सोमवार, 20 जुलाई 2015

राष्ट्र हित में चिन्तन करने वाले संगठन सदैव राष्ट्रहित की नीति बने इसी बात के लिए क्रियाशील रहते है - ललित शर्मा

राष्ट्र हित में चिन्तन करने वाले संगठन सदैव राष्ट्रहित की नीति  बने इसी बात के लिए क्रियाशील रहते है  - ललित शर्मा
 
दीप  प्रज्जवलन से कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए

प्रान्त संघचालक ललित जी शर्मा उध्बोधन देते हुए


मंच के प्रदेश  संयोजक भागीरथ चौधरी सम्बोधित करते हुए


जोधपुर 19 जुलाई 2015  राष्ट्र हित में चिन्तन करने वाले संगठन सदैव राष्ट्रहित की नीति  बने इसी बात के लिए क्रियाशील रहते है स्वदेशी जागरण मंच भी उनमें से एक है। भारत को समृद्धशाली एवं गौरवमयी बनाने के लिए कार्य कर रहे मंच के कार्यकर्ताओं द्वारा इस बात की चिन्ता न करते हुए कि सरकार किस पार्टी की है, सदैव राष्ट्रहित के मुद्दों को उजागर करना ही चाहिए। वर्तमान में मंच अपने कार्यो के द्वारा इस बात को सिद्ध भी कर रहा है। मंच द्वारा भूमि अधिग्रहण, जीएमक्राॅप्स, ईकाॅमर्स में विदेशी कम्पनियों को खुली छूट जैसे राष्ट्र विरोधी मुद्दों पर मुखर रूप से आन्दोलन किये जा रहे है। यह विचार राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ के जोधपुर प्रान्त संघचालक ललित शर्मा ने स्वदेशी जागरण मंच जोधपुर विभाग द्वारा आयोजित विभाग विचार वर्ग के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कहे।

मंच के विभाग संयोजक अनिल वर्मा ने जानकारी दी कि स्वदेशी जागरण मंच के कार्यकर्ताओं का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम जालोरी गेट स्थित ब्रह्मबाग मन्दिर में रविवार को आयोजित हुआ। इसमें विभिन्न विषयों पर जोधपुर महानगर जोधपुर ग्रामीण एवं फलोदी क्षेत्र के मंच के दायित्वान कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया। 

मंच के प्रदेश  संयोजक भागीरथ चौधरी  ने कहा कि मंच आर्थिक विषयों पर राष्ट्रहित के मुद्दो को लेकर कार्य कर रहा है। जो जंतर मंतर पर हाल ही किये गये भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ जन संसद से सरकार को भी बता चुका है कि राष्ट्रहित व जनहित के मुद्दो पर लड़ाई लड़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जायेगी। पर्यावरण से लेकर जैविक खेती उन्नयन तक के विषयों को मंच के कार्यकर्ता घर-घर पहुंचा रहे है।

मंच के राष्ट्रीय सह सम्पर्क प्रमुख डाॅ. रणजीत सिंह मंच के संस्थापक दत्तोपंत ठेगड़ी ने जो आज से कई वर्षो पहले विश्व व्यापार संघटन द्वारा किये जा रहे अन्र्तराष्ट्रीय समझौतो के कारण देश में लघु उद्योगो व गृह उद्योगो को नुकसान होगा व विदेशी बड़ी कम्पनियों का जाल भारत की स्वदेशी परिवार आधारित आर्थिक तंत्र को तोड़ने में पूरा जोर लगा देगी वह बात आज प्रत्यक्ष सत्य होती नजर आ रही है। ऐसे राष्ट्रऋषि के विचारों को पढना व समझना हमारे आर्थिक जगत आगे की दिशा तय करने के लिए बहुत जरूरी है। 


