बुधवार, 7 जनवरी 2015

संघर्षमयी भारतीय संस्कृति की फिल्म प्रदर्शन का अनूठा प्रयोग

संघर्षमयी भारतीय संस्कृति की फिल्म प्रदर्शन का अनूठा प्रयोग




बाली जिले के फालना कस्बे में पुरे देश में pk फ़िल्म का  कई तरीके से विरोध प्रदर्शन से हटकर हिंदुत्व की लाइन को बड़ी करके अर्थात धर्मरक्षक गुरु गोविन्द सिंह की जीवनी पर आधारित "चार साहेब जादे" जैसी राष्ट्र भक्ति से प्रेरित फ़िल्म को  समाज को दिखा कर समाज जागरण का अनूठा प्रयोग किया।

 योजना के तहत सिनेमा हॉल का एक पूरा शो दिनांक 5 जनवरी को सायं 6 बजे से 9 बजे का तय किया गया।  जिसमे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार विभाग के तत्वाधान में समाज के सभी वर्गों विशेष रूप से महाविधालय विद्यार्थियो को टोकन बाट कर निशुल्क फ़िल्म दिखाने का कार्यक्रम रखा गया।  कुल  560 दर्शकों ने किल्म को देखा  जिसमे महिलाये भी काफी संख्या में शामिल थी। सिनेमा हाल की क्षमता 450 सीटो की ही है फिर भी अलग से कुर्सिया लगा कर पूर्ति की गयी। कुछ दर्शकों को तो खड़े रहकर फिल्म देखनी पड़ी।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार विभाग के प्रयास और जनसहभागिता के उत्साह का परिणाम ही था की एक दिन पहले 4 जनवरी को ही बुकिंग बंद करनी पड़ी एवं लगभग 200 जनों को टोकन की अनुपलब्धता बताते हुए मना करना पड़ा।

प्रचार विभाग के संदीप गोल्छा ने बताया कि कोई भी दर्शक बीच में से उठ कर नहीं गया। युवाओ ने पुरे समय देश भक्ति के नारों के साथ पुरे हॉल को गुंजायमान रखा और देश भक्ति का ज्वार पैदा कर दिया।दर्शको को भी यह प्रयोग काफी रास आया और भविष्य में भी ऐसे प्रयोग करने का आग्रह किया।



विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित