सोमवार, 6 जुलाई 2009

तालिबानी खौफ से हिंदुओं का पलायन

जोधपुर। पाकिस्तान में तालिबान के बढ़ते कदमों ने वहां के अल्पसंख्यकों खासकर हिन्दुओं में इतना खौफ पैदा कर दिया है कि वे अपना बोरिया-बिस्तर बांध कर भारत आने को मजबूर हो रहे हैं। रविवार सुबह थार एक्सप्रेस से जोधपुर ऎसे दो-तीन परिवारों के करीब डेढ़ दर्जन लोगों का कहना है कि वे अब वापस नहीं जाएंगे। टूरिस्ट वीजा लेकर आए सिंध में रहमियार खान जिले के लियाकतपुर, अजीम खां दड़ी व सोलह चक गांवों के इन भील परिवारों के मुखियाओं ने यहां भगत की कोठी रेलवे स्टेशन पर "राजस्थान पत्रिका" से बातचीत में इन लोगों ने साफ कहा कि वे अब यहीं बसना चाहते हैं। इनका कहना है कि उत्पीड़न से परेशान सिन्ध के विभिन्न इलाकों के कई हिन्दू परिवार घर-गृहस्थी का अपना सामान समेट कर टुकड़ों-टुकड़ों में भारत आ रहे हैं।
अब वहां दिल नहीं लगता
पाकिस्तान में जन्में भील जाति के आलम (35) की शादी जोधपुर में हुई थी। पत्नी व चार बच्चों के साथ पाकिस्तान छोड़ आज वह अपने ससुराल आ गया है। उसने बताया कि अब वहां मन नहीं लगता, यहां सब कुछ अच्छा है। बाड़मेर व जैसलमेर जिलों में भी उसके रिश्तेदार हैं, जिनके बारे में अब यहां रहकर वह पता लगाएगा। यहां गुजारा कैसे होगा, इसके जवाब में आलम ने उम्मीद जताई कि कुछ काम-धंधा मिल ही जाएगा।
आना था, आ गए
परिवार के दस सदस्यों के साथ अजीम खां दड़ी से जोधपुर आए फकीराराम ने बताया कि वहां खेतीबाड़ी से गुजारा चल रहा था। रिश्तेदार यहां जोधपुर व आसपास के क्षेत्र में हैं। यहां आना था, आ गए। अब यहां रहकर देखेंगे कि कैसे क्या करना है।
दूसरे भी तैयारी में
सिंध के भारत की सीमा से लगे कई गांवों के लोग बोरिया-बिस्तर बांध कर वीजा व पासपोर्ट की जुगत कर रहे हैं। इनमें से कुछ लोग पहले थोड़ा सामान लेकर आ रहे हैं तो शेष लोग बाद में बचाखुचा सामान लेकर आएंगे।
सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
बसने की उम्मीद लेकर आ रहे इन लोगों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां चिंतित हैं। क्योंकि वीजा खत्म होने के बाद इन्हें ढूंढ़ने की मशक्कत करनी पड़ती है। इनमें से जो यहां नागरिकता का आवेदन कर देते हैं, उनके खिलाफ तो कार्रवाई भी नहीं हो पाती। सरदह पार से आने वालों में कौन अपना है, कौन पराया, यह चिंता भी खाती रहती है।
रिश्तेदारियों की डोर
सरहद के दोनों ओर रहने वाले लोगों की रिश्तेदारियां बंटवारे से पहले की हैं। सन् 1965 व 71 की लड़ाई के अलावा बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद पाकिस्तान में हिन्दुओं पर अत्याचार बढ़ने पर बड़े पलायन हो चुके हैं। अब तालिबान के बढ़ते खौफ ने हिंदुओं को भारत की शरण लेने को विवश किया है।
स्त्रोत: राजस्थान पत्रिका http://www.patrika.com/news.aspx?id=199774

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित