शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2015

चर्च में चोरी की अधिक चर्चा, कहीं षड्यंत्र तो नहीं?'

चर्च में चोरी की अधिक चर्चा, कहीं षड्यंत्र तो नहीं?'

नई दिल्ली, फरवरी 17 : गत ढाई महीने में दिल्ली के 5 चर्चों पर हमलों की घटनाएं सामने आईं, इस कारण ईसाई समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किए। वहीं 13 फरवरी को ही दक्षिण दिल्ली के एक नामी ईसाई स्कूल में भी चोरी और तोड़फोड़ की घटना सामने आई, जिसके बाद इस मामले ने और अधिक तूल पकड़ा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस सम्बन्ध में गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक  की और दिल्ली के चर्चों पर हुए हमलों और चोरियों पर जवाब मांगा।

इस पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर बी.एस. बस्सी ने गृह मंत्रालय को बताया है कि  मंदिरों, गुरुद्वारों और मस्जिदों में चर्चों के मुकाबले ज्यादा चोरियां  हुई हैं। बस्सी ने जो डेटा पेश किया है, उसके मुताबिक वर्ष 2014 में 206  मंदिरों, 30 गुरुद्वारों, 14 मस्जिदों और 3 चर्चों में चोरी की वारदात हुई  हैं। पुलिस कमिश्नर बस्सी ने स्पष्टीकरण देते हुए अधिकारियों को बताया कि  हाल की घटनाओं की वजह से ऐसी धारणा बनी है कि एक खास समुदाय (ईसाई) को  निशाना बनाया जा रहा है। 




मंत्रालय ने बस्सी से कहा है कि वह 5 चर्चों और एक ईसाई स्कूल में कथित तोड़फोड़ की घटनाओं के मामलों को तुरंत  हल करें, क्योंकि इसकी वजह से समुदायों के बीच तनाव पैदा हो रहा है। दिल्ली पुलिस के एक समारोह में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि इस तरह की  घटनाएं पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे  शहर को सुरक्षा देना मुश्किल काम है, लेकिन दिल्ली पुलिस को यह करना होगा। 

किसी भी धर्मस्थल में इस तरह की तोड़फोड़ या चोरियां होना कदापि स्वीकार्य नहीं  है। इसपर कड़ी कार्रवाई होनी ही चाहिए। पर समुदाय विशेष को सामने रखकर इन घटनाओं को साम्प्रदायिकता का रंग देना सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ने का घृणित काम है। हमारे देश में इन दिनों हर घटना को साम्प्रदायिकता का रंग चढ़ाने का षड्यंत्र शुरू है। हमारे देश की मीडिया इन घटनाओं पर एकतरफा खबर  परोसती है और दुनिया के सामने भारत की छवि को धूमिल करने का प्रयत्न करती  है। यही कारण है कि अमेरिका जैसा देश, जहां काले-गोरे का भेद अबतक नहीं गया, और भारतीय समुदाय को ईसाई बनाने के लिए जहां से मिशनरियों को बड़े प्रमाण में भेजा जाता है उसके राष्ट्राध्यक्ष बराक ओबामा भारत की वर्तमान स्थिति को ‘धार्मिक दृष्टि से असहिष्णु’ कहकर अपमानित करते हैं। 

कुछ माह पूर्व भारत में ‘घर वापसी’ चर्चा का विषय बना। दूसरे सम्प्रदायों में  गए हिन्दू लोग वापस हिन्दू धर्म में शामिल हुए। हिन्दू संगठन इसे ‘घर वापसी’ कहते हैं। इस ‘घर वापसी’ को ‘धर्मांतरण’ का नाम देकर मीडिया जगत और तथाकथित सेकुलरवादियों ने खूब बवाल मचाया। पर यह जग जाहिर है कि भारत में सदियों से तलवार और गोलियों के बल पर सनातन भारतीय (हिन्दू) समाज को मतांतरित किया गया। अंग्रेजों के राज में और देश के बंटवारे के बाद भी डराकर और लालच देकर करोड़ों हिंदुओं को ईसाई बनाया गया। आज भी धर्मांतरण की घटना हो रही है। पर ईसाई धर्मांतरण पर को चर्चा नहीं करता जबकि घर-वापसी के कार्यक्रमों से कथित सेकुलरवादी भाव जाग जाता है। 

इन दिनों मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारा और चर्चों में हो रही चोरियों से  लगता है कि लोग ईश्वर से नहीं डरते, न ही उनको कोई शर्म है। ऐसे षड्यंत्रकारी ताकतों से जुड़े लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी ही चाहिए। पूजा-स्थल लोगों की आस्था का केंद्र है। इसलिए वहां तोड़फोड़ और चोरी की घटना दुखदायी है। पर प्रत्येक घटना को सांप्रदायिकता का रंग देना देशहित में नहीं है। इससे सामाजिक एकता को चोंट पहुंचती है, इससे अमेरिका जैसे देश को हम पर धार्मिक असहिष्णुता के नाम पर गलत हमले करने का मौका भी मिलता है।  हमारा देश ‘भारत’ दुनिया में धार्मिक सहिष्णुता की मिसाल है।  
साभार: http://hn.newsbharati.com

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित