बुधवार, 2 सितंबर 2015

स्व. ठेंगड़ी जी का आर्थिक चितंन साम्यवाद के अधूरे चिंतन में नई दिशा है – डॉ. मोहन भावगत जी

स्व. ठेंगड़ी जी का आर्थिक चितंन साम्यवाद के अधूरे चिंतन में नई दिशा है – डॉ. मोहन भावगत जी

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नई दिल्ली. दत्तोपंत ठेंगड़ी जीवन दर्शन पुस्तक के प्रथम दो खण्डों का विमोचन 30 अगस्त को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत ने किया. भारतीय मजदूर संघ द्वारा पुस्तक विमोचन कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली में किया गया. पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में पुस्तक के सम्पादक अमरनाथ डोगरा जी तथा पुस्तक के लिए देश भर से सामग्री संकलन करने वाले रामदास पांडे जी को शाल एवं श्रीफल देकर सरसंघचालक जी ने सम्मानित किया.
DSC_5885 कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि स्व. दत्तोपंत ठेंगड़ी जी संघ के विचारों का प्रतिपादन करने वाले एक प्रमुख प्रचारक थे. उनका आर्थिक चिन्तन पूंजीवाद और साम्यवाद के अधूरे चिन्तन से उकताये विश्व के लिये एक नई दिशा है. कट्टर मार्क्सवाद के अनुयायी नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एमजी बोकरे जी ने जब ठेंगड़ी जी के विचार सुने तो उनके जीवन की दिशा ही बदल गई. 
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उन्होंने कहा कि स्व. दत्तोपंत जी केवल विचारक ही नहीं थे, उन्होंने एक आदर्श जीवन भी जीया. सहज, सरल एवं आदर्श जीवन के धनी ठेंगड़ी जी कार्यकर्ताओं की पूरी चिन्ता करते थे. जहां कहीं भी प्रवास पर जाते थे, सारे कार्यक्रम निपटाने के पश्चात स्थानीय परिचित कार्यकर्ताओं के घर पर मिलने अवश्य जाते थे. डॉ. भागवत जी ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि जब वे नागपुर में प्रचारक थे, स्वर्गीय ठेंगड़ी जी ने अपने नागपुर प्रवास के समय कार्यक्रम के बाद रात्रि 11 बजे उनको साथ चलने को कहा और एक- एक कार्यकर्ता को जगा- जगा कर मिलते हुए रात्रि 2 बजे तक कार्यालय वापिस लौटे.
साभार:: vskbharat.com

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित