शनिवार, 15 अक्तूबर 2011

अन्ना की टिप्पणी समझ से परे: संघ

अन्ना की टिप्पणी समझ से परे: संघ

गोरखपुर। आरएसएस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के आंदोलन से बहुत हद तक जुड़े होने की बात पर जोर देते हुए शनिवार को कहा कि जन लोकपाल अभियान में संघ से किसी तरह का समर्थन हासिल नहीं होने के बारे में हजारे की टिप्पणी उसके समझ से परे है।

आरएसएस के महासचिव सुरेश 'भैयाजी' जोशी ने एक बयान में कहा कि अन्ना ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बारे में कुछ टिप्पणी की और संकेत दिया कि उनके आंदोलन के समर्थन में मेरे लिखे पत्र को उन्होंने एक साजिश के तौर पर देखा। मीडिया में प्रकाशित यह विचार मेरे समझ से परे है और इससे मुझे काफी तकलीफ पहुंची है।

जोशी ने कहा कि यह दुखद बात है कि अन्ना जैसे कद्दावर लोग भी चुच्छ राजनीतिक साजिश से प्रभावित हो गए।

उन्होंने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के पत्र के जवाब में हजारे द्वारा लिखे गए एक पत्र का हवाला देते हुए यह बात कही।

जोशी ने कहा कि उनके पत्र में प्रकट किए गए विचार भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के लिए सिर्फ नुकसानदायक ही साबित होंगे। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होगा।

जोशी के बयान में हजारे की सराहना करते हुए उन्हें एक ऐसा व्यक्ति कहा गया है जो उच्च आदर्शों के लिए प्रतिबद्ध हैं और जिन्होंने देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक विशाल जन आंदोलन का नेतृत्व किया है।

उन्होंने कहा कि इस पूरे आंदोलन की सफलता का श्रेय सिर्फ उन्हें जाता है। मैं और देश के अन्य हजारों कार्यकर्ता इससे अवगत हैं तथा कई मौकों पर उनके द्वारा प्रकट किए विचारों एवं उनकी विकासपरक गतिविधियों से प्रेरित हुए हैं।

आरएसएस ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हजारे के आंदोलन का रामलीला मैदान में और देश भर में वह भी हिस्सा रहा है।

आंदोलन का हिस्सा संघ के नहीं होने संबंधी हजारे के दावे को झूठा बताते हुए आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने कहा कि साधारण आरएसएस कार्यकर्ता सैकड़ों हजारों की तादाद में रामलीला मैदान और देश भर में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में मौजूद रहे।

यह पूछे जाने पर कि अब हजारे आरएसएस से अपना पल्ला क्यों झाड़ रहे हैं, वैद्य ने कहा कि शायद ऐसा इसलिए है कि खबरों में आरएसएस को ही आंदोलन चलाने वाला कहा जा रहा है।

उन्होंने बताया कि सुरेश जोशी ने हजारे को समर्थन पत्र आठ अप्रैल को भेजा था लेकिन इस बारे में अफवाह पांच अप्रैल से गर्म थी, जिस दिन हजारे ने अपना अनशन [जंतर मंतर] शुरू किया था।

वैद्य ने कहा कि आरएसएस ने हजारे के अंदोलन की सफलता का कभी श्रेय लेने की कोशिश नहीं की।

source:http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_8358378.html


आरएसएस ने अन्ना को ओछी राजनीति से सावधान रहने की सलाह दी

भोपाल/गोरखपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अन्ना हजारे पर पलटवार किया है। संघ ने कहा है कि यह बहुत खेदजनक है कि अन्ना जैसे व्यक्ति भी कुटिल राजनीतिक चाल से प्रभावित हो गए। गांधीवादी समाजसेवी को सलाह देते हुए संघ ने कहा है कि अन्ना को ओछी राजनीति से सावधान रहना चाहिए। इनदिनों गोरखपुर में संघ का तीन दिनों का अखिल भारतीय प्रतिनिधियों का सम्मेलन चल रहा है।

अन्ना को सलाह देते हुए आरएसएस के सरकार्यवाह सुरेश जोशी ने कहा है कि ऐसे आंदोलनों को ओछी, निम्न स्तर की कुटिल और विकृत राजनीति से सुरक्षित रखने का दायित्व आंदोलन के नेतृत्व का ही रहता है। उनके मुताबिक ऐसे में नेतृत्व को सावधान और सजग रहना चाहिए।
जोशी ने कहा कि भ्रष्टाचार के विरोध में चल रहे आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहभागिता को लेकर चलाई जाने वाली चर्चा दुर्भावनापूर्ण है और इस आंदोलन को दुर्बल करने के राजनीतिक साजिश को ही जाहिर करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के महासचिव द्वारा साजिशन उठाए गए बेमतलब विवाद के जवाब के तौर पर अन्ना हजारे द्वारा लिखी गई चिट्ठी में संघ के सरसंघचालक मोहन राव भागवत जी के संदर्भ में व्यक्त किए गए विचार एवं आंदोलन के समर्थन में मेरे द्वारा भेजे गए पत्र को साजिश बताना, मेरे समझ से परे है और दुख की बात है।
अन्ना के पत्र पर प्रतिक्रिया देते जोशी ने कहा कि पत्र के द्वारा व्यक्त इस प्रकार की टिप्पणियां भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को ही कमजोर करने वाली साबित होंगी। जोशी के मुताबिक यह दुर्भाग्यपूर्ण है। दरअसल, कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह की चिट्ठियों के जवाब में अन्ना ने लिखा था कि संघ उनको बदनाम करने की कोशिश कर रहा है।

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विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित