बुधवार, 25 जनवरी 2012

गुण संपन्न बनो संघटित बनो स्वार्थ हटा दो, आपस के भेदों को भुला दो - मोहन भागवत










स्वंय के लिए नहीं समाज राष्ट्र के लिए कार्य करने का आव्हान
स्वयं को जाने अपनी शक्ति को पहचाने
समाज में जाग्रति आना आवश्यक
केवल में और मेरा परिवार इस स्वार्थ से बाहर निकाल कर देश के लिए जीने मरने वाला कार्यकर्त्ता बनो
भारत में सक्रांति कि प्रतीक्षा है एक अहिंसक क्रांति कि आवश्यकता है
संघ नाम के लिए नहीं देश के लिए कार्य करता है
मातृशक्ति को राष्ट्रीय सेविका समिति से जुड़ने का आव्हान
भारतवर्ष को विश्वगुरु बनना है
- परम पूजनीय सर संघचालक मोहन जी भागवत

बीकानेर २२ जनवरी २०१२। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बीकानेर द्वारा सक्रांति- महोत्सव परा पूजनीय सर संघचालक मोहन जी भागवत के सानिध्य में रेलवे स्टेडियम में हर्षोउल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।
मुख्य कार्यक्रम के पूर्व विविध धारा पथ संचलन का आयोजन किया गया, जिसका शहर के लोगो ने बड़े ही उत्साह से विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
द्विधारा संचलन राजरतन बिहारी पार्क में १२.५८ पर प्रारंभ होकर ठीक १.०६ मिनिट पर लव पथक तथा कुश पथक दो धाराओ में परिवर्तित होकर मुख्य मार्गो से गुजरता हुआ तोलियासर भेरूजी पर बाल संगम में परिवर्तित हुआ। यह दृश्य देखकर शहरवासियों ने दातों तले अंगुली दबा ली।
इसी तरह त्रिधारा संचलन गंगा, जमुना तथा सरस्वती अपने निर्धारित स्थानों पर समय से प्रारंभ हुए तथा आंबेडकर सर्किल पर ठीक १.५१ पर त्रिवेणी संगम में परिवर्तित हुए। भारी तादाद में उपस्थित जनता ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया तथा वन्देमातरम के जयघोष से स्वयंसेवको का उत्साहवर्धन किया।
रेलवे स्टेडियम में मुख्य कार्यक्रम सामूहिक गीत "शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है, दिव्य ऐसे प्रेम में इश्वर स्वयं साकार है " से प्रारंभ हुआ। ध्वजारोहण के पश्चात शारीरिक प्रदर्शन तथा घोष वादन हुआ।
मंच पर परम पूजनीय सर संघचालक मोहन जी भागवत के साथ श्री कैलाश भसीन, प्रान्त सह संघचालक, श्री नंदकिशोर सोनी, सह विभाग संघचालक , श्री किशन लाल पारीक, जिला संघचालक तथा नरोत्तम व्यास , महानगर संघचालक विराजमान थे।
काव्यगीत "अंतर्मन में भाव समझ कर राष्ट्र प्रेम का ध्यान करे" के पश्चात परम पूजनीय सर संघचालक मोहन जी भागवत ने उपस्थित स्वयंसेवको तथा नागरिक गणों का मार्गदर्शन किया। सक्रांति क्या है और उसके महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा कि स्वयं को जाने अपनी शक्ति को पहचाने। सक्रांति अँधेरा काम करने तथा सक्रियता बढ़ाने का पर्व है। क्रियाशील रहने से ही सक्रांति आती है। उन्होंने आगे कहा कि साधनों का महत्व नहीं सूर्य के सामान नियमितता महत्वपूर्ण है । भारत में सक्रांति कि प्रतीक्षा है एक अहिंसक क्रांति कि आवश्यकता है। सक्रांति स्वत्व में आती है। स्वंय का परिचय आवश्यक है ।
हनुमान जी का उदहारण देते हुए माननीय भागवत जी ने कहा कि जामवंत ने ही हनुमान को शक्ति का अहसास करवाया था।
माननीय भागवत जी ने अपने उधबोधन में आगे कहा कि भारत का परिचय हिन्दू है, हमारे देश में रहने वाले सब हिन्दू है। सब भारतमाता के पुत्र है। Unity is not necessarily Uniformity अर्थात एक होने के लिए एक जैसा होना आवश्यक नहीं है
सर संघचालक जी ने कहा कि समाज में जाग्रति आना आवश्यक है । इस समाज को कैसे जगाये ? इतना बड़ा समाज है आधे लोग भी पढ़े लिखे नहीं है रोजी रोटी की मारा मरी में घूम रहे हैं। निराशा आती है। निराशा से काम चलता है क्या ? विपत्तियों से डरने से काम चलता है क्या? अपने देश की इस स्तिथि इन सारी समस्याओ के लिए जिम्मेदार कौन है ? अपने समाधान के लिए किसी व्यक्ति को हम दोषी ठहराएंगे और उसको फांसी दे देंगे तो समस्या जाएगी क्या ? हमने तो कर के देख लिया ६४ साल , नेता बदल दिए , पार्टी बदल दी सरकारे बदल बदल कर देख लिया पर स्थति तो वही है जिम्मेदार कौन है ?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन जी भागवत ने जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे देश जिसने हजारो संकट ५०० वर्षो कि सुल्तानी झेली है उसे परास्त किया है उस देश का समाज यह क्यों सोचता है कि अब तो कुछ संभव नहीं है ? इस देश ने अपने इतिहास में इतने सरे संकट झेले है और फिर भी अमर देश है। इकबाल को भी कहना पड़ा कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। उस देश के लोगों को चिंता क्यों ? अपना कर्तव्य करना चाहिए। अपने आप सूर्योदय होगा। रात के बाद दिन निश्चित है। दिन की तय्यारी करो । गुण संपन्न बनो संघटित बनो स्वार्थ हटा दो, आपस के भेदों को भुला दो। भारतमाता के प्रत्येक पुत्र को अपना हिन्दू भाई माँ कर उसके अपने संस्कृति के मूल्यों के आधारित गुण संपदा को जगाओ। इस काम के लिए समय दो, परिश्रम करो। केवल में और मेरा परिवार इस स्वार्थ से बाहर निकाल कर देश के लिए जीने मरने वाला कार्यकर्त्ता बनो। यह कर्तव्य है सक्रांति के लिए।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चर्चा करते हुए माननीय भागवत जी ने कहा कि सम्पूर्ण हिन्दू समाज को देश के लिए संघठित करने कि कार्य पद्वति है जिसे डॉक्टर हेडगेवार जी ने हमें दिया है। संघ कि प्रार्थना - पवित्र साधना में कही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम तक नहीं है। संघ नाम के लिए नहीं देश के लिए कार्य करता है । राष्ट्र के लिए संघ कि प्रार्थना में भारत माता को जय है संघ का नाम तक नहीं है। वयम हिन्दू राष्ट्रंग भूताः अर्थात हम हिन्दू राष्ट्र के अंग है। सम्पूर्ण देश को इस प्रकार संघठन करने का योगमार्ग सिखने के लिए आव्हान है। पूजनीय भागवत जी ने कहा कि RSS के स्वयंसेवक बने। मातृशक्ति को राष्ट्रीय सेविका समिति से जुड़ने का आव्हान किया। राष्ट्र को जोड़ कर सम्पूर्ण समाज को राष्ट्रोथान के कार्य में जुटाने वाले बने। स्वंय के लिए नहीं समाज राष्ट्र के लिए कार्य करने का आव्हान किया। तन मन धन , प्रमाणिकता से कार्यकर्त्ता बन कर अछे गुण सीखे निस्वार्थ बुधि से न आम के लिए न फोटो के लिए न चुनाव के लिए न टिकिट के लिए कार्य करे। देश के लिए कार्य करे। ऐसे से समाज में जो बल खड़ा होगा उसका सामना करने कि क्षमता न चीन में हैं न पाकिस्तान में न अमेरिका में हैं न रशिया में।
भारतवर्ष को विश्वगुरु बनना है , दुनिया रहे इसलिए आवुश्यक है। दुनिया को दूसरी गति नहीं भारत के सिवाय। और भारतवर्ष को बड़ा करना ही तो हम सबको इसकी तैय्यारी करनी पड़ेगी। दूरदृष्टि से इस बात को देखते हुए सरे समाज कि ऐसी तैयारी करने वाला यह आर एस एस का काम है। यह किसी के विरोध में नहीं चलता, यह किसी कि प्रतिक्रिया में नहीं चलता लेकिन यह डंके कि चोट पर स्पष्ट शब्दों में हिन्दू समाज के लिए चलता है। क्योंकि हिन्दू इस देश कि राष्ट्रीय पहचान है । हिन्दू समाज इस देश का राष्ट्रीय समाज है। हिन्दुस्त्व इस देश कि राष्ट्रीय संस्कृति है। सुप्रीम कोर्ट भी यही कहता है और इसलिए हिन्दू संघठन के महाभियान के अंग बनकर केवल दर्शक या हितेषी न बनकर इसके सहयोगी बनकर हम सब को चलना होगा तो सारी समस्याओं के उत्तर एक साथ मिलेंगे। एक नया उध्हम पुरुषार्थ शक्ति सम्पूर्ण देश में हम अनुभव करेंगे। सारी दुनिया भारतवर्ष से शिक्षा ग्रहण कर एक नयी सुखी सुंदर दुनिया जो शोषण रहित, समतायुक्त , पर्यावरण की प्रचुरता से भरपूर और विकास की बहुलता से पूर्ण तृप्त ऐसी दुनिया बनाने कि राह पर सारी दुनिया, दुनिया के लोग चल पड़े है उस दृश्य को हम देखेंगे जिस सम्यक क्रांति को भारतवर्ष में हम लाना चाहते है उस सम्यक क्रांति कि योग्यता प्राप्त करने के लिए यही एक बेहतर रास्ता है और इसके लिए सहभागी कार्यकर्ता होने का आव्हान करते हुए माननीय भागवत जी ने अपना उधबोधन समाप्त किया ।
सक्रांति महोत्सव में क्षेत्रीय प्रचारक माननीय दुर्गादास , जोधपुर प्रान्त प्रचारक माननीय मुरलीधर, चित्तोर्गढ़प्रान्त प्रचारक माननीय गजेन्द्र सिंह जी, क्षेत्रीय प्रचारक प्रमुख माननीय नन्द लाल ,जयपुर प्रान्त प्रचारक गोपाल जी, सह क्षेत्रीय संपर्क प्रमुख प्रकाश चन्द्र , सीमाजन कल्याण समिति के संघटन मंत्री माननीय निम्ब सिंह , बीकानेर विभाग प्रचारक निम्बा राम जी , प्रज्ञा प्रवाह के माननीय गंगाबिशन सहित जोधपुर प्रान्त के प्रचारक, अधिकारी भी उपस्थित थे।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित