गुरुवार, 15 सितंबर 2011

भारत को घरेलू इस्लामी आतंक से खतरा : सीआरएस

वाशिंगटन, 14 सितंबर : भारत को घरेलू इस्लामी आतंकवाद से खतरा है। भले ही नई दिल्ली इसे खुले तौर पर स्वीकार करने में हिचकिचाहट महसूस करे। कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की एक रिपोर्ट में यह बातें कही गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि इस ग्रुप का नाम इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) है।

रिपोर्ट में कहा गया कि आईएम को स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया (सिमी) की ईकाई माना जा रहा है। हाल के दिनों में कई बम विस्फोटों में आईएम का नाम आया है। यहां तक कि सरकारी नेताओं ने भी पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। अमेरिकी कांग्रेस से जुड़े सीआरएस ने 1 सितंबर को 94 पृष्ठों वाली यह रिपोर्ट जारी की। फेडरेशन आफ अमेरिकन साइंटिस्ट (एफएएस) ने मंगलवार को इसकी एक प्रति सार्वजनिक की।

रिपोर्ट के मुताबिक नई दिल्ली सरकार ने 2010 में आईएम पर प्रतिबंध लगा दिया था। कुछ महीनों बाद आईएम ने वाराणसी में दिसंबर विस्फोटों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। उक्त विस्फोट में एक बच्चे की मौत हो गई थी और करीब 20 लोग घायल हुए थे।

जुलाई 2011 में मुम्बई में हुए तीन बम विस्फोटों में 17 लोग मारे गए और करीब 130 लोग गंभीर रुप से घायल हुए। आज तक इस धमाके की किसी संगठन ने विश्वसनीय जिम्मेदारी नहीं ली। भारतीय अधिकारियों ने भी इसके लिए किसी विदेशी अथवा घरेलू संगठन का नाम संदिग्ध के तौर पर नहीं लिया। इन धमाकों से साफ पता चलता है कि इसके लिए प्रशिक्षण दिया गया था (पाकिस्तान के दो प्रमुख नेताओं ने तत्काल इन विस्फोटों की निंदा की थी)।

प्रारंभिक संकेत बताते थे कि विस्फोट करने वाले संभवतः सिमी से जुड़े भारतीय थे न कि पाकिस्तान से जुड़े किसी संगठन के सदस्य। भारत के कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आईएम के प्रमुख संचालकों को पाकिस्तान में प्रशिक्षण दिया जाता है।

2008 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया था कि आतंकी हमलों में स्थानीय तत्वों की संलिप्तता ने भारत के घरेलू आतंकवाद की समस्या को और भी बढ़ा दिया है।

स्त्रोत: स्रोत: PTI तारीख: 9/14/2011 5:26:02 पम, http://www।newsbharati।com/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0.aspx



विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित