मणिपुर के इलाकों में आरएसएस के नाम से कई इलाकों को जाना जाने लगा है और वहाँ पर काम में भी सुधार हुआ है। बंगाल में कुछ मुद्दे हैं। केरल, कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली और गुजरात में हमारा काम अच्छा चल रहा है। श्रीजोशी ने कहा कि एक प्रश्न के जवाब में कहा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या आरएसएस  गडकरी का दूसरे कार्यकाल के लिए समर्थन करेंगी, उन्होंने स्पष्ट किया कि, यह आरएसएस को नहीं तय करना है। राजनीतिक दलों की अपनी एक प्रणाली होती है और उन्हें ही तय करना होता हैं और हम उस में कोई भूमिका नहीं निभाते हैं, जब उनसे पूछा गया कि क्या आरएसएस की बैठक में गडकरी के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श किया गया तो वे इसके जवाब में कहते हैं कि आरएसएस की बैठक में केवल सामाजिक और सुरक्षा के मुद्दों पर विचार - विमर्श किया गया हैं। जब उनसे पूछा गया, कि क्या गडकरी पर लगे आरोप से आरएसएस को शर्मिंदगी महसूस हो रही है, तो उन्होंने कहा कि यह समस्या आरएसएस से जुड़ी हुई नहीं है।
जब उनसे नरेंद्र मोदी को भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश किया जाना चाहिए मुद्दे पर आरएसएस के विचार के बारे में पूछा गया, उन्होंने कहा, "राजनीतिक दलों को राजनीतिक निर्णय लेने होते हैं। चुनाव हम नहीं लड़ रहे हैं। यह उनका निर्णय है और इस सन्दर्भ में आरएसएस की कोई भूमिका नहीं है,"उन्होंने यह भी कहा कि, प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार कौन होना चाहिए इस पर टिप्पणी करना अभी बहुत ही जल्दबाजी होगा।
जब कर्नाटक जल बंटवारे के मुद्दे पर टिप्पणी करने को कहा गया तब उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर, पानी जारी किया गया है और हर सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना चाहिए।
जब कुडनकुलम परमाणु परियोजना पर आरएसएस का रुख साफ़ करने के लिए कहा गया, उन्होंने कहा, हम विकास के समर्थक हैं। देश के हित में विकास की किया जाना चाहिए। हम इस प्रकार के परियोजनाओं का विरोध कभी नहीं करते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि यह पारदर्शी होना चाहिए। वे अन्य देशों के दबाव में नहीं होने चाहिए। इस विरोध प्रदर्शन में चर्च शामिल है। सभी को इस परियोजना का स्वागत करना चाहिए। हमें ऐसी परियोजनाओं में पर्यावरणीय कारकों को ध्यान में रखना चाहिए।
 स्रोत: News Bharati Hindi        http://hn.newsbharati.com

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित