बुधवार, 22 जुलाई 2009

"गोबर गैस कमीशन की स्थापना हो"

जोधपुर। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एम.एल. माथुर का कहना है कि गोबर गैस से ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गोबर गैस कमीशन की स्थापना होनी चाहिए। जोधपुर डिस्कॉम के तत्वावधान में राजस्थान ऊर्जा दिवस के अवसर पर रविवार को आयोजित "ऊर्जा क्षेत्र में नवीनतम गतिविधियां" विषयक तकनीकी संगोष्ठी में मुख्य अतिथि प्रो. माथुर ने कहा कि अवाणिज्यिक तथा गोबर गैस ऊर्जा पर विचार नहीं किया जाता है। भारत जैसे कृषि प्रधान देशों में इसे प्रमुखता देनी चाहिए। पेट्रोल व डीजल पर सब्सिडी देने से देश में निजी क्षेत्र व सड़क परिवहन को बढ़ावा मिल रहा है। जबकि सार्वजनिक क्षेत्र में जल व रेल परिवहन को बढ़ावा मिलना चाहिए। संगोष्ठी के अध्यक्ष जोधपुर डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक बी.एल. खमेसरा ने कहा कि आजादी के समय देश में सिर्फ 32 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता था, जो अब बढ़कर 1.47 लाख मेगावाट हो गया है। राज्य में विद्युत कम्पनियां बनने के बाद ऊर्जा क्षेत्र में विकास हुआ है। जोधपुर डिस्कॉम ने पश्चिमी राजस्थान में विषम परिस्थितियों में उपभोक्ता सेवा में विस्तार किया है। मारवाड़ इंजीनियरिंग एवं रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉ. वी.के. भंसाली ने कहा कि वैश्विक स्तर ऊर्जा के क्षेत्र में काफी बदलाव आ रहे हैं। भविष्य में सौर, वायु व हाइड्रोजन से ऊर्जा निर्माण की तकनीक बदलेगी। एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर जयश्री वाजपेयी ने विद्युत भार पूर्वानुमान पर पत्रवाचन किया। जोधपुर डिस्कॉम के अधिशासी अभियंता आर.के. पुरोहित ने बचत लेम्प योजना तथा सलेक्शन ऑफ लेम्प पर पत्रवाचन किया। अंत में निदेशक (तकनीक) एन.के. पाण्डेय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। पुस्तक का विमोचनसंगोष्ठी में प्रबंध निदेशक खमेसरा ने अतिरिक्त अधिशासी अभियंता ओ.पी. माहेश्वरी की पुस्तक "बिजली बचाने के तरीके" का विमोचन किया।

स्त्रोत : राजस्थान पत्रिका -> http://www.patrika.com/news.aspx?id=207124

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित