मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

‘‘कण कण में भगवान का स्वरूप एवं आत्मा में परमात्मा देखने वाले भारत में मनुष्यभेद दुर्भाग्यपूर्ण है - गंगाविशन

‘‘कण कण में भगवान का स्वरूप एवं आत्मा में परमात्मा देखने वाले भारत में मनुष्यभेद दुर्भाग्यपूर्ण है। वर्तमान समय में समाज को बांटने वाला तत्व जाति नहीं अपितु जातिवाद है।’’ उक्त विचार देश में फैली अस्पर्शता एवं जातिवाद पर प्रहार करते हुए ‘‘प्रज्ञा प्रवाह’’ संगठन के राजस्थान क्षैत्र सह संयोजक श्री गंगाविशन ने व्यक्त किये। श्री गंगाविशन शनिवार को डा. भीमराव अंबेडकर जयंति की पूर्व संध्या पर मारवाड़ विचार मंच द्वारा ‘‘सामाजिक परिवर्तन एवं समसरता’’ विषय पर आयोजित प्रबुद्धजन विचार संगोष्ठि को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर डा. अंबेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए मुख्यवक्ता श्री गंगाविशन ने विभिन्न बाबासाहब के जीवन का सांगोपान अध्ययन करने वाले इतिहासकारों द्वारा लिखी पुस्तकों का उल्लेख करते हुए अपने उदबोधन में कहा कि देश में फैली स्वच्छंदता वादी वामपंथी सोच से प्रेरित इतिहासकारों द्वारा षडयंत्रपूर्वक की गई गलत व्याख्या के कारण बाबासाहब एक वर्ग विशेष तक सीमित हो गये है जबकी बाबासाहब की सोच एवं उनके कार्य सर्वस्पर्शी थे। अस्पर्शता के साथ ही हिंसा एवं अलगाववाद के विरोधी बाबासाहब ने हिंदुधर्म में तत्समय फैली अस्पर्शता विमुख होकर धर्मान्तरण किया लेकिन इस्लाम एवं ईसाई धर्म में फैले अलगाव हिंसक क्रांती एवं कट्टरता से दूर बंधुता, क्षमता एवं ममता को मानने वाले बौद्ध धर्म ग्रहण किया इसके बावजूद पत्नी रमा बाई का अंतिम संस्कार संपूर्ण हिंदु रीति रिवाज से किया।

श्री गंगाविशन ने बाबा साहब के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संबंधो पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ में अस्पर्शता का विषय नहीं उठता क्यों की संघ में व्यक्ति जातिगत पहचान से नहीं अपितु अपने स्वयंसेवकत्व से जाना जाता है। साथ ही बाबा साहब के जीवन को एक शिक्षाविद् के रूप में पढाये जाने से देश के युवा वर्ग को नई दिशा मिल सकती है।

समरोह के अध्यक्ष महंत किशन गिरी महाराज ने अस्पर्शता के कारण हो रहे धर्मान्तरण को गलत बताते हुए हिंदुधर्म में फैली कुरीतियों को मिटाने का आह्मन किया।

इस अवसर पर चिंतक सोहन लाल भाटी, शिक्षाविद् प्रो. देवाराम, बांगड विद्यालय के प्राचार्य नरेन्द्र कुमार राजा, वंदेमातरम विद्यालय के संचालक राजेन्द्र सिंह ने भी विचार व्यक्त किये।
संचालन मारवाड़ विचार मंच के मेघराज बंब एवं निखिल व्यास ने किया।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित