गुरुवार, 3 सितंबर 2015

संघ की समन्वय बैठक


संघ की समन्वय बैठक 

समन्वय बैठक है क्या? यह कब से शुरू हुआ? इस बैठक की विशेषता कौन सी है? यह जानना इस समय जरुरी है।


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की समन्वय बैठक  (2,3 और 4 सितम्बर) से दिल्ली के बसंत कुंज में चल रही है । रविवार को जब संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य ने प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी, तो मीडिया जगत में एक कौतुहल, तर्क और कयास लगाने का सिलसिला जारी हो गया। ऐसा होना स्वाभाविक भी है, क्योंकि इस दौरान पाटीदार-पटेल का आरक्षण आन्दोलन, बिहार में विधानसभा चुनाव और धर्म आधारित जनगणना के सामने आने पर देश में जो माहौल बना है वह इस बैठक की प्रासंगिकता को बढ़ा देता है। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस समय भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संघ के प्रचारक हैं और संघ से प्रगट हुआ राजनीतिक संगठन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सत्ता देश की बागडौर संभाल रही है। समन्वय बैठक है क्या? यह कब से शुरू हुआ? इस बैठक की विशेषता कौन सी है? यह जानना इस समय जरुरी है।

समन्वय बैठक की अवधारणा
‘समन्वय’ यह शब्द हम भारतवासियों के लिए कोई नया नहीं है। हमारे प्राचीन हिन्दू संस्कृति में सबके साथ ‘समन्वय’ रखने की बात कही गई है। व्यक्ति का परिवार से, परिवार का समाज से, समाज का राष्ट्र से, राष्ट्र का समष्टि से, इस तरह व्यक्ति से समष्टि तक समन्वय रखने की प्रेरणा देनेवाली हमारी संस्कृति दुनिया के लिए अलौकिक है। आज के ज़माने में ‘समन्वय’ को ‘तालमेल’ की संज्ञा दी जाने लगी है। पर तालमेल और समन्वय दोनों की अवधारणा भिन्न है। सामान्यतः अलग-अलग दिशा में बहकने वालों को एक जगह पर केन्द्रित करने की विधि को तालमेल कहते हैं, जबकि ‘समन्वय’ में विपरीत दिशा में भटकने की कोई बात ही नहीं। एक तरह से समन्वय शब्द ‘एक-दूसरे से जुड़ा हुआ’ इस धारणा का सूचक शब्द है। आरएसएस की समन्वय बैठक इसी अवधारणा का एक रूप है।

समन्वय बैठक की शुरुवात 
संघ में बैठकों का दौर तो उसके स्थापना से चला आ रहा है। पर जब संघ का कार्य अधिक विस्तारित हो गया तो बैठक को एक प्रारूप देने की योजना बनीं। संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक में प्रस्ताव पारित किए जाते हैं, निर्णय लिए जाते हैं। पर समन्वय बैठक में कोई प्रस्ताव पारित नहीं होता। इस बैठक में संघ और संघ प्रेरित संगठनों के शीर्ष पदाधिकारी अपने कार्य के अनुभवों, कठिनाइयों, चुनौतियों और सफलता से जुड़े मुद्दों को आपस में बांटते हैं।

संघ की समन्वय बैठक की औपचारिक शुरुवात आपातकाल के बाद हुआ। इसका आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष में दो बार (सितम्बर और जनवरी) में होता है। इस बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष पदाधिकारी, जिनमें सरसंघचालक, सरकार्यवाह, सहसरकार्यवाह सहित संघ प्रेरित संगठनों के पदाधिकारी सम्मिलित होते हैं।

समन्वय बैठक की विशेषता
संघ की समन्वय बैठक में लगभग विविध संगठनों से लगभग 90 अधिकारी और संघ से 25 अधिकारी शामिल होते हैं। सबको अपने विषय तथा अनुभवों की प्रस्तुति के लिए समान अवसर मिलता है। 

इस समय समाचार पत्रों व टीवी मीडिया में समन्वय बैठक का मुख्य एजेंडा “संघ और भाजपा में बेहतर तालमेल” बिठाने के मुद्दे पर जोर दिया जा रहा है। खबर इस तरह दिखाई जा रही है मानो “भाजपा” के राजनीतिक मुद्दों पर ही सारा समन्वय बैठक केन्द्रित है। सच्चाई यह है कि भाजपा को भी अन्य संगठनों की भांति अपने विषय रखने के लिए एक-आध घंटे का समय मिलेगा। इसलिए समन्वय बैठक को राजनीतिक हौवा बनाने की आवश्यकता नहीं है। यह बैठक देश व समाज कार्य में सक्रिय संगठनों के अनुभवी अधिकारियों के सहज संवाद का आयोजन है, जो कार्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस बैठक से सभी को प्रेरणा और ऊर्जा मिलती है, और यही इसकी विशेषता है।

वर्तमान ‘समन्वय बैठक’ में क्या?  
संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य ने रविवार को अपने प्रेस वार्ता में समन्वय बैठक सम्बन्धी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस बार बैठक का दायरा बढ़ाया गया है, और पूर्व की तुलना में दोगुने कार्यकर्ता सम्मिलित होंगे। समाज जीवन में बहुत सी घटनाएं घट रही हैं, अतः विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत अधिकारियों से व्यापक जानकारी मिल सके, इस दृष्टि से इसके स्वरूप को बढ़ा किया गया है।

दीनदयाल शोध संस्थान दिल्ली के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. वैद्य ने कहा कि संघ की समन्वय बैठक कोई निर्णय प्रक्रिया की बैठक नहीं है, न ही बैठक में कोई प्रस्ताव पारित किया जाता है। संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारी देशभर में प्रवास करते हैं, इस दौरान कार्यकर्ताओं का विभिन्न वर्गों के लोगों से प्रत्यक्ष मिलना होता है। इनसे इनपुट, आब्जर्वेशन मिलते रहते हैं, जिन्हें समन्वय बैठक में सांझा किया जाता है। साथ ही बैठक में संगठनात्मक चर्चा होती है। इस बैठक में भी केवल अनुभवों का आदान प्रदान होगा। उन्होंने बताया कि कार्यकर्ताओं के माध्यम से आए समाज से संबंधित समस्त विषयों पर चर्चा हो सकती है, जिसमें राजनीति, गुजरात में आरक्षण को लेकर आंदोलन का मामला, वन रैंक वन पेंशन, धार्मिक जनगणना के मामले सहित अनेक विषयों पर भी चर्चा हो सकती है।

डॉ.वैद्य ने स्पष्ट किया कि इस बैठक में केंद्र सरकार को केंद्र में रखकर चर्चा या समीक्षा नहीं होगी। बैठक में विभिन्न संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी, कार्यकर्ताओं सहित संघ के अखिल भारतीय अधिकारी उपस्थित रहेंगे। संघ के सरसंघचालक डॉ.मोहन भागवतजी बैठक में पूरा समय उपस्थित रहेंगे, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय की अनुकूलता के अनुसार बैठक में उपस्थित रहेंगे।

साभार: newsbharati.com

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित