सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

अनुशासन, समय पालन व् देशहित में कार्य करना स्वयंसेवक की आदत- डॉ. मोहनराव भागवत


अनुशासन, समय पालन  व् देशहित में   कार्य करना स्वयंसेवक  की आदत- डॉ. मोहनराव भागवत
 


परम पूजनीय सरसंघचालक जी  उध्बोधन देते हुए


परम पूजनीय सरसंघचालक जी  उध्बोधन देते हुए

भरतपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने कहा कि संघ का काम कार्यकर्ता का निर्माण करना है, जो देश हित कार्य कर सके। अनुशासन, समय पालन  व् देशहित में   कार्य करना स्वयंसेवक  की आदत बन चुकी है. संघ समाज को जोड़ने का कार्य करता है. संघ कार्य के बदले स्वयंसेवक को क्या मिलेगा या स्वयंसेवक की सोच नहीं है। संघ देशभक्ति के विचार को आगे बढ़ने के लिए सतत रूप से प्रयासरत है. संगठन के इस काम को गांव और बस्ती तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्‍होंने कहा कि सरकार और परिस्थिति बदलती रहती हैं, लेकिन इन सब में हमें समर्थ भारत के निर्माण के लिए संघ के कार्य को बढाना होगा। संघ के प्रत्येक स्वयंसेवक का उद्देश्य जीवनपर्यन्त देश के लिए कार्य करना है. 

संघ अपनी स्थापना के ९० वर्षों  से सतत रूप से राष्ट्र कार्य में लगा है. संघ को समझने के लिए अन्य संगठनो से तुलना करना संभव नहीं है।  

सरसंघचालक जी रविवार को लोहागढ़ स्टेडियम में भरतपुर धौलपुर जिले के कार्यकर्ताओं के नव चैतन्य संगम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दुनिया में एकता की कुछ शर्तें हैं, किंतु भारत में देश के प्रति मातृ भूमि का भाव एकता का सूत्र है। 
केशव नगर में अशोक वृक्ष का रोपण करते हुए

इस भाव को जब-जब हम भूले हैं, विदेशियों ने विजय प्राप्त कर हमें गुलाम बनाया। इसलिए एक हजार साल के उस वक्त को भूलकर हमें संघ के कार्य को बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा के देश विविधता से भरा हुआ है। इसे स्वीकार करो। एकता को पहचानों। सबको साथ लेकर संघ कार्य को बढ़ाएं। क्योंकि संघ का कार्य लोगों को जोड़ना है। लोग जुड़ेंगे तो देश बढ़ेगा।

इसके लिए हमें जांत -पांत, क्षेत्र, धर्म के भेद को छोड़कर संगठन के कार्य को बढ़ाना होगा। संघ के मर्म को समझ कर समर्थ भारत का निर्माण करना है। डॉ. भागवत ने कहा कि संघ का काम यंत्रवत नहीं होना चाहिए, वरन विचार के साथ हो। क्योंकि इससे नुकसान होता है। संघ की शाखाओं का उद्देश्य ऐसे कार्यकर्ताओं का निर्माण करना है, जो देने के भाव से आएं। निस्वार्थ भाव से काम कर सकें क्योंकि दिशावान कार्यकर्ता ही हर क्षेत्र में संगठन को आगे बढ़ा सकता है। 
 
डॉ. भागवत ने अपने उध्बोधन में कहा कि भारत की प्रशस्ति रामायण, महाभारत,पुराणों  तथा वेदों  में पढ़ने को मिलती है.  हमारी संस्कृति हमें आपस में जोड़ने वाली है.  हमें भारत को फिर से विश्वगुरु बनाना है ताकि हम पुरे विश्व को सुखी बना सके.  विविधता  को स्वीकार करना चाहिए सारी  विविधता एक से निकली है , एक को जानोगे तो सदा के लिए सुखी हो जाओगे. यही कार्यकर्त्ता के जीवन का लक्ष्य है।  अपनी अपनी श्रद्धा पर पक्के रहना चाहिए साथ ही दूसरे की श्रद्धा का सम्मान करे क्योंकि वो भी उतनी  ही सत्य है.

डॉ. भागवत ने अपने उध्बोधन में त्याग का आव्हान करते हुए कहा कि सभी को मिल जुल कर रहते हुए सभी के हित का विचार करते रहना चाहिए. अपने अमूल्य जीवन को सेवा और परोपकार के लिए उपयोग मे लेना है इसे ध्यान में रखते हुए सदैव त्याग के लिए तत्पर रहे. यह भारतीय संस्कृति की ही सीख है यही  हिन्दू संस्कृति है.
हमारा कार्य हिन्दू समाज को संगठित करना है , हिन्दू समाज संगठित होगा तो भारत वर्ष अपने आप सम्पन्न  होगा।  समाज और देश के लिए कम से कम एक घंटा निकालो। जिम्मेदारी पूरी करने के बाद वानप्रस्थी जीवन जियो।

राष्ट्र भक्ति की भावना को आगे बढ़ाना है।  राष्ट्र के समक्ष कई संकट है कई कार्य करने  आवश्यकता भी है।  कार्य करने के लिए प्रमाणिकता के साथ निःस्वार्थ  भाव से उसे पूर्ण करने वाले व्यक्तियों का समाज बनाना संघ का कार्य हैं।

इजराइल का उदाहरण देते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि  यह छोटा सा देश हमारे साथ ही आजाद हुआ था।  हमारे पास बड़ा भौगोलिक क्षेत्र तह, विविधता भी थी फिर भी हम अपेक्षित तरक्की नहीं कर पाये। इसका कारण अपनी  सांस्कृतिक पहचान को भूलना था और उसकी कारन विदेशी आक्रामकों विजयी होने लगे. हमें गुलाम  बना लिया गया।  अब हमें हज़ार वर्ष के इस चक्र को बदलना है , इसके लिए समय निकलना  होगा , देश  करना होगा।  अपनी अपनी क्षमता के अनुसार मातृभूमि के लिए खड़े रहो   ताकि राष्ट्र के लिए जीने-मरने वाला समाज तैयार हो सके।


इससे पूर्व कार्यकर्ताओं ने घोषवादन पर नियुद्ध, दंड प्रहार और व्यायाम का प्रदर्शन किया। भाव गीत "निर्मले हे धार गंगे, अनथकी बहती रहो..." प्रस्तुत किया गया । मंच पर संघचालक लक्ष्मीनारायण चातक, डॉ. रमेशचंद एवं महेंद्रसिंह मग्गो  उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन संघ की प्रार्थना से हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता गणवेश में उपस्थित थे। कार्यक्रम में गणवेश में ही आना अनिवार्य किया गया था। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा का जिम्मा स्वयंसेवकों ने संभाला, जबकि परिसर के बाहर की सुरक्षा व्यवस्था पुलिस के जवान देख रहे थे। बाद में डॉ. भागवत किला स्थित महाराजा सूरजमल स्मारक पहुंचे और पुष्प चढ़ाए।
 
8 हजार घरों से जुटाए सुदामा के चावल 

संघ के इस कार्यक्रम में बाहर से आए करीब 8 हजार स्वयंसेवको के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी, किंतु इसके लिए हलवाई नहीं लगाया गया। भट्टी भी नहीं जली, बल्कि घर-घर से दो-दो पैकेट भोजन जुटाया गया। इसके लिए कार्यकर्ताओं ने शहर भर में एक दिन पहले भोजन की थैली बांटी और आज सुबह इन्हें एकत्रित किया गया। संघ ने इसे सुदामा के चावल नाम दिया।

तीन तीन पीढिय़ां एक साथ
संघ के कार्यक्रम में दो- तीन ऐसे परिवार भी आए, जिनकी तीन पीढिय़ां स्वयंसेवक के रूप में शामिल हुई। उदाहरणार्थ, संघ कार्यकर्ता हुक्मसिंह अपने पुत्र कुल भानसिंह पौत्र देवराजसिंह के साथ शामिल हुए।

महाराजा सूरजमल स्मारक पर चढ़ाए फूल


डॉ. भागवत ने महाराजा सूरजमल स्मारक पर पुष्प चढ़ाए तथा स्मारक का अवलोकन किया। इस मौके पर पर्यटन मंत्री कृष्णेंद्र कौर एवं धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकारसिंह लखावत ने स्वागत किया। इस अवसर पर संघ प्रमुख ने कहा कि युवाओं को चारधाम की यात्रा की तरह देशप्रेम का जज्बा पैदा करने वाले ऐतिहासिक स्मारकों की यात्रा करानी चाहिए। 

किला स्थित महाराजा सूरजमल स्मारक पर डीग-कुम्हेर विधायक विश्वेंद्रसिंह भी पहुंचे।
 
कार्यक्रम में भाजपा के सांसद और विधायक भी गणवेश यानी नेकर, कमीज और टोपी लगाकर स्वयंसेवक की भांति नजर आए।  कार्यक्रम में क्षेत्रीय प्रचारक दुर्गादास जी, जयपुर प्रान्त प्रचारक शिव लहरी जी, सह प्रान्त प्रचारक निम्बा राम जी , सांसद बहादुरसिंह कोली, पूर्व मंत्री डॉ. दिगंबरसिंह, विधायक विजय बंसल, जगतसिंह, नगर निगम के महापौर शिवसिंह भोंट आदि गणवेश में मौजूद थे। इसके अलावा भाजपा नेता भजनलाल शर्मा, डॉ. जितेंद्रसिंह, अरविंद पालसिंह, गिरधारी गुप्ता, नरेंद्र गोयल, सत्येंद्र गोयल, अंसार कुरैशी, नरेंद्र गोयल, भानु जघीना आदि उपस्थित थे।
 

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित