सोमवार, 9 मई 2011

आयोध्या मामले पर फैसले से संघ "खुश"


नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कहा कि अयोध्या मामले पर सोमवार को आए सुप्रीमकोर्ट के फैसले से "वह" खुश है। शीर्ष अदालत ने सितम्बर 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए उस फैसले पर स्थगनादेश दिया है जिसमें बाबरी ढांचे की जगह को तीन हिस्सों में बांटने को कहा गया था।

आरएसएस के प्रवक्ता राम माधव ने यहां संवाददाताओं से कहा कि हमें खुशी है कि अयोध्या की विवादास्पद भूमि के तीन हिस्सों में बंटवारे के खिलाफ राम जन्मभूमि आंदोलन की दलील को शीर्ष अदालत ने मान लिया है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या की विवादास्पद भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का जो निर्देश दिया है वह भी राम मंदिर आंदोलन की दलील के अनुरूप है।

माधव ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि अयोध्या के राम मंदिर स्थल पर हिंदू पूजा-पाठ जारी रख सकेंगे। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात यह कि सर्वोच्च न्यायालय अयोध्या मामले की सुनवाई कुछ ही महीनों के भीतर शुरू करेगा। हमें उम्मीद है कि राम मंदिर के निर्माण में आ रहीं सभी वैधानिक अड़चनें जल्द ही दूर हो जाएंगी।

उल्लेखनीय है कि शीर्ष अदालत ने सितम्बर 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए उस फैसले पर स्थगनादेश दिया है जिसमें बाबरी ढांचे की जगह को तीन हिस्सों में बांटकर एक-एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और हिंदू समाज (राम लला) को देने का निर्देश दिया था।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित