मंगलवार, 15 दिसंबर 2009

भारत-पाक से पैसा लेते हैं हुर्रियत नेता


श्रीनगर, [जागरण ब्यूरो]। मीरवाइज गुट के हुर्रियत नेताओं को दिल्ली का एजेंट बताने का मामला शांत नहीं हुआ था कि बिलाल गनी लोन ने भी एक 'राज' उगल दिया है। लोन ने यह कह कर सभी अलगाववादी नेताओं को कठघरे में खड़ा कर दिया कि अधिकांश हुर्रियत नेताओं ने किसी न किसी मौके पर भारत या फिर पाकिस्तान से पैसा लिया है।
लोन ने सोमवार सुबह एक स्थानीय चैनल के साथ साक्षात्कार में यह आरोप लगाया है। वह जमरूदा हबीब के उसी बयान पर बात कर रहे थे, जिसमें महिला नेता ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2003 में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर हवाला राशि के साथ उनकी गिरफ्तारी हुर्रियत के तत्कालीन चेयरमैन प्रो. अब्दुल गनी बट और मौलाना अब्बास अंसारी के इशारे पर ही हुई थी। पीपुल्स कांफ्रेंस के एक गुट के चेयरमैन और मीरवाइज मौलवी उमर फारूक की कार्यकारी परिषद के वरिष्ठ सदस्यों में शामिल बिलाल गनी लोन ने कहा कि उन्होंने दोनों मुल्कों से पैसा नहीं लिया है। एक चैनल से पैसा जरूर लिया है और यह जरिया भी बीते डेढ़ साल से बंद हो चुका है। वह पैसे के लिए कश्मीर के अपने लोगों पर ही निर्भर हैं।
उन्होंने कहा कि हुर्रियत कांफ्रेंस समेत कश्मीर के विभिन्न अलगाववादी नेताओं में एक बड़ी संख्या उन लोगों की है जो किसी न किसी समय भारत-पाकिस्तान से पैसा लेते रहे हैं। इतना ही नहीं, उसी के आधार पर कश्मीर के प्रति रूख अपनाते रहे हैं। इनमें से शायद आज भी कई भारत से या फिर पाकिस्तान से पैसा ले रहे हों। बिलाल ने कहा कि वह खुश हैं कि उन्होंने कश्मीर के लोगों से कभी गद्दारी नहीं की। हुर्रियत नेताओं को चाहिए कि वह कश्मीर के लोगों के विश्वास के साथ दगा न करे, क्योंकि वह तहरीक के लिए पैसा देता है। देर शाम लोन कुपवाड़ा जिले में अपने पैतृक गांव चले गए है। उनके इस बयान के बाद कश्मीर के अलगाववादी खेमे में मची खलबली पर मीरवाइज मौलवी उमर फारूक और प्रो। अब्दुल गनी बट ने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। जबकि मौलाना अब्बास अंसारी ने कहा कि बिलाल ने जो कहा बकवास है.

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित