शनिवार, 26 दिसंबर 2009

राष्ट्र का प्राण है गाय

सीकर। पौष माह की गोधूली बेला और गो भक्तों का लगता रैला। कहीं कलश यात्रा तो कहीं वाहन रैली। जगह-जगह स्वागत द्वारों और केसरिया ध्वजों के रंग में रंगा शहर का चप्पा-चप्पा। पुष्पों की पंखुडियों से महकती राहें और गो माता की जयकार से गूंजता आसमान। कुछ ऎसे ही नजारे शुक्रवार को दिखाई दिए शेखावाटी अंचल के सीकर, फतेहपुर और रतगनढ़ कस्बे में।अंचलवासियों ने विश्व मंगल गो ग्राम की मुख्य यात्रा के स्वागत में पलक पांवड़े बिछा दिए। लोगों का उत्साह और जोश इस तरह उमड़ा कि सीकर का रामलीला मैदान और फतेहपुर की बुधगिरी मढ़ी का वातावरण गोकुलमय हो गया। गाय की वंदना और अर्चना के लिए अंचलवासी उमड़ पड़े और पुष्प वर्षा कर अपनी भावनाओं का इजहार किया। इसके बाद हर दिल से एक पुकार उठी ... गाय बचेगी तो देश बचेगा। चलें गाय की ओर... चलें गांव की ओर ... चलें प्रकृति की ओर... सरीखे स्लोगन की सार्थकता शुक्रवार को सजीवता से नजर आई।
राष्ट्रीय प्राणी घोषित करने की मांग
फतेहपुर में बुधगिरी मढ़ी और सीकर शहर में रामलीला मैदान में आयोजित विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के मुख्य समारोहों को संबोधित करते हुए कर्नाटक की गोकर्ण पीठ के जगद्गुरूशंकराचार्य राघवेश्वर भारती ने अंचलवासियों से गो रक्षा के लिए आगे आने, उसका पालन और संरक्षण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारी तीन माताएं हैं। जन्म देने वाली माता, धरती माता व गो माता। जन्म देने वाली माता हमारा लालन पालन करती है। उसका पालन धरती माता करती है और धरती माता का लालन पालन व उसकी उवर्रक क्षमता गो माता बढ़ाती है। इस त्रिकोण की रक्षा व देश को टूटने से बचाने के लिए गो माता की रक्षा करनी होगी। राघेश्वर भारती ने कहा कि शंकराचार्य पद पर भिक्षु हैं। भिक्षु बनकर आन्दोलन के लिए आपसे आपको मांगने आए हैं। उन्होंने कहा कि जीवन हो गाय के लिए व मृत्यु हो गाय के लिए। यहीं भिक्षा आपसे मांगने आए हैं।यह ऎच्छिक नहीं हमारा कर्तव्य है। अपने माता-पिता व गुरूके प्रति कर्तव्य है उसी तरह गो माता के प्रति हमारा कर्तव्य है। विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के राष्ट्रीय सचिव शंकरलाल ने कहा कि देश को गाय के माध्यम से प्रदूषण व रोग मुक्त तथा स्वावलम्बी बनाना होगा। आज गाय की दुर्दशा के कारण जल, जमीन और जीवन नष्ट हो रहा है। अब लोगों को गाय के गोबर घी, दूध, दही व गोमूत्र की आर्थिक महत्ता समझ में आने लगी है। दूध, घी व दही से रोगों को दूर किया जाने लगा है। देश में बढ़ते अपराध का मुख्य कारण भी गो माता की उपेक्षा है। सन 1947 में देश में करीब 43 करोड़ गोधन था, जो आज महज 10 करोड़ रह गया है। देश में प्रतिदिन करीब एक लाख व एक वर्ष में तीन करोड़ गायों को काटा जा रहा है। इसलिए देश को बचाने के लिए गायों को बचाना होगा। सीकर में समारोह से पहले महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। उसके बाद यात्रा के आगमन पर उसे वाहन रैली के साथ शहर के प्रमुख मार्गो से होते हुए यात्रा को रामलीला मैदान लाया गया। यहां शंकराचार्य ने गो माता की पूजा कर समारोह का शुभारंभ किया। सीकर शहर में आयोजित समारोह के अंत में रैवासा पीठाधीश्वर राघवाचार्य महाराज ने उपस्थित सभी लोगों को गो रक्षा का संकल्प दिलाया। सभी समस्याओं का मूल गो हत्या है और सभी तरह की शुद्धि का मूल गो रक्षा है। गाय एक प्राणी नहीं बल्कि यह राष्ट्र का प्राण है। राष्ट्र प्राण को राष्ट्रीय प्राणी घोषित करना ही चाहिए। आज देश में गाय को राष्ट्रीय प्राणी घोषित नहीं कर हम जीवन की जड़ों को काट रहे हैं। गाय हमारे जीवन में उसी तरह महत्वपूर्ण है जिस तरह इमारत के लिए नींव व पेड़ के लिए जड़। -
शिखर पर पहुंचाएं
सीकर। शंकराचार्य राघवेश्वर भारती ने कहा कि शेखावाटी के बारे में सुना था। आज आंखों से देखने का मौका मिला है। सीकर वाले यात्रा को शिखर तक पहुंचाएं। इतिहास पुरूष पैदा करने वाली शेखावाटी की भूमि को नमन करता हूं। गाय बचाने के इस महासंग्राम में भी शेखावाटी का योगदान आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यात्रा में सीकर का योगदान शिखर जैसा होना चाहिए।
गो पूजा से शुभारम्भ
समारोह का शुभारम्भ कामधेनु ध्वजारोहण से किया गया। इस दौरान शंकराचार्य राघवेश्वर भारती को समिति की महिला प्रभारी कृष्णा शेखावत ने गाय की पूजा करवाई। उन्होंने गाय की पूजा कर महाआरती की। बाद में मंच पर समिति के पदाधिकारियों की ओर से उनका फूल माला पहनाकर स्वागत किया गया।वैदिक आश्रम में मंत्रणागोकर्ण पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य राघवेश्वर भारती शुक्रवार रात को वैदिक आश्रम पिपराली पहुंचे। वहां पर उन्होंने स्वामी सुमेधानंद सरस्वती के साथ करीब आधा घंटे तक मंत्रणा की। इससे पहले स्वामी सुमेधानंद सरस्वती और आश्रम के कार्यकर्ताओं ने शंकराचार्य का भावभीना स्वागत किया। इस दौरान गाय के विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही वेद, संस्कृत, संस्कृति और राष्ट्रधर्म पर भी बातचीत हुई। इसके बाद शंकराचार्य नीमकाथाना के लिए प्रस्थान कर गए।
नहीं आदेश दिया
उन्होंने कहा कि हम पांच साल के अधिकारी नहीं हैं। हमें वोट नहीं चाहिए। हम कोई उद्योगपति व व्यापारी भी नहीं है। हम गो माता की प्राण रक्षा के लिए आए हैं। शेखावाटी के लोगों को आदेश देते है कि वे माता को कटने नहीं देंगे। गाय हत्या, गो तस्करी नहीं हो इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे। भगवान शिव की आराधनासमारोह के बाद शंकराचार्य राघवेश्वर भारती ने समुत्कर्ष भवन में संध्या आरती की। करीब एक घंटे के दौरान उन्होंने भगवान शिव की भव्य आरती की। आरती के दौरान शहर में प्रमुख लोग उपस्थित थे। संतो के अनुसार शंकराचार्य की वर्षों की परम्परा के अनुसार शाम की आरती करीब एक घंटे तक की जाती है।
अभी तक नहीं हुए संगठित प्रयास -शंकराचार्य
जगदगुरू शंकराचार्य राघवेश्वर भारती का मानना है कि गो रक्षार्थ देशभर में अभी तक संगठित प्रयास नहीं हुए हैं। हालांकि गो माता को बचाने के लिए अनेक आंदोलन और अभियान चलाए गए, लेकिन संतों ने सेना की तरह व्यूय रचना कर एक स्वर में अभियान को गति नहीं दी। विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के जरिए देश भर के संतों को जोड़ा जा रहा है। इस तरह यह अभियान पूरी तरह संगठित और एक है।
राजस्थान पत्रिका से विशेष वार्ता
विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के मुख्य यात्रा समारोह के बाद शुक्रवार रात को समुत्कर्ष भवन में शंकराचार्य ने राजस्थान पत्रिका से विशेष वार्ता में यह बात कही। प्रस्तुत से बातचीत के मुख्य अंश-पत्रिका- गाय के प्रति आदर तो है लेकिन वह घर-घर से दूर है।
शंकराचार्य- भौतिक और आर्थिक युग में लोगों की सोच बदल गई है। इस कारण गाय के प्रति लोगों में समर्पण तो है, लेकिन वह घर-घर में नहीं रखी जा रही है। हालांकि गाय से धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ मिलता है। साथ ही गाय आर्थिक संबल प्रदान करती है। इस पक्ष को मजबूत करने के लिए हम गो मूत्र और गोबर आधारित वृहद् उद्योग स्थापित कर रहे हैं।
पत्रिका- आपकी प्रमुख मांग क्या है?
शंकराचार्य- गाय के साथ अत्याचार हो रहा है। गाय भारतीय संस्कृति, धर्म और सत्यता की प्रमुख आधार स्तम्भ है। गाय रहेगी तो संस्कृति बचेगी और देश सुरक्षित रहेगा। इसलिए गाय को राष्ट्रीय प्राणी घोषित करने की मांग की जा रही है।
पत्रिका- गो रक्षा के लिए क्या सरकार के प्रयास पर्याप्त हैं।
शंकराचार्य- सरकार, नेता और राजनीति से यह आंदोलन परे है। यह आंदोलन जनता की तरफ है ना कि सरकार की तरफ। हमारा अभियान गाय के प्रति आमजन को जागरूक कर उन्हें गाय के प्रति एकजुट करने का है। यदि हम देशवासियों को इस अभियान से जोड़ने में सफल हो जाते हैं तो नेता स्वयं मजबूर हो जाएंगे।
पत्रिका- देश भर में 33 हजार से अधिक गो कत्लखाने हैं। इन कत्लखानों को बंद करने के लिए संत आमरण अनशन क्यों नहीं करते।
शंकराचार्य- इसके लिए हम आंदोलन करेंगे। हम बलिदान के लिए तैयार हैं, लेकिन बलिदान निरर्थक और व्यर्थ नहीं हो इसके लिए संगठित होकर आंदोलन करेंगे।

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित