शुक्रवार, 22 मई 2009

सीमा पार से नापाक नजर

जोधपुर। पाकिस्तान में सक्रिय भारत विरोधी संगठन बार-बार मुंह की खाने के बावजूद पश्चिम सरहद को घुसपैठ का जरिया बनाने की कोशिशों से बाज नहीं आ रहे। राजस्थान के श्रीगंगानगर से सटी अन्तरराष्ट्रीय सीमा पर बुधवार रात मारा गया पाकिस्तानी घुसपैठिया भी इन संगठनों की ताजा कोशिश का हिस्सा था। सीसुब सूत्रों का कहना है कि सीमा पार से भारतीय क्षेत्र में सतर्कता का अन्दाजा लगाने के लिए "बलि का बकरा" भेजा जाता है। ताकि बडी घुसपैठ करवाई जा सके। तकनीकी भाषा में इसे "ड्राइ रन" कहते हैं। धकेला गया व्यक्ति पार हो जाए तो घुसपैठ की बडी कोशिश की जाती है। पश्चिम सीमा पर निशानागत नवम्बर में मुम्बई पर आतंककारी हमले के बाद से राजस्थान, खासकर श्रीगंगानगर से सटी सीमा पर घुसपैठ की कोशिशें कुछ ज्यादा ही बढी है। इन्हीं कोशिशों के चलते पांच माह की अवधि में ही छह घुसपैठिये ही सीसुब के हाथों मारे गए जबकि चार जिन्दा पकड लिए गए। तालिबान का खतरामारे गए लोगों में पाकिस्तान के तालिबान के नियंत्रण वाली स्वात वैली क्षेत्र का एक युवक शामिल होने से घुसपैठ के पीछे तालिबान का हाथ होने की आशंका जताई गई थी। इसी दौरान पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में तालिबानी हमला होने से इस आशंका को बल मिला। इसके बाद से ही पंजाब व राजस्थान से सटी सीमा पर अत्यधिक सतर्कता बरती जा रही है।ड्राइ रन के नापाक इरादे श्रीगंगानगर सेक्टर के अनूपगढ स्थित सीमा स्तम्भ संख्या 387 के पास बुधवार रात मारा गया 21 वर्षीय घुसपैठिया भी नापाक इरादों से ही भेजा गया था। इसके पास कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले हैं। इससे अन्दाजा लगता है कि घुसपैठिया किसी "टास्क" पर आया था। इसके पास मिली डायरी के सांकेतिक व कूट शब्दों तथा नम्बरों के आधार पर इस बारे में पडताल की जा रही है।घनी आबादी का फायदाराष्ट्रविरोधी तत्व पंजाब व श्रीगंगानगर से सटी सीमा के दोनों ओर घनी आबादी का फायदा लेने की फिराक में भी रहते है, लेकिन बाडमेर-जैसलमेर से सटी सीमा पर कई किलोमीटर तक निर्जन इलाका होने से राह इतनी आसान नहीं होती। इसलिए ही सम्भवत: पंजाब-श्रीगंगानगर क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिशें बढ रही है, लेकिन हर बार सजग सीमा प्रहरी इरादे नाकाम कर देते हैं।
सुरेश व्यास

विश्व संवाद केन्द्र जोधपुर द्वारा प्रकाशित