प्रशिक्षण वर्ग में आर्थिक जीडीपी व अन्य मुद्दो पर कार्यकर्ताओं को  सम्बोधित करते हुए जेएनवीयू  के प्रो. आर.सी.एस. राजपुरोहित ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की सातवी प्रमुख अर्थव्यवस्था है जब अमेरिका के कारण विश्व आर्थिक मन्दी से गुजरा तब भी भारतीय अर्थव्यवस्था अपने स्वदेशी प्रभावों के कारण इस विषम परिस्थितियों से सफलता पूर्वक निकल कर बाहर आई। उन्होने यह भी कहा कि ऐसे राष्ट्र जिन पर हमारी स्वदेशी सभ्यता का प्रभाव रहा है वे भी इस आर्थिक गुलामी के दौर से अपने आपको बचा सकेगे। हमारी भारतीय अर्थव्यवस्था उधार व गिरवी पर न चल कर मितव्यववता व बचत पर चलती है जबकि पश्चिमी अर्थव्यवस्था उधार, अधिक लाभ व शोषण पर चलने वाली है। ऐसे में पश्चिमी अर्थव्यवस्था का अन्धा अनुकरण हमारे विकास में सहायक सिद्ध नहीं हो सकता। जी.डी.पी. के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि पूरे देश में कृषि, इण्डस्ट्रीज व सेवा के कुल आर्थिक गतिविधियों के एक वर्ष का सकल योग है। 2014 में भारत की जीडीपी 2066 मिलियन डाॅलर रही। पूरे विश्व की जीडीपी की ग्रोथ रेट 1.9 प्रतिशत रही है। भारत चीन की तुलना में बहुत वर्षो अपनी जीडीपी को आगे ला सका है।

मंच के प्रदेश सह संयोजक धर्मेन्द्र दुबे ने प्रोजेक्टर प्रजेन्टेशन के माध्यम से बौद्धिक सम्पदा अधिकार विषय पर बोलते हुए विश्व व्यापार संघटन, विश्व बैंक, गैर समझौते, दोहा सम्मेलन आदि पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होने कहा कि विश्व बैंक अपने निर्माण के समय जब सबसे पहला ऋण जो कि 250 यूएस मिलियन डाॅलर था फ्रांस को दिया गया तो उन्होने उस समय की सरकार के सहयोगियों को हटाने की शर्त पर दिया। तो ऐसे में भारत में चल रहे वल्र्ड बैंक प्रायोजित 732 प्रोजेक्ट के लिए विभिन्न शर्तो को मानने के लिए विवश कर रहा है और आगे भी करेगा इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता। 

डिजिटल इण्डिया विषय पर  विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर के प्रफुल्ल मेहता ने डिजिटल लाॅकर, ई साईन, नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल, ई हाॅस्पीटल, भारत नेट जैसे विषयों को विस्तार से समझाया। उन्होने यह पक्ष भी रखा कि आने वाला युग पूर्ण रूप से इलेक्ट्रोनिक सूचनाओं के आदान प्रदान से परिपूर्ण तंत्र होगा। ऐसे में डिजिटल इण्डिया वैश्विक परिदृष्य में भारत को अगली पंक्ति खड़े करने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया एक सशक्त कदम है। हमें इसमें विदेशी निवेशको व बड़ी कम्पनियों के साथ समझोतो को सही प्रकार से ही लागू करना होगा। गांव के युवा व आमजन तक इसकी पहुंच बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षणों को करने की आवश्यकता है।

कार्यकर्ताओं को मिडिया फ्रेंडली रहने के लिए भी एक सत्र का आयोजन किया गया जिसमें बालते हुए सन्तोष प्रजापत ने मिडिया का राष्ट्रहित के विभिन्न आयामों के लिए सदैव सहयोग लेना चाहिए। तथ्यात्मक जानकारीयों के साथ में हम मिडिया के विभिन्न माध्यमों से जनता तक अपनी बात आसानी से पहुंचा सकते है। 

विभाग सहसंयोजक महेश जांगिड़, विनोद मेहरा, अनिल कुमार वर्मा, निलेश तिवारी, महानगर संयोजक अनिल माहेश्वरी, फलोदी संयोजक प्रमोद पालीवाल, जिला सह संयोजक मनोहर सिंह चारण ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

कार्यक्रम में मिथिलेश झा, रोहिताष पटेल, गजेन्द्र सिंह परिहार, ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यकर्ताओं में जयन्त माथुर, हरिश सोनी, रामसिंह, सत्येन्द्र प्रजापत, महेश वैष्णव, श्याम पालीवाल, किशन लाल सुथार ने सहयोग किया।


                                                        

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित