शनिवार, 21 मई 2011

समन्वय संवाद के स्त्रोत थे देवर्षि नारद मुनि

आदि पत्रकार देवऋषि नारद की जयंती पर गोष्ठी का आयोजन
बीकानेर २०.५.२०११। देवऋषि नारद सतयुग के महान युग समन्वयक थे जो कि देवता, दान व मृत्युलोक के मध्यम समन्वय एवं संवाद के प्रमुख स्रोत थे। उन्हें दुनिया का पहला पत्रकार भी कहा जाता है। वर्तमान युग में निर्भीकता से पत्रकार जगत यह कार्य कर रहा है और इसके प्रेरणास्रोत भी मुनि नारद हैं।

यह विचार प्रज्ञा प्रवाह के सह क्षेत्र संयोजक गंगाबिशन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार विभाग की ओर से आदि पत्रकार देवऋषि नारद की जयंती पर आयोजित गोष्ठी में व्यक्त किए। उन्होंने आज की मीडिया क्षेत्र से जुड़े लोगों से सम-सामयिक विषयों पर अपनी मुखर अभिव्यक्ति को शाश्वत रखने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पत्रकार जगत प्रशासन का काम कर रहा है। सामाजिक सरोकार में पत्रकारिता जगत ने अपनी अहम भूमिका निभाई है। देश में हुए विभिन्न घोटालों का पर्दाफाश पत्रकार जगत ने ही किया है। सतयुग में जो छवि नारद मुनि की थी वही छवि आज एक पत्रकार की है।

संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार संतोष जैन ने की। संगोष्ठी का शुभारंभ देवऋषि नारद के चित्र के आगे दीप प्रज्ज्वलन कर हुआ। मदन स्वामी ने काव्य गीत प्रस्तुत किया। विभाग प्रचार प्रमुख जेठानंद व्यास ने आगंतुकों व अतिथियों से सम्मान की शृंखला जारी रखने एवं सम-सामयिक विषय पर सक्रिय भागीदारी की बात कही। इस अवसर पर पत्रकारिता जगत से जुड़े सात पत्रकारों का सम्मान किया गया। गंगाबिशन व जैन ने पत्रकारों को प्रतीक चिह्न, शॉल व माल्यार्पण कर सम्मान किया। कार्यक्रम में विभाग के प्रांतीय प्रचार प्रमुख महेन्द्र दत्त देव, संस्कार भारती के पेंटर भोजराज, भाजपा शहर अध्यक्ष शशिकांत शर्मा, जे।पी।व्यास, विनोद भोजक सहित अनेक लोग मौजूद थे।