शुक्रवार, 24 अगस्त 2012

बंगलादेशियों की पहचान कर उन्हें उनके देश वापस भेजा जाए : संघ

बंगलादेशियों की पहचान कर उन्हें उनके देश वापस भेजा जाए : संघ

Source: http://www.vskbharat.com     Date: 8/24/2012 5:04:47 PM
नई दिल्ली : २४ अगस्त २०१२ ; राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह (Jt. Gen. Sec.)  डा. कृष्ण गोपालजी ने पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि, बंगलादेशी घुसपैठियों के सम्बन्ध में अनेक वर्षों के प्रयासों के बावजूद अभी तक कोई उल्लेखनीय सफलता नहीं मिल पायी। कोई भी सकारात्मक परिणामकारी कदम न उठाने के कारण यह समस्या आज इतने विकराल रूप में सामने आई है। उत्तर पूर्वांचल के सभी प्रान्त बंगलादेशी घुसपैठ से त्रस्त हैं। संघ यह मांग करता है कि बंगलादेशियों की पहचान कर उन्हें नौकरी, आरक्षण से वंचित किया जाए और उन्हें उनके देश वापस भेजा जाए।
असम की स्थिति आज चिन्ताजनक है। जुलाई मास से प्रारम्भ हुई हिंसक घटनाओं के कारण लाखों लोगों का विस्थापन हुआ है। यह दु:ख की बात है कि ‘बोडोलैण्ड टेरीटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्ट्स’ (BTAD) नामक भारतीय क्षेत्र में हुई घटनाओं से अपने ही देश के नागरिक शरणार्थी बन गये हैं। वहॉं पर हमारे कार्यकर्ता बड़ी मात्रा में सहायता कार्यों में जुटे हैं। बाहर से भी चिकित्सक वहॉं पहुँचे हैं। मुंबई (आजाद मैदान), लखनऊ, कानपुर, बरेली आदि स्थानों पर हुए हिंसक और उपद्रवी प्रदर्शनों ने सभी को चौंका दिया है। साथ ही बंगलौर, पूना, मुम्बई, हैदराबाद से भी बड़ी मात्रा में उत्तर पूर्वांचल के लोग वापस गये हैं। उनके मध्य भय का वातावरण बनाने वालों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। संघ के स्वयंसेवकों ने स्थान-स्थान पर इन लोगो की सहायता की है।
 बंगलादेशी घुसपैठियों के सम्बन्ध में अनेक वर्षों के प्रयासों के बावजूद अभी तक कोई उल्लेखनीय सफलता नहीं मिल पायी। सर्वोच्च न्यायालय ने IMDT-ACT को निरस्त करते समय 2005 में तथा एक बार पुन: 2006 में सरकार की मंशा पर तीखी टिप्पणियॉं की थीं तथा साथ ही इस समस्या के समाधान हेतु गंभीर निर्देश भी दिये थे। किन्तु, कोई भी सकारात्मक परिणामकारी कदम न उठाने के कारण यह समस्या आज इतने विकराल रूप में सामने आई है। उत्तर पूर्वांचल के सभी प्रान्त बंगलादेशी घुसपैठ से त्रस्त हैं। स्वतंत्रता के बाद भी घुसपैठ का क्रम रुका नहीं और इस कारण इन घुसपैठियों की उपस्थिति के कारण असम के 9 जिले मुस्लिम बहुल जिलों में बदल गये हैं।
इन घुसपैठियों के कारण वहॉं के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक वातावरण में उनकी पहचान का भी संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों के अन्दर भविष्य में अपनी सुरक्षा को लेकर भय व्याप्त है। इसी कारण स्थान-स्थान पर संघर्ष का वातावरण बन गया है। स्थिति लगातार विस्फोटक होती जा रही है। असम के मुख्यमंत्री तथा अनेक वरिष्ठ लोगों ने भी यही बात स्वीकार की है।
सर्वोच्च न्यायालय ने 2005 में इन गंभीर खतरों की चेतावनी दे दी थी। किन्तु, सर्वोच्च न्यायालय, विभिन्न उच्च न्यायालयों, (दिल्ली, गुवाहाटी आदि) शासन, प्रशासन, सेना, जॉंच एजेन्सियों के वरिष्ठ लोगों के निर्देशों की अभी तक अनदेखी ही की गई है। इसी का दुष्परिणाम है कि हम इस समस्या के योग्य समाधान की ओर बिल्कुल भी नहीं बढ़ सके।
गंभीर बात यह है कि अब बंगलादेशी घुसपैठियों ने सम्पूर्ण देश में अपनी जगह बना ली है। ऐसे समाचार आ रहे हैं कि देश के प्रत्येक शहर में वे उपस्थित हैं। आवश्यकता यह है कि अब बिना किसी विलम्ब के राष्ट्रीय नागरिक पंजिका में (National Register for Citizens, NRC) का व्यवस्थित निर्माण हो। विदेशी घुसपैठियों की पहचान कर पुलिस थानों (Police Stations) के अनुसार उनकी तालिकाएँ (Lists) बनाई जाएँ और उनके विरुद्ध भारत के कानून (Foreigners Act) के अनुसार कार्यवाही की जाय।
संघ यह मांग करता है कि बंगलादेशियों की पहचान कर उन्हें नौकरी, आरक्षण से वंचित किया जाए और उन्हें उनके देश वापस भेजा जाए।
हमारे कार्यकर्ता इस दृष्टि से देशभर में जनजागरण का कार्य करेंगे। देशभक्त नागरिकों से हमारा निवेदन है कि इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रश्‍न पर जागरूक हों और इस गंभीर समस्या के समाधान हेतु प्रयत्नशील हों।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित