शनिवार, 5 मार्च 2016

गीता के उपदेशों को जीवन में धारण करना समय की आवश्यकता – डॉ. मोहन भागवत जी

गीता के उपदेशों को जीवन में धारण करना समय की आवश्यकता – डॉ. मोहन भागवत जी


कुरुक्षेत्र (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने आप में परिवर्तन लाना होगा. और इसके लिए पवित्र ग्रन्थ गीता के उपदेशों को आचरण में धारण करना होगा. पवित्र ग्रन्थ गीता के उपदेश पूरे विश्व के लिये आवश्यक हैं और आज समय की आवश्यकता भी है कि महान ग्रन्थ गीता के संदेश को हम जीवन में धारण करें.

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी शुक्रवार को कुरुक्षेत्र में गीता ज्ञान संस्थानम का संतजनों की उपस्थिति में शिलान्यास करने के पश्चात मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम के दौरान सरसंघचालक जी ने आदर्श गृहस्थ, वीर जवानों हार न मानो सहित दो अन्य पुस्तकों का विमोचन भी किया. संस्थानम का निर्माण कार्य तीन साल में पूर्ण होगा.

सरसंघचालक जी ने कहा कि भारत मां के पुत्रों में भाईचारा और सद्भावना बरकरार रहे, इसके लिए गीता के संदेशों को अपने आचरण में लाना जरूरी है. देश को आगे ले जाना है तो इसके लिये सभी के सांझे सहयोग की जरूरत है. अगर भारत को फिर से विश्व गुरू बनाना है तो आपसी मनमुटाव को भुलाकर अपने आप में परिवर्तन लाना होगा. गीता के 11वें अध्याय के 13वें श्लोक के एक – एक शब्द को अपने जीवन में धारणा है. इसके साथ ही गीता के 12वें अध्याय भक्ति को भी ग्रहण करना है. गीता का 11वां अध्याय ज्ञान का संदेश देता है, वहीं 12वां अध्याय भक्ति का संदेश देता है. उन्होंने कहा कि भक्ति को मन में धारण करने के लिये स्वयं में नारायण देखना है, सभी को अपना मित्र मानना है और द्वेष को समाप्त करना है. स्वतंत्र देश में एक-एक गुण पर चितंन कर अपने जीवन में धारण करना है. भक्ति से ही कर्म सुंदर होता है.

स्वामी ज्ञानान्द जी महाराज ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह एक बड़ा शोध केंद्र बनेगा. इस अवसर पर देश भर से आए हुए संत और अन्य महानुभव मंच पर उपस्थित थे. गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि चरित्र, परंपरा का सम्मान, बच्चों को संस्कारवान व युवाओं को सही मार्ग  केवल गीता के उपदेशों से ही मिल सकता है. उन्होंने कहा कि गीता का ज्ञान घर-घर पहुंचे तथा पूरे विश्व को एक बार फिर से कुरूक्षेत्र की पावन धरा से गीता का संदेश मिले, इसके लिये ही गीता ज्ञान संस्थानम का निर्माण किया जा रहा है.

राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि महर्षि अरविंद जी ने भी दूरगामी सोच का परिचय देते हुए भविष्यवाणी की थी कि 21वीं शताब्दी में भारत विश्वगुरु बनने की तरफ अग्रसर होगा और उसका आधार गीता बनेगी. मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि हरियाणा की पावन धरा कुरूक्षेत्र में गीता ज्ञान संस्थानम की स्थापना होने से हरियाणा का गौरव पूरे विश्व में बढ़ेगा.

कार्यक्रम में स्वामी गुरु शरणानंद महाराज, हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, बाबा स्वामी रामदेव, स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज, रमेश ओझा, स्वामी वेदांतानंद महाराज, बाबा भूपेन्द्र सिंह, स्वामी परमात्मानंद, स्वामी सत्यानद आदि ने संबोधित किया.

भूल को पीछे छोड़ समाज बढ़े आगे

मंच से योग गुरू बाबा रामदेव जी की वाणी में हरियाणा में गत दिनों बिगड़े हालात पर पीड़ा झलक रही थी. उन्होंने कहा कि गौरव बनाने में समय लगता है, जबकि धूमिल क्षण भर में हो जाता है. हरियाणा ने देश और दुनिया को बहुत कुछ दिया है, परंतु जो भूल हुई है, हमें उससे आगे चलना होगा. उन्होंने बल देते हुए कहा कि इंसानियत की कीमत पर हमें कुछ नहीं चाहिये, हम जाति पंथ में बंधे हुए नहीं हैं. जाति मजहब का अवलंबन कमजोर लोग लेते हैं. योग्यता अर्जित कर स्थान बनाने पर समाज स्वयं सम्मान देता है. मैंने कभी जाति प्रांत का नाम नहीं लिया, बस योग साधना की है, जिससे लोगों ने मुझे प्यार से गले लगाया है. सामाजित भाईचारा बनाने के लिये संत शक्ति आगे आकर समाज का मार्गदर्शन करे. बाबा रामदेव जी ने हरियाणा की सेवा में अपना समय और पतंजलि उत्पादों से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा हरियाणा के हालात ठीक करने में खर्च करने की घोषणा की.

मेरठ से आए नेत्रहिन बच्चों ने गीता श्लोक सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया. राजस्थान के भरतपुर से आई बेटी अमृत्या ने गीता के श्लोक सुनाए, जिसे पूरे 700 श्लोक कंठस्थ थे. कुरूक्षेत्र के राजकीय स्कूल की छात्राओं ने हरियाणवी लोकगीत गाकर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया. दीदी मां साध्वी ऋतंभरा ने बेटियों पर कविता सुनाकर सबकी आंखें नम कर द


विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित