रविवार, 9 जनवरी 2011

छात्रजीवन दर्शन कार्यक्रम के तहत आए उत्तर-पूर्वी छात्रों के दल का भावभीना स्वागत


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और कहीं नहीं मिला ऐसा सद्भाव’

जोधपुर

उत्तर-पूर्वी राज्यों के विद्यार्थियों का मानना है कि मारवाड़ की संस्कृति में जो मिठास हैं, वह उत्तर-पूर्वी राज्यों में नहीं मिल सकती। उनका मानना है कि जोधपुर आकर उन्हें संयुक्त परिवार प्रणाली से रूबरू होने का मौका मिला, जो बहुत कम राज्यों की संस्कृति में देखने को मिलती है। ये छात्र अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अंतर राज्य छात्र जीवन दर्शन कार्यक्रम के तहत जोधपुर भ्रमण पर आए हैं। टीम के लीडर हरि बोरिकर ने कहा कि मारवाड़ के लोगों में जो भाईचारा व आपसी सद्भाव है, वह अतुल्य है। यह कहीं नहीं मिल सकता। उत्तर-पूर्वी राज्यों में ज्यादातर एकल परिवार प्रणाली है। एबीवीपी के इस कार्यक्रम से हमें संयुक्त परिवार प्रणाली से रूबरू होने का मौका मिला। यहां के कार्यकर्ताओं ने उन्हें भीतरी शहर का भ्रमण करवाया तथा भीतरी शहर की संस्कृति से भी रूबरू करवाया। उन्होंने ब्ल्यू सिटी व उसके ब्ल्यू होने के कारणों की जानकारी जुटाई, तो बेहद प्रसन्न नजर आए।
हथाई को कैमरे में उतारा

कार्यकर्ताओं के साथ जब वे जोधपुर के भीतरी शहर में गए तो उन्होंने मोहल्लों के बीच में बनी हथाइयों के बारे में जानकारियां मांगी। उन्हें जब बताया गया कि यहां रात तीन बजे तक यंू ही महफिलें जमी रहती हंै और शहर में कभी चोरी नहीं होती। इस पर उन्होंने इस हथाई की सराहना करते हुए फोटो खींचे।

पूर्व नरेश से पूछे सवाल

उत्तर-पूर्वी राज्यों से आए छात्रों ने पूर्व नरेश गजसिंह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने गजसिंह से पूछा कि महाराजा बनने का अनुभव कैसा था। उन्होंने कहा कि मारवाड़ की जनता ने मुझे छोटी उम्र में ही महाराजा के रूप में स्वीकार किया, जो मेरे लिए एक चुनौती थी। उन्होंने पैलेस के निर्माण के बारे में भी जानकारी ली।

मेहरानगढ़ का अवलोकन किया

इन 33 छात्रों ने विभिन्न छात्रनेताओं के साथ मेहरानगढ़ का अवलोकन भी किया। शाम सूचना केंद्र के मिनी ऑडिटोरियम में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुआ। इसमें उत्तर-पूर्वी राज्य की संगीता दास ने असम का बिहू नृत्य किया। वही इडीलिना ने मणिपुरी व मिजोरम की लालरी डोंगी ने मिजोरम का नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं केएन कॉलेज के छात्राओं ने मारवाड़ी लोकनृत्यों से समां बांध दिया। इस कार्यक्रम में एनएलयू, जोधपुर के कुलपति एनएन माथुर बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नरपतमल लोढ़ा ने की।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित