शुक्रवार, 4 जून 2010

इस फैमिली पर कुछ कहना नहीं आसां, बस इतना समझ लीजै!


इस फैमिली पर कुछ कहना नहीं आसां, बस इतना समझ लीजै!
4 Jun 2010, 0638 hrs IST,नवभारत टाइम्स
भारत में सबसे मुश्किल क्या है? नेहरू-गांधी फैमिली पर फिल्म बनाना या किताब लिखना। हाल का ट्रेंड तो यही कहता है। फिल्मकारों और लेखकों
े उम्मीद की जाती है कि वे वही कहेंगे, जो परिवार को नागवार न लगे। अपनी इज्जत से छेड़छाड़ उसे जरा भी बर्दाश्त नहीं।

सारी नहीं, सॉरी कहो
सबसे ताजा वाकया है स्पेनिश लेखक जेवियर मोरो की किताब एल सारी रोसो यानी द रेड सारी का। सोनिया गंधी की जिंदगी पर लिखी गई यह नॉवेल नुमा किताब 2008 में छपी थी। इटैलियन, फ्रेंच और डच में इसकी दो लाख से ज्यादा कॉपियां बिक चुकी हैं और अब इसका इंगलिश ट्रांसलेशन छपने के लिए तैयार है। मोरो और उनके पब्लिशर्स को लीगल नोटिस मिला है, जिसमें किताब वापस लेने को कहा गया है।

क्या है किताब में
किताब के टाइटल में जिस लाल साड़ी का जिक्र है, उसे लेखक के मुताबिक पंडित नेहरू ने जेल में बुना था और सोनिया ने अपनी शादी के दिन पहना था। यह कहानी है, इटली के एक छोटे से गांव में पैदा हुई लड़की के हैरतअंगेज सफर की जिसे पावर तो मिली, लेकिन मौतों के सिलसिले से गुजरकर। किताब का सब-टाइटल है- लाइफ इज द प्राइस ऑफ पावर यानी ताकत की कीमत है जिंदगी।

क्या कहना है वकीलों का
इस केस की अगुआई कर रहे सीनियर वकील और कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और उनके सहयोगियों का कहना है कि किताब में बेमतलब के और मनगढ़ंत किस्से रचे गए हैं। सब कुछ ऐसे पेश किया गया है, जैसे वाकई हुआ हो। मोरो इसे बायोग्राफी बताकर बेच रहे हैं, जिससे गलत इमेज बनती है। किताब में संजय गांधी को गालियां बकते और सोनिया को राजीव की मौत के बाद इटली चले जाने की सोचते दिखाया गया है। न सिर्फ यह किताब झूठ का पुलिंदा है, बल्कि इसे सच बताकर पेश किया गया है। मामला नेहरू-गांधी फैमिली की इज्जत से खिलवाड़ का बनता है।

क्या कहना है मोरो का
मोरो का दावा है कि यह एक उपन्यास है, हिस्ट्री नहीं। उनका कहना है कि कांग्रेस तो चाहेगी कि सोनिया को दिल्ली में पैदा हुई ब्राह्मण बताया जाए।

राजनीति या अनीति
आज रिलीज हो रही प्रकाश झा की फिल्म राजनीति को कांग्रेस की टेढ़ी नजर का सामना करना पड़ा है। हालांकि नेहरू-गांधी फैमिली ने सीधे कुछ कहने से परहेज किया है, लेकिन कांग्रेसी अपनी नाराजगी छुपा नहीं रहे हैं। माना जाता है कि फिल्म में काट-छांट की गई है। झा सेंसर की सख्ती से खफा हैं।

क्या कहा , सोनिया ?
इमर्जेंसी के दिनों में ' किस्सा कुर्सी का ' बनाकर सरकार का डंडा खा चुकेजगमोहन मूंदड़ा का इरादा सोनिया पर इसी नाम से फिल्म बनाने का था।सोनिया के रोल के लिए इटैलियन एक्ट्रेस मोनिका बलुची को साइन भी करलिया गया ा। फिर मूंदड़ा ने सोनिया से मुलाकात की और कुछ ही दिनबाद उन्हें सिंघवी का नोटिस मिल गया। बरस हो गए , इस फिल्म काजिक्नहीं हुआ।

नई मदर इंडिया
फिल्मकार कृष्णा शाह का इरादा ंदिरा गांधी पर एक फिल्म बनाने का है।इसका नाम होगा - मदर : इंदिरा गांधी स्टोरी। कहते हैं कि शाह ने इंदिराके रोल के लिए माधुरी दीक्षित से बात की , लेकिन माधुरी ने क्या कहा , यहकिसी को नहीं पता। इस फिल्म को 2011 में रिलीज करने की बात थी ,ेकिन कौन जानता है क्या हंगामा खड़ा हो जाए। हुए बिना रह जाए , ऐसातो नहीं हो सकता।

हॉट समर
फिल्मकार जो राइट ने इंडियन समर नाम से फिल्म बनाने की तैयारी लगभगपूरी कर ली थी। यह भारत के आखिरी गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन औरउनकी पत्नी एडविना की हानी है। एडविना से पंडित नेहरू के लव अफेयरका जिक्र भी इसमें होता , लिहाजा भारत सरकार को शक हुआ। उसने फिल्मकी स्क्रिप्ट ांगी। फिलहाल यह प्रोजेक्ट अटका पड़ा है। केट ब्लेंशेट को इसमेएडविना का रोल करना था।

03 जून 2010 आईबीएन-7 स्पेनिश लेखक जेवियर मोरो की किताब ‘द रेड साड़ी’ सोनिया गांधी की जिंदगी पर आधारित है। ये किताब भारत में आने से पहले ही विवादों से घिर गई है। कांग्रेस पार्टी को किताब की कुछ पंक्तिओं पर ऐतराज है और कांग्रेस चाहती है कि देश में किताब पर पाबंदी लगा दी जाए। कांग्रेस की तरफ से इस किताब के लेखक को कानूनी नोटिस भी भेजा गया है। मोरो की कलम से लिखी सोनिया गांधी की जिंदगी पर आधारित ये किताब स्पेन में 2008 से ही बिक रही है। अब इसके अंग्रेजी अनुवाद को भारत में बेचने की तैयारी च रही है। मोरो ने राजीव गांधी की बर्बर हत्या के बाद के पलों को सोनिया गांधी की नजरों से देखने की कोशिश की है। वो लिखते हैं ‘कि राजीव की मौत से सोनिया को झकझोर कर रख दिया और उसके बाद ही वो सब कुछ समेट कर वापस अपने मुल्क जाने की सोचने लगीं।’ जाहिर है सोनिया गांधी की ये छवि उनकी मौजूदा छवि से मेल नहीं खाएगी। कांग्रेस के नेता ये नहीं चाहेंगे कि सोनिया गांधी की एक ऐसी छवि जनता के बीच जाए जो पति की हत्या के बाद बहादुरी से हालात का सामना करने के बजाय, पति के ही देश को अपना देश बनाकर उनकी यादों को यहीं संजोने, अपने बच्चों को यहीं बड़ा करने के बजाय वापस अपने मुल्क लौट जाने की सोचने लगी थीं। आज राजीव का सपना पूरा हुआ: सोनिया गांधी ‘द रेड साड़ी’ किताब का इटालवी, फ्रेंच और डच भाषा में अनुवाद हो चुका है। मोरो का दावा है कि अब तक उनकी किताब ‘एल साड़ी रोज़ा’ की करीब ढाई लाख प्रतियां बिक भी चुकी हैं। ज़ाहिर है सोनिया की जिंदगी अतर्राष्ट्रीय ‘बेस्टसेलर’ के दर्जे में पहुंच रही हैं। लेकिन किताब पर तूफान सिर्फ राजीव गांधी की हत्या के बाद के पलों पर ही नहीं उठ रहा है बल्कि कांग्रेस की नाराजगी किताब में दर्ज सोनिया की शुरुआती जिंदगी के कई पन्नों पर भी है। यानि सोनिया का बचपन और इटली में बिताए गए कई अहम पल। साफ है कांग्रेस सोनिया के नाम के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करने वाली। इसलिए कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मोरो को कानूनी नोटिस थमा दिया है। ये किताब नहीं एक तूफान है। कांग्रेस को डर है कि इसमें लिखी कुछ बातें अगर दुनिया के सामने आ गईं तो विरोधियों को बोलने का मौका मिल जाएगा। कांग्रेस पार्टी ये नहीं चाहेगी कि सोनिया की जिंदगी के कुछ अनछूए पहलू दुनिया के सामने आए। इसलिए कांग्रेस इस किताब को भारत में नहीं आने देना चाहती।

जयपुर.el sati rojoपहले ‘जयपुर फुट’, फिर ‘भोपाल में आधी रात’ और अब ‘द रेड सारी’। लाल साड़ी (स्पेनिश नाम- एल सारी रोज़ो) जेविएर मोरो की वह ताजा पुस्तक है, जिसने कांग्रेस के भीतर आतंक की लहर सी छेड़ दी है। पुस्तक में कांग्रेसियों को सत्ता का भूखा बताया गया है।। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी तक ने लेखक को कानूनी नोटिस भेजकर पुस्तक के भारत में प्रकाशन से रोका है। पुस्तक तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतंगमय उपनिषद वाक्य से शुरू की गई है। इसके बाद कहानी शुरू होती है 24 मई 1991 के दिन से, जब राजीव गांधी का अंतिम संस्कार किया जा रहा था।

लाल साड़ी ही क्यों?

राजीव की हत्या के बाद जब सोनिया ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद ठुकरा दिया तो कांग्रेसी नेता उनके पास गए और उनके घर में लगी उनकी एक तस्वीर की तरफ इशारा किया। सोनिया जी, इस फोटो को देखो। देखो ये लाल साड़ी, जो आपने शादी के दिन पहनी थी, इसे पंडित जवाहरलाल नेहरू ने चरखे पर कातकर तैयार किया था। इसी संदर्भ को उठाते हुए लेखक ने पुस्तक का नाम लाल साड़ी (द रेड सारी) रखा।

इस पर सोनिया ने जवाब दिया : हां, लेकिन यह मत भूलो कि मैं एक विदेशी हूं। इस पर कांग्रेसी नेताओं ने तर्क दिया : मैडम, आप ऐनी बिसेंट को याद कीजिए। कांग्रेस की प्रमुख नेता। उन्होंने पार्टी का नेतृत्व राष्ट्रीय स्तर पर किया था। वे आयरिश थीं। आप इटली की हैं तो क्या हुआ? विचार बुरा नहीं है। लेकिन सोनिया बोलीं : आई एम सॉरी। आप गलत दरवाजा खटखटा रहे हैं।

पुस्तक के विवादित अंश

एक पुजारी ने सोनिया को राजीव गांधी के अंतिम संस्कार में शामिल होने से यह कहकर रोक दिया था कि विधवाओं को ऐसे में दूर रहना होता है। और फिर वे तो दूसरे धर्म की हैं।

सोनिया जब पहली बार राजीव के साथ भारत आईं तो वे यह जानकर हैरान रह गईं कि इस देश में सती प्रथा जैसी बर्बर कुरीतियां हैं।

राजीव की हत्या के तत्काल बाद सोनिया ने अपनी बहन अनुष्का से आशंका जताई कि यह कुकृत्य इंदिरा के हत्यारे सिखों, गांधीजी की हत्या करने वाले हिंदू कट्टरपंथियों या कश्मीर के मुस्लिम अतिवादियों जैसों में से किसी का हो सकता है।

सोनिया ने राजीव गांधी को प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद सुरक्षा कम किए जाने पर बेहतर सुरक्षा के लिए दबाव बनाया तो राजीव बोले : अगर वे तुम्हें मारना ही चाहते हैं तो मारकर ही रहेंगे।

राजीव की हत्या के तत्काल बाद सोनिया की मां ने फोन करके उन्हें कहा : बेटी तुम्हें इटली वापस लौट आना चाहिए। सोनिया खुद भी सोचने लगीं थी कि अब यहां रुकने का मतलब ही क्या है?

-राजीव गांधी सुरक्षा को लेकर पहले ही चिंतित थे। एक बार उन्होंने बच्चों को मास्को के अमेरिकन स्कूल में भर्ती कराने का फैसला कर लिया था, लेकिन सोनिया बच्चों को अपने पास ही रखना चाहती थीं।

-सोनिया ने कांग्रेसी नेताओं को फटकारा था : ये तो इंदिरा गांधी दबाव नहीं डालतीं तो राजीव भी राजनीति में नहीं आते। वे पायलट ही अच्छे थे। ऐसा होता तो आज वे हमारे बीच होते।

-कांग्रेसी नेताओं ने उन्हें अध्यक्ष पद के लिए बार-बार जिम्मेदारी के लिए कहा तो सोनिया बोलीं : जिम्मेदारी? इस परिवार को ही बार-बार अपना खून देकर इस देश के लिए अपनी जिम्मेदारी क्यों निभानी चाहिए? क्या आपका दिल इंदिरा और राजीव के खून से भी नहीं भरा है? क्या अभी आप और भी चाहते हैं?

कांग्रेसी नेता : आप ही भारत हैं। आपके परिवार के बिना हम कुछ भी नहीं। आपके ही हाथों में आज गांधी-नेहरू का वो दीपक है, जो देश को अंधेरे में रोशनी दिखा सकता है।

कांग्रेसी नेताओं पर तीखे कटाक्ष

कांग्रेसी नेताओं ने सोनिया के दुख की घड़ी में भी ये नहीं सोचा कि उनके सीने में एक इनसान का दिल धड़क रहा है। उन्होंने बिना एक क्षण भी विलंब किए, सोनिया के जरिए अपने व्यक्तिगत सत्ता को सुरक्षित करने की चिंता की।

-भारत में सत्ता ऐसा चुंबक है, जिससे बचना किसी के लिए संभव नहीं। कांग्रेसी नेता इतने चालाक निकले कि उन्होंने सोचा तारीफों के जरिए सोनिया गांधी अंतत: मान ही जाएंगी। अपने लिए न सही, अपने बच्चों के लिए और अपने गांधी-नेहरू परिवार के नाम के लिए।

-सोनिया गांधी बचपन से ही दमे की मरीज है। उन्होंने अपने कुत्ते का नाम स्टालिन रखा था।

-सोनिया की मां पाओला एक पुलिस वाले की बेटी हैं और वे अपने दादा का बार संचालित करती थीं।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित