मंगलवार, 21 अगस्त 2012

राष्ट्रधर्म के प्रति समर्पित : राष्ट्र सेविका समिति प्रमुख शांताक्का का भाषण

राष्ट्रधर्म के प्रति समर्पित : राष्ट्र सेविका समिति प्रमुख शांताक्का का भाषण

स्रोत: News Bharati Hindi      तारीख: 8/21/2012 9:34:08 AM

$img_titleनागपुर, अगस्त 21
: हमारा समाज सदियों पुराने मूल्यों, परंपराओं एवं जीवनशैली को भूल चुका है। जिस वजह से हमारा समाज जाति, भाषा आदि  भेदभावों से टुकड़ों में बंट गया है। इसमें बदलाव लाने के लिए यह आवश्यक है कि हम पुरानी जीवनशैली, मूल्यों व परंपराओं को दोबारा अपनाएं ताकि समाज में एकता की भावना पैदा हो सके एवं हमारा देश महान बन सके। यह राष्ट्र सेविका समिति का मिशन है। यह बातें समिति की प्रमुख संचालिका वंदनीय शांताक्का ने सोमवार को यहां कहीं।
हिन्दू महिलाओं के लिए देश की सबसे बड़ी संस्था की प्रमुख संचालिका के तौर पर अपने पहले भाषण में शांताक्का ने सेविकाओं का आहवान किया कि वे समाज के सदस्यों के बीच सद्बभावना, सौहार्द्र और समझ पैदा कर समिति के मिशन के कामों को पूरा करने में तन्मयता से जुट जाएं।
नयी नेता ने कहा कि सौहार्द्र पैदा करना हिन्दू जीवनशैली का हिस्सा है और केवल हिन्दू इस मिशन की महत्ता समझ सकते हैं। इस तरह की सदभावना पैदा करना और मस्तिष्क की पवित्रता समिति का मिशन है।
आज हिंदू समाज छोटी-छोटी बातों में बिखरा पड़ा है और ऐसा करने वाले भारत को नष्ट करना चाहते हैं। ऐसे लोगों की वजह से हम अपनी पुरानी जीवनशैली भूल गए हैं। हमारा मिशन इसमें बदलाव लाएगा और मुलभूत जीवनशैली बरकरार रखेगा जिसमें शारीरिक सौंदर्य की जगह आंतरिक सौंदर्य को महत्ता दी जाती है।
कोका कोला की सीईओ इंदिरा नूयी का उदाहरण देते हुए समिति प्रमुख ने कहा कि उनकी तरह की महिला ने भी विश्वभर में जहां कही भी गईं, भारतीय मूल के होने के अपने गौरव को नहीं भूला। हमें इंदिरा नूयी और जमशेदजी टाटा जैसे लोगों का उदाहरण देकर नयी पीढ़ी के सामने अपनी संस्कृति, परंपरा के प्रति आत्मविश्वास पैदा करना चाहिए। यह हमारा राष्ट्रधर्म है।
वर्तमान में हमारा देश कठिन दौर से गुजर रहा है। यह हमारा आहवान कर रहा है कि हम राष्ट्रधर्म में जुट जाएं। इसलिए समिति ने राष्ट्रधर्म परिवर्तन संकल्पिता वयन अंगीकार किया है।
$img_titleइससे पहले वंदनीय प्रमिलाताई मेधे ने समिति की जिम्मेदारी शांताक्का को सौंपी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि समिति का काम लगातार चलने वाली धारा की तरह है। नेतृत्व में परिवर्तन से हमारे काम में कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। यह बदलाव भी हमारे संगठन प्रणाली का हिस्सा है।
 सदभावना दिवस के दिन यह बदलाव किया गया है। यह सदभावना हमारे काम का अनिवार्य हिस्सा है जो हमें समाज से जोड़ता है। शांताक्का की गणितीय पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इससे समिति को फायदा होगा।
उन्होंने कहा कि हिंदूत्व हमेशा से एक सुनियोजित षडयंत्र के तहत हमलों का सामना कर रहा है। युवा पीढ़ी को हमारे समाज के मुलभूत सिद्धांतों से अलग किया जा रहा है। इस तरह की स्थिति में यह आवश्यक है कि हम अपने काम में तेजी लाएं जिससे हिन्दू समाज मजबूत बन सके और आत्मसम्मान और सौहार्द्र की भावना का विकास हो।
प्रमुख कार्यवाहिक के पद पर चुनी गईं ए. सीता ने अपने संक्षिप्त भाषण में आशा व्यक्त किया कि सभी वरिष्ठ एवं कनिष्ठ सेविकाओं के सहयोग से समिति नई ऊंचार्इयों को छुएगा।
इससे पहले चित्राताई जोशी ने समिति की सदस्यों से शांताक्का और सीता का परिचय कराया। देवी अहिल्या मंदिर में आयोजित एक समारोह में समिति की सेविकाओं ने प्रमुख संचालिका का स्वागत किया।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित