सोमवार, 10 अक्तूबर 2011

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भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को समर्थन
सिटी रिपोर्टर, गोरखपुर : आदमी का स्वार्थी होना भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी वजह है। आज भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चर्चा में है। हर अच्छे काम की तरह इस आंदोलन को भी संघ परिवार का पूरा समर्थन है। काम अच्छा है तो समर्थन करना ही चाहिए। यह एलान था सरसंघ चालक मोहनराव मधुकरराव भागवत का, जो उन्होंने रविवार को यहां एमपी इंटर कालेज में आयोजित संघ के विजयादशमी उत्सव में किया। इसके पहले सुबह जब उन्होंने वैशाली एक्सप्रेस से उतरकर गोरखपुर की धरती पर कदम रखे, तब भी अपनी संक्षिप्त बातचीत में कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जो अन्ना हजारे का एजेंडा है, वही संघ का भी है। विजयादशमी उत्सव में अपने 45 मिनट के संबोधन में भागवत ने देश, दुनिया और आम जन के आचरण-चरित्र पर खुलकर विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज देश को नायकों की जरूरत है। संघ अपनी शाखाओं के जरिए ऐसे ही नायक तैयार कर, समाज को बदलने के लिए गांव-गांव भेजना चाहता है। नीचे से समाज बदलेगा तो परिवर्तन होना तय है। उन्होंने कहा कि दुनिया राह से भटक गई है। इसे भारत राह दिखाएगा। हमें भारत को महान बनाना है। इसके लिए खुद को महान बनाना होगा। इतिहास गवाह है सत्ता, नेता और नारे नहीं, समाज से होता है बदलाव। इसकी शुरुआत खुद से करनी पड़ेगी। हमें पश्चिम के अंधानुकरण की बजाय, खुद की महत्ता को समझना होगा। हमारी परंपरा पूरी दुनिया को परिवार मानती है तो पश्चिम की परंपरा पूरी दुनिया को बाजार। अगर दुनिया बाजार होगी तो आदमी का बाजारू भी होना तय है। सरसंघ चालक ने कहा कि हमें अपनी मानसिक गुलामी से उबरना होगा। सबकी तरक्की में अपनी तरक्की मानकर सबको समान मौका देते हुए देश को दुनिया का सिरमौर बनाना होगा। हमें अमेरिका और चीन जैसा सिरमौर नहीं बनना है। मात्र सद्भावना के उपदेशों से काम नहीं चलने वाला। इसके लिए खुद के आचरण और व्यवहार से लोगों के सामने नजीर पेश करनी होगी।इसके पहले सभा की अध्यक्षता कर रहे गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रतिकुलपति प्रो. सभाजीत मिश्र ने कहा कि पश्चिम की विचारधारा में भटकने की जरूरत नहीं। हमें अपने गौरवशाली अतीत, परंपरा, संस्कृति, दर्शन और सनातन धर्म पर यकीन रखना होगा। मौजूदा समय में दुनिया जिन तमाम समस्याओं से जूझ रही है, उसका हल ल्ल
हमारी परंपरा में बहुत पहले से है और वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। कार्यक्रम के संचालक आत्मा सिंह ने अतिथियों का परिचय कराया। प्रांत संचालक प्रो. यूपी सिंह, क्षेत्र प्रचारक शिवनारायण, महानगर संचालक श्रीराम खेमका, सह प्रांत कार्यवाह भगत सिंह, प्रांत संपर्क प्रमुख प्रेमचंद गौड़, महानगर सह संघ चालक महेंद्र अग्रवाल, सह प्रांत संघ चालक प्रो. रामअचल सिंह, सह विभाग संचालक ओमप्रकाश डिडवानिया, प्रांत प्रचारक अनिल, विभाग प्रचारक रमेश, सह प्रांत प्रचारक राजेंद्र सिंह के अलावा परशुराम, राजेंद्र प्रसाद, अरुण कुमार मल्ल, राजेंद्र सक्सेना, राकेश, डा. दिनेश मणि त्रिपाठी, डा.सतीश द्विवेदी और रमाशंकर जायसवाल आदि पदाधिकारी मौजूद थे
मंच कर रहा था उद्घोष, पुन: बनेंगे विश्व गुरु
स्टाफ रिपोर्टर, गोरखपुर : संघ का विजयादशमी उत्सव। महाराणा प्रताप इंटर कालेज में बना मंच ही उद्घोष कर रहा था, भारत पुन: विश्र्व गुरु बनेगा, इसे जग भी देखेगा और जुग भी। केसरिया परिधान से सजे मंच पर मंदिर की आकृति को दर्शाती गुम्बदों पर लहरा रहे थे स्वस्तिक, सुदर्शन चक्र, त्रिशूल, गदा और ऊं लिखे ध्वज। सब मिलकर आध्यात्म व शक्ति का समन्वय स्थापित कर रहे थे। स्वयंसेवकों ने पहले संघ की शाखा में क्या-क्या होता है इसकी झलक पेश की। उन्होंने शारीरिक प्रदर्शन कर अर्जित ताकत व कला का न केवल अहसास कराया, वरन करके भी दिखाया। लाठी चलाने की उनकी फुर्ती देखने लायक थी। सभी ने उनकी कुशलता की सराहना की और महसूस किया कि लाठी के बल पर भी दुश्मनों के छक्के छुड़ाए जा सकते हैं। प्रार्थना, अवतरण, एकलगीत व सामूहिक गीत के जरिए उपस्थित जन समूह में स्वयंसेवकों ने उत्साह का संचार किया। प्रार्थना की शुरुआत नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे से की गई। संस्कृत में हुई इस प्रार्थना का अंतिम वाक्य हिन्दी में था। सभी बोल उठे-भारत माता की जय। इस जयकारे से पूरा परिसर गूंज उठा और इसी के साथ आलोकित हो उठी भारत भूमि। बाद में शस्त्र पूजा कर स्वयंसेवकों ने इस बात का अहसास कराया कि वे सिर्फ लाठी ही नहीं, जरूरत पड़ने पर शस्त्र भी उठा सकते हैं और कुशलतापूर्वक चला भी सकते हैं। इसके बाद बैंड की ताल पर सूर्य नमस्कार व सीटी पर कदमताल कर स्वयंसेवकों ने घ्वनि व ताल के बीच सामंजस्य स्थापित किया।
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45 मिनट के भाषण में एक बार भी ताली नहीं
स्त्रोत:
गिरीश पांडेय ,गोरखपुर 45 मिनट का था सरसंघ चालक मोहनराव भागवत का संबोधन और इस दौरान महाराणा प्रताप इंटर कालेज में मौजूद उत्साही भीड़ पर पूरी तरह सवार था अनुशासन। अनुशासन ऐसा कि पूरे भाषण के दौरान एक बार भी ताली नहीं बजी। अपने संबोधन के दौरान सरसंघ चालक ने राजनीति से पूरी तरह दूरी बनाकर रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, सत्ता से हमारा कोई सरोकार नहीं। उन्होंने भारत की संस्कृति, दर्शन, परंपरा, धर्म और समाज को अपने संबोधन के केंद्र में रखा। लोगों से समाज में बदलाव के लिए संघ से जुड़ने की अपील की। उनके भाषण में देश के विभाजन की टीस भी दिखी। उन्होंने कहा कि संघ को स्वयंसेवक चाहिए, सहानुभूति नहीं। शाखा में आकर अनुभव करिए। लगे कि इससे आपको देश व समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा मिल रही है तो संघ के सहयोगी बनिए। टैगोर की बात मानते तो देश नहीं बंटता : डा. भागवत ने कहा कि बंगाल का विभाजन देश के बंटवारे का पूर्वाभ्यास था। उस समय दोनों कौमों ने जो एकजुटता दिखाई, वह बेमिसाल थी। उसी समय वंदे मातरम जंगे आजादी का मूल मंत्र बन गया। उस समय रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था कि हम लड़कर खत्म होने वाले नहीं। इसी संघर्ष में से राह निकलेगी और यह राह होगी हिंदुत्व की। हिंदुत्व जोड़ता है, तोड़ता नहीं। टैगोर की बात मानते तो देश नहीं बंटता। संघ धर्म को सर्वोपरि मानता है। सबको अपने-अपने तरीके से उपासना की आजादी होनी चाहिए, पर देश भक्ति सबसे बड़ा धर्म है। विवेकानंद को भी याद किया भागवत के भाषण का एक हिस्सा स्वामी विवेकानंद को भी समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि जो विवेकानंद ने बहुत पहले कहा था, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। सिर्फ नौकरी और पैसे से सरोकार रखने वाली शिक्षा का कोई मतलब नहीं, शिक्षित होने के बाद भी अगर संबंधित व्यक्ति को अपनी संस्कृति, परंपरा, दर्शन और धर्म का ज्ञान नहीं तो उसकी शिक्षा का कोई मतलब नहीं। शिक्षा का मतलब संस्कार और सर्वकल्याण है।
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भ्रष्टाचार के खिलाफ हर लड़ाई को समर्थन देगा स्वयंसेवक



विजयादशमी उत्सव भारत को समर्थ बनाने के लिए किसी नकल की आवश्यकता नहीं समाज परिवर्तन में विश्वास करता है संघ साम्प्रदायिक हिंसा अधिनियम लोगों में झगड़ा लगाने वाला कानून

गोरखपुर (एसएनबी)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भ्रष्टाचार के खिलाफ देश में चल रह आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी भी तरह के संघर्ष में स्वयंसेवक अपनी सहभागिता करते रहेंगे। संघ की प्रतिनिधि सभा इस संबंध में पूर्व में ही प्रस्ताव पारित कर चुकी है। सरसंघचालक ने कहा कि दुनिया को भारत की जरूरत है। भारत को फिर से समर्थ बनाने के लिए किसी का नकल करने की आवश्यकता नहीं बल्कि इसके लिए हमारे अपने रास्ते ही पर्याप्त हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों व आम नागरिकों से गांव-गांव तक संघ विचारधारा के विस्तार का आह्वान किया। एमपी इंटर कालेज परिसर में संघ की महानगर इकाई द्वारा आयोजित विजयादशमी उत्सव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया रास्ता भटक गई है। एक के बाद एक नया वाद सामने आता जा रहा है। समय की यात्रा के साथ हमारी संस्कृति में कुछ विकृत्तियां आ गई है। लेकिन यह इसलिए हो रहा क्योंकि हम अपनीैआत्मा को भूलते जा रहे हैं। दूसरा कारण यह

भी है कि हम नकल कर रहे हैं। हमको अपना रास्ता ही खोजना पड़ेगा क्योंकि उसी में ही समग्रता है। उन्होंने कहा कि संघ ने कभी धर्म को पूजा-पद्धति से नहीं जोड़ा। हर कोई अपने तरीके से पूजा-पद्धति करेगा लेकिन पहुंचेगा एक ही स्थान पर। हिन्दुत्व किसी की विरोधी विचारधारा नहीं है और न ही इसका प्रतिक्रिया स्वरुप जन्म हुआ है। सरसंघचालक श्री भागवत ने रविन्द्र नाथ ठाकुर के निबंधों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में हिन्दू-मुस्लिम के बीच जो समस्या है उसका रास्ता हिन्दुत्व से ही निकलेगा। लेकिन हमने इस तरीके को छोड़ दिया और यही कारण है कि आजादी के 64 वर्षों बाद भी हम इस समस्या से जूझ रहे हैं। सरसंघचालक ने कहा कि संघ सत्ता परिवर्तन में नहीं अपितु समाज परिवर्तन में विश्वास करता है। संघ इसके लिए समाज में उदाहरण खड़ा करने में लगा है। स्माज में परिवर्तन के लिए नायक की आवश्यकता होती है। ऐसा नायक जरुरी नहीं कि वो सर्वगुण सम्पन्न हो लेकिन उसमें शुद्ध चरित्र होना आवश्यक है। ऐसा नायक जो संपूर्ण समाज के साथ आत्मीय संपर्क स्थापित कर सके। संघ गांव-गांव में ऐसे नायकों को खड़ा करना चाहता है। सरसंघचालक ने विवेकानन्द को उद्घृत करते हुए कहा कि दुनिया के कष्ट को दूर करने के लिए भारत को समर्थ बनाना होगा। लेकिन विश्व की परिस्थितियां बदल रही है। अमेरिका और चीन अपने को शक्तिशाली बनाकर दुनिया को अपनी व्यवस्था के रंग में रंगना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी विचारधारा पूरे विश्व को कुटुम्ब मानने की रही है। लेकिन हम आज नकलची होते जा रहे हैं। हम ज्ञान की बातें करते हैं पर हमारे देश का क्या हाल है। वेदों को भूल गए एवं कई जगहों पर लोगों के साथ जानवरों की तरह व्यवहार किया जा रहा है। मन में जल, जंगल, जमीन, जानवर सबके लिए भाव उत्पन्न करना होगा ऐसा उद्यम होगा तभी भारत बदलेगा। उन्होंने कहा कि भारत सनातन अनुभूतियों पर खड़ा है लेकिन हम नकल करते जा रहे हैं। अंग्रेज गए लेकिन अंग्रेजियत यही रह गई। इसलिए हमारी योजनाएं ठीक ढंग से नहीं बन पा रही हैं। गरीब आदमी को 32 Rs में बांधा जा रहा है। इस देश को समझकर नीति बनाने की जरूरत है। शिक्षा से लेकर चुनाव तक इसका असर पड़ रहा है। हम अपने आचरण और शिक्षा से क्या सिखा रहे हैं। ऐसी शिक्षा से निकलने वाले व्यक्ति को यह पता नहीं है कि इस देश का पूर्व गौरव क्या है और इस राष्ट्र में विश्व को क्या देने की शक्ति है। सरसंघचालक ने यूपीए सरकार द्वारा प्रस्तावित साम्प्रदायिक हिंसा अधिनियम की आलोचना करते हुए कहा कि यह झगड़ा लगाने वाला कानून है। जनता मानती है तभी कोई कानून चलता है। सरकार लोगों के मन में सद्भावना जगाए तो सब ठीक हो जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दीदउ विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति प्रो. सभाजीत मिश्र ने कहा कि वतर्मान भारत का बौद्धिक परिवेश कई उलझनों से जूझ रहा है। ग्लोबलाइजेशन की अवधारणा से भारत में भी कई विकृतियां आयी हैं। हम बहुत सारे नारों से खुद को जोड़ लेते है भले ही उनका अर्थ न जानते हो। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के आदि-अंत की र्चचा करना ही उसके मिजाज के विपरीत है।



साभार : अमर उजाला

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित