सोमवार, 10 सितंबर 2012

पाकिस्तान ने ऐसी दुर्दशा की कि भागने को मजबूर हो गए हिन्दू! जोधपुर पहुंचे 171 पाक हिन्दू

पाकिस्तान ने ऐसी दुर्दशा की कि भागने को मजबूर हो गए हिन्दू!

पाक से आई महिलाएं 

पाक से आई महिलाएं और बच्चे 

पाक से आया इक युवक एवं एक वृद्द 

जोधपुर.पाकिस्तान के सिंध व हैदराबाद प्रांत में रहने वाले हिंदू परिवारों के 171 लोग पलायन कर भारत आ गए हैं। सीमा पर तारबंदी के बाद यह पहला मौका है जब एक साथ इतने लोग पाकिस्तान छोड़ कर आए हैं। थार एक्सप्रेस से रविवार सुबह ये लोग जोधपुर पहुंचे। इनमें सौ से ज्यादा महिलाएं व बच्चे हैं।

फिलहाल उन्होंने डाली बाई मंदिर के पास खुले आसमान के नीचे अस्थायी डेरा डाला है। ये सभी धार्मिक वीजा लेकर आए हैं, मगर पाकिस्तान लौटना नहीं चाहते। इन लोगों ने बताया कि आने वाले फेरों में और भी लोग पाकिस्तान छोड़ कर आने वाले हैं। पाक विस्थापित संघ ने उनके खाने-पीने का इंतजाम किया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी इसकी जानकारी दी गई है।

पाक में हिंदू तहसीलदार की जमीन पर कब्जा> पाक में जमींदारों के जुल्म की दास्तां बयां करते हुए इन्होंने बताया कि उनका एक रिश्तेदार अचलदास मीरपुर खास में तहसीलदार हैं, मगर चपरासी उसे पानी तक नहीं पिलाता। पटवारी उस पर हुक्म चलाता है। यही नहीं वहां के लोगों ने तहसीलदार की जमीन पर भी कब्जा कर लिया। 
100 से अधिक महिलाएं और बच्चे आए> सीमा पर तारबंदी के बाद यह पहला मौका है जब एक साथ इतने लोग पाकिस्तान छोड़ कर आए हैं। थार एक्सप्रेस से रविवार सुबह ये लोग जोधपुर पहुंचे। इनमें सौ से ज्यादा महिलाएं व बच्चे हैं।
कभी काउंसलर रहा, अब खानाबदोश > चेतनदास ने बताया कि वह दो बार मटियारी प्रांत में काउंसलर रहा है, मगर अब खानाबदोश है। भारत आने के लिए उसका परिवार तीन माह तक इधर-उधर छुपता रहा। वह धार्मिक यात्रा पर जाने की बात कहकर आए हैं। रिश्तेदार भी भारत आने के लिए वीजा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। 
हिन्दू सिंह सोढा , सयोंजक, पाक विस्थापित संघ पाक से आये हिन्दुओ के संग 
शरणार्थियों का दर्जा दिया जाए> प्रदेश में करीब सवा लाख पाक विस्थापित हिंदू हैं, मगर सरकार ने कोई पॉलिसी नहीं बनाई। इन लोगों को शरणार्थियों का दर्जा मिलना चाहिए। हमने मुख्यमंत्री को इसकी सूचना दी है। हम चाहते हैं कि कलेक्टर सरकार को रिपोर्ट भेजे। —हिंदूसिंह सोढ़ा, संयोजक, पाक विस्थापित संघ
पत्थर खाने से अच्छा है पत्थर ढोना मटियारी प्रांत से एक पूरा परिवार पाकिस्तान छोड़ आया है। चार भाई व मां सहित इस परिवार के 23 लोगों ने पलायन किया है। उसने बताया कि जब पाकिस्तान अलग देश नहीं था, तब वे लोग बाड़मेर से ही रोजी-रोटी के लिए सिंध गए थे। उस दौर में वहां के जमींदार उनके साथ न्याय करते थे, मगर अब वे ही अत्याचार कर रहे हैं। अत्याचार से तंग आकर भारत लौटे हैं। वहां पत्थर खाने से अच्छा है यहां पत्थर ढोकर परिवार पाल लेंगे। 
स्त्रोत: http://www.bhaskar.com/article/RAJ-JOD-hindus-from-pakistan-arrived-in-india-3763480.html?prev=y&img=2012/09/10/23.jpg&seq=2&imgname=23.jpg#photo_bm


                                                  जोधपुर पहुंचे 171 पाक हिन्दू
 
जोधपुर। पाकिस्तान में बसे हिन्दुओं पर कथित अत्याचार को लेकर बीते रोज इस्लामाबाद में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत को चौबीस घंटे भी नहीं बीते थे कि पकिस्तान से 171 हिन्दुओं का एक बड़ा जत्था रविवार तड़के जोधपुर पहुंचा। इन लोगों का कहना था कि वहां के रसूखदारों के अत्याचार से परेशान होकर वे भारत आए हैं। पाकिस्तान से भारत आने वाला यह अब तक का संभवत: सबसे बड़ा दल है। भील समाज के ये सभी हिन्दू पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आए हैं।

इसमें सांगलसिंध, हैदराबाद, मटियारी व खिपरो जिले के लोग शामिल हैं। "पत्रिका" से बातचीत में हाजी मिटाकोसा गांव के पांचाराम भील (70) ने बताया कि पाकिस्तान में हिंदुओं पर जमींदारों के जुल्म बढ़ रहे हैं। हमने कुछ महीने पहले ही यह तय कर लिया था कि अब इस मुल्क में नहीं रहना है। जैसे-तैसे धार्मिक यात्रा वीजा बनवाया और भारत आ गए। इन पाकिस्तानी हिन्दुओं का भारत में कोई रिश्तेदार भी नहीं है। फिलहाल पाक विस्थापितों के मददगार सीमांत लोक संगठन ने इनके लिए ठहरने और खाने-पीने का इंतजाम किया है।

आंख मूंदकर आए हैं
"पत्रिका" से बातचीत में एक बुजुर्ग ने कहा, "बाबू! आंख मूंदकर हम तो यहां आ गए। हमारा असली मुल्क तो यही है। हिन्दुस्तानी हुकूमत से बड़ी आस है। बस हमें यहां रहने दिया जाए।"

महिलाएं और बच्चे ज्यादा
171 हिन्दुओं के इस दल में करीब तीस से अधिक महिलाएं और बड़ी संख्या में बच्चे हैं। इसके अलावा कुछ बुजुर्ग, अधेड़ एवं युवा हैं। जमीन, घर-मकान और दीगर कीमती सामान छोड़कर आए इन लोगों के पास फिलहाल पहनने के कपड़ों के अलावा कुछ नहीं है।

घर से निकल नहीं सकती बहन-बेटियां
चालीस साल के कृष्ण ने "पत्रिका" को बताया कि हालात इस कदर खराब हैं कि बहन-बेटियां घर से निकल नहीं सकती। लूटपाट की घटनाएं तो आम हो चली हैं। किसी से शिकायत करना तो मुसीबत मोल लेने जैसा है। जमींदारों के खेतों में काम करने वालों को उनके हक का पैसा तक नहीं दिया जाता।
स्त्रोत: http://www.patrika.com/news.aspx?id=899017
 

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित